#abhimishra

259 posts
  • abhi_mishra_ 1w



    तेरे इश्क़ में मुसलसल, मुक़म्मल हो रहा हूँ,
    था कल, फ़िर मैं आज, फ़िर कल हो रहा हूँ।

    जो तुझ पर लिखी है, जो तुझ से बनी है,
    मैं तेरी कहानी, अमल हो रहा हूँ।

    ना जन्मों के वादे, ना सदियों के किस्से,
    इन्हीं चंद घड़ियों का पल हो रहा हूँ।

    जो माथे पर लिपटी है, बातों में दिखती है,
    अब हर उस शिकन का, मैं हल हो रहा हूँ।

    मोहब्बत में लाज़मी है, हुनर मात खाने का,
    मैं हर उस हुनर में सफ़ल हो रहा हूँ।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 6w



    कहने को काफ़ी एक लफ्ज़ ही मुक़म्मल,
    लिखने जो बैठूँ, तो जहां कम है।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 7w



    एक ज़िम्मा है जो गहरा है,
    एक ख़्वाब है जो ख़ाली है।

    मुझे डर है तो बस झरोखों से,
    मैंने तूफां में कश्ती संभाली है।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 8w



    मेरे दिल में यूँ तो स्याह अँधेरा है,
    मगर तुम आ सको तो थोड़े तारे समेट लाना।
    रोशनी की थोड़ी कमी होगी,
    पलकों में शायद नमी होगी,
    रात शायद स्याह और काली होगी,
    पर वो ही मेरी चाँद रात, दिवाली होगी।
    उन तारों को यूँ ही बिखेर देना,
    जैसे पंछी को दाने सवेर देना।
    फिर जैसे सितारे रोशन होंगे,
    मेरे दिल के अँधेरे ओझल होंगे।
    अँधेरे के साथ चली जाएँगी यादें,
    तुम्हारी नहीं,
    उस वक्त की जो मैंने तुम्हारे बिना बिताया है।
    क्योंकि अँधेरा गवाह है मेरी कसक का,
    और गवाहों ने कब साथ निभाया है।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 11w



    क्यों हमें औरों की तरह, पेश आना चाहिए,
    कभी रूठ जाना चाहिए, कभी मान जाना चाहिए।

    आख़िर क्यों कहें हम सिर्फ़ गज़लें प्रेम, उल्फत पर,
    हमें भी दुःख जताना चाहिए, गम सुनाना चाहिए।

    कोई ना सुनें तो एक रोज़, सिर्फ़ ख़ुद के लिए,
    कभी पढ़ना चाहिए शेर, कभी गीत गाना चाहिए।

    दिल में रख कर बात, ये रात कब बसर होगी,
    सुनना चाहिए उनकी, और कभी बताना चाहिए।

    आजकल की आशिक़ी में, चार दिन की चाँदनी में,
    दिल-ए-नादाँ को ना यूँ सताना चाहिए।

    ये दिखावे का दौर है, दिल की आँखें कमज़ोर हैं,
    इश्क़ हो या इबादत, खुल कर जताना चाहिए।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 12w

    तुम्हारे खयालों में रहना तुम्हारे साथ रहने से बेहतर है।

    खयालों में तुम वो सब बोलती हो जो मैं तुमसे सुनने को तरसता हूँ, ख्वाबों में तुम मुझे मनाती हो, और मैं मनाता हूँ तो मान भी जाती हो।

    तुम पास बैठकर सुनती हो जो मैं कहना चाहता हूँ, हर बात पर मुस्कुराकर सर हिला देती हो, तुम चाहती हो कि मैं और कहूँ, वो सब कह दूँ जो आजतक मैं किसी से नहीं कह पाया, वो सब जो तुम्हारे लिए बचा कर रखा था।

    ख़्वाब में तुम्हारा पूरा खाली वक्त मेरा होता है।

    तुम्हारी आवाज़ सुनने को महिनों इंतज़ार करना होता है, खयालों में हर दिन ख़त्म होने पर तुम दिन का हाल सुनाती हो।

    जो सूरत देखने को सालों तरसता हूँ, खयालों में हर रोज़ सामने होती है।
    मैं देखता रहता हूँ, तुम मुस्कुराती रहती हो।

    जाने क्यों लेकिन हर रोज़ बरसात होती है, ख़्वाबों में कोई और मौसम नहीं आता, खयालों में वो बारिश की बूंदें होती हैं और असलियत में शायद आँखों के मोती।

    तुम्हारा हँसना, मुस्कुराना, मनाना, मान जाना, हक़ जताना, बातें बताना शायद ख्वाबों और खयालों में ही मुमकिन है।

    मुझे समझ नहीं आता मुझे तुमसे प्यार है या तुम्हारे ख्वाबों और खयालों से जो मैंने बुने हैं।

    शायद तुम वैसी हो भी नहीं जैसा मैंने तुम्हें खयालों में बना रखा है, शायद मैं दो लोगों से प्यार करता हूँ।

    एक तुम जो असलियत में हो, प्रैक्टिकल और समझदार और एक जो खयालों में है, जिसमें मेरे लिए उतना ही पागलपन है जितना मेरे अंदर।

    शायद इसी वजह से खीझ जाती हो मुझसे, मैं खयालों में खूबसूरत लम्हें सोचकर तुमसे भी वही अपेक्षा करता हूँ।
    तो इस मनमुटाव की जड़ भी मैं ही हूँ।

    यह एक ऐसा प्रेम त्रिकोण है जिसके बारे में जितना सोचता हूँ उतना डूबता हूँ और शायद ही कभी मैं तुम्हें समझा भी पाऊंगा।

    काश मैं तुम्हें समझा पाऊँ वह लम्हें, और हम तीनों मिल पाएं किसी शाम और साथ मुस्कुराएं इन बचकानी बातों पर।

    तुम थोड़ा वक्त बचाकर लाना, मैं ले आऊँगा तुम्हें...



    #hindi #hindiwriters #abhimishra

    Read More



    इक शख़्स से दो इश्क़ ऐसे निभा रहा हूँ मैं,
    उससे मिलकर, उस ही से मिलने जा रहा हूँ मैं।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 13w

    कुर्बत - closeness

    #hindi #hindiwriters #abhimishra #Fictional

    Read More



    ये बात इक बरस की, अब बता रहा हूँ मैं,
    वो गया नहीं ये कहकर, कि जा रहा हूँ मैं।

    बताता गर निगाहों से, निगाहें फेर लेता मैं,
    ये बात कह कह कर ख़ुद को, जता रहा हूँ मैं।

    होते तुम तो शायद ख़ुद से भी मैं प्यार कर लेता,
    तुम्हारे बिन तो बस ख़ुद को जैसे सता रहा हूँ मैं।

    तुम्हारे संग शायद कुर्बतों पर गीत मैं लिखता,
    तुम्हारे बिन उदासी की ही गज़लें गा रहा हूँ मैं।

    जो बादल है, जो पानी है, ये मेरी ही कहानी है,
    कि बहता जा रहा हूँ मैं, बरसता जा रहा हूँ मैं।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 17w

    ताउम्र - आजीवन, जीवन के आरम्भ से लेकर अंतिम समय तक

    #Hindi #hindiwriters #abhimishra

    Read More



    वो हर मुलाक़ात पर, ताउम्र का वादा कर रही है,
    और ये उम्र है जो सब्र में, इंतज़ार में गुज़र रही है।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 17w



    बताता, जो तुमको गर यकीं होता,
    तुम होते, तो शायद मैं यहीं होता।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 19w



    शिकायत रोज़ करता हूँ, मगर फ़िर भी सताता है,
    मैं उसको भूल जाता हूँ, वो मुझको याद आता है।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 20w



    इन राहों को हर ख़्वाब से, जुदा किया मैंने,
    और जिसको भी चाहा, ख़ुदा किया मैंने।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 21w

    आब - पानी

    #hindi #hindiwriters #abhimishra

    Read More



    बारिश की हर बूँद से अश्क़ों को आब करता हूँ,
    मैं ख़ुद को, ख़ुद ही, ख़ुद से बेनकाब करता हूँ।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 21w



    कुछ याद नहीं मैं रोया था, या हल्का सा मुस्काया था,
    पर जन्नत जैसा था वो पल, जब माँ ने गले लगाया था।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 27w

    सहर - सवेरा
    निजात - मुक्त
    स्याह - काला, Dark
    हयात - ज़िंदगी


    #hindi #hindiwriters #abhimishra

    Read More



    काश कि तेरे शहर से, मेरी बात हो पाती,
    बिताता कुछ वक़्त तो मुलाक़ात हो पाती।

    गुज़रता फ़िर गलियों से, राहों से, चौराहों से,
    ढूँढता मैं वो सहर, कि जिसकी रात हो पाती।

    पूछता मैं हाल तेरा हर पत्ते से, हर डाली से,
    शामें मेरी फ़िर फिक्र से, निजात हो पाती।

    तू रूठती तो डूबता, शहर स्याह अंधेरों में,
    तू मुस्कुराती तब ख़ुशनुमा हयात हो पाती।

    सुनता तेरा शहर जब, फ़िर किस्सा तेरा मेरा,
    वो पोंछता फ़िर आँसू, तब बरसात हो पाती।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 28w



    तुम मुझे तोहफ़े में क़िताब देना,
    मैं तुम्हें तोहफ़े में कलम दूंगा।
    तुम मत लिखना कभी उस कलम से,
    ना मैं वह क़िताब कभी पढूँगा।
    इस तरह बच जाएंगे स्याही, पन्ने और प्रेम।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 21w



    मैं अक्सर यह सोचता था कि कवि कैसे लिखते हैं क्रांति, प्रेम, विरह, जीवन, चाह?
    कुछ देर से ही सही मुझे यह मालूम हुआ कि कवि अपना अधूरापन लिखते हैं।
    वह लिखता है प्रेम जब उसे सबसे अधिक आवश्यकता होती है प्रेमी की, वह लिखता है आग जब उसे चाहिए होती है क्रांति विचारों की, वह लिखता है जीवन जब कठिनाइयाँ उसके सर होती हैं और वह लिखता है व्यंग्य जब वह मुस्कुराहटें देखना चाहता है।
    आज जब लोग लिख रहे हैं वीर रस पर, मैं लिख रहा हूँ तुम्हें।
    तो इसपर मुझे शर्म क्यों नहीं आती?
    और क्यों आनी चाहिए मुझे शर्म?
    प्रेम सारी वैश्विक समस्याओं का अंत है।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 28w



    तेरी यारी पर मैं "आशना" जान वारता क्यों नहीं,
    जो तेरी जीत की मुस्कान है, मैं हारता क्यों नहीं।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 29w

    शोखी - चंचलता
    फिज़ा - वातावरण
    पनाह - शरण

    #hindi #hindiwriters #abhimishra

    Read More



    यह बादल, यह बरसात,
    और शोख़ी इन फिज़ाओं में,
    तुम नहीं तब भी बेहतर है,
    होतीं तो बेहतरीन होता।

    यह माथे की शिकन,
    आँखों के स्याह घेरे,
    नाक पर दाग चश्मे का,
    और बाल बिखरे से मेरे।

    यह वक्त का ना कटना,
    जज़्बातों का यूँ सिमटना,
    तुम नहीं तब भी बेहतर है,
    होतीं तो बेहतरीन होता।

    यह नींद का ना आना,
    और अंधेरों का रहना,
    ख़ामोश रहना औरों में,
    फिर खुद से ही कहना।

    यह गीत और यह सरगम,
    उदासी, दुःख और यह गम,
    तुम नहीं तब भी बेहतर है,
    होतीं तो बेहतरीन होता।

    निगाहें गढ़ाना एक ही जगह,
    और दिल का कठोर होना,
    ख़ामोश रहना जुबां से,
    दिमाग में अक्सर शोर होना।

    कुदरत और उसकी पनाहें,
    यह दिल, दिमाग़ और निगाहें,
    तुम नहीं तब भी बेहतर है,
    होतीं तो बेहतरीन होता।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 15w

    From Draft

    क़हर - संकट, आपत्ति
    बहर - वृत, छंद, शेर का वज़्न
    सहर - Morning
    पहर - Time period

    #hindi #hindiwriters #abhimishra

    Read More



    मैं लिखूँ भी तो क्या इस क़हर पर लिखूँ,
    या इस हवा में घुल चुके ज़हर पर लिखूँ।

    लिख दूँ जो भी दिल मेरा, कह रहा है मुझसे,
    या तुम कहो तो तोल कर बहर पर लिखूँ।

    लिखा है मैंने अक्सर काली अँधेरी रातों पर,
    तो क्यों ना फ़िर मैं इस दफ़ा सहर पर लिखूँ।

    इम्तिहानों से गुज़रता है, हर दिन यूँ तो मेरा,
    तुम कहो दिन के कौन से पहर पर लिखूँ।

    इस क़दर दूर आ चुका हूँ कलह, बहस से मैं,
    तुम गाँव को कह दो शहर, तो शहर पर लिखूँ।

    ©abhi_mishra_

  • abhi_mishra_ 33w

    लहज़ा - Accent, tone
    इत्मीनान - धैर्य
    गवारा - Acceptable
    ज़बान - ज़ुबान
    संकरी - Narrow, पतली

    #hindi #hindiwriters #abhimishra

    Read More



    लहज़े में आदमी को, इत्मीनान रखना चाहिए,
    गवारा है गर चुप हो, पर ज़बान रखना चाहिए।

    बेशक हमसफ़र हो, इस सफ़र का मगर,
    गली संकरी है, कम सामान रखना चाहिए।

    ©abhi_mishra_