#abhivyakti51

34 posts
  • rinki_writes 105w

    #abhivyakti51
    @goldenwrites_jakir
    Sorry for being late ��

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    यादें

    कुछ पल ठहर जाती हूं,
    उसे याद कर के,
    कुछ कदम और चल लेती हूं,
    उसे याद कर के,

    उसकी यादें ही तो हैं,
    जो चलने नहीं देती,
    उसकी यादें ही तो हैं,
    जो रुकने भी नहीं देती ....

    ©rinki_writes

  • butterfly97 105w

    ��������������������������

    #abhivyakti51 �� #abhivyakti52

    आप सभी ने �� यादें /याद ��पर बहुत ही खूबसूरत रचनाएं प्रस्तुत की ����������������

    सभी की रचनाएं एक से बढ़कर एक थी ❤️��इस शीर्षक पर लिखते समय आप सब जरूर कुछ बीते पलो में पहुंच गए होंगे ����ऐसे पल जो हमे बहुत कुछ दे जाते है....और खुद में बहुत सी यादें �� समेटे हुए होते है ����

    यादें हमे बीते पलो में ले जाती है....तो वहीं यादें हमे आगे बढ़ने की ताकत देती है....समझ देती है...नई उम्मीद देती है ����
    आप सभी का तहे दिल से आभार ������������जो आपने अपना कीमती योगदान दिया ��������������❤️

    जिन सभी ने आज रचनाएं लिखी है...उनमें से लगभग सब ही इस मंच को संभाल चुके है इसलिए मै अभिव्यक्ति को आगे बढ़ाने का जिम्मा @karan_ahir jii को सौंपती हूं ������उम्मीद है कि आप सब सहमत होंगे ����������������������������

    एक बार पुनः आप सभी का शुक्रिया ❤️��������

    ��������������������������

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    #abhivyakti51 #abhivyakti52

    इन यादों की अभिव्यक्ति में
    बहुत से पल सिमट आए
    हम उन पुरानी बातो
    और जज्बातों को
    खुद में समेट आए
    ❤️❤️
    ©beautiful_feelings

  • deepajoshidhawan 105w

    यादें

    जुड़ी थी तुझसे जो वो हर याद बिसारी है
    हमने ज़िन्दगी बड़ी मुश्किल में गुज़ारी है

    दिल के पिंजरे में यादों को हलाल करता है
    वक़्त भी देखो बड़ा ज़ालिम सा शिकारी है

    देखा किये थे साथ कभी चाँद तारे बैठकर
    बेगैरत छत ने माँग ली वो अपनी उधारी है

    हकीकत से क्यों अनजान बना फिरता है
    दिल को चढ़ी न जाने कौन सी खुमारी है

    आगे बढ़ें या लौटें दोनों सूरतों में चैन कहाँ
    चल रहे हैं जिस पर हम तलवार दुधारी है

    जान देने का वादा किया था जिसने कभी
    उस शख़्स ने ही अब दिल से बात उतारी है

    दोगलेपन की सी महक आती है ज़माने से
    यकीन है हमको इसमें सभी की शुमारी है
    ©deepajoshidhawan

  • sweta_singh99 105w

    Dedicate to my Papa I miss you lot
    #abhivyakti51

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    यादें

    सोचा नहीं कभी मेरे यादों के हिस्से में सामिल हो मेरे पापा
    क्यों याद बन कर रह गए हो मेरे पापा
    आपके कदमों के चिन्हो पर चलना है मुझे ऐसा चिन्ह छोड़ गए हों मेरे पापा
    आपके वचनों और विचारों को अपनाया है मैंने ऐसे क्यों छोड़ गए हों मेरे पापा
    कैसे करूं मैं याद कि आपका ही खून मेरे रगो में दौड़ रहा हो मेरे पापा
    मेरा रोम रोम कर्जदार मेरी चल रही सांस में बसे हो मेरे पापा
    क्यों नहीं मेरे जीवन के अंतिम घड़ी तक साथ नहीं हो मेरे पापा
    आपकी जीवनशैली को अपनाने का संकल्प लिया है मैंने ऐसा आशीर्वाद देना मेरे पापा
    क्यों याद बन कर रह गए हो मेरे पापा।
    ©sweta_singh99

  • piu_writes 105w

    देखें ये यादें तुम्हारी मेरी ज़िंदगी को क्या नई करवट दे जाती है, फिलहाल तो सिर्फ ये मेरे चद्दर पे सिलवट पे सिलवट दे जाती हैं
    ©piu_writes

  • karan_ahir 105w

    याद हैं??

    याद है जब हमारा मिलना हुआ था
    फिर मेरे ख्वाबों में तेरा आना जाना हुआ था

    आज भले ही साथ नहीं लेकिन तेरी बातें याद है
    तुम भी याद करो जब ना बिछड़ने का वादा हुआ था
    ©karan_ahir

  • goldenwrites_jakir 105w

    यादें मिट्टी की

    वीर जवान

    यादें ज़ब भी आती है आँखों से लहू दिल का बहा ले जातीं है
    क़ुर्बान हो गए हमारे बाप दादा जिस मिट्टी की आजादी के लिए --- आज हम एक नहीं इस आजादी की खुसबू में
    हर तरफ नफरत की चिंगारी हर तरफ चंद सफ़ेद पोस लोगो की दादागिरी ये केसी आजादी हमें मिली हम होकर आज़ाद आज़ाद नहीं ---- रोज देखतें है सम्भिधान की मर्यादा का उल्लंघन होते हुए ये केसी हम सब की ख़ामोशी ,,,,

    याद करो वो क़ुरबानी जो हमारे अपनों ने लहू से हमें दिलाई भूलकर जातीं धर्म सबने एक साथ इस लड़ाई को आजादी का नाम दिया -- कौन छोटा कौन बड़ा सबने लहू से अपने
    धरती माँ की शान बड़ाई फिर क्यों आज हम बटे - बटे से रहते है ऊंच नीच के धागे से बंधे - बंधे से रहते है
    क्या है आज़ादी हमारी इसे भूलकर हम एक दूसरे को निचा दिखाते है क्या यही उन सब की क़ुरबानीयों का देश है
    हम कहा है खड़े हम चाहते क्या है ये सब एक सवाल से हम क्यों नजरें चुराए खामोश है ......

    याद करो शहीदो की कुर्बानियां जगाओ अपना ज़मीर
    हम सब एक है एक है एक है
    एक ही तिरंगा एक लहू का क़तरा हम सब आज़ाद है
    जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द की हम सेना


    ©goldenwrites_jakir

  • piu_writes 105w

    सोचती हूं मैं तूने जो मुस्कुराकर देखा था मुझे, वो लम्हा तुझे भी तो याद आता होगा, शायद उसे सोच कर तू भी तो मुस्कुराता होगा ।।
    ©piu_writes

  • loveneetm 105w

    यादों का संदूक

    संदूक खोलकर यादों की,
    एक दिन दादी निहार रहीं,
    अपने जीवन के काल खंड को,
    अंतर्मन से संवार रही।

    अनायास कभी नीर बहें,
    कभी मंद मंद मुस्काए रही,
    यादों की संदूक देखकर,
    मन ही मन हरषाए रहीं।

    मैंने पूछा देख दृश्य यह,
    कि दादी खोई सपनों में,
    तो चौंक सहम कर दादी जी,
    मुझको कंठ लगाएँ रहीं।

    बोली मुझसे लाल मेरे,
    मैं यादों में खो बैठी थी,
    कैसे बदला जीवन मेरा,
    यह खुद को थी समझाए रहीं।

    बचपन में ही ब्याह हुआ,
    और जीवन पल में बदल गया,
    माँ बनने के अनुभव को,
    झांक हृदय निहार रहीं ।

    बच्चो का लालन पालन,
    और उनका जीवनयापन,
    तेरे दादा की स्मृतियों को,
    फिर से भीतर संवार रहीं।

    संदूक खोलकर यादों की,
    एक दिन दादी निहार रहीं,
    अपने जीवन के काल खंड को,
    अंतर्मन से संवार रही।
    ©loveneetm

  • piu_writes 105w

    याद

    क्या तुम्हें याद है वो लम्हा जब तुमनें मुझे मुस्कुरा कर देखा था मगर जानते हो? उस लम्हे को सोच कर आज भी मुस्कुराती हु मैं
    ©piu_writes

  • neha_ek_leher 105w

    यादें जिंदगी का वो खूबसूरत हिस्सा है
    जो एकांत में भी किसी के होने का
    एहसास दिलाती हैं।
    ❤️❤️

    ©neha_ek_leher

  • rnsharma65 105w

    याद

    याद है विशेष उपयोगी
    आगे चलने राह बताएगी ।।
    वह शायद अपने माता
    पिता को भुल जाता
    जिसका कुछ याद न रहता ।।
    याद रखना है बहुत जरूरी
    न तो पढ़ाई में कमजोरी
    जीविका निर्वाह में कमजोरी
    रिश्ते में भी कमजोरी ।।
    जो कुछ याद नहीं रख पाता
    वह अपने तथा परिवार को
    उपयुक्त नहीं बना पाता ।।
    किसिसे कुछ जब पाते
    याद रखें तो श्रेष्ठ होते
    किन्तु किसीको जब कुछ सेवा देते
    सज्जन उसे सदा भुल जाया करते ।
    देना जो है याद रख मन
    लेना जो न लगा ध्यान ।।
    ©rnsharma65

  • smritishukla 106w

    याद रहते;️️

    बिछड़ कर भी मोहब्बत के ज़माने याद रहते हैं
    उजड़ जाती है महफ़िल और चेहरे याद रहते हैं
    मै खुशबू की मदद से आपको पहचान लेता हूँ
    नशे में भी मुझे अपने पराये याद रहते हैं

    समन्दर की नजर फैलाव पर मरकूज़ रहती है।
    मैं दरिया हूँ मुझे अपने किनारे याद रहते हैं।

    खुदा ने ये सिफ़त दुनिया की हर औरत को बख्शी है
    के वो पागल भी हो जाये तो बेटे याद रहते हैं

    शगुफ्ता लोग भी टूटे हुए होते हैं
    अन्दर से बहुत रोते हैं वो जिनको लतीफ़े याद रहते हैं।
    ©smritishukla

  • lazybongness 110w

    #Abhivyakti51 @beautiful_feelings @goldenwrites_jakir @vaishally

    जब भी मौसम बदले तो
    तुम याद आती हो ,
    थकावट से अकेली बैठी तो
    तुम याद आती हो,
    पता नहीं वेवक़्त अचानक
    तुम याद आती हो ,
    खुशी में भी आँसू के बुँदे
    जैसे चली आती हो।
    रसोई में हाथ जले , तो
    तुम याद आती हो।
    श्रृंगार समय .... कुमकुम की डिब्बी देखीं
    तो तुम याद आती हो .........
    पुरानी खोले बक्सों में साड़िया देख
    तो तुम याद आती हो ,
    अपने सोते हुए बेटी को ताकती 'मैं '
    क्योकि तुम याद आती हो।
    उनसे रूठी या झगड़ी , याद तेरी आती है
    पड़ोसी के घर .... व्यंजनों की ख़ुशबू
    याद तेरी सताती है ,
    शंख की ध्वनि ,घंटी की आवाज़
    याद तेरी आती है
    तेरे सिखाये रस्मों का हिस्सा
    किस्सा साथ लाती हैं।

    कैसे बोलू तेरी ......... कितनी याद आती है ??
    बस थोड़ा -थोड़ा हर दिन ,यादो की मुलाकात होती है
    तुम याद की तरह आती हो ,
    दो पल में गुम हो जाती हो ,
    ज़िन्दगी की वयस्तता को
    नए दिशा दे जाती हो।
    तेरी हर छोटी मोटी बातें
    अब मेरी समझ आती है ,
    अशंख्य प्रश्नों का उत्तर
    स्वंयम मुझे दे जाती हैं।
    तीज - त्यौहार , जश्न मे
    तुम याद आती हो ,
    छुट्टियों के लम्बे अरसो में
    तुम याद आती हो,
    आदत की तरह हर रोज़
    तुम याद आती हो ........
    "माँ " नहीं समझ पाती मैं ,
    यह यादें क्यों इतना मुझे सताती है!!
    ©️lazybongness
    #maa #hindipoem #hindii #anubhooti
    #mirakee #mirakeeworld

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    मां तेरी याद

    जननी हो , नींव हो
    मेरी सृजन का
    आधार हो ।
    ©lazybongness

  • sweta_singh99 111w

    मुझे लौटा दो मेरे हिस्से का बचपन
    छोड़ आईं मैं तो मां के आंगन
    वो छोटी सी रातों में नानी की लम्बी कहानी
    वो सुना सा झुला वो आमों का बगिया
    बाबा के कंधे की सवारी पल भर में रूठना-मनाना
    मुझे लौटा दो मेरे हिस्से का बचपन
    वो बारिश की कस्ती वो आंगन का पानी
    गुड्डे गुड़ियों की शादी में मैं अल्हड़ दिवानी
    चाहें ले लोग मेरी जवानी मुझे लौटा दो मेरी कहानी
    संग सहेलियों के हंसी ठिठोली
    करती थी मैं अपनी मनमानी
    मुझे लौटा दो मेरे वो खेल खिलौने
    चाहें दिला दो वो गिट्टी और कबड्डी का आंगन
    वो गर्मी की छुट्टियों में नानी घर की उघम चौकड़ी
    याद है मुझको सब बातें हुई पुरानी


    थकी हुई है आज मेरी कहानी
    लादे है मुझपे बड़ी परेशानी
    फुर्सत के पल की बात है पुरानी
    दुर्लभ जिवन की बहुत हैं कहानी
    छुटा है बचपन रूठा है जवानी
    मुझे लौटा दो मेरी अपनी कहानी।
    #abhivyakti51

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    बचपन की यादें

    ©sweta_singh99

  • dil_ke_alfajj 122w

    बीते हुये लम्हें, यक़ीनन अतीत का किस्सा है..
    पर उनसे जुड़ी यादें, अब जिंदगी का हिस्सा है..
    MRJ
    ©dil_ke_alfajj

  • vipin_bahar 125w

    आज कमरें में मन,बहुत ज्यादा विचलित था,
    तेरे स्वप्न में हृदय का,पोर-पोर सम्मलित था,
    तेरी सुरभि बिखर गई..ऐ जान यत्र-तत्र हैं,
    तेरी याद कि आवर्ती हुई.. जब खोले सारे पत्र हैं,
    तुम तो सीधी-साधी थी,मैं ही तुममें इच्छुक था,
    तुम दिव्य आत्मा सी थी,मैं तुम्हारा भिक्षुक था,
    मौत सा लग रहा था-जान इश्क़ की छुपाई में,
    नयन भीग जाते थे- इस वेदना की लड़ाई में,
    तुम नही हो फिर भी..डायरी में तेरा इत्र हैं,
    तेरे याद की आवर्ती हुई. जब खोले सारे पत्र हैं,
    जीवन के ऐसे मोड़ पे,जान तेरा साथ था,
    जेब खाली थी मेरी पर,हाथों में तेरा हाथ था,
    गणित का विद्यार्थी था मैं,इश्क से अनभिज्ञ था,
    पर तुझे पाना ही जानेमन,मेरे मन का जिद्द था,
    जीवन के हर क़दम पे..जान तू ही तू सर्वत्र हैं,
    तेरी याद कि आवर्ती हुई.. जब खोले सारे पत्र हैं,
    मैं तो खाली गागर था,तूने बनाया सागर जी,
    लिखना नही आता हैं,तूने बनाया शायर जी,
    इश्क़ ने ही सब सिखलाया,तेरा अक्षर-अक्षर जी,
    गजल भी लिख दिया मैने, न जाना क्या बहर जी,
    तेरे वियोग में ऐ जानेमन..बिगड़े सभी नक्षत्र हैं,
    तेरी याद की आवर्ती हुई..जब खोले सारे पत्र हैं,
    विपिन"बहार"
    ©
    Vipin_bahar
    ©

  • dil_k_ahsaas 128w

    #abhivyakti51 ( ✒️ )
    #यादें
    @beautiful_feelings

    #reposting this Post

    @writersnetwork #writersnetwork #writerstolli @writerstolli #mirakee #mirakeeworld #mirakeewriters #readwriteunite #hindiwriters #hindinetwork #hindiwritersnetwork
    #yaadein #collection #bitternsweet #confusions #zindagi #thoughts #restlessness #empowerment #remembrance #type_of_jail #no_freedom #nonforgatable #painful_memories #sweet_memories #memories

    #nirjhar-lekhni
    @rikt__

    दिमाग़ की अलमारी में यादों की किताबें हैं
    कुछ पर जमी है गर्द और कुछ अभी झाड़ी हैं

    अनगिनत हैं खाने और अनगिनत किताबें
    कुछ बहुत पुरानी हैं और कुछ अभी नई ही डाली हैं

    पुरानी जो हैं वो कुछ कट फट रही हैं
    लेकिन फिर भी कहानी पूरी कहती हैं

    कभी कभी यूं उलझ भी जाती हूं
    जब याद इक देखने को अलमारी कि तरफ बढ़ती हूं

    हर याद पुकार लगाती हैं पहले मुझे देखो
    अनगिनत आवाज़ों से घबरा कर अलमारी बंद कर देती हूं

    अक्सर ये आवाजें उन्ही किताबों से आती है
    जिन पर मैंने इक गहरा काला कवर चढ़ाया है
    ताकि मुझे याद रहे इसमें कुछ दिल दुखाने वाला है

    परंतु ये याद बड़ी ही ठीठ किस्म की है
    अच्छी यादों पर अक्सर भारी पड़ जाती हैं

    दिमाग़ की अलमारी पर ताला भी लगाती हूं
    फिर भी ना जाने कैसे दरवाजे कि दरारों से बाहर निकल आती हैं

    कश्मकश में हूं ऐसा क्या करूं कि सुहानी यादों को सुनहरे कवर में संजो कर रखूं
    काला रंग देखो धीरे धीरे सबकुछ निगल रहा हैं
    अपनी कड़वी सच्चाई से अच्छी यादों को झुठला रहा हैं

    मन में इक वहम भी होने लगा हैं शायद अच्छा कुछ भी नहीं बस हर तरफ आग जल रही हैं
    यादें हैं कि पीछा ही नहीं छोड़ती
    खुद-ब-खुद अलमारी में अपनी जगह बना कर खुद को कैद कर लेती हैं

    कभी कभी लगता हैं ये नहीं, मैं खुद ही इनमें कैद हो रही हूं
    मैं नहीं यादों को रिहा कर रही यां मुझे ही इनसे रिहाई नहीं मिल रही हैं

    बस यही जंग दिल पर भारी हैं
    और मेरी यादों की अलमारी मेरी उलझन पर मुस्कुरा रही हैं

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना

    Pic credit : Google

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    ©dil_k_ahsaas

  • saroj_gupta 133w

    #abhivyakti51
    @beautiful_feelings

    अभिव्यक्ति के 50 अंक पूर्ण होने पर आप सभी पाठकों एवं लेखकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ��������������

    ये मेरी पुरानी पोस्ट है जो आज के अंक के अनुसार है ��������

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    तेरी यादें

    तेरी यादें
    मुझसे लिपटी हैं ऐसे

    जैसे जाड़े के मौसम में
    तन से गर्म शाॅल लिपटी है

    फिर ये मुलायम धूप की तरह
    दिल पे उतर आती है

    भीनी खुशबू की तरह
    सांसों में घुल जाती है

    और सुर्ख लहू की तरह
    नस-नस में बहती जाती है

    फिर मुझे एहसास होता है
    कितनी खूबसूरत है ये यादें

    बिल्कुल संजीवनी के स्पर्श की तरह
    मुझमें प्राण फूंक जाती हैं

    फिर से वापस आने के लिए
    और तेरी याद दिलाने के लिए
    ©saroj_gupta

  • aashish_hr_nema 198w

    संलग्न चित्र पर आधारित मेरी पुरानी रचना आप सभी की समीक्षा हेतु प्रस्तुत है , निवेदन है कि रचना पढ़ने के पूर्व एक बार चित्र का बारीकी से अवलोकन अवश्य करें , उसके बाद ही रचना का सही आनंद मिल पाऐगा। ������

    #hindilekhan #hind #hindiwriters
    #panchdoot_social

    #abhivyakti51 { ✒ }

    {शीर्षक = धुंधली यादें }

    वो बचपन के देखे त्यौहारो की ,
    बात ही कुछ और थी ।
     घर मे रौनको से सजी  ,
    सुहानी हर भोर थी ।।

    इक महक खींच लाती थी
    रसोई की दहलीज पर ।
    और फिर नज़रे टिक जाती थी
    बनती हुई हर चीज पर ।।

    माॅ और दादी मिलके 
    कई पकवान बनाती थी ।
    प्रेम-स्वाद के गुर सारे
    नई चाची को सिखाती थी ।।

    पिताजी तैयार होते थे
    हमें मेले में ले जाने को ।
    पर हम बेसुध गुझिया ही निहारें ,
    सोचें- "कब मिलेंगी ये खाने को"? 

    वो छोटा भाई घुटनो पे चलकर
    माॅ के आँचल से जा चिपकता था ।
    पकवान बनते देखकर
    उसका भी जी-मचलता था ।।
     
    पहन कर नए कपड़े
    कुछ यूं इतराते थे ।
    अफसर सा रुतबा दिखा
    पूरा गाँव घूम आते थे ।।

    स्वाद उन पकवानों का
    हम आज भी नहीं भूले ।
    याद है कश्ती कागज की
    याद है मेलों के झूले ।।

    याद अभी भी है हमें
    वो आटे के चूहा-बिल्ली ।।
    याद है वो झूठा रोना
    याद है वो डण्डा-गुल्ली ।।

    याद अभी है वो पल
    जब-जब जिद पर अड़ जाते थे ।
    प्यार भरे थप्पड़ तब-तब
    इन गालों पर पड़ जाते थे ।।

    वो गुजरा जमाना नहीं 
    असल जिंदगी थी हमारी ।
    जहाँ धन के अभाव में भी
    खुशियाँ थी सारी ।।

    अब आधुनिकता की दौड़ में
    संस्कृति चूर-चूर हो गई है ।
    जिस कारण सारी रौनकें
    त्यौहारों से दूर हो गई है ।।

    इस बार मिलकर हम सब
    वो रीत दोहराएंगे ।
    भूलकर गिले-शिकवे
    परस्पर प्रीत बढ़ाएंगे ।।
     
    बदलेगी हर निराशा
    महकती खुशहाली में ।
    जब प्रेम-दीप जल उठेंगे
    घर-घर इस दीवाली में ।।
                                     
       ✍
      आशीष हरीराम नेमा 
      ©aashish_nema

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    {धुंधली यादें }

    PC = Google
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