deovrat

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  • deovrat 2w

    Fairy Tales

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    Fragrances of few moments..
    in our lives..
    becomes just like fairy tales...
    are imprints in our brain...

    We cherish them always, forever....
    they are beyond...
    the limit of words to explain...

    Those moments remain forever.
    Imprint on heart and soul faded never.
    Days comes and goes.
    But such phrases of time are our treasure.
    ●●●
    ©deovrat 19.11.2021

  • deovrat 2w

    हौसला

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    सदियों से ग़म पिंघल कर अश्कों में ढल रहे हैं।
    वो दीदार-ए-ज़ुस्तज़ू में गिर कर संभल रहें हैं।।

    बादल दमकती बिजली वो काली घनी घटायें।
    ज़ीस्त-ओ-दहर में कब से तूफ़ां मचल रहें हैं।।

    आये हैं कैसे मौसम पतझड़ हो जैसे गुलशन।
    रंगीन दिल के अरमां रंग पलपल बदल रहे हैं।।

    मौसम गरम ज़बीं का तपते चमन की उलझन।
    गुलशन की आरज़ू में अब ख़ार पल रहें हैं।।

    ख़्वाहिश में जीतने की हरदम शिकस्त पाई।
    'अयन' के हौसलों में फ़िर पर निकल रहें हैं।।
    ●●●
    ©deovrat 'अयन' 18.11.2021

  • deovrat 3w

    भ्रम

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    उफ़ुक़ पर धूल उड़ती देख कर वो मुस्कुराता है।
    उसे लगता है कि जैसे हमनवां नज़दीक आता है।।

    हरारत तन में हल्की सी है मन में ढेर सी सिहरन।
    कहाँ यूँ ओर से मिलना भला अब उसको भाता है।।

    वस्ल की चाह में गुज़रे न जाने रात ओ दिन कितने।
    हिज़्र का फ़िक्र भी उसको मुसलसल ही सताता है।।

    करे शिक़वा शिकायत क्या नहीं है रूबरू कोई।
    ख़ुदी से बात करता फ़िर ख़ुदी से रूठ जाता है।।

    सर्द चाँदनी रातें, तन्हाई, फ़लक पर चाँद और तारे।
    इन्हीं बेताबियों से ही अब 'अयन' सुकून पाता है।।
    ●●●
    ©deovrat 'अयन' 14.11.2021

    हिज़्र=बिछड़ना

  • deovrat 3w

    तनहाई

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    शब-ए-फुरक़त की रातें एक बस उनका ख़याल।
    ज़वाब-ए-इंतज़ार में उलझे हैं सवाल दर सवाल।।

    ज़मीं पर तारी तन्हाई उफ़ुक़ पर चाँद एक तनहा।
    हरेक शय: ख़ुद से ही आज़िज़ फिर कैसा मलाल।।

    बदगुमानी की चादर में लिपटा अंजान सा चेहरा।
    फ़िर वही शाम-ए-तन्हाई मुसलसल एक ज़वाल।।

    उल्फ़ते आजिज़ी दीवानों को होती है किस क़दर।
    'अयन' ख़ुद देख कर हैरान क़ुदरत का ये क़माल।।
    ●●●
    ©deovrat 'अयन' 10.11.2021

    ज़वाल=आफत, झंझट
    उफ़ुक़=क्षितिज

  • deovrat 4w

    ठहराव

    ठहराव
    ●●●
    ज़िन्दगी आज कल थमी सी है।
    जाने किस बात की कमी सी है।।

    गर्म लगती है सर्द बाद-ए-सबा।
    दिल में कोई आग़ ये लगी सी है।।

    ना हैं ख़ुशबू से महकती कलियाँ।
    अब ना गुलशन में ताज़गी सी है।।

    ख़ुश्क आँखों से टपकता है लहू।
    कैसी...अंदाज़-ए-बेरुख़ी सी है।।

    वैसे हर शय:तो मुक़्क़मल है यहाँ।
    हाँ 'अयन' में ही कुछ कमीं सी है।।

    ज़िन्दगी आज कल थमी सी है।
    जाने किस बात की कमी सी है।।
    ●●●
    ©deovrat 'अयन' 08.11.2021

  • deovrat 5w

    नैनाभिराम

    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...
    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...

    रे मन भज ले राम कृपाला.... भव भंजन प्रभु दीनदयाला
    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...

    अवधपुरी पावन जगजानी करहुँ प्रणाम जोरि जुगपानी
    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...

    जन्में दशरथ के घर भाई शत्रुघन भरत लखन रघुराई
    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...

    दीनदयाल प्रणति प्रतिपालक राम सुमर मन चारों बालक
    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...

    बजरंगी सम को बड़ भागी जो सिया राम चरण अनुरागी
    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...

    मम हिय बसत सदा हनुमाना जाको राम भरत सम माना
    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...

    नीलकमल नव नीरज निर्मल दहन करें पावक सम खलबल
    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...

    आठो याम जपो सिय रामा करहिं कृपानिधि पूरण कामा
    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...

    सिंहासन पर सिया समेता....दुष्टदलन प्रभु कृपा निकेता
    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...

    सीता राम 'अयन' हिय राखी श्रुति सम्मति सब संतन भाखी
    राम सियाराम सियाराम जय जय राम...
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    ©deovrat 'अयन' 30.10.2021

  • deovrat 5w

    दुनियाँ

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    अलग हर बात का मतलब..निकालेगी दुनियाँ।
    मिज़ा से अश्क़ भी यक़ीनन चुरा लेगी दुनियाँ।।

    वो जो कहता है..हक़ीक़त की ही तो परछाई है।
    उसकी हर बात का अफ़साना बना लेगी दुनियाँ।।

    इश्क़ बेजानसी कोई शय: या तो कोई धोखा है।
    इश्क़ के नाम पे तुम्हें तुमसे चुरा लेगी दुनियाँ।।

    भूल के भी तुम ना कभी इश्क़ की बातें करना।
    वरना अंजान सी ग़फ़लत में फंसा लेगी दुनियाँ।।

    वह तेरे.. शहर की गलियों में भटकता क्यूँ है।
    'अयन' उसे भी तो दीवाना बना लेगी दुनियाँ।।

    अलग हर बात का मतलब निकालेगी दुनियाँ।
    मिज़ा से अश्क़ भी यक़ीनन चुरा लेगी दुनियाँ।।
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    ©deovrat 'अयन' 30.10.2021

  • deovrat 5w

    बेबसी

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    जिस ज़िंदगी की बात
    हम ताज़िंदगी करते रहे।
    सामने दिखती है फ़िर
    क्यूँ अब भी हमसे दूर है।।

    इस जहाँ में हर तरफ़ है
    जी के मरने की सज़ा।
    संगदिल ज़िन्दा 'अयन'
    यहाँ जीने को मज़बूर है।।
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    ©deovrat 'अयन' 26.10.2021

  • deovrat 6w

    सत्य

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    चंद लमहें चंद यादें मुख़्तसर सा है ये सफ़र।
    मुख़्तसर है ज़िंदगी यूँ मुफ़्त में ज़ाया ना कर।।

    हर बसर यूँ तो जहाँ में ख़ुदही में मसरूफ़ हैं।
    बारे-ग़म है ऐश-ओ-इशरत मुब्तला यहाँ रूह है।
    ग़र मिले जो कोई साथी साथ ले स्वीकार कर।।
    मुख़्तसर है ज़िंदगी यूँ मुफ़्त में ज़ाया ना कर।।

    सबकी की मरज़ी से चलेगा चाँद तारों का निज़ाम।
    इस भरम को छोड़ कर बस उन्स का हो एहतमाम।।
    मन की आँखें खोल अब तो सत्य का दीदार कर।।
    ज्ञान का दीपक जला कर ख़ुद को तू बेदार कर।।

    एक रंगीं ख़्वाब जैसी.... है ये दुनियाँ-ओ-दहर।
    कौन कब होगा ज़ुदा याँ.. है कहाँ किसको ख़बर
    ज्ञान का दीपक जला बस ईश का दीदार कर।।
    सत्य को ले मान "अयन" ख़ुदको ना बेज़ार कर।।

    चंद लमहें चंद यादें मुख़्तसर सा है ये सफ़र।
    मुख़्तसर है ज़िंदगी यूँ मुफ़्त में ज़ाया ना कर।।
    ●●●
    ©deovrat "अयन" 24.10.2021
    बेदार=जागरूक, बारे-ग़म=दुःखों का बोझ
    ऐश-ओ-इशरत=अय्याशी, मुब्तला=आसक्त
    उन्स=प्यार, एहतमाम=व्यवस्था, क़याम=ठिकाना

  • deovrat 6w

    असमंजस

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    वो भी क्या दिन थे कि
    जब हरेक बात पे हाँ थी।

    ख़ुलूस-ओ-वक़ार की,
    इफ़रात-ओ-इन्तेहा थी।।

    आज वो तिरछी नज़र है
    फ़क़त मयस्सर हमको।

    ग़र ये हक़ीक़त है 'अयन'
    तब वो सदाक़त क्या थी।।
    ●●●
    ©deovrat "अयन" 21.10.2021

    इफ़रात=बहुतायत। मयस्सर=उपलबद्धता
    हक़ीक़त=यथार्थ। सदाक़त=सच्चाई