brokeninfinity

I'll be gone before you reach ... ख़ैर छोड़ो ... ��

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  • brokeninfinity 31w

    इन दिनों इस कमरे के दरवाज़े ज्यादातर बंद और परदे अक्सर गिरे रहते हैं।
    इंतजाम ऐसा है के दिन और रात का कुछ होंश नहीं पड़ता।
    न पंखे के जाल का सफ़ाया होता है और न ही आईने का कोई मुआयना।
    सिरहाने पर रखीं यादें, चादर की खारी सिलवटों से लिपटकर जमीं पर आ फिसलती हैं।
    उस जमीं पर जहां मैं किसी जंग लगी संदूक की तरह एक कोने में पड़ा रहता हूं।

    और ये हाथ!
    ये हाथ, जिनमें कभी 'उसका' हाथ हुआ करता था,
    वो अब एक ऐब जकड़े बेजान पड़े रहते हैं।

    "बस ये आख़री बार है, पक्का!"...ऐसा कहकर पता नहीं कितनी बार ख़ुद से झूठ बोला होगा।

    खिड़की से कुर्सी सरकाई, तो कुछ पुराने अखबार, कागज़ और उनके साथ पड़ती माथे पर लकीरें अंगड़ाई भरने लगीं।
    कागज़ रख कर दिमाग़ पर थोड़ा ज़ोर डाला और कलम उठा कर कुछ लिखने की कोशिश भी की।
    थोड़ा लिखते ही हर बार की तरह दिमाग़ सुन्न पड़ता चला गया।

    माथा पसीने से भर गया लेकिन फिर से घूम-फिर के वहीं जा अटकना के जाने "मैं क्या नहीं छोड़ पा रहा हूं!" "क्यों एक ही जगह आ रुकता हूं मैं!"
    ये समझो के अब मैं लिखना ही नहीं चाहता...
    ख़ैर, जाने दो!...
    ©brokeninfinity

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  • brokeninfinity 32w



    मेरे हाल पर ही मुझको रहने दिया होता,
    होता बेहतर जो मुझको तू न मिला होता।
    ©brokeninfinity

  • brokeninfinity 33w



    तुम शहर मेरे आओ, मेरी इक झलक को तरसो,
    और बारिशों की तरह ही फिर बेहिसाब बरसो!
    ©brokeninfinity

  • brokeninfinity 33w



    वक़्त की दीवार पर दरारें सी रहा हूं,
    मय में मिला कर, हर ग़म पी रहा हूं।

    मेरे चेहरे से उम्र का ख़्याल नहीं पड़ता,
    जवानी में देखो, मैं बुढ़ापा जी रहा हूं।।
    ©brokeninfinity

  • brokeninfinity 33w

    तफ़क्कुर मिरे की न शिफ़ा है न दवा है,
    अदब है ये अपना, न मर्ज़ है न मसला है ।
    ©brokeninfinity

  • brokeninfinity 33w



    मुंतज़िर को तेरे जो इक नज़र मिले,
    मर्ज़-ऐ-ला-दवा को चारागर मिले।
    ©brokeninfinity

  • brokeninfinity 33w



    लौटने की कोई खबर नहीं दिखती,
    राहों को फिर भी उमर नहीं दिखती।

    खोजता हूं आंखे जो तुझ सा निहारें,
    इन नजरों को ऐसी नज़र नहीं दिखती।
    ©brokeninfinity

  • brokeninfinity 34w

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  • brokeninfinity 34w

    Colors of spring...

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  • brokeninfinity 36w

    गर्मी की किसी तेज़ धूप से,
    झुलस गया हूं, छिला हुआ हूं...��
    © brokeninfinity

    #khairchhodo #openNshut

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    चाहो तो अपने ज़ेहन से निकालो,
    चाहो तो नज़रों से भी गिरा दो।
    ×
    जला दो खत सारे, ये सफ़े भी जला दो,
    जला दो मेरी जान! तुम हमें भी जला दो।
    ©brokeninfinity