deepakmandal

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When life gives me shits, i just pen it down.

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Reposts
  • deepakmandal 4w

    ये सफ़रनामा तुम्हारा नहीं,
    तुम्हे बस लगता है , तुम्हारा है ।
    तुम्हे रास्तों की, सफ़र की, हर मोड़ की,
    फ़िकर है ।
    ये सफ़र जिसकी आखिरी मंजिल,
    बस सिफ़र है ।

    ©deepakmandal

  • deepakmandal 5w

    गुज़रते हैं तो गुज़रने दो ,
    लम्हों का हिसाब क्यों रखें ।
    जो ना हुआ कभी हासिल हमें ,
    भला उसका ख़िताब क्यों रखें ।

    ©deepakmandal

  • deepakmandal 16w

    आधी रूह है क़ैद कहीं बादलों में ।
    और आधी , यहीं गुम है सवालों में ।
    आधा मैं , कई धागों से बँधा हुआ ।
    और आधा , आज़ादी में रमा हुआ ।
    ये जो आधी आधी की आँधी है ।
    इसमें कुछ बर्फ है, कुछ पानी है ।
    कुछ अधूरे मौसम हैं ,
    और एक अधूरी कहानी है

    ©deepakmandal

  • deepakmandal 17w

    कुछ बारिश बिन बारिश की तरह ,

    कुछ तुम अपने माज़ी की तरह ।

    जैसे बारिश हो रही और कहीं,

    कोई भीग रहा हो और कहीं ।

    तुम वो सब कुछ समेट कर,

    भेज देना मेरे पते पर ।

    जैसे देख रहा कोई और कहीं,

    और आए नज़र कोई और कहीं ।

    ©deepakmandal

  • deepakmandal 21w

    ज़ायके को ज़रा तसल्ली से घुलने दिया जाय ।
    मुझे ऐसी ही पसंद है, मेरी ज़िन्दगी और मेरी चाय ।

    ©deepakmandal

  • deepakmandal 26w

    घर था एक मिटटी का, आंगन था प्यारा सा ।
    कहते हैं उसमे थे पेड़ कई ।
    एक झूला बँधवाया था बाबा ने जिसपर ,
    करते थे झूला हम बारी बारी ।
    फूलों के पौधे थे,
    गुलाब, जूही और रात की रानी ।
    रातों में झींगुर भी गाते थे गाने ,
    और झूमता था मतवाला होकर गुलमोहर ।
    ऐसा ही था कुछ वो दूजा मकान भी ,
    जो अब है उस दीवार के पीछे ।
    पहले ना ये दीवार थी और
    ना ही था ये दूजा मकान यहाँ ।
    ये घर जो है अब दो कमरों का ,
    पहले था चार और आँगन बड़ा ।
    पहले जो गिरते थे आम हवाओं से,
    अब वो गिराए जाते हैं वक़्त से पहले ही ।
    रस्ता वही है उतना ही चौड़ा ,
    बस दरवाजों के दो हिस्से किए ।
    फूलों के पौधे हटा कर वहाँ अब तारें बिछाई है कांटों वाली ।
    अब जलते हैं दो चूल्हे वहाँ
    मगर पानी है आता एक ही नदी से ।
    शायद दीवार के लिए ईंटें कम पड़ गई होंगी ।

    ©deepakmandal

  • deepakmandal 26w

    बेसबर है बशर बहुत बयार के मानिंद ,
    ज़िन्दगी है कोई रेलगाड़ी नहीं है ।

    ©deepakmandal

  • deepakmandal 27w

    ज़रूरी है कि गलत है जो ,
    उसे गलत भी बोला जाए ।
    द्वंद हो मन में कठोर,
    या बंधी हो विचारधाराओं में ,
    हो अगर कहीं जो मैलापन तो ,
    उसे और ना घोला जाए ।
    संशय हो गर तनिक भी तुमको,
    फर्क भले ना पड़े किसी को ।
    जो दबी हो मन में व्यथा तुम्हारी ,
    निश्चित उसे अब खोला जाए ।
    ज़रूरी है कि गलत है जो ,
    उसे गलत भी बोला जाए ।

    ©deepakmandal

  • deepakmandal 27w

    काफी नहीं , मेहेज़ ख्वाहिशों का मुकम्मल होना ,
    उनका मुकम्मल हुए रहना जरूरी है ।
    के रेत को हथेलियों में उठा लिया तो क्या,
    रेत का हथेलियों में ठहरना जरूरी है ।

    ©deepakmandal

  • deepakmandal 28w

    पूछे कोई तो खुल जाएंगे असरार कई ,

    शहर अच्छा है जब तलक ज़िक्र ना हो ।