divine_love_words

अफसानानिगार

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  • divine_love_words 29w

    कहते हैं अंत में सब ठीक हो जाता है
    कमबख़्त ये अंत कब आता है!

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  • divine_love_words 29w

    कुछ रिश्ते इजहारों के मोहताज़ नहीं होते
    जरा सी लड़ाईयों पर नासाज़ नहीं होते

    गुफ़्तगू बेशक़ नाकामयाब रहे दरमियाँ
    मोहब्बत वाले दिल कभी नाराज़ नहीं होते

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  • divine_love_words 29w

    किरदार सब झूठे लगते हैं उस कहानी के
    जिसे जहन में हमने हकीकत बना रखी थी
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  • divine_love_words 31w

    खुशियों की दस्तक, तेरे कदमों की आहट
    रेतीली सी बेला में, तू प्यासे की पनघट
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  • divine_love_words 31w

    मेरी सब लड़ाईयाँ मुस्कुराहट से अपनी तुम फौत कर देते हो
    कहो ये शिकवे-शिक़ायत, लड़ाई-झगड़े तुम्हें आते क्यों नहीं
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  • divine_love_words 32w

    तेरे कांधे पर सिर रख कर रक़ीबों को भी रोये हैं हम
    ऐ सनम तुझसे और कितनी हमनवाई हम मांगें
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  • divine_love_words 33w

    कड़वा काला मीठा खट्टा
    जिंदगी तेरे हर स्वाद को
    चखना है मुझे
    उमस भरी रातों को
    शीत भरी सहरों से
    ढकना है मुझे
    सीखना है मुझे
    दुःख के घने बादलों से
    खुशियों के इंद्रधनुष निकाल लाना
    और तेरी भूरी भद्दी सूरतों को भी
    चमकते आइने में
    तकना है मुझे
    तुझे तराशते रहना है
    आखिरी सांस तक
    जिंदगी तेरे संग
    हर तंग किनारों से
    बहना है मुझे।
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  • divine_love_words 34w

    @rajkssora
    चाय से मेरी दोस्ती उतनी ही पुरानी है जितनी कि तुमसे। चाय से अपनी पुरानी खुन्नस रही है। चाय की खुश्बू से ले कर स्वाद तक, कुछ भी हमें पसंद न था। चाय पीने जाऊँ और मेरी जीभ न जले ऐसा कभी न हुआ। भरी दुपहरी या मई-जून की गर्मी में चाय पीने वाले लोग मुझे ताड़ी पीने वालों से कम बौराये हुए नहीं लगते । एक तो गर्मी ऊपर से गर्म पेय कोई भला क्यों पिये ये बात मेरी समझ के बाहर थी। मेरे हिसाब से चाय कॉफ़ी सर्दियों के सामान हैं। फिर हुआ यूँ की सर्दियों में ही वसंत बन के तुम आ गए। और तुम्हारे साथ बकबक सुनना और चाय पीना दोनों शुरू कर दिया हमने। पीना तो अब भी नहीं आया है। अब भी ठंढा कर के पीते हैं। पर हाँ बनाना जरूर आ गया है। अब अक्सर खुद के लिए बना लेते हैं और बालकनी में बैठ कर तुम्हारी मौजूदगी महसूस कर लेते हैं। कभी चायपत्ती थोड़ी कम होती है कभी दूध, पर चीनी बराबर रहती है। पर तुम कभी शिकायत नहीं करते। और हाँ ! चाय हमें नीट ही पसंद है, बिना अदरक इलायची के। जैसे तुम हो, बिना ढोंग-आडंबर के।

    #internationalteaday #tea #oreocookie

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    हम-तुम और चाय

    चाय मुझे नीट ही पसंद है, बिना अदरक-इलायची के।
    जैसे तुम हो, बिना ढोंग-आडंबर के।
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  • divine_love_words 34w

    जिंदगी मयस्सर करने के
    सबके तरीक़े अपने हैं
    कोई चुनता सफेदी
    मन का है
    किसी के बड़े रंगीन
    सपने हैं।

    कोई बनाता है राई के महल
    दुनिया को दिखाता है
    कोई बना कर छोटे घरौंदे
    उन्हें ख्वाबों से सजाता है

    कोई डरता जमाने से
    "लोग क्या कहेंगे" पर जीवन बिताता है
    कोई बना कर प्रेम को धुरी
    जीवन को स्वर्ग बनाता है।
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  • divine_love_words 35w

    कितने झूठे थे हम मोहब्बत में
    तुम भी जिंदा हो, हम भी जिंदा हैं

    ~जौन एलिया