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Reposts
  • drusha 7w

    मुर्दो की बस्तियाँ ,,,,,,,,,,,,,,
    मआतम मनाती हस्तियाँ,,,,,,,,,,

    खोफ का माहोल है,,,,,,,,,,,,,
    रोती सिसकती जिंदगियाँ,,,,,,,,,,,,

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    नमी

  • drusha 14w

    बेफ़िकर रहती हू,,,,,,,,,,,,
    कैसे कहूँ तुझमे रहती हू,,,,,,,,,,,
    ©drusha

  • drusha 16w

    कुछ बदला नहीं दिल अब तलक तेरा तलबगार है,,,,,
    खामोशीयाँ बस मेरा आखिरी हथियार है,,,,,,,,,,,
    जज्बातों का सैलाब चरम पर पहुँचकर थम गया,,,,,,
    शायद वक़्त- ए -हालात की यही दरकार है,,,,,,,,,,,,
    ©drusha

  • drusha 22w

    जब बिखरी हु अदतं,,,,,,,,,,,,,,,
    निखरी हू बेइंतेहा ,,,,,,,,,,,,,,,

    इन लकीरों मे उलज़ी,,,,,,,,,,,
    सिसकी हु बेइंतेहा,,,,,,,,,,,,,,,,,

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    Hashu

  • drusha 27w

    तुम आदतं मेरे साथ रहते हो,,,,
    कैसे हो, क्या हो, ,,,,,,,,,,,,,,,,,
    गुफ्तगु हो, या खामोश रहते हो,,,,,,,,,,,,
    करीब हो दूर हो, कोई फ़ास्ला अब नहीं,,,,,,,,,,,,
    तुम मेरे हर अहसास मे साथ रहते हो,,,,,,,,,,,,
    मेरी पेसानी पर सिलबटो जैसे,,,,,,,,,,,,
    चेहरे पर मुस्कान जैसे,,,,,,,,,,,,,,,,,
    मै कभी तन्हा रही भी नहीं,,,,,,,,,,,,,,,,,
    सर पर आसमा से रहते हो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
    जिदगी मे अरमां जैसे,,,,,,,,,,
    मेरी जाँ और ईमान जैसे हो,,,,,,,,,
    अब जुदाई का कोई मजर नहीं,,,,,,,,,,,
    इतना समाये हो मुझमे तुम,,,,,,,,,,,,
    जैसे भी हो अजीज रहते हो,,,,,,,,,,,,
    जिक्र क्यू करूँ मेरी जरूरत हो तुम,,,,,,,,,,,
    जब याद करूँ मेरे हमराज होते हो,,,,,,,,,,,,,
    जुदाइयाँ कभी थी ही नहीं ,,,,,,,,,,,,,,,
    कुछ तेरी हद थी कुछ मजबूरियाँ थी मेरी,,,,,,,,,,,,,,,,
    तुझे तकलीफ़ न हो सोचती हुँ यही,,,,,,,,,,,,,,,,
    तेरा हर फेसला कुबुल् है मुझे,,,,,,,,,,,,,,
    तेरी ख़ुशी मे छुपी मेरी ख़ुशी हो,,,,,,,,,,,,,,,
    जुदा हो इस तरह हम मिले नहीं,,,,,,,,,,,,,,,
    दर्द का दर्द से रिश्ता था ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
    इससे जियादा चाहा ही नहीं,,,,,,,,,,
    निर्लोभी रिश्ते है आसानी से टूटते नहीं,,,,,,,,,,,,,,
    तकलीफ़ों के अहसास की फसल पर ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
    लहलहाते कीमती रिश्ते है हमारे पास,,,,,, ,,,,,,,,,,,,
    जिंदगी देगे, कभी हम जुदा होंगे नहीं,,,,,,,,,,,
    कभी खलिश आ जाती है खता हो जाती है,,,,,,,,,,,,,,
    इंसान है कोई ख़ुदा तो नहीं,,,,,,,,,,,,,,,
    जिसे याद आख नम कर जाए ,,,,,,,,,,,,,,,,,
    वो मामूली रिश्ते होते नहीं,,,,,,,,,,,,,,,,
    फ़िर क्या शिकवा तूने कुछ कहा या कहा नहीं,,,,,,,,,,,,,
    हा कभी बेपरवाह हुए भी नहीं,,,,,,,,,,,,,,
    तू आज भी मेरा खुदा है,,,,,,,,,,,,,,,,,
    मैने दर बदला ही नहीं,,,,,,,,,,,,,

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    गुफ्तगु
    ©drusha

  • drusha 30w

    शोत्र है प्रेम , सुखा नहीं सकते,,,,,,,,,,,,,,
    चाहकर भी पनपा नहीं सकते,,,,,,,,,,,,,,

    अविरल गंगा सा रूप है इसका,,,,,,,,,,,,,,
    चाहकर अवरोद् कर नहीं सकते,,,,,,,,,,,,

    मैली होकर भी पतित पावन है,,,,,,,,,,,,,
    प्रेम छूकर मैला कर नहीं सकते,,,,,,,,,,,,,

    युं ही नहीं इतराती इठलाती है,,,,,,,,,,,,,,,,
    पापी छवि धूमिल कर नहीं सकते,,,,,,,,,,,,,,,,,

    ऐसा प्रवाह महसूस किया है इसका ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
    नजदीक हो विवाद कर नहीं सकते,,,,,,,,,,,,,,

    अहसास की ज़मी अपनी अपनी है,,,,,,,,,,,,,,,,
    ये नमी आप कम कर नहीं सकते,,,,,,,,,,,,,,

    पूजनीय है रहेगी सदियों तक गंगा ,,,,,,,,,,,,,,
    आस्था है आप गलत कर नहीं सकते,,,,,,,,,,,,,,

    मर्यादा और समर्पण से बहती हू बिंदास,,,,,,,,,,,,,,,,,
    मुझे आहत कर युं खत्म कर नहीं सकते,,,,,,,,,,,,,,,,,,

    कुछ ऐसा ही है प्रेम मेरा और उसका ,,,,,,,,,,,,,,,,
    कोशिश कर तबाह कर नहीं सकते,,,,,,,,,,,,,,,,,

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    H

    मेरी जुबानी
    ©drusha

  • drusha 33w

    कैसे यकी करूँ अब आप नहीं है,,,,,,,,,,,,,,
    ख्यालात है, हकीकत ए खास नहीं है,,,,,,,,,,,,

    आपकी रूह बसी है हम सभी मे,,,,,,,,,,,,,,,,,
    अहसास वही है जिस्म से पास नहीं है,,,,,,,,,,,,,,,

    आपके होसले तहजीब से रूबरू है,,,,,,,,,,,,,,,,
    आपका दिया आसमां है आप नहीं है,,,,,,,,,,,,,,

    जब तलाशते है बजूद अपना अपना,,,,,,,,,,,,,,,,
    सभी मे आपका अक्स है आप नहीं है,,,,,,,,,,,,,,

    रूप बदला, सूरत भी बदल गई गोया,,,,,,,,,,,,,,,
    वनस्थली मे खुशबु है, आपकी आप नहीं है,,,,,,,,,,,,,

    नाम नहीं विचारों, संस्कारों का पाठ है आपका जीवन,,,,,,,,,,,,,
    हम सभी मे आपकी परछाई है आप नहीं है,,,,,,,,,,,,,,,

    सोचती हुँ बेशुमार रहमत है आपकी हमपर,,,,,,,,,,,,
    कैसे मन को समझl पाऊ की आप नहीं है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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    पथ

  • drusha 34w

    प्रीत की रीत न जाने मनवा,,,,,,,,,,,,,,

    इक आँख रोए दूजी भी रोए,,,,,,,,,,,,,,,
    चैन कहा मन पाए रे मनवा,,,,,,,,,,,,,,,,,,

    बिछड़ कल पर बरसो लागे,,,,,,,,,,,
    नैना दिन रैन तके पथ मनवा,,,,,,,,,,,,

    भाषा नैनो की पड़ न पावे ,,,,,,,,,,,,,,,,
    ठगा हुआँ सा मेरा मनवा,,,,,,,,,,,,,,,,

    प्रीत कहा ऐसी कर पावे,,,,,,,,,,,,,,,,,
    धरती गगन मगन हो मनवा,,,,,,,,,,,,,,,,

    दिन और रैन वैरी हो पावे,,,,,,,,,,,,,,,,
    रोए- रोए कजरा बहे मनवा,,,,,,,,,,,,,,,,,

    कर्मं गति की जो कोई पावे,,,,,,,,,,, ,,,,
    हरि हरे सबहै पीर मोरे मनवा,,,,,,,,,,,,,,,

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    मनवा

  • drusha 34w

    मुहब्बत तेरे बगैर अच्छे थे ,,,,,,,,,,,,,
    जब की जताना पड़ता है,,,,,,,,,,,,,
    अजब किरदार है मुहब्बत????????
    ऐतबार हर लम्हा कराना पड़ता है,,,,,,,,,,,,,,,

    युं तुमसे जियादा ,,,,,,,,,,,,,,,,
    किसी से ताल्लुक नहीं,,,,,,,,,,,,,
    ख़ास हो हर दफ़ा,,,,,,,,,,,,,,,,
    बताना पढ़ता है,,,,,,,,,,,,,,,,,

    कब तू दिल मे,,,,,,,,,,,,,,,,
    आ बसा ख़मोशी से,,,,,,,,,,,,,,,,
    मुहब्बत को जहाँ से,,,,,,,,,,,,,
    छुपाना पड़ता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

    मामला अच्छे लगने,,,,,,,,,,,,,,
    से शुरू हुआँ ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
    सबसे अच्छे हो,,,,,,,,,,,,
    यकीं दिलाना पड़ता है,,,,,,,,,,,,,

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    सबसे अच्छे

  • drusha 34w

    तेरे रंग मे रंग गई मै फ़िर बदल गई,,,,,,,,,,
    जिस राह तू गया मै उधर निकल गई,,,,,,,,,,,,

    कुछ पाने का जुनूँ था कुछ देने का सुकूँ,,,,,,,,,,,,,,
    इसी जददो जहद मे उमर निकल गई,,,,,,,,,,,,,,,

    बेनाम सा रिश्ता है दिल से अज़ीज है ,,,,,,,,,,,,,,,,,
    दखल ना करूँ ख़ामोश निकल गई,,,,,,,,,,,,,

    तकलीफ़ सताती है शामो ओ सुबहः तेरी,,,,,,,,,,,,,,,
    लब सी लिए थे मगर सिसकी निकल गई,,,,,,,,,,,,,,,

    कीमती है सभी सामां -ओ- हसरते,,,,,,,,,,,,,,
    तेरे चाह मे दिल की आरजू निकल गई,,,,,,,,,,,,

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