#Drought

72 posts
  • maanvi_bhagat 25w

    Cries heard all over the earth
    Trees read to be dry and die
    Leaves feeling down as if autumn
    Clouds already left saying goodbye
    Mud awaiting rain still feeling alone
    No grains ready to be a plant and grow
    Mother earth weeping for the rains
    With rivers dried, no visible water flow
    ©maanvi_bhagat

  • jumbledthoughts 28w

    Drought

    After a long .. a truly long drought
    There was some pitter patter last night
    You see, I cried
    The thoughts and the feelings which I never get to release
    They were in free fall last night
    You see, I cried
    The cloud of sorrow that keeps trailing me
    Is a little lighter tonight
    You see, I cried
    Don’t worry about me, I am not alone
    The cloud is still with me and it will be a long drought again…
    Before I cried.
    ©jumbledthoughts

  • unnatural 39w

    The Say 04

    Don't wait for me
    I am a drought
    You shouldn't expect the rain soon
    ©unnatural

  • smile_its_sunnah 43w

    Horizon of dry acres land.

    He looks out his hut, far and beyond, it seems today there is no water pond. He walks to Saturn, he climbs to Mars but still nothing found in galaxy far's.

    D
    R
    I
    P
    ��

    The children gallop to the intoxicating lake, panting and grunting to solve their thirst ache. The mothers are hopping from the mountains, up and down, for her whaling babies sake. The men with their binocular eyes searching for water in the cracked land below, through the aquifers and deep underground but water cannot be found yards low.


    D
    R
    I
    P
    ��

    Dry is the Earth,
    dry is the thirst,
    dry is the desert
    And dry is the peoples worth.

    Come my people let's go to Mars, hopefully their water still has some bars, the water has perished, our bodies have no fuel, to continue like the unaware passing cars. Our throats are arid, no life to speak, as the bodies drop at every drips peak.


    D
    R
    I
    P
    ��

    ��������������������������������������

    Wait, do you hear those children's smiles, as the water falls on the floor in everlasting piles. Do you hear those showers running, as our lands transends to nothing.
    Oh, look at the splish splash of fun, that is our reason for weighing a none. These helpless souls have been through eternal pain, as my body falls down like harsh rain.

    R
    I
    P
    ��
    �� ��
    �� ��
    �� ��
    ��

    #hyperboles #pod #wod #mirakee #writersnetwork
    #drought #savewater #awareness
    @mirakee
    @mirakeeworld
    @writersnetwork
    @childauthor_345

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    Horizon of dry acres land

    The children gallop to the intoxicating lake, panting and grunting to solve their thirst ache. The mothers are hopping from the mountains, up and down, for her whaling babies sake. The men with their binocular eyes searching for water in the cracked land below, through the aquifers and deep underground but water cannot be found yards low.
    ©smile_its_sunnah

  • james_taumas 54w

    Drought

    Cracked and thirsty
    Merciless sun
    Strips and burns
    Green memories fade
    Livestock cry
    Carcasses lay baking
    Crops become tinder
    Clouds tease hope
    Rain never falls
    Farmers say a prayer
    Sacrifices unrewarded.

    ©james_taumas

  • amoghavarsha 59w

    May The Drought In Minds
    And The Storm In Hearts
    End
    And
    I Wanna Be Your Rain
    And You Are My Rainbow
    ©amoghavarsha

  • sydneyqueen 71w

    Take back your curse,
    Take back your solace.
    Let me get a life like the rest,
    Not in tears and Not in mess
    Something that you couldn't posses.

    ©sydneyqueen

  • jyotikaa 76w

    Oasis

    Drought of heart.

    ©jyotikaa
    11.08.20

  • _harsingar_ 78w

    प्रकृति (२)

    तब आया इक शैतान
    प्यार से था बिल्कुल अनजान,
    उसको दुनिया नहीं सुहाती
    बहुत बड़ा था वो उत्पाती,
    तोड़े पौंधे , जीव सताए
    दुख देख सभी का वो मुस्काए,
    मालिक ने उसको देख लिया
    पल भर में उसको जान लिया,
    बहुत प्यार से उसे बुलाया
    फिर छड़ी घुमा के उसे सुलाया,
    जाने क्या फिर उसको बुझी
    इक प्यारी सी युक्ति सूझी,
    दिल नन्हा सा डाल दिया
    जिसे प्यार से सींच दिया,
    मस्तिष्क दिया फिर उसमें डाल
    सोचा कुछ ये करे कमाल,
    मानव तब उसको नाम दिया
    पृथ्वी ने उसको थाम लिया,
    मस्तिष्क प्रयोग कर मानव ने
    जीत लिया सब पल भर में,
    धीरे धीरे बढ़ी लालसा
    थमी नहीं उसकी अभिलाषा,
    फिर मानव ने इतिहास रचा
    अंबर, सागर,धरती पर धूम मचा,
    अभिलाषा बदली लालच में
    लगा रहा वो निज हित में,
    धरती को उसने कृत्रिम किया
    ग्रीष्म काल में ए.सी. आया,
    शीत काल में ग्रीष्म सामाया
    मौसम भी उसने बदल दिए,
    सरहद बांटी,पर्वत काटे
    नदियों के रुख मोड़ दिए,
    धरती, सागर और आसमान
    हर तरफ उसने तब भरी उड़ान।
    हुई अति जब मानव द्वारा,
    कई प्रजातियां लुप्त हुईं,
    दिखी नहीं फिर वो दोबारा।
    प्रकृति से सब कुछ सोख लिया,
    बदले में फिर कुछ कहां दिया।
    प्रेम सौहार्द सब भाग गया
    मानो शैतान फिर जाग गया,
    प्रकृति भी तांडव कर बैठी
    मानव करम पर वो ऐंठी,
    दरके पर्वत,उफनी नदियां
    जीवन पल में नरक बनाया,
    बनने में जिसको लगीं थीं, सदियां।
    कहीं कहीं जल सूख गया,
    विधाता मानो रुठ गया।
    अब भी जाग जा तू मानव,
    क्यूं तू बन बैठा है दानव।
    प्रेम पूर्वक रह ले पृथ्वी पे,
    पृथ्वी सबकी हम सब इसके।
    बहुत लिया है इस धरती से
    बाज़ अा अब ना कर नादानी,
    ये तेरी ही थाति नहीं अज्ञानी ।
    ये तो है नौनिहालों की धरोहर
    रखना जिसको तुझे संभाल कर।

    डॉ सीमा अधिकारी
    ©_harsingar_

  • _harsingar_ 78w

    प्रकृति संरक्षण दिवस

    आज विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस (world nature conservation day) है। सभी को उसकी हार्दिक बधाई कोई भी दिवस तभी मनाया जाता है जब हम उसे भूल जाते हैं। अपने स्वार्थ में हम इतने लिप्त हो गए हैं कि हम भूल गए कि हम जिस प्रकृति से इतना कुछ लेते है बदले में उसे क्या देते हैं। हम पैसा बचाने के लिए एफ डी और भी ना जाने क्या क्या भविष्य निधि जोड़ते हैं। पर क्या हम अपनी प्रकृति को भी भविष्य निधि जैसी किसी व्यवस्था पर निवेश कर रहे हैैं। सोचिए क्या हम अपने बच्चों के लिए प्रकृति को संजो रहे हैं? प्रकृति के संरक्षण पर एक रचना सृजी है आशा है पसंद आएगी थोड़ा बड़ी है।

    #natureconservation #lovenature #monsterman #heritage #flood #drought #mountainrange
    #mirakee #mirakeepod #hindikavita #writersnetwork #hindiwriteup #writerstoli

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    प्रकृति (१)

    बहुत बड़ा इक जादूगर था,
    चित्रकार वह पेशेवर था।
    नाना रंगों से चित्र बनाया उसने
    वृक्ष, नदी, जंगल औ झरने,
    पर्वत, बादल, फूल और सागर
    अथक प्रयास कर रूका न पल भर,
    लगा अधूरा पन जब उसमें
    रच डालीं जीवों की किस्में,
    चिड़िया,भालू ,हाथी,चीता
    लोमड़, कछुआ, हिरण भी था,
    तरह तरह के दृश्य बनाए
    चांद औ सूरज तारे लटकाए,
    तब जादू की छड़ी घुमाई
    सब जीवों में जान समाई,
    बहुत प्रेम से रहते थे सब,
    ईर्ष्या ,नफरत थी कहां तब।
    क्रमशः
    डॉ सीमा अधिकारी

    ©_harsingar_

  • krishnakantrai 79w

    बिहार हूँ मैं

    मगध का साम्राज्य,
    चन्द्रगुप्त के सपनों की नगरी,
    पुत्र बुद्ध के भिक्षुओं का विहार हूँ मैं।
    त्रस्त किन्तु आशापूर्ण,
    निर्जन बिहार हूँ मैं !

    यहीं आर्यभट्ट ने जन्म लिया,
    दिया जग को शून्य, संख्या और पाई,
    आकाशीय पिंडों का अध्ययन चुटकियों में कर लिया,
    जहाँ की पसंदीदा बिस्तर है चारपाई,
    अपनों से हीं दंशित, बिहार हूँ मैं !

    जहाँ बुद्ध और महावीर ने शांति का ज्ञान पाया,
    विद्यापति की कविताओं से लेकर,
    वीर लोरिक का गुणगान सुनाया।
    'बिदेशिया' बने भिखारी को सहेजकर
    अपने पूर्वजों की राह देखता, बिहार हूँ मैं !

    देश के प्रशासन की रीढ़,
    सुरक्षा का भार संभाले,
    जहाँ खुश रहते थे
    गुरु गोविन्द और नन्द के ग्वाले।
    जात पात में उलझा, बिहार हूँ मैं!

    किसी को फ़िक्र नहीं, मेरा भविष्य सँवारे,
    देश के राजनेता हैं बड़े मूढ़ ,
    तभी तो वंचित, तिरस्कृत; हे प्यारे! 
    न्याय के इंतज़ार में खड़ा, बिहार हूँ मैं !

    मेरे ललाट पर कभी शिखा खेल जाती है,
    खेलती है कभी गंगा मईया,
    आशा भरी निगाहेँ हमेशा खिल जाती है,
    जब दिख जाये कोई खेवइआ।
    पर अति-जनसंख्या की नाव पर सवार, बिहार हूँ मैं !

    मेरी चीत्कार अधरों से फूटने नहीं देता ,
    गाँधी के सत्याग्रह का त्योहार हूँ मैं।
    लाचार, विवश, सुव्यवस्था के इंतज़ार में खड़ा,
    विरासतों का धनी, बिहार हूँ मैं !!!
    ©krishnakantkumar_

  • prakriti2005 83w

    Thoughts

    Sometimes I wanna have demise,
    and that seems to me damn nice.
    Sometimes I wanna have my life,
    although it peels my heart like a knife.
    Me lost in a thinking so deep,
    through which I also can't peep.
    So much in that I'm lost,
    can't get out of it at any cost.
    Sometimes my thoughts surround me like fog,
    and I, just like a well's frog,
    lost in my own thoughts,
    face my life's fearful droughts.
    A trial to remove some exclamations,
    get me trapped into other big questions,
    opening my life's each and every page,
    and I become a bird prisoned in my thoughts' cage.
    They are so much frozen,
    and act like a sweet poison,
    which lead me to death every moment,
    and make me each second dormant.
    But still...
    I wanna be in my own thoughts' fold,
    giving myself a pain so sweet and cold.
    ©risham2004

  • kritikapal 85w

    ना खेल कुदरत से बंदेया
    बच ना तू पाएगा
    दिन सबका आता है
    वक़्त तेरे साथ भी खेल जाएगा

    इतने ना कर तू पाप
    की पापों से घड़ा भर जाए
    आखिर कितने और निर्दोष जीव जंतुओं का
    हत्यारा बनना चाहेगा

    ना खेल कुदरत से बंदेया
    बच ना तू पाएगा
    दिन सबका आता है
    वक़्त तेरे साथ भी खेल जाएगा

    थोड़ा डर अपनी करनी से
    क्योंकि अपने कर्मों के नतीजे
    इसी जन्म में भोगेगा

    ना खेल कुदरत से बंदेया
    बच ना तू पाएगा
    दिन सबका आता है
    वक़्त तेरे साथ भी खेल जाएगा...





    #pregnantelephantkilled #gangeticdolphinsburnt #oilspillsinrivers #valuenaturesgifts #lovenature #dontplaywithnature #dontdestroyearth #loveanimals #orelsenaturewillfindoutownwaytoregainthings #naturewillkillyou #amphan #covid19 #drought #flood
    #poetrycommunity #poetrylove #poetofindia #poeticthoughts #poet #poemdaily #writersofindia #writingcommunity #writingispassion

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    ना खेल कुदरत से

    ©kritikapal

  • hetal_gohel 91w

    સંબંધો આમ જ નથી સુકાતા સાહેબ , લાગણી નો દુષ્કાળ તેનું ગળુ ધુટવા બેઠો જ હોય છે.
    -હેતલ ગોહેલ
    ©hetal_gohel

  • admiral_slim 94w

    Even in the time of drought, always imagine yourself dancing in the rain.

    Be Hopeful and Focus.

    Prepare yourself for the coming showers. this season would definitely pass.
    ©admiral_slim

  • james_taumas 107w

    Inferno

    Sun betrays
    Drought reigns
    Fertile green a memory
    Perfect storm stirs
    A single spark
    Tinder brush set aflame
    An inferno born
    Indiscriminate destruction
    Scorched land and desolation
    Insatiable monster feeds
    Deaths under ashen skies.

    ©james_taumas

  • liquidland88 110w

    We Land and We Sea

    When you drift like sea, it is land I'll be. Your rock a bye motion is not lost on me. When you're lost like sea, back to the shore you'll be. Alone you are not when grounded by me.

    When I drift like sand, it is the river you'll be. Your water is lotion and runs the right motion. When I'm found like land, relief from the drought I'll be. Alone I am not when moved by sea.


    ©liquidland88

  • marathi_shabd 122w

    #marathi #marathipoetry #marathikavita #marathishabd #marathiwriter #readwriteunite #drought
    @writerstolli @writersnetwork

    अजून पण दुष्काळी भागात परिस्थिती बदललेली नाही. आमच्या वर जशी काही वर्षापूर्वी वेळ आली होती अजून पण काही जणांवर सद्यस्थितीत तशीच्या तशीच आहे...��

    पाणी जीवन आहे कळलं होतं
    जेंव्हा आईला त्याने छळलं होतं
    एक दोन घागरी मधे
    डोक्यावर त्याला ती आणायची
    तुटून पडलेल्या डबक्यावर
    कित्येकदा त्यासाठी ती भांडायची
    तशीच पायपीट करत
    ती दूरदूर चालत असे
    तेंव्हा माझ्या मनात
    आईसाठी हुरहुर होत असे...

    कधी कधी अनवाणी
    कधी पहाटेच्या पण क्षणी
    उन्हात फाटलेलं पायतान
    पायात ती ओढत ओढत
    तर कधी सांजे ला थकलेली
    दूरवरून ती येताना दिसत
    हा दुष्काळ सोसता सोसता
    ती मजबूर होत असे
    तेंव्हा माझ्या मनात
    आईसाठी हुरहुर होत असे...

    आभाळ पण धावलं नाही
    बळ व्यवस्थेचं आलं नाही
    तशीच शोध ती घेत राहिली
    हे आयुष्य अर्ध पाण्यासाठी
    पाण्यासारखा वाहत राहिली
    तो आभाळ, ती व्यवस्था
    तरीही बेकसुर राहत असे
    तेंव्हा माझ्या मनात
    आईसाठी हुरहुर होत असे...

    ©ग सु देवकत्ते

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    आईसाठी हुरहुर

    (कृपया मथळा पहा)
    ©ग सु देवकत्ते

  • iamsingh 130w

    #19 #rain #flood #drought

    This piece is just about the people who can't afford a house for them and are living in their small huts and slums..
    We may enjoy the rain with some tea and snacks but for them this rain over an extent is a major problem . They don't have a roof on their heads.
    Some parts of our country still fighting with the droughts and some with floods. For These conditions only humans are responsible . We can regulate the rain by planting trees and by stopping deforestation.

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    "पानी घर"

    बरस थोड़ा थोड़ा सा,
    ये कैसी मनमानी है,
    वहां प्यासा हर इन्सान है,
    और यहां सड़कों पर बहता पानी है ।

    खेत मेरे सूख रहे,
    मगर छत टपकता पानी है।
    तू ना होता जहां ज़रुरत तेरी,
    ये कैसीे मनमानी है ।।

    कहीं बाढ़ है कहीं अकाल,
    कहीं नन्ही परियां दीवानी है ।
    पूछो उन बच्चों से भी,
    जिनके घर बैठा तेरा पानी है ।।

    ©iamsingh

  • swetapanigrahi 131w

    Denial

    I am in a phase of denial,
    No begging or pleadings,
    I don't run avenues to catch up with the gone wind,
    I watch the storm surging,
    Twirling with dusty, fading memories
    I have no words of confront or comfort
    Just a barren land who is used to
    Hurricanes and drought alike
    Catastrophes been a constant part
    And i am a silent dweller
    Awaiting no daylight
    But thriving in the dark night.
    ©swetapanigrahi