devendra_shukla

Aspirant,music lover,sometimes writer

Grid View
List View
Reposts
  • devendra_shukla 13w

    आसान नही किसी से जुदा होकर रहना पर मंज़िल है पाना तो कुछ फैसले लेने होते
    ©devendra_shukla

  • devendra_shukla 15w

    चलो मौसम ने फितरत तो बदली
    नही तो हाल बेहाल था इस कदर
    चलो फ़िज़ा रंगीन तो हुई कुछ
    सुकूँ मिला इस बेकरारी के आलम
    ©devendra_shukla

  • devendra_shukla 15w

    अधखुली आँखों से देखे ख़्वाबों में जीना सीख गए
    ख़्वाबों को हक़ीक़त करना मुकम्मल जहाँ ने सिखा दिया
    ©devendra_shukla

  • devendra_shukla 15w

    इतना आसान नही होता किसी का आदर्श बनना
    कुछ ख़्वाबों की बलि तो कुछ में जीना होता है
    ©devendra_shukla

  • devendra_shukla 16w

    अपने एहसास को हिंदवी में बयां करते देखा है
    उन्ही शायर को अंग्रेजी में गुफ़्तगू करते देखा है

    बोली को ऊँच नीच का पैमाना बनते देखा है
    किसी के लिए लोगों के नज़रिये को बदलते देखा है
    ©devendra_shukla

  • devendra_shukla 16w

    एक अरसे बाद मिला उनसे कुछ बात तो हुई
    धीरे धीरे ही सही पर सधी सी मुलाकात तो हुई
    ©devendra_shukla

  • devendra_shukla 16w

    #अफकार अल्वी

    Read More

    तजुर्बा था सो दुआ की क़े नुकसान ना हो
    इश्क़ मजदूर को मज़दूरी के दौरान न हो
    अफकार अल्वी

  • devendra_shukla 16w

    इस रचना का वास्तविकता से कोई लेना देना नही है☺☺@alkatripathi @dixitpriya22 @aryaaverma12 @anusugandh @saloniiiii

    Read More

    दूरियाँ बढ़ती रहीं
    वक्त भी बदलता रहा
    फिर भी कुछ बात पुरानी ही रही
    वक्त के साथ तुम न बदले
    तुम भी उन्ही बातों को लेकर बैठे रहे
    हमने भी कभी तुम्हे न समझ सके
    सिहर उठता रोम रोम
    कपकपी होती बदन में
    जब भी सोचता तुम्हारे लिए
    गलत जरूर हूँ तुम्हारी नजर में
    पर ये नज़र नही नज़रिया है तुम्हारा
    छोटी सी जिंदगी है इतना भी सोचना क्या
    मिलते है फिर वहीं
    करते हैं दूर गले शिकवे
    बदलते हैं प्रत्येक पल को बेहतरीन पलों में
    करते हैं वादा साथ निभाने का
    फिर न जुदा होने
    मिलते है फिर वहीं..............................
    ©devendra_shukla

  • devendra_shukla 16w

    शायद

    शायद तुम ख़्वाबों में हो इसलिए सामने नही होती
    पर तुम संग हो हर पल यह यकीं दिलाती हो मुझे
    ©devendra_shukla

  • devendra_shukla 16w

    हाँ मुझे वो हर लम्हा याद है
    तुम्हारा रूठ जाना झट से मान जाना
    वो नदी का किनारा जिसमें मिलते थे छिपकर
    वो चाँदनी रात में तुमसे मिलना याद है मुझे
    हाँ याद वो दिन जब मिले थे आखिरी बार
    तेरा यूँ ही चले जाना मुझे याद है