erjoshihc

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Innovator, Administrator, Engineer, Hindi Story Writer, Principal Scientist (Retd)

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Reposts
  • erjoshihc 24w

    अन्जाम अपनों से आगे रहने की दौड़ का
    ऐसा अकेलापन होगा मुझे पता ही न था।
    जो अपनापन था वह तो जड़ से छूट गया
    पास है उसका क्या करूँ ये पता ही न था।

    ©erjoshihc

  • erjoshihc 26w

    नववर्ष 2022

    जीवन मुश्किल
    कठिन से, और कठिनतम
    जिम्मेदारी, आकांक्षायें
    बना रही व्याकुल मम्
    अनुभव के थपेड़े खा
    जीवन से हट रहा तम
    ज्ञान वृक्ष फल फूल रहा
    हटा के सभी वहम
    नववर्ष 2022 शत शत
    तेरा स्वागत करते हम!!

    प्रभु नई सुबह दिखाई
    कोटिश: तेरा नमन
    धर्म को क्यूँ ईश्वर से जोड़ें
    सबका कैसे टूटे भ्रम?
    धर्म से ही ईश्वर जुड़ा है
    टूटेगा यह कैसे क्रम?
    तू अछेद, तू अभेद
    तू तो है अक्षम!
    नववर्ष 2022 शत शत
    तेरा स्वागत करते हम।

    हेम/31 दिसम्बर,2021
    ©erjoshihc

  • erjoshihc 35w

    हर रोज आज की तरह दीपावली हो जाये यदि थोड़ी सी अक्ल ज्यादा मिल जाये

    चन्द जरूरतें तेरी, पर ख्वाहिशें बेहिसाब हैं।
    जीने का मज़ा है उनसे, जो तेरे आसपास हैं।

    ©erjoshihc

  • erjoshihc 39w

    मिलावट

    इश्क़ में झूठ सी मिलावट की है उसने
    सोना जैसे ताँबे की दरकार रखता हो।
    ©erjoshihc

  • erjoshihc 42w

    बीज❤️❤️

    इस बीज का भी तो
    मस्तिष्क होता होगा
    जो भूमि के स्पर्श
    जल की भावनाओं को
    समझता होगा!
    साँसों की गर्मी सा
    ताप की आँच में
    पिघलता होगा!
    प्रसव की पीड़ा लिए
    दो हिस्सों में बँट कर
    सृजन के पथ पर
    अग्रसर होता होगा।
    बीज का भी तो
    मस्तिष्क होता होगा!
    अंकुरित हो
    बढ़ता बढ़ता
    सूरज को छूने का
    असफल प्रयास करता होगा
    मनुष्य की तरह
    जिज्ञासा से परिपूर्ण
    अँधेरे पथों पर
    नर्म जड़ों से टटोलता
    हौले हौले
    चारों दिशाओं को
    बढ़ता होगा
    आखिर कुछ तो
    खोजता होगा!
    बीज का भी तो
    मस्तिष्क होता होगा!
    ©erjoshihc

  • erjoshihc 42w

    प्रश्न

    तुमने पूछा था तेरे जाने के बाद मेरा क्या हुआ?
    तू चली गयी मुझे तो ये कभी पता ही नहीं चला!
    ©erjoshihc

  • erjoshihc 43w

    वादा

    तू ने वादा था निभाया, गयीं थीं मुझसे मिल के
    तेरे इनकार का अन्देशा मुझे बेजुबान बना बैठा।
    ©erjoshihc

  • erjoshihc 43w

    चाहत

    भूली हुईं यादों को हौले से दिल में टटोला जो मैंने
    मुद्दतों बाद भी उनकी चाहत के बुलबुले जिंदा थे।
    ©erjoshihc

  • erjoshihc 48w

    हिसाब

    तुम मुझे खुशी दो, मैं भी तुमको खुशी ही दूँगा!
    झूठ ही सही, मैं भी तो तुम्हें झूठी ही खुशी दूँगा
    यह वक़्त है सीधा सादा हिसाब सादा रखता है
    वक्त आने पर देखना,जो बोया था वही उगता है।

    ©erjoshihc

  • erjoshihc 48w

    निशान

    रेत पर चले थे हम, लहरों ने निशां मिटा दिये।
    धड़कनों में बसी यादें, उनको मिटाऊँ मैं कैसे?
    ©erjoshihc