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  • bimalpathak 110w

    वो हिन्दू मुस्लिम मे बाटेंगे मगर तुम भारतीय बनने पर
    अड़े रहना,
    वो दंगे भड़काने की कोशिश करेंगे मगर तुम अहिंसक तरीके से शान्तिपूर्ण वातावरण बनाए रखना,
    वो तुम्हे गलत खबरों से गुमराह करेंगे,मगर तुम सही सही खबरे पढ़ते रहना,
    वो तुम्हे "पढ़े लिखे अनपढ़" बनाएंगे, मगर तुम सभ्य आदमी बनने पर अड़े रहना।

  • bimalpathak 113w

    #justice for priyanka

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    #justice for priyanka

    दहल गई दहलीजे फिर से
    कोई बहन बाहर न जाएगी
    सोचेगी वो सौ बार फिर से
    की कही कोई अनहोनी न हो जाएगी

    कापेगे पैर फिर से उसके
    फिर माँ भी उसकी समझाएगी
    न निकल बेटी घर से बाहर
    कही निर्भया न बन जाएगी

    क्या यही देश है मेरा
    जहाँ नारी सशक्तिकरण की बाते होती है
    यहां घर से निकलना दुश्वार है
    वहा बाते ऊँचे औधो की होती है

    प्रशासन की क्या बात करू
    ये तो अब सिर्फ सोता है
    बेबस लचारो की
    कोन कमब्ख्त सुनता है,

    और हां
    न डालना इल्ज़ाम इन कपड़ो पर
    यहां बुरखे मे भी दुष्कर्म होता है
    इन दहसी दरिंदो से
    कोई नादान भी न छूटा है

    दामिनी निर्भया आशिफा जैसी कई बहनो ने
    अपनी इज्जत जान गवा दी है
    कुछ तो करलो अब यारो
    अब सर मे चढ़ता पानी है

    चलो अब मिलकर हम साथ चले
    इन दरिंदो का अब वध करे
    और जब न दे प्रशासन फासी इनको
    ये नेक कर्म खुद अपने हाथो से करे।।।
    -बिमल पाठक
    ©bimalpathak

  • bimalpathak 113w

    हसीन सा ख्वाब आ रहा है,
    दिल मे प्यार आ रहा है,
    इंतज़ार हो रहा है,
    सिर्फ तेरा।

    ©bimalpathak

  • bimalpathak 113w

    अल्फ़ाज़ नही जज़्बात लिखता हूँ
    कभी अपनी तो कभी तुम्हारी याद लिखता हूँ,
    किन किन पलों मे कैसे कैसे मिले थे हम
    बस वोही पुरानी बाते हर रात लिखता हूँ।
    ©bimalpathak

  • bimalpathak 113w

    ताजमहल तो नही दीवार बना सकता हूँ
    मै तुम्हारा नाम उसपे लहू से तराश सकता हूँ,
    और फिर भी जो काम लगे तुम्हे मेरी मोहब्बत
    गर कह मुझे तो अपनी जिंदगी हर जन्म कुर्बान कर सकता हूँ
    ©bimalpathak

  • bimalpathak 113w

    यूँ, बदनाम न कर ए दुनिया
    जब तुझे बाते पता न हो,
    जिस हालात मे हूँ मै
    जब तुझे हालाते पता न हो।
    ©bimalpathak

  • bimalpathak 114w

    वो ईठलाते हुए जो सवालात कर रही थी
    मानो कयामत की रात थी,
    वो मेरा लेखा, जोखा पढ़ रही थी।
    ©bimalpathak

  • bimalpathak 114w

    वो मासूमियत से उन्होंने
    जो मेरी और हाथ बढ़ाया था,
    मानो खुदा का फरिस्ता
    मुझे अपने संग लेने आया था।
    ©bimalpathak

  • bimalpathak 114w

    उन मुस्कुराते हुए लबो से
    जो लफ्ज़ निकले थे,
    वो कानो मे नही
    सीधा दिल मे लगे थे।
    ©bimalpathak

  • bimalpathak 114w

    जानता हूँ तुम हासिल नही होगे
    पर फिर भी तुम्हारे ख्वाब देख रहा हूँ,
    वैसे ज्यादा कुछ तो नही सोचा
    बस तुम्हारी खूबसूरती का दीदार कर रहा हूँ।
    ©bimalpathak