Grid View
List View
Reposts
  • ekta__ 3d

    अगर ग़ुमसुम कभी बैठूँ
    तो मेरी ज़ुल्फ़ सहलाना
    फ़क़त इतना मुझे चाहना
    महज़ इतना मुझे चाहना

    ये बे-मतलब की सब बातें
    तुम्हें मैं ख़ुद बता दूँगी
    मग़र जो कह नही पाऊँ
    वो बातें ख़ुद समझ जाना
    फ़क़त इतना मुझे चाहना

    अगर नाराज़ हो जाऊँ
    तो कोई गिफ़्ट मत लाना
    बस मेरी गोद में सिर रखके
    कोई शेर कह देना या
    कोई गीत गुन-गुनाना
    फ़क़त इतना मुझे चाहना

    मेरी वफ़ा से वाकिफ़ हो
    ऐसा मुमकिन नही फिर भी
    किसी के साथ देख लो मुझे
    तो बिल्कुल सह नही पाना
    फ़क़त इतना मुझे चाहना

    सुनो ये दौर नाज़ुक है
    और मिलना है बहुत मुश्क़िल
    मैं उम्र भर को सो जाऊँ अग़र
    तुम ही तुम ख़्वाब में आना
    फ़क़त इतना मुझे चाहना
    ©ekta__

  • ekta__ 2w

    मैंने देखा था उन दिनों में उसे
    जब वो खिलते गुलाब जैसा था
    उसकी पलकों से नींद छटती थी
    उसका लहजा शराब जैसा था

    उसकी ज़ुल्फ़ों से भीगती थी घटा
    उसका रुख़ महताब जैसा था
    लोग पढ़ते थे हाल~ओ~खद उसका
    वो अदब की किताब जैसा था

    बोलता था ज़ुबान ख़ुश्बू की
    लोग सुनते थे धड़कनों में उसे
    मैंने देखा था उन दिनों में उसे

    सारी आँखें थी आईने उसके
    सारे चेहरों में इंतिख़ाब था वो
    सब से घुल मिल के अजनबी रहना
    एक दरिया नुमा सराब था वो

    ख़्वाब ये है के वो हक़ीक़त था
    ये हक़ीक़त है ख़्वाब था वो
    दिल की धरती पे आसमाँ की तरह
    सूरत~ए~साया~ए~साहब था वो

    अपनी नींदें भी उसकी नज़्र हुईँ
    मैंने पाया था रतजगों में उसे
    मैंने देखा था उन दिनों में उसे

    जब वो हस हस के बात करता था
    दिल के ख़ेमे में रात करता था
    रँग पड़ते थे आँचलो में उसे
    मैंने देखा था उन दिनों में उसे

    ये मग़र देर की कहानी है
    ये मग़र दूर का फ़साना है
    उसके मेरे मिलाप में हायल
    अब तो सदियोँ भरा ज़माना है

    अब तो ऐसा है हाल अपना भी
    दश्त~ए~हिज्रां की शाम जैसा है
    क्या ख़बर इन दिनों वो कैसा है
    मैंने देखा था उन दिनों में उसे

    ~मोहसिन नक़वी

  • ekta__ 3w

    दिल इस तरह क़सम से तेरे ध्यान में खोता हैं
    जैसे मरके शख़्स कोई श्मशान में खोता हैं
    ©ekta__

  • ekta__ 4w

    ज़रूर तुझको छू के आ रही है
    हवाएँ मेरा घर महका रही है

    जिस तरफ़ भी देखती हूँ मुझे
    तेरी सूरत ही नज़र आ रही है

    तुझे महसूस करने का असर है
    मेरी आँखों में चमक छा रही है

    तेरी कमी फ़िलहाल जीवन में
    बड़ा हड़कंप सा मचा रही है

    इतना दूर रखके हमको क़ुदरत
    बस मेरा सब्र आज़मा रही है

    मग़र दिल के बहुत क़रीब हो तुम
    बात ये धड़कने समझा रही है

    चाँद भी तेरी खूबसूरती से जलता है
    राज़ ये चाँदनी बतला रही है
    ©ekta__

  • ekta__ 4w

    Dil jalayenge dil raakh hone tak
    Tujhe chahenge sirf tujhe... khaak hone tak
    ©ekta__

    Read More

    दिल जलायेंगे दिल... राख़ होने तक
    तुझे चाहेँगे सिर्फ तुझे... ख़ाक होने तक
    ©ekta__

  • ekta__ 5w

    Aaisa khoya ke phir kabhi paaya hi nahi
    Jaane wala dubara laut kar aaya hi nahi

    Aakhiri baar jab dekha tha yahi din the woh
    Deedar~e~talab ko nazar aajtak aaya hi nahi

    Uski dhadkan ki awaaz ko sunte bhi toh kaise
    Usne seene se kabhi humko lagaya hi nahi

    Adhmare khwaab ne ankhon ki woh haalat kardi
    Phir koi khwaab inn aankhon ne sajaya hi nahi

    Kabhi toh hoga uss taraf bhi asar chahat ka
    Issi umeed mein dil kahin aur lagaya hi nahi
    ©ekta__

  • ekta__ 5w

    मिलने की तरह मुझसे वो पल भर नही मिलता
    दिल उससे मिला जिससे मुक़द्दर नही मिलता

    ~ नासिर तुराबी

  • ekta__ 5w

    अब ये तमाशा पूरी रात मेरे साथ रहेगा
    तू ख़्याल बनके मेरे ज़ेहन में आबाद रहेगा
    ©ekta__

  • ekta__ 5w

    बहुत अजीब हैं ये बंदिशे मोहब्ब्त की फ़राज़

    ना उसने क़ैद किया ना हम फ़रार हुए

  • ekta__ 6w

    लड़े, रूठे, चाहे नाराज़ रहा करे

    उससे कहना के बस मेरे साथ रहा करे
    ©ekta__