#Sheroes

539 posts
  • themundanebard 19w

    Dinner

    I want to have small salacious sips
    One at a time, simultaneously
    And then gulp it down all at once
    Oh, your slithering smothering lips.

    ©themundanebard

  • zeee_zephyrs 35w

    Women power.
    Her ability cannot be calculated, if she decides it she will do... never try to underestimate her...
    #sheroes #mirakeeworld #prashantlm #writersnetwork #pod #zeeCollection

    @taniya_9124 @pragya_a_dreamer @_anant_ @purva_saxena @naushadtm

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    Woh Naari Hu Mai

    Na rok pane wali tufaan hu mai,
    Sab tabah karne wali leher hu mai,
    Sab ko dara de aisa keher h mera,
    Par sab ko bhah jaye aisa roop bhi h mera.

    Jo ise ched de woh barbadi payega,
    Jo ise samman de woh salaam le jayega,
    Har kisi ke jiwan ki aham pehlu hu mai,
    Aur jise koi na samaj paye woh naari hu mai.
    ©zaalima_2002

  • anu420 43w

    अवसाद के कारण

    डिप्रेशन या अवसाद होने के देखा जाए तो बहुत से कारण होते है , आप किसी भी एक कारण को प्रमुख नहीं बता सकते । क्योंकि जब भी अवसाद होता है तो इंसान की किसी भी कार्य को करने की रुचि खत्म हो जाती है । वो लोगो में हो कर भी नहीं रहता , वो भीड़ में भी अकेला महसूस करता है । उसका अंदर से दिल और दिमाग़ दोनों ही हिल जाता है , वो सोचने समझने की किसी भी अवस्था में नहीं होता । ऐसे में उसके पास ज़्यादा विकल्प नहीं रह जाते , कुछ एक आद ही होते है जो इस अवसाद से बाहर आ पाते हैं। क्योंकि जो व्यक्ति इस से गुजर रहा है वहीं अपनी मनोस्थिति जान सकता है , हम और आप सिर्फ बात कर सकते है बस । पर जैसे हर बीमारी का हल होता है , वैसे इसका भी है पर वही कहते है ना जिस व्यक्ति को कुछ अच्छा ना लगता हो तो वो जो भी कर ले बेकार ही है । पर हम कोशिश तो कर ही सकते है जितना हो सके लोगो से मिलिए बात कीजिए । अपने आपको उस काम में लगाइए जिसको करने में आप सक्षम है । बस इतना ध्यान रखिए कि यह ज़िन्दगी ईश्वर का एक वरदान है आपको और हमको तो इसको ऐसे ही व्यर्थ ना जाने दे । क्योंकि सिर्फ मौत ही आखरी विकल्प नहीं होता , तो आप उससे लडिए और अपने और बाकी लोगो के लिए एक मिसाल बनिए ।
    ©anu420

  • anu420 43w

    अवसाद

    डिप्रेशन या अवसाद होता क्या है पहले तो इसको जानना बहुत ज़रूरी है । यह वह अवस्था है जहां अगर किसी भी व्यक्ति के मन मुताबिक चीज़े ना हो , या बहुत समय से वो नकारात्मकता को झेल रहा हो । यह किसी भी व्यक्ति विशेष को हो सकता है , अब सवाल यह आता है कि इससे कैसे बचा जा सके ? या फिर व्यक्ति के पास मौत के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता । ऐसा नहीं है कि जितने लोगो को भी यह अवसाद होता है सब मौत को ही गले लगाते है । कुछ इसका प्रेशर झेल लेते है और जो नहीं झेल पाते वो यह कदम उठा लेते है । इसलिए कहते है की जितना हो सके लोगो से बात कीजिए अपने अंदर के दुख को ज़ाहिर कीजिए , अपने आपको व्यस्त रखिए । जब आपका दिमाग बहुत ज़्यादा सोचने लगता है तब भी अवसाद की अवस्था बनती है , मेरे हिसाब से जितना हो सके अध्यात्मवाद को भड़ावा दे । ज़्यादा से ज़्यादा किताबे पढ़े , भगवान की तरफ अपना ध्यान केंद्रित करे । ईश्वर ने सबको सिर्फ एक ही ज़िन्दगी दी है तो इसका सोच समझ कर उपयोग करे , अपने लिए ना सही पर अपने परिवार वालों के लिए सोचे और ऐसी गलती कभी ना करे ।
    ©anu420

  • anu420 44w

    दिल ओ दीवार

    दिल आे दीवार में आज भी बहुत छेद है मेरे , अपनी दंग दिल बेहाली का कसूरवार बनाऊ किसे । यह ईश्वर की बनाई हुई ही तो कायनात है , इसको किसी और पर मिटाऊं भी तो कैसे ।

    कभी - कभी तो में खुद से यही सवाल करता हूं , क्या मै इतना कमजोर इतना नकारा हूं कि किसी के जाने से मै खुद की हस्ती मिटा दू । जब की यह हस्ती मेरी है भी नहीं ।

    अब जो बीत गया सो बीत गया उसको मैं बदल सकता नहीं , अपनी खुशियों को किसी और के लिए मैं बर्बाद करू ऐसी किसी की शक्सियत नहीं ।
    ©anu420

  • anu420 44w

    शांत लहर

    नदी की शांत लहरों को मैंने उफनते देखा है , छोटी - छोटी नदियों को सागर में मिलते देखा है । गिरते संभलते फिर उठते हुए पर्वत को तूफानों से लड़ते देखा है , इंसानों की सारी कमियों को छोड़ ईश्वर को उसको माफ करते देखा है ।
    ©anu420

  • anu420 44w

    मेहनत

    बैसाखियां छोड़ बहानों की , हिम्मत को तू हथियार बना । कड़ी धूप में तू मेहनत कर , फिर अपनी किस्मत का सोना चमका । अपनी तंगदिल बेहाली का कब तक तू रोना रोएगा , औरो को देख देख कब तक तू खुद को संतुष्ट कर पायेगा । चल उठा अपनी किस्मत को फिर बाज़ार मै उसका तू मोल लगा , आज कुछ नहीं हुआ तेरे पास तो क्या हुआ । तू कल एक स्वर्णिम इतिहास बना ।
    ©anu420

  • anu420 44w

    हालातो के तूफान

    हालातो के तूफान में तो हम कुछ इस तरह बेह रहे है , जो दिल कहना नहीं चाहता था कभी वो होठो से आज कह रहे है ।

    फिर भी लोग कहते है हम पत्थर दिल हो रहे है , अपनी भावनाओं के सुमंदर में खुद ही डूब रहे है । दिल ,दरिया और समुंदर ही तो प्यार की निशानी थे , फिर भी आज हम ना जाने क्यों अकेले रो रहे है ।

    कोई तो आकर हमको रोके हम अपनी ही भावनाओं में खो से रहे है । प्यार करना इतना भी आसान नहीं होता हम फिर भी किसी आशिक से प्यार किए जा रहे है ।

    लोग कहते है गिरोगे और चोट भी लगेगी , फिर संभालेगा कौन। हम बस यही कहते है कि अगर हम ना रहे तो उस पागल से इतना प्यार करेगा कौन ।
    ©anu420

  • anu420 44w

    बुद्धि और कल्पना

    विकास की इस अंधी दौड़ में , ये कहां हम आ गए ।
    घर पैसा तो बना लिया , पर वो अपने कहां गए ।
    जो कभी रहते थे साथ - साथ वो अब हमसे दूर हो गए ।

    यह पैसे का नशा , यह जीवन की रेस में सबको नीचे गिरा कर खुद पहले मंज़िल पर पहुंचने की होड़ में ना जाने हम इतना आगे निकल गए की आए कहां से थे यह सब भूल गए । फिर पता चला कि बुद्धि से ज़्यादा महत्वपूर्ण कल्पना शक्ति है ।

    फिर अपने विवेक अपनी अंतरात्मा को जगा कर , अपनी कल्पना शक्ति के अनरूप कार्य किए । खुद को ही वास्तविकता के दरवाज़े से अपनी ही झलक दिखाई , खुद को खुद के ही आयने में देख सकूं कुछ ऐसी अपनी शख्सियत बनाई ।

    पाने की लालसा बहुत थी इस जीवन में ,फिर अपनी कल्पना शक्ति को जगा कर औरो के साथ मिल कर कुछ ऐसी अपनी शख्सियत बनाई ।
    आज मैं हूं और मेरे अपने ज़्यादा कुछ नहीं है पर बहुत कुछ पाने की दिल में एक लालसा जगाई ।
    ©anu420

  • anu420 44w

    वीर जवान

    यह शहादतो का सिलसिला कब तक यूं ही चलता रहेगा , कब तक यू मौतों पर तिरंगे से लिपटा किसी वीर का शरीर मिलता रहेगा ।

    कब तक एक माता को अपने ही औलाद के जाने का यूं मातम मनाना पड़ेगा । जो अपने ही घर पर अगली छुट्टी पर आऊंगा ऐसा कह कर गया था , वो उसके घर की छत वो उसके घर का आंगन कब तक उसकी वाट जोड़ेगा ।

    क्या अब भी उसकी बहन उसकी राखी लेकर उसका अपनी ही घर की गली पर उसका इंतज़ार करेगी , जो कह कर गया था कि अगली छुटियो में आएगा ।

    कब तक कई घरों को यूं आंतकवाद की इस लड़ाई से यूं रुखसत होना पड़ेगा ,कब तक यूं कई घरों में चूल्हों में यूं पानी डालना पड़ेगा । अब तो कहीं ना कहीं इन सब का अंत होना ही चाहिए ।

    अब ना तो किसी भी पिता की आंखे नम हो , ना ही किसी भी मां की हंसी जाए । ना ही किसी भी बहन का भाई उससे दूर जाए । आओ आज से आप और हम मिलकर एक अमन और शांति का देश बनाए , ना लड़े ना लड़वाए ।
    ©anu420

  • anu420 45w

    शुक्रिया

    मैं आपकी अपनी अनुपमा आगरा से जिसको कई वर्षों से आपने अपना प्यार दिया । अभी तक आप सभी ने मेरे कलम की ताकत देखी , अभी आप मेरे आवाज़ का जादू भी देखेगे । आज में आप सभी लोगो का तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहती हूं ,की आपने मेरी लिखाई को अभी तक इतना प्रोत्साहन दिया । बिना आप सभी के यह सब कर पाना मेरे लिए नामुमकिन था , जहां पर भी मैं गलत हुई वहां आप सभी ने मेरी गलतियों को सुधारा भी और मुझे बताया भी की मैं आगे कैसे बढ़ सकती हूं । मैं लेखन सिर्फ लाइक या अपने फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए ही नहीं लिखती मुझे अच्छा लगता है इसलिए मैं लिखती हूं । तो जिन लोगो ने मेरा लिखा हुआ पढ़ा और जिन्होंने अभी तक नहीं पढ़ा उन सब को मेरा तहे दिल से शुक्रिया और बहुत प्यार । आगे भी अपना प्यार ऐसे ही बनाए रखियेगा आपकी अपनी अनुपमा ।
    ©anu420

  • anu420 45w

    अनोखी शादी

    चलो इस लॉक डॉउन शादी करते है , चार घराती हमारे चार बराती तुम्हारे ।
    ना वो मंहगे - मंहगे पैलेस देखने की झंझट , ना किसी के मामा चाचा के रूठने का सिलसिला ।
    बस तुम और मैं और वो साथ फैरो की कसमें चलो इसी लॉक डॉउन शादी करते है ।
    अगर हर लड़की की शादी ऐसे ही हो तो कोई भी पिता कर्जदार नहीं होगा , किसी भी लड़की को दहेज़ की चिता में सोना नहीं पड़ेगा ।
    हर उस एक पिता के चहरे पर मुस्कान होगी , जिसके लिए उसकी लड़की कोई बोझ नहीं होगी ।
    चलो एक मिसाल बनते है , अपनी ही उम्मीदों पर खरे उतरते है । इसी लॉक डॉउन हम तुम शादी करते है ।
    ©anu420

  • anu420 45w

    हिम्मत

    हिम्मत को तू हथियार बना , छुले तू आसमा ।
    ज़िन्दगी से तू लड़ता जा आयेगी कितनी भी मुश्किलें राह में तू बस चलता जा चलता जा ।

    जो बीत गया सो बीत गया , बस अब यह सोच कर चलना की अब यह राह ना होगी इतनी आसान ।
    चट्टानों सा फौलादी बन फिर बस चलता जा चलता जा ।

    फिर भी अगर कोई आए मुश्किल तो बस अपने हौसले को देख , किस लिए तू आया है इस जीवन में बस इसके बारे में सोच और फिर चलता जा चलता जा ।
    ©anu420

  • anu420 45w

    इंसानियत

    जाने क्यूं , अब शर्म से ,चेहरे गुलाब नहीं होते ।
    जाने क्यों अब वो फरिश्ते नदारत नहीं होते ।
    जिनको हम कभी दादी नानी के किस्से कहानियों में सुना करते थे , आज वो क्यों कही दिखाई नहीं देते ।

    अब पालघर में दो साधुओं की हत्या ही ले ले , क्यों तब हमें हमारा ज़मीर आवाज़ नहीं देता । क्या वो हमारे जाती या धर्म के नहीं थे , इसलिए हमने किसी को हत्या करने से उधर रोका नहीं था ।

    निर्भया भी किसी की बेटी थी , क्या उन दरिंदो की खुद की मां बेटी नहीं थी । वो भी चीखी होगी , वो भी चिलाई होगी उसके भी कुछ अरमान कुछ सपने होगे । क्या अब भी हम मूक बधिर ही बने रहेंगे , वो एक सीता का ज़माना था , वो द्रोपदी के लिए किसी कृष्ण को आना पड़ा था ।

    आज हम भी यही बोलते है देखा हर तरफ तो , इंसानों की ही सूरत है फिर भी देखो धरती को , इंसानियत की ज़रूरत है । हम कृष्ण ना सही पर एक इंसान तो बन ही सकते है , एक पालन हार ना सही पर एक रक्षक तो बनी सकते है ।

    पापा की परियों को भी अब खुले आसमा में उड़ने का हक है , कब तक वो इस डर से घर में रहेगी । कहीं से तो अब बदलाव की जरूरत है , इस भारत को अब नई भारत की जरूरत है ।
    ©anu420

  • anu420 45w

    काश

    ज़िन्दगी कभी भी एक काश पर नहीं चलती , की काश ऐसा होता तो वैसा होता ।
    काश एक रात के सपने की तरह है , होता तो सबके साथ है पर उतनी ही जल्दी सुबह के सपने की तरह फुर्र भी हो जाता है ।

    आप ज़िन्दगी को कभी भी हल्के में नहीं ले सकते , वो बदले में आपकी कब ले लेगी आपको पता ही नहीं चलेगा । इसीलिए जितना मेहनत आप अभी कर सकते है , उतना बाद में नहीं ।

    ज़िन्दगी भी एक उगते हुए सूरज की तरह है , सूरज की रोशनी में रहना सबको है पर फिर अधेरो से डर भी उतना ही लगता है । बस इसी अंधेरे को पकड़ कर उजालों में चलना है , मंज़िल खुद ब खुद मिल जायेगी ।

    राह थोड़ी सी मुश्किल होगी , अकेले का सफर होगा ।
    चलते चलते कभी थक भी जाओगे , पर हौसला अपना बुलंद रखना है ।
    अगर कोई उस सफ़र में तुम्हारे साथ ना भी हुआ तो क्या , तुम को बस खुद का साथी बनना है ।
    मंज़िल को बस अपनी नज़रों के सामने रखकर बस उस पर ही चलना है । क्योंकि ज़िन्दगी कभी भी एक काश पर कभी नहीं गुजारी जाती ।
    ©anu420

  • anu420 46w

    ज़िन्दगी

    काश , ज़िन्दगी सचमुच एक किताब सी होती पढ़ सकता मै कि आगे क्या होगा ?
    कितना रोना है और कितना मुस्कुराना है ।
    जीवन का खेल बस यहीं तक का है कि अभी और पड़ाव देखने बाकी है ।
    ज़िन्दगी अगर वाकई एक किताब होती तो फाड़ देता उन पन्नों को जिसने मुझे बहुत रुलाया है ।
    क्या था सपना मुझको अब वो याद नहीं , जिसके लिए मैं कई रातों से सोया नहीं ।
    जोड़ता तोड़ता कई पन्नों को , फिर शायद रख पाता हिसाब मैं अपने ही जीवन का ।
    अंधेरों से चीर कर उजालों की तरफ़ कब बढू मैं , यह तो मैंने सोचा नहीं ।
    हमेशा से लगा कि ज़िन्दगी एक स्वप्न सी है , जिसका लेखा जोखा उस किताब में है जो कभी मेरे पास थी नहीं ।
    अब तो बस अकेले ही चलना है उन अंधेरी रातों में , जहा एक मीठा सा भविष्य खड़ा हुआ है मुझको गले लगाने को ।
    ©anu420

  • anu420 46w

    लॉक डाउन

    जैसे ही लॉक डाउन खत्म होगा ,जीवन का एक और संघर्ष शूरू होगा । फिर से वहीं भागम भाग होगा ,जो रुकी हुई सी जिंदगी थी उस पर यू मौतों का संहार होगा । जो अब तक घर पर रुके हुए थे , उस पर खुद को फिर से साबित करने का भार होगा । सड़को पर यू मजदूरों की लंबी लंबी कतार होगी , हिम्मत तो होगी घर जाने की पर कोई सवारी साथ ना होगी । पैदल ही फिर घर को निकलेंगे , बच गए तो अपनों से मिलेंगे नहीं तो किसी अखबार की खबर बनेंगे । अब तो और ज़्यादा संघर्ष होगा , जैसे ही यह लॉक डाउन खत्म होगा ।
    ©anu420

  • anu420 46w

    मित्रता अनुरोध

    एक मित्रता अनुरोध ही तो थी जो हमसे किसी अपने खास के पास रहने की ऊपर वाले ने साजिश रची थी । फिर धीरे धीरे ही यू बात चली थी , जैसे कोई अपनी पुरानी कहानी जुड़ी थी । आज भी जब सोचते है तो लगता है कि लाखों की भीड़ में बस तुमसे ही क्यों मिली थी ।
    ©anu420

  • anu420 47w

    अपना बचपन

    कुछ ऐसा अपना बचपन था , दिन भर खेलना कूदना दोस्तो के संग छोटी - छोटी बातो पर लड़ना फिर से एक हो जाना कुछ ऐसा मेरा जीवन था । इन्द्रधनुष के सारे रंग थे , फिर भी अपना बचपन कुछ खाली था । आज जब भी सोचती हूं तो लगता है अब कैसा अपना जीवन है । फिर से लौट चले अपने वही बचपन में जहां दादी नानी की कहानियां थी , मम्मी का प्यार पापा की डांट वहां सब अपना था ।
    ©anu420

  • anu420 47w

    बदल लिया

    बदल लिया है मैंने जिस दिन से खुदको,
    दुनिया के आगे तब से मैं रोती नही ।
    सक्षम हूँ हर परेशानी और लोगों से लड़ने के लिए ,
    भरोसा करो सबसे मजबूत हूँ अब मैं गिरती नही । पापा की परी हूं मैं मम्मी की हूं राज दुलारी , खुद उनसे ही तो सीखा है खुद को फौलाद बनाने की। कहते थे गिरोगे लगेंगी भी खूब ,पर खुद को खुद से ही उठाना है । यह ना देखो कौन कहा से तुमको है देख रहा , झूमो नाचो गाओ वो सब करो जो आज तुम्हारे दिल में है जगा । फिर से यह पल ना आयेंगे , दिमाग़ में यह बात रखो सदा , की लोगों का क्या है वो तो आलोचना करेंगे सदा । यह जीवन तुम्हारा है , तुमको क्या करना है बस इसका ध्यान रखो सदा ।
    ©anu420