#asma7khan

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  • asma7khan 57w

    कैसी गफ़लत ले चला हूं मैं
    उसकी मुहब्बत ले चला हूँ मैं

    अक्स नज़र आया था उसमें
    लगा था आईने से मिला हूँ मैं

    अभी तो जान बाकी है मुझमें
    अभी तो बस अधजला हूँ मैं

    हर एक राह उसी को जाती है
    किस मंज़िल को निकला हूँ मैं

    जो आज देखते हो मुझे तुम
    बेशक़ उसका ही सिला हूँ मैं

    बांधे हुए लफ्ज़ों में खुद को
    अपना ही एक फैसला हूँ मैं

    सुनो, गज़ल को वक्त है अभी
    अभी तो फकत मत्तला हूँ मैं

    चाहत नहीं रही रहगुज़र की
    खुद में ही अब काफ़िला हूं मैं

    एक रोज़ ख़त्म होगा झोंके से
    महज़ वही सिलसिला हूँ मैं

    ©asma7khan

  • asma7khan 57w

    लिहाज़

    चुभ जायेंगी बात जो मैं कहता नहीं दिल की
    ये खामोशी मेरी,लिहाज़ की निशानी रही है

    ©asma7khan

  • asma7khan 58w

    अंजाम तो सबसे छिपा नहीं है
    कि इश्क में अब मज़ा नहीं है

    आधे सफर में है ज़िंदगी मिरी
    कि मोहब्बत में अभी सज़ा नहीं है

    दूर से ही देखता हूँ उसको मैं
    अब तलक उससे कुछ कहा नहीं है

    बेहया समझो या बेकाबू तुम जानो
    दिल ये अब मेरा रहा नहीं है

    हर मुश्क मौजूद है वो महबूब मेरा
    क्या कहूँ कि वो कहाँ नहीं है

    बहुत हसीन है बेशक वो मगर
    क्यों कहूँ मेरा, जब वो मेरा नहीं है

    ©asma7khan

  • asma7khan 89w

    दिल बेकरार हुआ जा रहा है
    क्या बात है कि टूटता ही नहीं

    हर पल बेचैन रहता हूं आजकल
    तेरा नशा है कि छूटता ही नहीं

    ©asma7khan