divyanshisuthar

Instagram @divii_suusuthar. Birth:19 may�� Dream:�� bkwas na kre qki m galiya dena uchit ni smzti

Grid View
List View
Reposts
  • divyanshisuthar 56w

    ��after a long tym ��‍♀��

    Read More

    मुसाफिर

    जात से घुमक्कड़ हूँ,बंजारा सा फिरता हूं
    नई नई राह,मेरी वफा राहगीरों से रखता हूं
    बंद पलकों से अपनी नई मंजिलें बुनता हूं
    खोल आंखों को ख्वाबों की मंजिल से मिलाता हूं
    माना...एक जगह पर कभी नहीं टिकता हूं
    हर दफा सुकून से भटकता ही रहता हूं
    पर..मैं घर बैठे व्यक्ति को हसीन दुनिया से वाकिफ कराता हूं
    मैं दुनिया को कलाकार के कला की मनोरमता भी दिखाता हूँ
    मुझे बेकार समझने वालों...
    मैं कोई अब्तर सा कीड़ा नहीं जो अत्फ में बिकता हूं

    ©divyanshisuthar

  • divyanshisuthar 75w

    ©divyanshisuthar

  • divyanshisuthar 83w

    मैं बहुत कोशिश करती हूँ,कई अपनो के साथ अच्छा बनकर रहने कि पर मेरी जुबान मेरा साथ नहीं देती, बस फ़ीर इधर से जुबान चली ओर उधर सामने वाले की जली
    ©divya suthar

  • divyanshisuthar 84w

    बेशक मुझे आजादी प्यारी है,पर
    इतनी भी नहीं की बापु की पगड़ी किसी के पैरों में गिर जाए
    पापा की इज्जत से बढकर हो ऐसे कोई ख्वाब ही नहीं सजाए



    ©divyanshisuthar

  • divyanshisuthar 85w

    मां भारती

    मेरे देश के कपूतों से दरिंदगी की हदें पार हर रोज होती है
    की अब मुझे मां भारती होने पर शर्मिंदगी महसूस होती है
    मेरे रक्षको के रहते मेरी बेटियों के साथ ऐसी क्रूरता होती है
    हैवानियत की जिस्म की भूख शरीर को यूं नोच डालती है
    रीढ तोड़ना छोटी बात है,यहां जीभ तक काट दी जाती है
    जलाना भी कम है,यहां आंतो में रोड़ भी डाल दी जाती है
    दरिंदगी से हाथ डालकर अंतङिया बाहर खींच ली जाती है
    जो हाथ ना लगे आंटी ....तो माल कहकर टाल दी जाती है
    मां भारती की बेटियां ऐसे असीम प्रेम में पलती है
    कुछ दबंगो कि वजह से हर रोज जलील होती हैं
    जो रहती है सुर्खियों में,,,,वो तो न्याय पा लेती है
    जिनकी बंद जुबान वो हर पल गंदगी में मरती है
    मां मत छोड़ना अपनी बेटी को अकेला ना जाने कब चाचा चेप हो जाए
    यह पावन धरा ऐसी है कि यहां 2 साल की बच्ची के साथ भी रेप हो जाए
    समझ नी आता कानून इतना वक्त क्यों लगाए
    उन दरिंदों में भी वही रोड़ क्यों ना घुसाई जाए
    कम है रीढ तोड़ना,जीभ के बदले कर्दन काटी जाए
    दरिंदों को भी जलाकर राख क्यों ना कर दिया जाए
    मोमबत्ती जलाकर शांति और न्याय की गुहार लगाए
    ये भारतीय संस्कृति नहीं,
    जैसा दोष वैसी ही सजा दी जाए
    ©divya suthar

  • divyanshisuthar 88w

    हकीकत से इसका कोई संबंध नहीं है������������

    Read More

    इश्क ए फसाना

    तू हर किसी को खोने का शौकीन मैं तुझे मिलने में मगरूर करूं
    खोए ना मेरी आंखों से मोहब्बत का मोती ऐसा तुझे नाजरूर करूं
    नफरतों के बाजार में घूमते हो आओ कभी तुम्हे इश्क से आबरू करूं
    अभी मिले हो सिर्फ धड़कनो से आओ कभी तुम्हें मेरी रूह से रूबरू करूं



    ©divyanshisuthar

  • divyanshisuthar 90w

  • divyanshisuthar 91w

    शायद यही सही समय है,
    समय को बदलने का

    ©divyanshisuthar

  • divyanshisuthar 91w



    हर पुत मर मिटने को तैयार इसके दरमियांने में
    हर रस झलकता है हिंदुस्तान को बखाने मे
    दुश्मन पंगा ना ले फौजियों के तहखाने में
    यहां हर कोई मर मिटता है इंकलाब के महखाने में
    कोशिश ना करना फसाने की इसे अपने पेचखाने में
    तुम खुद ही मात खा जाएगो खुद के सैयखाने में
    ©divyanshisuthar

  • divyanshisuthar 93w

    Congrats chachu & chachi

    देखो आसमां से उतरके चांदनी आई है
    दीपक की भांती पावन रोशनी आई है
    खुश होना लाजमी है उस ईंसान का
    जिस घर जन्नत सी हीर नूरानी आई है
    ©divya suthar