deovrat

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  • deovrat 1d

    बेबसी

    ●●●
    जिस ज़िंदगी की बात
    हम ताज़िंदगी करते रहे।
    सामने दिखती है फ़िर
    क्यूँ अब भी हमसे दूर है।।

    इस जहाँ में हर तरफ़ है
    जी के मरने की सज़ा।
    संगदिल ज़िन्दा 'अयन'
    यहाँ जीने को मज़बूर है।।
    ●●●
    ©deovrat 'अयन' 26.10.2021

  • deovrat 3d

    सत्य

    ●●●
    चंद लमहें चंद यादें मुख़्तसर सा है ये सफ़र।
    मुख़्तसर है ज़िंदगी यूँ मुफ़्त में ज़ाया ना कर।।

    हर बसर यूँ तो जहाँ में ख़ुदही में मसरूफ़ हैं।
    बारे-ग़म है ऐश-ओ-इशरत मुब्तला यहाँ रूह है।
    ग़र मिले जो कोई साथी साथ ले स्वीकार कर।।
    मुख़्तसर है ज़िंदगी यूँ मुफ़्त में ज़ाया ना कर।।

    सबकी की मरज़ी से चलेगा चाँद तारों का निज़ाम।
    इस भरम को छोड़ कर बस उन्स का हो एहतमाम।।
    मन की आँखें खोल अब तो सत्य का दीदार कर।।
    ज्ञान का दीपक जला कर ख़ुद को तू बेदार कर।।

    एक रंगीं ख़्वाब जैसी.... है ये दुनियाँ-ओ-दहर।
    कौन कब होगा ज़ुदा याँ.. है कहाँ किसको ख़बर
    ज्ञान का दीपक जला बस ईश का दीदार कर।।
    सत्य को ले मान "अयन" ख़ुदको ना बेज़ार कर।।

    चंद लमहें चंद यादें मुख़्तसर सा है ये सफ़र।
    मुख़्तसर है ज़िंदगी यूँ मुफ़्त में ज़ाया ना कर।।
    ●●●
    ©deovrat "अयन" 24.10.2021
    बेदार=जागरूक, बारे-ग़म=दुःखों का बोझ
    ऐश-ओ-इशरत=अय्याशी, मुब्तला=आसक्त
    उन्स=प्यार, एहतमाम=व्यवस्था, क़याम=ठिकाना

  • deovrat 1w

    असमंजस

    ●●●
    वो भी क्या दिन थे कि
    जब हरेक बात पे हाँ थी।

    ख़ुलूस-ओ-वक़ार की,
    इफ़रात-ओ-इन्तेहा थी।।

    आज वो तिरछी नज़र है
    फ़क़त मयस्सर हमको।

    ग़र ये हक़ीक़त है 'अयन'
    तब वो सदाक़त क्या थी।।
    ●●●
    ©deovrat "अयन" 21.10.2021

    इफ़रात=बहुतायत। मयस्सर=उपलबद्धता
    हक़ीक़त=यथार्थ। सदाक़त=सच्चाई

  • deovrat 1w

    Interesting

    ●●●
    most amazing
    funny thing is that
    we all live our lives
    for everything which
    is almost unknown

    seeds planted through
    our deeds during our
    life span will rip into
    sweet fruits or just
    the sharp thorn

    we remain ignorant
    to this fact until  
    we face outcome
    of  the crop
    we swon*
    ●●●
    ©deovrat "अयन"  12.10.2021

  • deovrat 2w

    रामनवमी

    रामनवमी एवं दशहरा पर्व की अनन्तकोटि शुभकामनाएं

    शमी शमय मे पापं शमी लोहितकंटका।
    धारिण्यर्जुन बाणानां रामस्य प्रियवादिनी॥
    करिष्यमाणयात्रायां यथाकालं सुखं मम।
    तत्र निर्विघ्नकर्त्री त्वं भव श्रीरामपूजिते॥ ...
    अश्मंतक महावृक्ष महादोषनिवारक।
    इष्टानां दर्शनं देहि शत्रूणां च विनाशनम्॥

    ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम ,
    लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम !
    श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे ,
    रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः !

    ॐ रां रामाय नमः ! ॐ हं हनुमते नमः !

    पुनश्चः रामनवमी एवं दशहरा पर्व की
    अनन्तकोटि शुभकामनाएं

    deovrat 'अयन'

  • deovrat 2w

    रोचक

    ●●●
    सबसे आश्चर्यजनक
    एवं बेहद रोचक बात यह है
    कि हम कभी यह भी नहीं जान पाते
    की हमनें जीवनपर्यन्त अपने कर्मों द्वारा
    जो बीज रोपित किये थे वह मीठे फल के हैं
    अथवा तीक्ष्ण शूल के।

    हम तब तक
    इस तथ्य से नितांत अनभिज्ञ रहते हैं
    जब तक हमारे द्वारा रोपित एवं सिंचित
    कर्मों के कर्मफ़ल, कालांतर में हमारे
    सन्मुख नहीं आ जाते।।
    ●●●
    ©deovrat "अयन" 12.10.2021

  • deovrat 2w

    दस्तूर

    ●●●
    ज़माने में मोहब्बत का
    अज़ब दस्तूर देखा है।

    जिसकी खोज़ में तू है
    "अयन' ख़ुद तेरी तलाश में है।।
    ●●●
    ©deovrat "अयन" 11.10.2021

  • deovrat 3w

    नमो नमः

    सुख, शान्ति एवम समृध्दि मंगलमयी कामनाओं के साथ आप को शारदयी नवरात्री की हार्दिक मंगल कामनायें। माँ अम्बे आपको सुख समृद्धि वैभव ख्याति प्रदान करे।

    ●●●
    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।

    सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
    शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

    ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
    दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

    या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ।
    ॐ ग्लौ हुं क्लीं जूं सः
    ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
    ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा ।।

    देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परम् सुखम्।
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

    सर्वा बाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः।
    मनुष्यो मत्प्रसादेन, भविष्यति न शंसयः॥
    ●●●
    deovrat "अयन" 22.06.2021

  • deovrat 3w

    अंतर्मन

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    कहता है अंतर्मन
    यह रंग बिरंगी दुनियाँ
    हर पल बदलते वक़्त
    के आईने में

    हमारी स्वयं की
    परछाई को स्वयं से
    अलग दिखाने की होड़
    के सिवा 'अयन' कुछ भी नहीं
    ●●●
    ©deovrat 'अयन' 06.10.2021

  • deovrat 3w

    सच्चाई;

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    हम तुम और सब हैं
    अनंत विराट ब्रह्मांड में फैले
    कोटि कोटि क्षणभंगुर कीट पतंगों की
    दुनियाँ का एक अदना सा हिस्सा
    शामिल है उस कारवाँ में
    जो स्वयं में कभी ना
    ख़त्म होने वाली दौड़
    के सिवा 'अयन'
    कुछ भी नहीं
    ●●●
    ©deovrat 'अयन' 04.10.2021