#SRV

3785 posts
  • sramverma 2w

    Date 20/11/2021 Time 2:11 PM #SRV #gulab

    भले तुम जुबाँ से जवाब न देना
    बस दे सको तो एक गुलाब देना

    भले न दे सको ज़माने के सामने
    फूल किताब में रख कर दे देना

    भले मैं तुम से कुछ भी न कहूँ
    पर तुम अपनी बात कह देना

    जो मेरी तरफ़ से भी ले के जाना
    वो एक फूल तुम खुद को देना !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    भले तुम जुबाँ से जवाब न देना
    बस दे सको तो एक गुलाब देना

    भले न दे सको ज़माने के सामने
    फूल किताब में रख कर दे देना

    भले मैं तुम से कुछ भी न कहूँ
    पर तुम अपनी बात कह देना

    जो मेरी तरफ़ से भी ले के जाना
    वो एक फूल तुम खुद को देना !
    ©sramverma

  • sramverma 2w

    Date 19/11/2021 Time 10:33 PM #SRV #akeli

    खुद को कहीं रख कर भूल गयी हूँ मैं
    शायद तुझ में ही कहीं रह गई हूँ मैं ;

    तुम कहते हो मैं कितनी सबल हूँ पर ;
    कैसे कहूँ अकेली कितनी निर्बल हूँ मैं !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    खुद को कहीं रख कर भूल गयी हूँ मैं
    शायद तुझ में ही कहीं रह गई हूँ मैं ;

    तुम कहते हो मैं कितनी सबल हूँ पर ;
    कैसे कहूँ अकेली कितनी निर्बल हूँ मैं !
    ©sramverma

  • sramverma 2w

    Date 18/11/2021 Time 12:32 PM #SRV #mohobbat

    मर्द
    अपनी औरत से
    आधी मोहब्बत करने लगता है
    जब वो उसकी
    सारी बात मानने लगती है !

    औरत
    अपने मर्द से
    पूरी मोहब्बत करने लगती है
    जब वो उसकी
    सारी बात सुनने लगता है !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    मर्द
    अपनी औरत से
    आधी मोहब्बत करने लगता है
    जब वो उसकी
    सारी बात मानने लगती है !

    औरत
    अपने मर्द से
    पूरी मोहब्बत करने लगती है
    जब वो उसकी
    सारी बात सुनने लगता है !
    ©sramverma

  • sramverma 2w

    Date 17/11/2021 Time 1:21 PM #SRV #kavita

    चाँद जैसा है
    मर्दों का इश्क़
    पूरा होते ही घटने लगता है !

    सूरज जैसी है
    औरतों की मोहब्बत
    पूरी होते ही बढ़ने लगती है !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    चाँद जैसा है
    मर्दों का इश्क़
    पूरा होते ही घटने लगता है !

    सूरज जैसी है
    औरतों की मोहब्बत
    पूरी होते ही बढ़ने लगती है !
    ©sramverma

  • sramverma 2w

    Date 16/11/2021 Time 12:39 PM #SRV #kavita

    मैं कविता को नहीं लिखता
    कविता मुझे लिखती है
    कविता मेरे होंठों से हँसती है
    मेरी ही आँखों से रोती है
    मैं मसरूफ़ होता हूँ तब
    कविता मेरी आराम करती है
    कविता की ख़्वाबों भरी
    आसमानी रंग की आँखें
    मेरा पीछा करती हैं तब
    मेरा खालीपन ढेरों
    लफ़्ज़ों से भर जाता है
    और जब सुरमई शाम
    रात की अँधेरी कोख में
    ज़ीना ज़ीना उतरती है तो
    कविता मेरी यादों की पोटली
    खोल कर बैठ जाती है
    और वो यादें उसके
    दिल-ओ-दिमाग
    पर फैल जाती हैं
    फिर परत-दर-परत
    कविता मुझे लिखती है

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    मैं कविता को नहीं लिखता
    कविता मुझे लिखती है
    कविता मेरे होंठों से हँसती है
    मेरी ही आँखों से रोती है
    मैं मसरूफ़ होता हूँ तब
    कविता मेरी आराम करती है
    कविता की ख़्वाबों भरी
    आसमानी रंग की आँखें
    मेरा पीछा करती हैं तब
    मेरा खालीपन ढेरों
    लफ़्ज़ों से भर जाता है
    और जब सुरमई शाम
    रात की अँधेरी कोख में
    ज़ीना ज़ीना उतरती है तो
    कविता मेरी यादों की पोटली
    खोल कर बैठ जाती है
    और वो यादें उसके
    दिल-ओ-दिमाग
    पर फैल जाती हैं
    फिर परत-दर-परत
    कविता मुझे लिखती है
    ©sramverma

  • sramverma 3w

    Date 15/11/2021 Time 1:18 PM #SRV #zeendagi

    पेट भर खाना
    सोने को बिस्तर
    थोड़ी सी मोहब्बत
    ढाई गज चादर'
    और एक चुटकी इज़्ज़त
    के बदले लगभग इस
    संसार की सभी औरतों
    ने अधूरे पुरुषों को भी
    अपनी पूरी ज़िन्दगी
    बना ली है !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    पेट भर खाना
    सोने को बिस्तर
    थोड़ी सी मोहब्बत
    ढाई गज चादर'
    और एक चुटकी इज़्ज़त
    के बदले लगभग इस
    संसार की सभी औरतों
    ने अधूरे पुरुषों को भी
    अपनी पूरी ज़िन्दगी
    बना ली है !
    ©sramverma

  • sramverma 3w

    Date 13/11/2021 Time 12:08 PM #SRV #unwan

    मैं हर रात
    तुम्हारा ख़्याल
    अपने सिरहाने
    रख कर सोती हूँ

    फिर सुबह उठते
    ही मुझे अपने तकिए
    के ठीक नीचे

    एक ग़ज़ल मिलती है
    जिसका उन्वान हू-ब-हू
    तुम्हारे जैसा होता है !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    मैं हर रात
    तुम्हारा ख़्याल
    अपने सिरहाने
    रख कर सोती हूँ

    फिर सुबह उठते
    ही मुझे अपने तकिए
    के ठीक नीचे

    एक ग़ज़ल मिलती है
    जिसका उन्वान हू-ब-हू
    तुम्हारे जैसा होता है !
    ©sramverma

  • sramverma 3w

    Date 12/11/2021 Time 1:13 PM #SRV #khushbu

    कल रात मेरी दोनों
    हथेलियाँ उस की
    ख़ुशबू में भीगीं थी;
    निश्छल आँखों के दोनों
    पर्दों पर एक उसी की
    तस्वीर चस्पा थी;
    मेरी जुल्फों में भी उसी
    का स्पर्श रमा था;
    जिन में उलझे उस के
    कुछ तो इंकार थे;
    और कुछ इरादे थे
    लेकिन मेरा दिल
    था जो उसकी रूह
    में ही अटका था;
    और उसकी सारी
    खूबियाँ मेरी ओर
    निरुत्तर सी देखी
    जा रही थी !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    कल रात मेरी दोनों
    हथेलियाँ उस की
    ख़ुशबू में भीगीं थी;
    निश्छल आँखों के दोनों
    पर्दों पर एक उसी की
    तस्वीर चस्पा थी;
    मेरी जुल्फों में भी उसी
    का स्पर्श रमा था;
    जिन में उलझे उस के
    कुछ तो इंकार थे;
    और कुछ इरादे थे
    लेकिन मेरा दिल
    था जो उसकी रूह
    में ही अटका था;
    और उसकी सारी
    खूबियाँ मेरी ओर
    निरुत्तर सी देखी
    जा रही थी !
    ©sramverma

  • sramverma 3w

    Date 11/11/2021 Time 12:39 PM #SRV #dil

    प्रेम की किताब में लिखे मोहब्बत के जो हर्फ़ है ;
    जिन्हे समझदार किस्म के लोग कहां पढ़ पाते हैं !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    प्रेम की किताब में लिखे मोहब्बत के जो हर्फ़ है ;
    जिन्हे समझदार किस्म के लोग कहां पढ़ पाते हैं !
    ©sramverma

  • sramverma 3w

    Date 10/11/2021 Time 12:58 PM #SRV #dil

    जिनको अपने दिल में जगह दो "राम",
    वो अगर दिल दुखाते है तो दुखाने दो ;

    एक दिन वो भी समझेंगे इस दर्द को ;
    उनके दिल को भी तो कभी दुखने दो !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    जिनको अपने दिल में जगह दो "राम",
    वो अगर दिल दुखाते है तो दुखाने दो ;

    एक दिन वो भी समझेंगे इस दर्द को ;
    उनके दिल को भी तो कभी दुखने दो !
    ©sramverma

  • sramverma 3w

    Date 09/11/2021 Time 10:59 PM #SRV #mohobbat

    तेरी ओर
    आने के लिए
    मैंने जो पहला
    कदम उठाया था
    उस मेरे पहले
    कदम के रखने
    के बीच का जो
    थोडा सा वक्त और
    तुझ तक पहुंचने के
    बीच की दुरी थी
    वही कहीं मेरी
    पहली मोहब्बत
    ने जन्म लिया था !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    तेरी ओर
    आने के लिए
    मैंने जो पहला
    कदम उठाया था
    उस मेरे पहले
    कदम के रखने
    के बीच का जो
    थोडा सा वक्त और
    तुझ तक पहुंचने के
    बीच की दुरी थी
    वही कहीं मेरी
    पहली मोहब्बत
    ने जन्म लिया था !
    ©sramverma

  • sramverma 4w

    Date 07/11/2021 Time 7:10 PM #SRV #mohobbat

    मगरूर सी उसकी आँखों में ,
    मेरी मोहब्बत का गुमान था ;

    ज़िन्दगी मेरी खुली किताब थी ;
    वो उस में लिखा हर्फ़-दर-हर्फ़ था !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    मगरूर सी उसकी आँखों में ,
    मेरी मोहब्बत का गुमान था ;

    ज़िन्दगी मेरी खुली किताब थी ;
    वो उस में लिखा हर्फ़-दर-हर्फ़ था !
    ©sramverma

  • sramverma 4w

    Date 05/11/2021 Time 9:15 PM #SRV #deepawali

    उस रोज़ 'दिवाली' होती है !

    जब मन में हो मौज बहारों की
    चमक आये चमकते सितारों की,
    जब ख़ुशियों के शुभ घेरे घेरते हों
    तन्हाई में भी तेरी यादों के मेले हों,
    उर में आनंद की आभा बिखरती है
    मन में उजियारे की रोली फैलती है,

    उस रोज़ 'दिवाली' होती है ;

    जब प्रेम-प्रीत के डीप जलते हों
    सपने सबके जब सच होते हों,
    मन में उमड़े मधुरता भावों की
    और लहके फ़सलें लाड चावों की,
    उत्साह उमंग की आभा होती है

    उस रोज़ 'दिवाली' होती है ।

    जब प्रेम से प्रीत मिलती हों
    दुश्मन भी गले लग जाते हों,
    जब किसी से वैर भाव न हो
    सब अपने हों कोई ग़ैर न हो,
    अपनत्व की आभा फैलती हो;

    उस रोज़ 'दिवाली' होती है ।

    जब तन-मन-प्राण सज जाएं
    सद्स-गुण के बाजे बज जाएं,
    महक आये ख़ुशबू ख़ुशियों की
    मुस्काएं चंदनिया सुधियों की,
    हिय में तृप्ति की आभा फैलती है;

    उस रोज़ 'दिवाली' होती है ।

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    उस रोज़ 'दिवाली' होती है !

    जब मन में हो मौज बहारों की
    चमक आये चमकते सितारों की,
    जब ख़ुशियों के शुभ घेरे घेरते हों
    तन्हाई में भी तेरी यादों के मेले हों,
    उर में आनंद की आभा बिखरती है
    मन में उजियारे की रोली फैलती है,

    उस रोज़ 'दिवाली' होती है ;

    जब प्रेम-प्रीत के डीप जलते हों
    सपने सबके जब सच होते हों,
    मन में उमड़े मधुरता भावों की
    और लहके फ़सलें लाड चावों की,
    उत्साह उमंग की आभा होती है

    उस रोज़ 'दिवाली' होती है ।

    जब प्रेम से प्रीत मिलती हों
    दुश्मन भी गले लग जाते हों,
    जब किसी से वैर भाव न हो
    सब अपने हों कोई ग़ैर न हो,
    अपनत्व की आभा फैलती हो;

    उस रोज़ 'दिवाली' होती है ।

    जब तन-मन-प्राण सज जाएं
    सद्स-गुण के बाजे बज जाएं,
    महक आये ख़ुशबू ख़ुशियों की
    मुस्काएं चंदनिया सुधियों की,
    हिय में तृप्ति की आभा फैलती है;

    उस रोज़ 'दिवाली' होती है ।
    ©sramverma

  • sramverma 4w

    Date 04/11/2021 Time 3:00 PM #SRV #deepawali
    आप सभी को दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं

    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    हर ओर है तम छाया
    इतने दीप कंहा से लाएं ;
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    एक भाव के आंगन में
    एक आस की दहलीज़ पर ;
    एक निज हिय के द्वार पर
    एक सत्य के सिंघासन पर !
    तुम बनो माटी दीपक की
    मैं उसकी बाती बन जाऊँ ;
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    एक देह के तहखाने में भी
    स्वप्निल तारों की छत पर भी ;
    एक प्यार की पगडण्डी पर भी
    खुले विचारों के मत पर भी !
    जले हम-तुम फिर बिन बुझे
    तेल बन तिल-तिल जल जाए ;
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    एक यारों की बैठक में
    एक ईमान की राहों पर ;
    एक नयी सोच की खिड़की पर
    एक तरह तरह की हंसी के चौराहे पर !
    दीप की लौ जो कभी सहमे
    तुफानो से उसे हम तुम बचाएं ;
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    बचपन की गलियों में भी
    और यादों के मेले में भी ;
    अनुभव की तिजोरी में भी
    और दौड़ती उम्र के बाड़े में भी !
    बाती की भी अपनी सीमा है
    चलो उसकी भी उम्र बढ़ाते है ;
    बाती को बाती से जोड़ देते है
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    आज हार है निश्चित तम की
    जग में ये आस जगा आएं ;
    सुबह का सूरज जब तक आये
    तब तक प्रकाश के प्रहरी बन जाए !
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    हर ओर है तम छाया
    इतने दीप कंहा से लाएं ;
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    एक भाव के आंगन में
    एक आस की दहलीज़ पर ;
    एक निज हिय के द्वार पर
    एक सत्य के सिंघासन पर !
    तुम बनो माटी दीपक की
    मैं उसकी बाती बन जाऊँ ;
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    एक देह के तहखाने में भी
    स्वप्निल तारों की छत पर भी ;
    एक प्यार की पगडण्डी पर भी
    खुले विचारों के मत पर भी !
    जले हम-तुम फिर बिन बुझे
    तेल बन तिल-तिल जल जाए ;
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    एक यारों की बैठक में
    एक ईमान की राहों पर ;
    एक नयी सोच की खिड़की पर
    एक तरह तरह की हंसी के चौराहे पर !
    दीप की लौ जो कभी सहमे
    तुफानो से उसे हम तुम बचाएं ;
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    बचपन की गलियों में भी
    और यादों के मेले में भी ;
    अनुभव की तिजोरी में भी
    और दौड़ती उम्र के बाड़े में भी !
    बाती की भी अपनी सीमा है
    चलो उसकी भी उम्र बढ़ाते है ;
    बाती को बाती से जोड़ देते है
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    आज हार है निश्चित तम की
    जग में ये आस जगा आएं ;
    सुबह का सूरज जब तक आये
    तब तक प्रकाश के प्रहरी बन जाए !
    जंहा-जंहा है तम गहराया
    वंहा-वंहा हम दीप जलाएं !
    ©sramverma

  • sramverma 4w

    Date 03/11/2021 Time 1:37 PM #SRV #mohibbat

    मुझे किसी और से मोहब्बत हो गई है
    पर तुम तो मुझ से नफ़रत कर रहे होंगे
    मैं कितनी ख़ुश हूँ
    पर तुम अपने ही घर में उदास होंगे
    मेरे ये हाथ किसी और के हाथ में देख कर
    हाथ तुम अपने मल रहे होंगे
    मेरे लफ़्ज़ों में किसी और का जिक्र सुन कर
    तुम अपने ही लफ़्ज़ों पर शर्मिंदा हो रहे होंगे
    मेरी आँखों में किसी और का अक्स देख कर
    तुम अपनी ही नज़रों में गिर रहे होंगे
    मैं मसरूर हूँ किसी की हो कर
    ये सोच कर तुम खुद से ही कट रहे होंगे
    मुझे किसी और से मोहब्बत हो गई है
    पर तुम तो मुझ से नफ़रत कर रहे होंगे !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    मुझे किसी और से मोहब्बत हो गई है
    पर तुम तो मुझ से नफ़रत कर रहे होंगे
    मैं कितनी ख़ुश हूँ
    पर तुम अपने ही घर में उदास होंगे
    मेरे ये हाथ किसी और के हाथ में देख कर
    हाथ तुम अपने मल रहे होंगे
    मेरे लफ़्ज़ों में किसी और का जिक्र सुन कर
    तुम अपने ही लफ़्ज़ों पर शर्मिंदा हो रहे होंगे
    मेरी आँखों में किसी और का अक्स देख कर
    तुम अपनी ही नज़रों में गिर रहे होंगे
    मैं मसरूर हूँ किसी की हो कर
    ये सोच कर तुम खुद से ही कट रहे होंगे
    मुझे किसी और से मोहब्बत हो गई है
    पर तुम तो मुझ से नफ़रत कर रहे होंगे !
    ©sramverma

  • sramverma 4w

    Date 02/11/2021 Time 1:49 PM #SRV #zeendagani

    बा'द-ए-मौत भी है इक ज़िंदगानी ,
    तू क्यों फ़िक्र करती है मेरी जानी ;

    मैं तुम्हे फिर एक बार वही मिलूंगा ;
    जहां पर साथ छूटेगा हमारा जानी !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    बा'द-ए-मौत भी है इक ज़िंदगानी ,
    तू क्यों फ़िक्र करती है मेरी जानी ;

    मैं तुम्हे फिर एक बार वही मिलूंगा ;
    जहां पर साथ छूटेगा हमारा जानी !
    ©sramverma

  • sramverma 5w

    Date 01/11/2021 Time 6:09 PM #SRV #dard

    ख़्वाब जैसी ही गर ये ज़िन्दगी होती ,
    तो यूँ न कठिन ये ज़िन्दगानी होती ;

    तेरे पास होने से क्या क्या हो जाता ;
    जमीं की तरह मैं भी हरी भरी होती !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    ख़्वाब जैसी ही गर ये ज़िन्दगी होती ,
    तो यूँ न कठिन ये ज़िन्दगानी होती ;

    तेरे पास होने से क्या क्या हो जाता ;
    जमीं की तरह मैं भी हरी भरी होती !
    ©sramverma

  • sramverma 5w

    Date 31/10/2021 Time 6:46 AM #SRV #dard

    कितना ही दर्द हो दिल के अन्दर मेरे मगर,
    तेरे लिए तो सदा मुस्कुराने को जी करता है ;

    दर्द भी ज़ख्म पर मरहम का काम करते है मगर
    तुम्हारे लिए तो मर जाने को भी जी करता है !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    कितना ही दर्द हो दिल के अन्दर मेरे मगर,
    तेरे लिए तो सदा मुस्कुराने को जी करता है ;

    दर्द भी ज़ख्म पर मरहम का काम करते है मगर
    तुम्हारे लिए तो मर जाने को भी जी करता है !
    ©sramverma

  • sramverma 5w

    Date 30/10/2021 Time 11:18 AM #SRV #izhar

    ये मोहब्बत भी इतना कड़ा इम्तिहान है कि 'राम' ;
    इसमें पढ़े लिखे फ़ैल और अनपढ़ पास हो जाते है !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    ये मोहब्बत भी इतना कड़ा इम्तिहान है कि 'राम' ;
    इसमें पढ़े लिखे फ़ैल और अनपढ़ पास हो जाते है !
    ©sramverma

  • sramverma 5w

    Date 29/10/2021 Time 12:06 AM #SRV #izhar

    तुमसे दूर रहकर भी एक तुम्हें,
    ही याद करने को जी करता है ;

    कितना प्यार करते हैं तुमसे,
    ये इज़हार करने को जी करता है !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    तुमसे दूर रहकर भी एक तुम्हें,
    ही याद करने को जी करता है ;

    कितना प्यार करते हैं तुमसे,
    ये इज़हार करने को जी करता है !
    ©sramverma