#azaadi

90 posts
  • chayanchaudhary 2w

    आज़ादी

    यह आज़ादी भी बड़ी कमाल की चीज है। कंगना रानौत ने पद्मश्री होते ही कहा आज़ादी हमें 2014 में मिली। किताबों में पढ़ा था कि 15 अगस्त 1947 को मिली। कंगना के बयान के बाद सब बोल रहे हैं कि 1947 में ही मिली थी। जबकि 2016 में कन्हैया कुमार J.N.U के गेट पर कह रहे थे हमें चाहिए आज़ादी.. यही आलाप 2019 में स्वरा भास्कर ने भी आलापा था C.A.A के दौरान कि हमे चाहिए आज़ादी। अब कोई होशियार आदमी ज़रा इतना बता दे तो बड़ी मेहरबानी होगी कि सच में हमें आज़ादी मिली भी है या नहीं? और मिली है तो कब मिली थी? क्योंकि मिल चुकी है तो कन्हैया कुमार और स्वरा भास्कर को कौनसी आज़ादी चाहिए और क्यों? और अगर 2016 और 19 में भी आज़ादी मिलने की मांग उठ रही है तो पद्मश्री कंगना क्यों झूठ बोल रही है कि आज़ादी हमको 2014 में मिली। और पूरा देश बोल रहा है कि यह झूठ है। हम तो आज़ाद 1947 में ही हो चुके हैं। अगर कंगना झूठ है तो कन्हैया और स्वरा भास्कर भी झूठ है कि वो अब भी बोल रहे हैं हमें चाहिए आज़ादी। वैसे मेरी राय तो यह है कि हमें आज़ादी कुछ ज्यादा ही मिल गयी है। असल में हमें इतनी मिलनी नही चाहिए थी। उतनी ही मिलनी चाहिए थी जितनी खाड़ी देशों में मिली हुई है....🤔🙏🏻

  • ronit_b 14w

    मनचला सा मन ख़्यालों के पीछे भागे,
    मनचला सा मन ख़्यालों के पीछे भागे,
    कहने पे तो कोई बात ना माने,
    कोई तो उतारे
    अरे कोई तो उतारे
    आज़ादी का जो नशा चढ़ा इसे ।

  • imgarima 14w

    ये आज़ादी क्या है,.
    जब कभी सोचते है,
    बंद कमरे में बाहर,
    का रास्ता खोजते है,
    बंदिशे ये ख्वाबों पर हमारे,
    कैसी ये सब ने लगायी है,
    हर परिंदा तो उड़ रहा है,
    खुले आकाश में,
    फिर हमें ही क्यों नहीं मिली अभी तक रिहाई है...!!

    ~ गरिमा प्रसाद
    ©imgarima

  • mycatharsis 67w

    Today is a day to feel proud about being a part of this great nation. May this spirit of freedom leads us all to success and glory in life.

    “This is the fight for freedom, freedom from yesterday, for tomorrow!”—Mangal Pandey ����


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    August 15 marks the Independence Day for India. This year India will celebrate the 73rd year of gaining independence from the British rule.
    The day also coincides with the Partition of the country. On 15 August 1947, the first Prime Minister of independent India Pandit Jawaharlal Nehru, hoisted the national flag at the Lahori Gate of Red Fort in New Delhi.

    15/August
    2020,
    Saturday.

    #happyindependenceday #azaadi #freedom

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    Happy Independence Day!

    Freedom is not worth having if it does not include the freedom to make mistakes.”
    —Mahatma Gandhi 

  • piyushalbus 78w

    तमस-darkness, क्षितिज-horizon, नूर-ए-आफ़ताब-sunlight, इंकलाब-revolution #bhagatsingh #light #freedom #azaadi #revolution #freedomfighters #freethought #nation #patriotism #hindiwriters @mirakee @writersnetwork @writersofmirakee @readwriteunite

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    भगत

    सूर्य अस्त हो चला है तमस के समंदर में, फिर भी
    क्षितिज पर नूर-ए-आफ़ताब अभी बाकी है।
    आज़ाद सोच दफ़्न है ज़िंदा लाशों में कब से,
    भगत, लौट आओ, इंकलाब अभी बाकी है ।।
    ©piyushalbus

  • dil_k_ahsaas 86w

    अब जीने का मन नहीं करता
    बस उंगलियों पर दिन हूं गिनती

    यहां की दुनिया बड़ी ही संगदिल हैं
    मोहब्बत जता कर इक पल में ही दुत्कार भी देती हैं

    यूं मिली दुत्कार से दिल मर जाता हैं
    रोज़ थोड़ा-थोड़ा मरने से अच्छा, इक बार में ही जान हमेशा के लिए निकल जाए बदन से

    बदन, दिल की बात क्यूं नहीं समझता
    रूह को कैद में कर के हैं रखा

    रूह अब तड़पने लगी हैं निकल कर उड़ जाने को
    कोई तो है जो रूह बन आसमां में बैठा इंतज़ार हैं कर रहा

    पर खामोश है, आवाज़ क्यूं नहीं देता
    कभी कभी पास ही महसूस होता हैं पर दिखाई नहीं देता

    वादे भूला कर चला गया कोई
    मैं जा कर फिर वो वादे याद दिलाना चाहती हूं

    बदन के पिंजरे का ताला नहीं है खुल रहा
    पर इस पिंजरे का दरवाज़ा भी तो नहीं मिल रहा

    सारा बदन झंझोड़ कर भी देख लिया
    कोई कब्जा ढीला हो कर खनक भी नहीं रहा

    कुछ तो हो अब ऐसा, इक जोर के झटके के जैसा
    ऐसा कि रूह छिटक कर जा गिरे दूर बदन से
    हाथ कितना भी पकड़ना चाहे
    पर रूह इतनी तेज भागे कि पकड़ में ही ना आ सकें

    इक बार बदन की कैद से निकल भागेगी तो आजाद हो जाएगी
    पर बदन खुद को स्वर्गवासी कहलाने से है डर रहा

    शायद डर हैं कि जल कर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा
    डर बोल रहा है फिर तू जिंदा लोगों के दिलों से भी भूला दिया जाएगा

    पर जिंदगी बोझ सी लगने लगी है
    जलने की दर्द भी सहने को तैयार हैं

    बस बदन से थोड़ी गुफ्तगू कर समझाने की जरूरत है
    किसी को भी यूं कैद कर रखना गलत हैं

    वो जो आसमां में बैठा देख रहा है मुझको
    गर उसे इंतज़ार से पाना हैं छुटकारा
    तो मदद का हाथ बढ़ा कर पिंजरे को खोलना होगा

    वो रूह बन मेरी कैद रूह के पिंजरे के ताले को देख है सकता
    बस हिम्मत कर इसे खोलने में मेरा साथ देना ही होगा

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • monikaja 87w

    आज़ादी

    रोज़ परिंदों को अब खुले आसमान में उड़ता देख रहा हूँ,
    सुबह शाम कमरे की खिड़की से उनकी वो बोली सुन रहा हूँ,
    देखकर इनकी इस आज़ादी को कैद घर से अब रोज़ निहार रहा हूँ,
    पर अब हर पल पिंजरे में हुए बंद उन परिंदों की...उड़ने की फ़रियाद कर रहा हूँ

    मोनिका जैन

  • rizwan_ishtiaq 90w

    चिराग बुझ गए जिन घरों के,
    सुना है बिजली मुफ्त है उन मकानों की.

    #mirakee #writers #delhiriots #delhipogrom #bol #azaadi #delhiriots2020

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    چراغ दीपक

    ©rizwan_ishtiaq

  • swapnajal 95w

    आज़ादी की घुटन

    आज कुछ आज़ाद सा हूँ मैं
    मगर खुश नहीं
    काश कि उसने सिर्फ दिमाग से निकाला हो
    मुझे
    अपने दिल से नहीं
    ©swapnajal

  • corroded 96w

    Aazad

    Jis aazadi ka gungan hum unke, sath kiya krte the
    Aaj unhi bandishon me behadd muqtala hai
    Aye kaash ke muqammal ho har khwahish unki
    Khudko hi sab haasil ho toh zindagi jeene ka maza kaha hai...
    ©corroded

  • melancholy2243 97w

    You woke up to chants of "azaadi" on the streets. A galaxy of humans with raised placards, steel eyes and quiet mouths move on the streets. The scene baffles you. You wonder why they aren't in places they are supposed to be. You ask why they are out on the streets on this Monday, a Monday which to you was supposed to be busy with work. It burns you with anger at the leisurely stroll they seem to be taking. Their quiet confidence only makes you more indignant. They could not possibly be doing this for the entire day. The thought itself sparks series of hateful wild wrath deep inside your brain. Embeds you with the sudden violent onslaught of screams. It's unjustified. These protests. It wasn't that bad. Everything was okay. The newspapers did not say anything about a fascist country, the words written with fresh blood of youth. It was perfect. The morning tea wasn't bitter with oppression. It was just a bit of extra brewing. Everything was exactly how it was supposed to be. The old man across the shop wearing a once white skull cap had his legs crippled with an age old disease. It definitely wasn't communal hatred. It wasn't. The doctors never diagnosed that. Your wife's eyes have lost the shine now. It happens when people get old. It definitely wasn't patriarchy. Your daughter is a tad bit hesitant while wearing jeans now. It's all that anxiety about her appearance. All that dieting. It's not really about the scorching gazes that cling heavily on her body. Life wasn't that bad, that they needed to stop their daily work. We still have law after all. Law that provides justice while burning girls screams are accomodated in the constitution. Law would provide justice even if it meant painting the two year old with pellets. Pellets in eye. In arm. In voice.

    Life was just perfect. The mindless youth with wasted life were on the streets. You had freedom. Yet your tongue could never touch the top of your mouth top to morph out an "azaadi".

    #pod #poetry #resistance #youth #azaadi #freedom #mirakeeworld @mirakeeworld @mirakee #thoughts #poetry #life

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    Azaadi

    Life was just perfect. The mindless youth with wasted life were on the streets. You had freedom. Yet your tongue could never touch the top of your mouth top to morph out an "azaadi".

    ©melancholy2243

  • word_world 99w

    Azaadi

    Logo ko pyaar se azaadi chahiye,
    Aur mujhe pyaar krne ki azaadi chahiye.
    ©word_world

  • candyflaws 102w

    अब छोड़ भी दो मुझे
    नहीं हूं अब इतनी भी कमजोर
    अब छोड़ भी दो मुझे
    हूं इस काबिल की, लगा सकूं ज़िन्दगी की दौड़।
    अब जी लेने भी दो खुलकर
    रह लेने भी दो अब हंस बोल कर
    क्यूं बांधे हुए हो मुझे
    मैं कोई कैदी तो नहीं
    आखिर कैसी सजा है ये
    किसी जुर्म की में दोषी तो नहीं
    अब छोड़ भी दो मुझे
    ©candyflaws

  • farhahaque002 102w

    ©farhahaque00

    Majbooriyan insaan ko kamzor Kar deteen hai ,
    Aadat badalte badalte , insaan badal deti Hain,
    Kamzor na ban oh mere raahi,,
    Kismat aisi cheez hai Jo Zindagi badal deti hai,
    Har lamhe ko jeena seek, taaqat banengi woh teri,
    Aaj nahi toh kal, raahein aasan Kar degi teri,
    Iss safar ka mazza lele har din mein,
    Kya pata alvida likha ho Tere agle panne Mei,
    Dua Kar,madad kar, Farishta ban ja kisika,
    Kya pata uski dua mein ho teri jannat ka raasta,
    Na maud muh uss haqiqat se,saamna karle datke,
    Jeet hogi teri aur mushqilaen aasan hogi teri
    Uss gareeb se puch jo ek roti ko tarasta hai,
    Duaon mein uske bhi bahut bharosa hai
    Aaj na mile khaana usse, Kal milega usse bhi zyaada usse ,
    Himmat na haar oh mere raahi ,
    Kya pata agla panna ho teri baadshahat ki gali
    ©farhahaque002

  • shamay 102w

    Zinda hi hoon.

    Meri shan e parvarish hi aagaz hai, wahi ek andaaz hai nasha toh hum mein bhi hai chadate toh tm ho baith kar...hm yaha utaarte thake jaa rahe.
    Dilhaal badal jaye, jab khayal badal jaye palat kar sekhna dhoop chavon mein humare bhi,
    Gum mein haal dard e dil hi hota hai, ishq mein kahan sirf mehfil hi hota hai!
    Ittila kiya jo tmko tabhi dil ne ummeed ki thi
    Bewajah hm the baithe, beshak par daud jazbaat rhe....
    Mansoobe kuch yun the ki sath hum hon aur haalaat kahen...
    Seeli sirf labon ko hargiz nhi rukh jo tha badla ki der se hi, parr aur tarfa ho gaye.
    Nazar jhuka hi lun toh behtarrr, aadat chashmein ka in ankhon ne jo seekh liya..... kyuki Chipa hi deti hai gavah-e-ehsaas jo simat te ghut te abb jee rahen.
    Hifz thi zehen mein yaadon ki kitaabein, jab kholun toh dikhte bheege panne mujhe aksar.
    Kyu, palat ti hawa bhi har ek panne ki kurbaniyan.... Geeli sehemti jujhti hi sahi kahin aas toh hai ki sookh kar ud jana hoga, phir aur panno ko aana hoga....!!!
    Shuru humse hi hoga, qki quwwat bhi meri aur himmat bhi meri.
    Kismat khuda ne rakhi hai badi hi gehri, khushi aati bhi daudte, paas kandhe pe so bhi jati hai!
    Waqt khuda ne usko beshaq mere liye hi zyaada diya. Auron se bhi rishte bana ne lagi hai wo, Aaj kal zara duur si jane lagi hai wo.
    Parvah krtii abb sansein meri, cheekhti bina awaaz k par jaan leti hai andheron mein meri baatien hi kbhi.
    Hoshiyaar kaha jo elaan yun kiya maanlena!bekaar kahan ladna seekh liya hai jaan lena!
    Hamdard toh abb bhi hun, patti bhi kardun tere ghaav ko, milenge pal jeene wo panno wale!
    Darr hai, kahin mere simte raaste pata puchne na nikle, kahin tere waaste abb izzat se matbhed na ho jaye.
    Jaam phir lagega, chad toh abb bhi jayegi utarte waqt bhi kam jayegi
    Par iss baar mujhe lene mere waqt se pehle log aaenge.
    Khushi tum le jana, badi bigdi hai paas jo rehti thi kano mein kehti thi paas hi hun mein tre par afsos, chal padhte ho kyu dhundne kabhi aise डेरे jaha aksar hai badle khushnuma chehre jaha aksar taqdeer ne bhi munh ho phere.
    Kehti thi, gehraiyon se khudko dekha hai tum nein. Gunahon se dhul kar paaki seencha hai tum mein.
    Zinda ho tum abb azaad ho, darr kam hai qki beparvahbaaz ho. Paas hun mein sath hun,jab zikr e duniya kam hogi toh muskaan bhi aap hi ghar hogi.



    ©shamay98

  • sane_in_sane 104w

    Tab jinhone chup-chup bol kar
    Awaaz daba di thi hamaari
    Aaj khud k liye aawaz uthaane par
    thhu-thhu kar rahein hain

    Tab gussa or nafrat mehsoos kiya tha
    Khud k andar
    Aaj khud par gurur kar rahein hain

    Socha sayad badal denge soch
    thodi si chuppi saadh kar

    Aawaz uthaane par pata chala
    soch to na badal paaye unki
    Par thodi himmat kar k,
    Khud ko badal k,
    Apna bhavishya

    hum badal rahein hai
    hum aage badh rahein hai
    ©bibliophilic

  • eleutheromaniac96 107w

    Jo kabhi pinjre me kayd na rahe,
    wo kya samjhenge azaadi Ki khushbu.


    ©_eleutheromaniac_

  • manjari78621 107w

    Poem
    Title :- #woh koi azaad parinda hota hai
    #musibaton ka paheraa
    #azaadi ki talash



    Woh koi azaad parinda hota hai
    Jo samaaj ki zanjeere
    Todh kar uda jataa hai...

    Bekhudi main bhi apni
    Raha khud hi
    Dhundataa hai....

    Dagmagaa jaati hai
    Uski umidyen
    Jab chaaro aur se hota hai
    Musibaton kaa paheraa...

    Girta-padta chot khaa kar
    Bhi udanaa nahi
    bhooltaa...

    Har musibat kaa datkar
    Samana karta
    Aur apni azaadi ko
    Karib Pataa...

    Woh koi azaad parinda hota hai
    Jo asmaan main udh jata hai
    Nadaan naa raha abb parinda..!
    Azaadi apne pankho main
    Dhundataa hai...
    ©manjari78621

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    Poem

    Woh koi azaad parinda hota hai
    Jo samaaj ki zanjeere
    Todh kar uda jataa hai...

    Bekhudi main bhi apni
    Raha khud hi
    Dhundataa hai....

    Dagmagaa jaati hai
    Uski umidyen
    Jab chaaro aur se hota hai
    Musibaton kaa paheraa...

    Girta-padta chot khaa kar
    Bhi udanaa nahi
    bhooltaa...

    Har musibat kaa datkar
    Samana karta
    Aur apni azaadi ko
    Karib Pataa...

  • silent_writer__ 117w

    Toh bolo azaadi...

    Apni azadi kisko ni pyaari hai..
    Bus us nanhi si chidiya ki kahaani hai ...
    Jo pinjare me hi mar jaati hai aur apni jaan se is azadi ki kimat chukati hai..
    Ya phir voh jo pinjare ke band darwaze khool kr khule asmaan me udd jati hai...
    ©kukkuu_

  • bejubaanshayar 118w

    #Shayarnama #shayrinama #mrak

    #katar ke #par #hamare #hame
    #udne ki #azaadi de #rahe ho #yani
    #hamara #jitna #haq #hai
    #uski #Aadhi #de rahe #ho


    katar ke par hamare hame
    udne ki azaadi de rahe ho yani
    hamara jitna haq hai
    uski Aadhi de rahe ho

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    katar ke par hamare hame
    udne ki azaadi de rahe ho yani
    hamara jitna haq hai
    uski Aadhi de rahe ho
    ©bejubaanshayar