era_of_shayar

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Reposts
  • era_of_shayar 4w

    आओ जख्मों की नुमाइश करें कैसे हम बर्बाद हुए,
    कहा टूटे, कहा बिखरे, कहा हम नीलाम हुए,
    अंधेरों से यारी हुई उजाले से परेशान रहे,
    खैर छोड़ो पुरानी बातें कौन सा पहली बार हुए..!!

    ©era_of_shayar
    (ANUPAM MISHRA)

  • era_of_shayar 6w

    परिंदों की तरह फजा की रवानी में मरे,
    कुछ ख्वाब थे मेरे जो भरी जवानी में मरे,
    ये जिन्दगी की क़िताब हम से लिखी न गई,
    हम रेजा रेजा हुए हर कहानी में मरे..!!

    ©era_of_shayar
    (ANUPAM MISHRA)

  • era_of_shayar 6w

    दश्त के अंधेरों की तरह सिमटे हुए था,
    मानों हर शक्श उस पर तीर खीचे हुए था,
    शहबाज बना फिरता था जो महफिलों में,
    आज गूँगे तमाशे की तरह सहमे हुए था..!!

    ©era_of_shayar
    (ANUPAM MISHRA)

  • era_of_shayar 7w

    Part-2��

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    सुहानी सुबह..!! 2

    तुमने उन तूफानों को झेला है जिन्होंने कितने हमसफर तुमसे छीन लिए,
    उस दरिया को पार किया जिसने बहुत कोशिश की थी डुबोने की,
    कुछ नज़रों को फिर भी यकीं होगा तुम्हारे सपनों पर, तुम्हारे इरादों पर,
    जब सब तुम्हे टूटते देखने की ख्वाहिश रखे होंगे, तब वो नज़रों की चमक तुम्हारा हौसला अफजाई करेंगी,
    तुम्हें याद आएंगे निराशा के वो पल जब लौट जाने के ख्याल तुम्हें सम्मोहित कर रहे थे,
    जब तुम खुद का सहारा बने थे,
    कैसे कहा था तुमने खुद से,"बस कुछ कदम और, फिर तुम्हारे पदचिन्हों पर एक काफिला होगा",
    "बस रुकना नहीं, थकना नहीं, चलते रहना... कुछ कदम और कुछ कदम और"।।

    ©era_of_shayar
    (ANUPAM KUMAR MISHRA)

  • era_of_shayar 7w

    Part -1

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    सुहानी सुबह..!!

    एक रोज एक नई सुबह होगी,
    नया सूरज निकलेगा नई उम्मीदों की लालिमा लेकर,
    ये रौशनी तुम्हें दिशा बताएगी, जिस पर आगे बढ़ तुम्हे एहसास होगा, कि,
    बीती रातों के सपने बांह फैलाए तुम्हे अपनी और बुला रहे हैं,
    बरसों की तलाश आज तुम्हारे सामने है,
    दिल और दिमाग तुम्हें इस कदर बेचैन करेंगे कि,
    ख्वाब और हकीकत का फासला मिट जाएगा,
    तुमने जो इतना लंबा सफर तय किया है उसकी मंजिल तुम्हारे सामने है,
    हर मोड़ पर लिए फैसले अब इतिहास लिखने को बेताब हैं,
    सफर की थकान महसूस नहीं हो रही, पांव के छाले कब भर गए ये एहसास ही नहीं होगा..!!

    ©era_of_shayar
    (ANUPAM KUMAR MISHRA)

  • era_of_shayar 7w

    मशरूफ हो गया है दिल खाली नहीं रहता,
    अब मैं बैठे बैठे खो जाता हूं सिर्फ ख्याली नहीं रहता,
    और आफताब से कहो समेट ले इन उजालों को,
    अंधेरे आते होंगे उन्हें मेरे घर का रास्ता मालूम नहीं रहता..!!

    ©era_of_shayar
    (ANUPAM MISHRA)

  • era_of_shayar 8w

    उस शख्स को कितना समझना पड़ा मुझे,
    किसी निगाह के सामने खुदको जलाना पड़ा मुझे,
    उड़ गया हवाओं की शोहबत में परवाज़ को,
    पंख जब कटे तो लौट ज़मीं पर आना पड़ा मुझे..!!

    ©era_of_shayar
    (ANUPAM MISHRA)

  • era_of_shayar 8w

    बुला लो सितारों को की कब तक ये जाम चले,
    नज़्म मेरी पूरी हुई अब मुशायरा में कयाम चले,
    कुछ अफसानों ने जिंदा रखा है नाम मेरा,
    जिस्म तो फूक दिया हमने एक लाश सरेशाम चले..!!

    ©era_of_shayar
    (ANUPAM MISHRA)

  • era_of_shayar 8w

    पत्ता पत्ता बूटा बूटा दर्द मेरा जाने है,
    एक परिंदा जो बस आसमां को पहचाने है..!!

    ©era_of_shayar
    (ANUPAM MISHRA)

  • era_of_shayar 8w

    लिख रहा हूं कि कलम टूटने को है,
    कुछ जुगनू थे मेरी आंख के जो बुझने को है,
    बरसों का कलाम चंद लम्हों में सिमट रहा है,
    थक गया हूं सफर से अब आंख मेरी लगने को है..!!

    ©era_of_shayar
    (ANUPAM MISHRA)