#abhirites

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  • abhirites 44w

    पता नहीं क्या सोच बैठे हो तुम..
    होती थी रोज़ बातें , आज कहां हो गुम..
    तुम्हारे बिन सूरज ढल तो जाता है पर शाम नहीं होती है...
    कहने सुनने को है कितना कुछ
    पर अब बात नहीं होती है।

    एक वक़्त थे दिन रात बराबर
    बिन सोचे सब तुमसे कहता था..
    औरो का मतलब नहीं,खयाल तुम्हारा रहता था,
    थक गए है किस्से..
    कहानियां भी अब रोती है...
    कहने सुनने को है कितना कुछ
    पर अब बात नहीं होती है।

    सूना सा अब है सब
    बदला था कभी,या बदला हूं अब
    मिलकर भी सामने
    अब ये खामोशी सहन नहीं होती है...
    कहने सुनने को है कितना कुछ
    पर अब बात नहीं होती है।।

    ©abhirites