#23rdapril_2021

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  • krati_sangeet_mandloi 39w

    अव्वल - प्रथम, सर्वश्रेष्ठ
    मख़लूक - रचा या बनाया हुआ
    ख़िलाफ़त - विरोध करने की क्रिया
    इल्म - ज्ञान, बुद्धि
    ग़ुरूर - अहंकार, घमंड
    ख़िदमत - सेवा
    दोज़ख - नर्क
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    #krati_mandloi #23rdapril_2021 #Respost #Hindinama @hindiwriters @hindinama

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    इंसान

    खुदा की दुनिया में अव्वल दर्जे का मख़लूक इन्सान,
    कश्मकश में खुद की, वजूद से अपने है अनजान।

    खुदा ने फ़क़त बख्शी है, इंसान को तमाम आजादी,
    अपनी हदों को पार करके, ख़िलाफ़त में की बर्बादी।

    इल्म के तख़्त पर इंसाँ, बैठकर सुनाता गया फ़रमान,
    शहंशाह खुद को समझने लगा, बढ़ता गया गुमान।

    बंटवारा किया सबका, बनाए मज़हब के कई नाम,
    बना वो तेरे लिए, कभी अल्लाह, जीसस, कभी राम।

    किस बात का ग़ुरूर तुझे, बुलबुले सी है तेरी जान,
    सर झुका कर चल, ख़िदमत में रख अपना ईमान।

    औकात क्या है तेरी, जो खुदा को कुछ भी देगा,
    दौलत अपनी पास में रख, देने वाला कुछ नहीं लेगा।

    सुन तेरे अंदर खुदा ने, अपना चिराग जला रखा है,
    दिखे साफ़ सब आईने जैसा, वो रास्ता बना रखा है।

    नफ़रत, फ़रेब, बेईमानी तुझे दोज़ख तक ले जाएगी,
    तेरी पाक नीयत, सच्चाई ही, जन्नत तक पहुँचाएगी।

    ख़ुशी और ग़म के बीच, उलझा हुआ तेरा सफ़र है,
    मुश्किल है, राहत भी है, ज़िंदगी की ऐसी डगर है।

    ए इंसान, खुद से खुदा को जानकर, भरम को दूर ले,
    खुदा के इबादत में बंदे, खुद को तू कोहिनूर कर ले।

    इंसान आए इंसान के काम, इंसान है इंसान ही रहे,
    शैतान का हो ख़ात्मा, इंसानियत की बोली कहे।

    ©Krati_Sangeet_Mandloi
    (20-04-2021)✍️ (23-04-2021)