Grid View
List View
Reposts
  • bal_ram_pandey 70w

    इरादों में अगर तेरे दम है
    यकीनन तेरे चांद पर कदम है

    जख्म देती‌ रहती ‌ है ज़िंदगी
    मुस्कान ही तुम्हारी ‌ मरहम है


    गर मिले मिट्टी को आबो-हवा
    अंकुर का होता जनम है

    नामुकम्मल सी है ज़िंदगी जानां
    साथ तेरे खुशियों का परचम है

    ज़ुल्म के ख़िलाफ़ ना हो आवाज़
    तो अच्छाई भी तेरी सितम है

    गुलशन हवा ख़ुशबू तुम्हारे लिए
    कागज़ ग़ज़ल तेरे लिए क़लम है

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 71w

    आज फिर से उठे हाथ, फिर से दुआ मांगी
    जलती रहे शम्मा , थोड़ी सी हवा मांगी

    यादों के फूल रखकर, सोए सिरहाने हम
    सुब्ह हुई तो ,कांटों से ज़ख्मों की दवा मांगी

    कुछ जागे कुछ सोए से, ख्वाब आंखों में
    नींद ने आंखों से , थोड़ी सी वफा मांगी

    हटा दो चिलमन, दीदार ए रुखसार करने दो
    गुस्ताख नजरों ने,दिल से कुछ ‌हया मांगी


    जन्नत नसीब ना हुई ,ईमान पर चलकर
    आज फिर हमने , रिंदों से सलाह मांगी
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 72w

    ******************************

    बड़ी दुनिया में छोटी सी कहानी रखना
    परिंदों के लिए कटोरी में पानी रखना

    मुफलिसी में भले ही बीत जाए कोई दिन
    मन को बड़ा रखना दिल दानी रखना

    अंधेरे ने कब रोका है उजाले का रास्ता आंखों में ख्वाब हमेशा सुहानी रखना

    लम्हे चुरा लिया वक्त ने छूप कर कितने
    दिले तिजोरी में खतों की निशानी रखना

    ज़िंदगी नीम सी कड़वी है माना हमने
    पेड़ के साए तले सांसों की रवानी रखना

    तुम्हे भी पढ़े समझे दिल के एहसास कोई
    संभाल कर पन्ने क़िताब की ‌जवानी रखना

    ‌‌ ©bal_ram_pandey
    ********************************

  • bal_ram_pandey 72w

    सहरा..... Forest ,desert

    Read More

    रिश्तों का...... अजब हमें सहरा मिला
    ख़ामोशी में ......हर शख़्स बहरा मिला

    दिखावे की दोस्ती आईने से पत्थर की
    आईने...में रोता हुआ एक चेहरा मिला

    नदियों के शहर में भटकती रही आंखें
    अर्से बाद समंदर से आंसू का क़तरा मिला

    क्या बंट गए.. हम मज़हबी तकरीरों में
    एक इंसान दूसरे इंसान से दूर ठहरा मिला

    उम्र की सीढ़ियों पर बैठा तन्हा साया
    न मिली मंज़िल.. राज़ मगर गहरा मिला
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 72w

    ।।सपना।।

    नित नए सपने सजाता हूं.....

    कभी टूटता बिखरता हूं
    कभी सजता संवरता हूं
    टूटे हुए कांच के टुकड़े
    जोड़कर दर्पण बनाता हूं
    नित नए सपने सजाता हूं..........

    बाधाओं से घिर जाता
    अंधियारे में गिर जाता
    दीपक आशाओं के जला
    उन्नत मस्तक उठाता हूं
    नित नए सपने सजाता हूं.........

    भाग्य की धरती पर बोता
    कर्म का नन्हा सा पौधा
    जीवन के बगीचे में हर पल
    सुमन सौरभ लुटाता हूं
    . नित नए सपने सजाता हूं

    लूटी विस्मृतियां बिसारता
    ..रिश्ते नए संजोता सवांरता
    पीकर गरल पीड़ाओं का
    हर्षित होता मुस्कुराता हूं
    . नित नए सपने सजाता हूं
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 73w

    ज़हन से जो रिश्ते मिटते नहीं हैं
    रिश्ते वह सफ़र में मिलते नहीं हैं

    अनजान रहे जो आंधी तूफ़ान से
    वो फूल कांटो में कभी खिलते नहीं है

    जिन आंखों की कब्र में दफ़न ख़्वाब
    उन आंखों से आंसू निकलते नहीं हैं

    जहां नाराज़गी हो शेर की ‌मत्ले से
    ग़ज़ल ऐसी अब हम लिखते नहीं हैं

    किसी और दर पर सदा लगा लीजिए
    हमारे दिल के सपने बिकते नहीं है

    मजारों पे कितने गुल खिल गए हैं
    उसके गमों के ज़ख्म दिखते नहीं हैं
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 73w

    *बूंद*................................ एक ग़ज़ल

    *****XXXXX*****

    सूखा आंखो का पानी और दिल बंजर हो गया
    भटक रहे काले बादल ग़जब मंजर हो गया

    आंसू की एक बूंद तिरे आंखों से क्या टपकी
    सूखा हुआ दिल का कुआं समंदर हो गया

    कितने मासूम रिश्ते हैं अलफाजों के आंसू से
    कागज़ पे ग़ज़ल दर ए दिल पर खंजर हो गया

    यूं तो फासला जियादा दूर ना था मेरे घर से
    मगर घर उसका अब मील का पत्थर हो गया

    *****XXXXX**"""

    Read More

    **

  • bal_ram_pandey 74w

    #soullove
    @jigna___ ji����

    जितने दिल उतने सपने
    जितने हांथ उतने नगमें
    जितनी गहरी होती चाहत
    उतने गहरे होते सदमें....

    Read More

    #soullove

  • bal_ram_pandey 74w

    मिले काश बंदा नवाज़ कोई
    रूह को मिले फ़राज़ कोई

    छुप के बैठा है जुगनू कहीं
    जल रहा है चिराग़ कोई

    बह रही है हवा यादों की
    पढ़ रहा है क़िताब कोई

    खर्च की हमने सांसे और
    कर रहा है हिसाब कोई

    सवाल तुझसे ए ज़िंदगी
    दे रहा है ज़वाब कोई

    सर कितने कलम कर दिए
    गिन रहा है सवाब कोई

    सूरज दरिया में डूबने को है
    अब्र से झांके महताब कोई

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 74w

    सर्वप्रथम क्षमा प्रार्थी हूं मेराकी पर समय न दे पाने के लिए....��������

    मेरी कलम, करती नमन ,
    आजादी के दीवानों का,
    हंसते-हंसते दे दी कुर्बानी,
    उन अमर परवानों का ��

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ������

    Read More

    सदा सुखी रहे सब जन, इस भारतवर्ष में......

    आजादी का स्वर प्रस्फुटित
    हो रहा हर जन के स्वांस में
    देश नित्य नई प्रगति पथ पर बढे
    'एक हैं हम' हुंकार सब के विश्वास में
    एक दूजे का हाथ न छोड़ें
    जीवन पथ के संघर्ष में..................

    माना है बाधाएं कुछ मार्ग में परंतु
    है माता के आंचल में पुण्य संचित
    प्रखर कर्म का पथ न छोड़ें हम
    पुत्र न होगा मां का कोई सुख से वंचित
    करें प्रतिज्ञा अडिग रहेंगे हम सब
    हर पीड़ा... हर हर्ष में......................

    आज भी है पल रहे आस्तीनों में
    जहरीले सर्प कितने देश में
    नित नई षड्यंत्र झेलता है वतन
    सियासत के मुखौटे, नई गणवेश में
    नए संकल्पों विकल्पों से सुसज्जित
    चलें साथ आजादी के नव वर्ष में......

    मिट गए जो मातृभूमि की रज में
    हम उनका बलिदान न भूलें
    रहे कहीं भी देश विदेश की धरती पर
    हर परिवेश में अपनी पहचान ना भूले
    सर्वस्व निछावर तुझ पर मां भारती
    सीना ताने चलें भारती इसी अनुतर्ष में..
    ©bal_ram_pandey