#Upanishads

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  • sarthiwrites 18h

    Sanskritam ☀️

    प्राता रत्नं प्रातरित्वा दधाति ।

    Translation:
    prātā ratnaṃ prātaritvā dadhāti

    English Translation:
    An early riser earns good health.

    Hindi Translation:
    प्रातःकाल उठने वाले अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करतें है ।

  • sarthiwrites 3w

    AmáVaśya

    ||Glorious Sanatan Dharma||

    अमावस्या - Purely a Scientific Name...!

    AmáVaśya is a sanskrit name which is found in Sanatan Hindu Dharma, People of our era should wonder howcome vedic Rishis could give such a beautiful scientific name during at least 10000+ BC ?!!

    Lets try to understand meaning of AmáVaśya..

    Ama - Means together in Sanskrit..
    Vasya - Means to reside, To habitat

    Ama Vasya = When Sun and Moon reside together, the day is called AmáVaśya!

    Modern science in this age call that day as New Moon Day. It is quite ridiculous because the moon never becomes new. The same moon is seen again, thus we can scientifically say that vedic rishis / sages were more scientific than the modern scientists.

    - Dr.P.V.Vartak

  • sarthiwrites 5w

    ☀️

    सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने ।
    विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तुते ॥

    सरस्वती को नित्य नमस्कार है, भद्रकाली को नमस्कार है और वेद, वेदान्त,वेदांग तथा विद्याओं के स्थानों को प्रणाम है।

    हे महाभाग्यवती ज्ञानरूपा कमल के समान विशाल नेत्र वाली, ज्ञानदात्री सरस्वती ! मुझको विद्या दो, मैं आपको प्रणाम करता हूँ ।

  • sarthiwrites 13w

    शुभ सवार ☀️

    कार्यार्थी भजते लोकं यावत्कार्य न सिद्धति।
    उत्तीर्णे च परे पारे नौकायां किं प्रयोजनम्।।

    अर्थ – जब तक काम पूरे नहीं होते हैं तब तक लोग दूसरों की प्रशंसा करते हैं। काम पूरा होने के बाद लोग दूसरे व्यक्ति को भूल जाते हैं। ठीक उसी तरह जैसे नदी पार करने के बाद नाव का कोई उपयोग नहीं रह जाता है।

  • sarthiwrites 13w

    Geeta Gyan ☀️

    क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।
    स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
    (द्वितीय अध्याय, श्लोक 63)

    इस श्लोक का अर्थ है: क्रोध से मनुष्य की मति मारी जाती है यानी मूढ़ हो जाती है जिससे स्मृति भ्रमित हो जाती है। स्मृति-भ्रम हो जाने से मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि का नाश हो जाने पर मनुष्य खुद अपना ही का नाश कर बैठता है।

  • sarthiwrites 14w

    Sanskrit Shloka ☀️

    तेषां शेयाणां शुश्रूषा परम् तप अच्यते  |
    न तैरभ्यननुज्ञातो धर्ममन्य समाचरेत्   ||

    अर्थात  - 
    अपने माता पिता और आचार्य (गुरु) की सेवा करना ही श्रेष्ठ तप बताया गया है, इसीलिए उनकी आज्ञा के बिना मनुष्य को अन्य किसी धर्म का आचरण नहीं करना चाहिए।

  • sarthiwrites 15w

    Rains

    This is a Sanskrit Shloka from Valmiki Ramayana - writen on Rain.

    नवमासधृतं गर्भं भास्करस्य गभस्तिभिः।

    पीत्वा रसं समुद्राणां द्यौः प्रसूते रसायनम्॥

    For nine months, the sky drank the ocean’s water, sucking it up through the sun’s rays, and now gives birth to a liquid offspring, the elixir of life.

    Rāmāyaṇa, 4.27.3 – Vālmīki

  • sarthiwrites 15w

    Su_Vichar ☀️

    श्रोत्रं श्रुतेनैव न कुंडलेन, दानेन पाणिर्न तु कंकणेन।
    विभाति कायः करुणापराणां, परोपकारैर्न तु चन्दनेन।।

    अर्थ – कानों में कुंडल पहन लेने से शोभा नहीं बढ़ती, अपितु ज्ञान की बातें सुनने से होती है। हाथों की सुन्दरता कंगन पहनने से नहीं होती बल्कि दान देने से होती है। सज्जनों का शरीर भी चन्दन से नहीं बल्कि परहित में किये गये कार्यों से शोभायमान होता है।

  • sarthiwrites 15w

    Good Morning ☀️

    आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।
    नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।।

    अर्थ – व्यक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन आलस्य होता है, व्यक्ति का परिश्रम ही उसका सच्चा मित्र होता है। क्योंकि जब भी मनुष्य परिश्रम करता है तो वह दुखी नहीं होता है और हमेशा खुश ही रहता है।

    Laziness is one of the biggest enemy of mankind. And efforts are their true friends. Because efforts makes him calm and satisfied from within and he never becomes sad.

  • sarthiwrites 15w

    Sanskrit Shloka

    शब्दॊयमीश्वर इति श्रुतिगॊचरस्सन्
        आनीलकण्ठमवतंसितचन्द्रलॆखम् ।
    त्वामॆव बॊधयति नाथ निजार्थपॊषात्
        अन्यं पुनः प्रकरणादि निपीडनॆन ॥ ४ ॥

    (shabdOyam Ishvara iti shruti gOcharassan
        AnIlakaNTham avataMsita chandralEkham |
    tvAmEva bOdhayati nAtha nijArtha pOShAt
        anyaM punaH prakaraNAdi nipIDanEna || )

    By the word Ishvara, in its natural form,
    Oh Nilakanta, One ornated with the crescent,
    the vedas only refer to You by the true intent!
    For others it is a forceful derivation!

  • sarthiwrites 15w

    Morning Gyan ☀️

    कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
    मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
    (द्वितीय अध्याय, श्लोक 47)

    हिंदी अनुवाद: कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, लेकिन कर्म के फलों में कभी नहीं… इसलिए कर्म को फल के लिए मत करो और न ही काम करने में तुम्हारी आसक्ति हो।

    English Translation: You have a right to perform your prescribed duties, but you are not entitled to the fruits of your actions. Never consider yourself to be the cause of the results of your activities, nor be attached to inaction.

    Shrimad Bhagwat Geeta
    Ch.2, Shloka 47

  • sarthiwrites 16w

    Divine Mantra ☀️

    Hare Rāma Hare Rāma
    Rāma Rāma Hare Hare
    Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa
    Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare

    — Kali-Saṇṭāraṇa Upaniṣad

    The Hare Krishna mantra, also referred to reverentially as the Mahā-mantra ("Great Mantra"), is a 16-word Vaishnava mantra which is mentioned in the Kali-Santarana Upanishad[1] and which from the 15th century rose to importance in the Bhakti movement following the teachings of Chaitanya Mahaprabhu. This mantra is composed of two Sanskrit names of the Supreme Being, "Krishna" and "Rama".

  • sarthiwrites 16w

    Prayers ☀️

    शुभम् करोति  कल्याणम् 
    आरोग्यं धन सम्पदः 
    शत्रुबुद्धि विनाशाय 
    दीपज्योतिर् नमोस्तुते ।।

    shubham karoti kalyaanam
    aarogyam dhana sampadaa
    shatru buddhi vinaashaaya
    deepa jyothir namostute.


    Meaning: May the lamp usher in all that is auspicious, and bless us with good health and prosperity. 

    shatru buddhi vinaashaaya: This line maybe interpreted in two ways -
    1.May the light from this lamp remove the darkness of ignorance which is the enemy of knowledge. 
    2. May this light destroy the maleficent intellect of enemies. 

    To this light, the harbinger of all things good and auspicious, I offer my salutations.

  • sarthiwrites 16w

    Early Morning Prayers

    कराग्रे वसते लक्ष्मिः करमध्ये सरस्वति I

    करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् II

    Karaagre vasate Lakshmi
    (In the front part of the hands, i.e. the fingertips, lives Lakshmi, the goddess of wealth)

    Karamadhye Saraswati
    (In the middle part of the hands, i.e. the palm, lives Saraswati, the goddess of art and of learning or knowledge)

    Karamoole tu Govinda
    (In the end part of the hands, i.e. the root or wrist, lives Govinda, Lord Krishna)

    Prabhate kara darsanam
    (It is auspicious to see the palm in the morning) ☀️

  • sarthiwrites 16w

    ☀️ Morning Prayers ☀️

    ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
    सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।
    ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

    Om Sarve Bhavantu Sukhinah, Sarve Santu Nir-Aamayaah |
    Sarve Bhadraanni Pashyantu, Maa Kashcid-Duhkha-Bhaag-Bhavet |
    Om Shaantih Shaantih Shaantih ||

    may every one be happy, may every one be free from all diseases
    may every one see goodness and auspiciousness in every thing, may none be unhappy or distressed
    Om peace, peace, peace!

  • sarthiwrites 16w

    Morning Prayers ☀️

    Gayatri Mantra :

    ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
    oṃ bhūr bhuvaḥ svaḥtat savitur vareṇyaṃbhargo devasya dhīmahidhiyo yo naḥ pracodayāt.

    We meditate on the glory of that Being who has produced this universe; may She enlighten our minds.

    उस प्राण स्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंतःकरण में धारण करें। अर्थात् 'सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परमात्मा के प्रसिद्ध पवणीय तेज का (हम) ध्यान करते हैं, वे परमात्मा हमारी बुद्धि को (सत् की ओर) प्रेरित करें।

  • sarthiwrites 17w

    Divine Prayers

    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
    सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
    उर्वारुकमिव बन्धनान्
    मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
    Om Try-Ambakam Yajaamahe
    Sugandhim Pusstti-Vardhanam
    Urvaarukam-Iva Bandhanaan
    Mrtyor-Mukssiiya Maa-[A]mrtaat ||

    Meaning:
    1: Om, We Worship the Tryambaka (the Three-Eyed One),
    2: Who is Fragrant (as the Spiritual Essence), Increasing the Nourishment (of our Spiritual Core);
    3: From these many Bondages (of Samsara) similar to Cucumbers (tied to their Creepers),
    4: May I be Liberated from Death (Attachment to Perishable Things), So that I am not separated from the perception of Immortality (Immortal Essence pervading everywhere).
    ©sarthiwrites

  • sarthiwrites 17w

    Divine Prayers ☀️

    असतो मा सद्गमय ।
    तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
    मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥

    asato mā sadgamaya
    ,tamaso mā jyotirgamaya,
    mṛtyormā'mṛtaṃ gamaya.

    From evil lead me to good,
    From darkness lead me to light,
    From death lead me to immortality.

    #Upanishads #Veda #SatyaSanatan

  • shivam_rs_tyagi 25w

    अद्वैत ☯️

    न दिन है, न रात कही।
    न सम्प्रदाय है, न जात कही।
    जो भिन्न है, उसे भ्रम है...की है सिर्फ... ज्ञात वही।
    अज्ञानी जो लीन है... उसे फिर भी है... राहत कही।
    जो कह पाए उस अद्वैत को, है ऐसी न बात कही।

    दो छोरो में बंधा ये नज़रिया, न छोर कही, न द्वैत कही।
    बाज़ारो सा लगता है ये मेरा नगरिया, भीड़ में गुम है इंसान कही।
    नियति की डोर ही है मेरा गडरिया, चलना उसपे आसान नही।
    परमात्मा के रेशो से ... है इस डोर का बसरिया...तू भी मेरे मौला को पहचान कभी।
    मान नही, तू जान कभी.... जानता है... ऐसा मान नही।

    ज्ञान की टोकरी क्या ऊपर लेके जाएगा, अज्ञानी बन...और कर इस ज़िन्दगी का एहसास कभी।
    अहंकार न तुझे उस्से मिला पायेगा, ज्ञान की टोकरी और तेरा शान कभी।
    ध्यान से भी भक्ति में लीन हो जाएगा, और भक्ति मे लगता है...ध्यान सहज ही।
    सहज प्रकृति ही विवेक को घर लाएगा, फिर चलना होगा डोर पे मुश्किल नही।
    ऐसी कोई बात नही जो अद्वैत को कह जाएगा, ये उपनिषदों का ज्ञान है.... कोई फालतू की बकचोदी नही।
    ©shivam_rs_tyagi

  • yatharth_singh_chauhan 74w

    Birth

    Every man is born a Shudra.
    He is born impure.
    And is born ignorant.
    Hence, it depends on the man himself what stature he can achieve.
    ©yatharth_singh_chauhan