divine_love_words

अफसानानिगार

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  • divine_love_words 10w

    आलिंगन ज्योतिर्लिंगम का, सर्व सुखों से ऊपर है
    ईश विराजे मन मंदिर है, स्वर्ग इसी धरा के भू पर है
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  • divine_love_words 10w

    ये क्या है, क्यों है, सब तेरे हिस्से प्रभु
    मेरा हिस्सा है बस तेरा शुक्रगुज़ार होना

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  • divine_love_words 10w

    है जो गंदगी सब निचोड़ दूँ
    आ जंगल तुझमें छोड़ दूँ

    प्रकृति तुझे जो दूषित करे
    वो हाथ सब मैं मरोड़ दूँ
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  • divine_love_words 10w

    जो तूने दिया, सब लौटा सकूँ
    तुझे फिर से हरा, मैं बना सकूँ

    दोहन तेरा फिर न हो कभी
    प्रकृति तुझे फिर से मैं सजा सकूँ

    वो शक्ति जरा बटोर लूँ
    अंधभक्ति मन से निछोड़ दूँ

    तू है ना मेरे साथ माँ
    आ तुझमें जंगल फिर से छोड़ दूँ।
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  • divine_love_words 13w

    वक़्त के साथ सबकुछ बदलेगा
    हम, हमारी आकांक्षाएं
    हमारा परिवेश, हमारी प्राथमिकताएं
    बस नहीं बदलेगा
    मेरा तुम्हारा और तुम्हारा मेरा होना
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  • divine_love_words 16w

    खींचेगी दुनिया मेरे पैरों के नीचे की जमीन
    तुम सर पे मेरे आँचल की छाँव रख देना

    पूछी जाएगी जहाँ में औक़ात मेरी
    तुम मेरे हाथों में अपना हाथ रख देना
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  • divine_love_words 19w

    हमारे रिश्ते को जो बात खास बनाती है, वो ये की मुझे तुम्हें खो देने का डर नहीं है। तुमसे बिछड़ के कैसे रहूँगी ऐसी कोई कल्पना ही नहीं हुई। मैं तुममें अपना जन्नत नहीं ढूंढती। जन्नत तो भीतर होता है। तुम उस जन्नत का गुलाबी मौसम हो। भीतर जन्नत पैदा किये बगैर कोई मोहब्बत मुकम्मल नहीं हो सकती। हम मुक़म्मल हैं क्योंकि हमारी रूह जन्नती है। और हमारी मोहब्बत रूहानी। तुम्हारा नहीं होना सम्भव ही नहीं है। जैसे दोपहर को रात नहीं हो सकती। वैसे ही अलग हमारी ज़ात नहीं हो सकती। कुछ चीजें जोड़े में बनाई जाती हैं। जैसे मैं और तुम।
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  • divine_love_words 20w

    जग-विजय

    जीतने से पहले धरा को
    मन के दानव को हरा लो
    फिर जीत कर विपत्तियों को
    चरणों की तुम धूल बना लो

    जितना चाहो जो जग को
    जीत लो पहले तुम मग को
    मन से बड़ा शत्रु नहीं है
    मन से बड़ा अस्त्र भी नहीं

    बंद कर के नयनों को
    खोल लो अन्तरचक्षु
    झाँक लो अपनी दरारें
    जान लो अपनी कमी को

    चलो एक कदम तो उठाओ
    रास्ता कठिन भले है
    एक बार तो शुरू करो
    चलो जरा, चलते ही जाओ

    बिन रुके जो तुम चले
    जीत निश्चित है तुम्हारी
    सारे कंटक, हर असफलता
    ईश्वर ने है दूर कर डाली

    अब कुछ भी नामुमकिन नहीं है
    मुट्ठी में क़िस्मत तेरी है
    हर साँस से हर आस तक
    अब सब तेरी है, सब तेरी है

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  • divine_love_words 22w

    मुझे समंदर नहीं पसंद, जिसकी लहरें पल पल बदलती रहती हैं। मुझे बदलने वाली चीजें नहीं पसंद। मुझे शोर नहीं पसंद और समंदर बहुत शोर करता है। उसके शोर में दिल की आवाज़ कहीं खो सी जाती है। और जहाँ दिल की आवाज़ दबा दी जाए वहाँ ठहरना मानों जिंदगी की नाशुक्री करना। मुझे दरिया नहीं बनना जो अंत में समंदर से जा मिले। मुझे झील पसंद है। झील का पानी कुछ यूँ ठहरा हुआ सा लगता है जैसे लंबे सफर का मुसाफिर मंजिल मिलने पर हमेशा के लिए ठहर गया हो। पुरसुकून हो कर बस वहीं अपनी दुनिया बना कर बस वहीं का होकर रह गया हो। तुम मेरी जिंदगी का वही ठहराव हो। जहाँ सुकून है।जहाँ झील की रुमानियत है। बदलते लहरों के खौफ नहीं। मुझे भी झील की पानी की तरह बस तुम पर ठहर जाना है। यहीं अपनी दुनिया बनानी है।
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  • divine_love_words 22w

    कि अबकी दफ़ा पुराने सब हिसाब करता गया कोई
    कपड़े-लत्ते, रुपये-पैसे बकाए के, लेता गया कोई
    समेट कर ऐसे गया कोई यादें बची नहीं
    शब्द जब्त हो गए, दरम्यां मौन खिंची रही
    बची रही मेरे हाथों बनी उसकी "भद्दी" सी एक स्केच
    कमरे से जहन तक आज भी वही खिंची रही

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