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  • piu_writes 16w


    आओ माता रानी जगत से अंधकार मिटाने को, मानव मन से असुरअत्व हटाने को और विश्व में दुर्गअत्व लाने को

    आओ माता रानी विश्व से रोग और संताप मिटाने को , अभय संचार करो माँ आओ सब दुःख दर्द मिटाने को

    आओ माता रानी बन कर जगत कल्याणी विश्व से पशुता मिटाने को, पाप हरो माँ पुण्य फल दो माँ, आओ सब क्लेश मिटाने को

    बन कर जगधात्रि धरो विश्व को आओ माँ विनाश रोकने को ,बन कर नव चेतना मानव मन में ,आओ माँ नव निर्माण कराने को

    बन कर शिवा आओ माँ मानव मन में नव शक्ति का संचार कराने को, मानव मन के विकार संघारो माँ, आओ माँ सृष्टि साकार करवाने को

    तमस हरो माँ ज्योति दो माँ आओ माँ अमृत संचार कराने को, हम तुम्हरे बालक अज्ञानी आओ माँ सब विकार मिटाने को

    तुम्हरी पीयू करे कर जोड़ विनती आओ बिराजो मन में माँ जीवन सफल सबल साकार बनाने को ,कोई गलती हो तो माफ़ करो माँ अपनी इस तुच्छ बालिका को

    अभय दो माँ कर आह्वान तुम्हारा सफल हो जाय जिवन सारा, आओ माँ बन कर दुर्गा चेतना जीवन की नैया पार लगाने को

  • piu_writes 27w

    Once upon a time lived a lady who was a single mum ,
    She worked as a professor and had her household work and her life seemed no fun,
    one day one of her student Ankita Gorkhede introduced her to mirakee and her poetry found its wings and friends She made plenty, from the end days of october 2018 mirakee has been her nest and today without penneing her poems here She cannot take rest so here She is penning an ode about her abode miraquill it has given her name fame and happiness and She is so thrilled to know that today mirakee is 5 yrs old and hope it lives for eternity and provides wholesome poetry and literature which is its goal

  • piu_writes 32w

    Soul flower

    Every human soul is a beautiful flower , but some get crushed and some bloom and flower • I am the human soul the non ending life force • when I shall meet the divine my journey will end it's couse (om sai baba sharnagata sharnagata shranagata )

  • piu_writes 64w

    पर्दे हया के थे मेरी आँखों में मगर दिल की खिड़की पर तुम्हारे मुस्कान ने दस्तक जो दी थी आज भी भीगा हुआ है मन मेरा तुम्हारे यादों की बारिश में

  • piu_writes 77w


    सबसे पहले तो मैं @Smritishukla ji aur@rnsharmaji का ध्यानवाद करना चाहूंगी कि उन्होंने मुझे#abhivyakti39 के संचालन के काबिल समझा ये मेरे लिए बड़े ही गर्व की बात है mirakee पर आए हुए मुझे तकरीबन दो साल हुए है और आज मुझे इतनी खुशी हो रही है के मेरे कलम से मेरी इतनी तो पहचान बनी की आज इस नाचीज़ को इस मंच के संनचलन का भार मिला तो क्यों ना आज का यही विषय हो - पहचान , तो उठाइये कलम और लिखिए आप के लिए पहचान क्या है क्या मायने रखता है ये शब्द आज के संधर्ब में ।।। so today' topic is -- पहचान

  • piu_writes 78w


    Mirakee के आदरणीय लेखकगण और सदस्यगण आज मुझे बहुत खुशी हो रही है @goldenwrites_jakir ji ने मुझे आज prayasss6 के संचालन का कार्य दिया है आज का विषय है सपना/ख्वाब उम्मीद करती हूं आप सब को विषय पसंद आय और हमें आप सब की ओर से अधिक से अधिक रचनाएँ प्राप्त हो today's topic for prayasss06 सपना/ख्वाब तो देर किस बात की ख्वाब तो सब देखतें है तो फिर शुरू हो जाइए आज अपने ख्वाबों को mirakee के पन्नों पर उजागर करने के लिए कलम उठाइए।। आप सब को मेरा नमस्कार आप की

  • piu_writes 78w

    Wish i cold capture those moments with you forever.but life has to carry on it seems .but i still hold on to those sweet moments in my dreams

  • piu_writes 81w


    जब मैं शब्द लेने लगे भीषण आकर समझ लो फैल गया है खुद में अहंकार ।। मानव को जब खुद पर अहंकार आया कोरोना रूपी कीटाणु ने सब को पाठ पढ़ाया।। जब भी विश्व में अहंकार बढ़ जाता है ईश्वर किसी ना किसी रूप में अहंकार मिटाता है।।लंका नरेश में जब छाया अहंकार राम जी आये समुंदर पार मिटाने अहंकार।। जब राजा बलि को हुआ अहंकार वामन रूप में आये विष्णु मिटाने अहंकार जब कंस को हुआ अहंकार कृष्ण रूप में आये करने जग उद्धार ।। जब माहीसासुर को हुआ अहंकार दुर्गा देवी आयी करने जगत उद्धार ।। जब हिरणकश्यप को हुआ अहंकार प्रह्लाद को बचाने आये पलानहार बन नरसिंह अवतार ।। जब पंडितों को हुआ अहंकार आये राम कृष्ण करने उद्दार इससे पहले मुझमें आए अहंकार साई मालिक ये नाचीज़ आये आप के दरबार।।

  • piu_writes 81w


    जग की रीत सदा चली आयी सब कहने में माहिर सच्चाई मगर जब सुनने की बात आई कोई ना सुनना चाहे सच्चाई

  • piu_writes 84w

    Fighting spirit

    At the end of the day being pepped up to take the challenge of another day, Leading the life even when it is challenging and stormy. Keeping the fighting spirit alive comes from within . No amount of counselling friends family or lover can build that in you .They may give you words of wisdom and courage be with you in your tough times empathise or sympathize with you but still it is up to you to live with courage bear hardships look at fear in the face.move on carry on.start afresh start with open mind try again .All this can only come from self belief that your life has meaning and purpose on earth. You not only belong to yourself and your near and dear ones but you have a role to play in the society. You have to not only look up to people higher than you but look at the people who are less fortunate than you. I remember a story my father used to tell I cried because I had no shoes till I saw a person who had no feet. So let us be greatful for what we have and stop crying for what we don't have. We should love ourselves first and only then can we love others. And remember every day might not be a bed of roses but yes after every hard day there comes night and there is the next dawn bringing a new day giving new hope and another chance to live love and move ahead in life. To all my friends of mirakee and the world live life you get it only once life is a stage finish your act and exit gracefully. Those who run away from life are nothing but quitters. And a strong person does not give up mid_ way. Lots of love_Supriya Banerjee

  • swapdream 92w

    बैठे थे खाली, आंखे बंद कर के, सफ़र-ए-उम्र तमाम कर आये
    बनाया हैं हमे जिन लम्हों ने, उन लम्हों को सलाम कर आये ।
    जो आयी थे हमे तोडने, हमे अकेला देख कर तनहाईयों में
    उन मुश्किलों को अपने हौसले के दम पर नाकाम कर आये ।

  • monika_tripathi 97w

    देख के चेहरा तेरा, बच्ची मैं कैसे हो गईं
    जैसे कि तू ही है बड़ी,औ मैं बड़प्पन भूल गईं।

  • monika_tripathi 98w

    तेरी याद और मेरी हक़ीक़त में बढ़ा है फासला
    फिर तेरी मद और मयखाने का घटा है फासला।

    हर रात, जलती दोपहरी सी, तब से यूं लगने लगी
    जब से मेरी नज़र और नींद में हुआ है फासला।

    हां, अनमनी सी हो गयीं , जब से तू मुझसे कट गया
    बेनाम सी किसकी पतंग, तेरी ड़ोर से है फासला।

    तू तो फिरंगी हो गया, गांव से, जब से गया
    मेरे घर की चौखट से ,तेरी गलियों का अब है फासला।

    हां, देख के तेरे अश्क़ फिर से ,दिल मेरा रुक ही गया
    फिर दौड़ के भागा , बनाया इश्क़ से फिर फासला।।

  • monika_tripathi 98w

    चार कंधो की सवारी से कहो तुम डर गए
    दो कदम की हिस्सेदारी भी लगी महंगी तुम्हे।

    घर को रौशन करने में क़त्ल न जाने कितने किये
    श्मशान की रौशन ज़मी पर घर बनाने से डरे।

    चंदन लगे धड़ से अलग, हर शीश की क़ीमत लगी
    पर सर्द रातों में ठिठुरती, जान से थी क्या बड़ी?

    तुम मखमली ख़्वाबों को मखमल पर बिछाये सो रहे
    वो बैठ सड़कों के किनारे भूख से थे रो रहे।

    तुम देखते रहते हो ऐसे जैसे तुम भगवान हो
    मरघट पे आओ, रुक के देखो, अब कहो भगवान हो।।

  • monika_tripathi 98w


    क्या है?
    जो ढ़लते हुए सूरज में
    काली घनी रात में
    बादल से घिरे चाँद में
    उफनती नदी में
    काले पड़े नाले में
    ठूंठ खड़े पतझड़ में
    बेपरवाह आंधी में
    ज्वार से समंदर में
    ठिठुरती सर्द में
    सड़क पर बिखरी जान में
    टूटे स्वाभिमान में
    बिखरे मकान में
    तुम में हम में
    हर एक द्वन्द में
    वीभत्स बुराई में
    तम की अंगड़ाई में
    रौद्र दम्भ की शान में
    मौन के अपमान में

    संभाले रखता है
    जोड़े रहता है
    विश्वास भटकता है
    पर कहाँ बिखरता है?
    वो एक 'अच्छाई'
    छोटी सी सीधी सादी
    तुम्हारी मुस्कुराहट मे
    गिर कर उठाने की चाहत में
    कुछ कर गुजरने की ज्वाला की
    हर कूचे गली मुहल्ले में
    वो एक 'अच्छाई'
    अलग अलग रिश्ते रूप और रंग में
    छोटी सी बेहद मामूली
    अकेले बराबर करती है
    हर एक बुराई मरती है

    ओढ़े चोला विश्वास का
    हम में तुम में बसती है
    वो एक अच्छाई चढ़ती है
    दुनिया फिर वही बदलती है

    विश्वास जगत का टूटे ना
    इसका ख्याल रखती है
    जीवित रखो विश्वास को
    तम वेधिनी संधान को
    छोटी है साधारण
    बस एक जगत का अवधारण

  • monika_tripathi 103w

    जो अल्फ़ाज संभाल ले, वो मेरा इश्क़ नही।
    जो पन्नो पर उतार दे, वो मेरा इश्क़ नही।।
    बहुत दूर से, बड़ी देर तक, मेरी रूह से तेरे दिल तक
    बेजुबां, बेपरवाह, बाकायदा किया है तुझसे।
    जो तेरे मेरे सिवा किसी और को पता दे, वो मेरा इश्क़ नही।।

  • monika_tripathi 103w

    Dear Man, Husband, Boyfriend!!
    No, you can't put me down
    All over the crown
    No, don't you dare slap with your wing
    I am PINK, not shitty Kabeer singh .
    THAPPAD, will not remain as my cheek's LALI.
    We will raise our voice , and truly you deserve just GAALI .

  • dil_k_ahsaas 105w

    मेरी ✍️ कलम से ......... दिल के एहसास

    कभी खामोशियां बोलती हैं
    कभी शब्द निशब्द हो जाते हैं ।।

    कभी बेबाक बेशुमार बातें लुभाती हैं ।।
    कभी मौन भी चुभ जाता हैै।

    कभी किसी का साथ नहीं भाता,
    कभी अकेलापन भी सुकून दे जाता हैं ।।

    कभी किसी का प्यार नहीं मिलता,
    कभी किसी से रूह का बंधन हो जाता हैं ।।

    कभी नज़रों से नज़रें नहीं मिलती,
    कभी कोई नज़रों से दिल में उतर जाता हैं ।।

    कभी दिल के दिल से तार नहीं जुड़ते,
    कभी जन्मों का बंधन बंध जाता हैं ।।

    ***‌ रेखा खन्ना ***

  • dil_k_ahsaas 105w

    वो गलने लगा हैं दर्दों की तासीर से
    तो सोचा कुछ कम कर लूं अपनों में बांट के
    रोज़ थोड़ा-थोड़ा कम कर रहा हैं
    देखो उसकी तासीर से दूसरा इन्सान गलने लगा हैं
    दर्द, दर्द से बद्तर और क्या हो सकता हैं
    ये तो जान भी लेता हैं किश्तों में
    रोज़ इक हाथ ना जाने कहां से निकलता हैं
    और बदन को देखो कैसे नोचता हैं
    नोचता हैं रूह को और बदन कांप जाता हैं
    पर दर्द अदृश्य हो कर ही सताता हैं
    शायद रूप धर कर सामने आने की हिम्मत नहीं
    इसलिए अदृश्य और बिना आवाज़ ही सामने वाले को मारता हैं
    दर्द की कोई आहट नहीं आने की
    पर जिसे दर्द होता हैं वो भर जाता हैं अनगिनत हृदयविदारक चित्कारों से
    दर्द, दर्द की तासीर हैं इतनी जहरीली
    कि सामने वाला जिंदगी की नहीं, मौत की दुआ करता हैं।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना

  • monika_tripathi 105w

    मेरे चेहरे के नूर में, रंगत उसकी देखा करते थे।
    मेरी आँखों के अल्फ़ाज से किताब उसकी पढ़ते थे।।
    हाथ मेरा लिए, बैठे थे, लेकिन छू कहां पाते थे?
    जिस्म के रिश्ते से बंधे थे, लेकिन रूह तक नहीं जाते थे।।
    साथ रहे उम्र भर, तो लोग इसे 'इश्क़' का नाम दे जाते थे।
    अधूरे थे हमतुम, और दोनों इसे 'शर्त' बुलाते थे।।