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  • bal_ram_pandey 20w

    ����

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    बेकरार हूं मैं, अपनी ज़मीर के खेत बचाने के लिए
    तुम बेसब्र हो ,अपनी अना के अब्र बरसाने के लिए

    दर्द बन जाती है दवा,अब मुस्कान बनकर चेहरे पर
    आता नहीं हुनर हमें, रूठे हुए को मनाने के लिए

    गांव की फकीरी ,शहर की अमीरी से अच्छी लगी
    वहां नक़ाब नहीं होते गोया, फितरत छुपाने के लिए

    जिक्र होने लगा है खूब अब ,जन्नत में इंसान
    का
    तोड़ा जा रहा है देश, मंदिर मस्ज़िद बनाने के लिए

    नींद ,खुशियां ,सपने, अपने, यार सब छूट जाते हैं
    लगता है वक्त बहुत, इतने ग़म को भुलाने के लिए

    शायद हो यह ग़ज़ल ,मेरी कलम का सफ़र आख़िरी
    राज़ी नहीं दिल अब, किसी को कुछ सुनाने के लिए

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 21w

    हुलसित चेहरा
    झुलसित मन

    बोझिल सपने
    निष्प्राण तन

    पीली पाती
    सूखा वन

    गुंजित सांसे
    ठिठका‌ जीवन

    बुझे दीप
    हंसता ‌‌ तम

    अनचिन्हित मग
    कैसा ‌ श्रम

    वंचित भाग्य
    संचित यौवन

    कंटक पथ
    सुवासित उपवन

    जन्म मरण
    अनूठा बंधन

    हे प्राणसखे
    तव शरणम्

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 21w

    ज़हर दिल में लबों पर दुआ कैसे
    ज़ुबां में कांटे हाथों में दवा कैसे

    न तुम किराएदार न वफादार मेरे
    मकां ए दिल में रहते हो भला कैसे

    मुझसे न कर इतना प्यार ए जिंदगी
    निभा पाऊंगा तुझसे मैं वफ़ा कैसे

    फुरकत के लम्हे और मुस्कुराना तेरा
    दे रहे हो मुझको यह सजा कैसे

    मेरे चेहरे में कोई और नज़र आया
    आईना हो कर दे रहे हो दगा कैसे

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 21w

    मां के आंचल तले मेरा सर रहे
    अनजान बलाओं से दिल बेखबर रहे

    हर तरफ़ है अंधेरा गिले-शिकवों का
    एक चिराग़ हर- पल मेरे घर रहे

    तू आसमां है भला ‌भूलूं यह कैसे
    हर हरकत पर मेरी तेरी नज़र रहे

    मां है नगीना ‌ आंखों का नूर मेरे
    दुआओं से आबाद तेरे घर दफ़्तर रहे

    हर ख्वाबों की तासीर ही तुझसे है
    बावस्ता तुझसे सांसो का सफ़र रहे

    आरती अज़ान हो जाती कबूल मेरी
    मौजूद सामने तेरा वजूद अगर रहे

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 23w

    रिश्तों के दीवारों में दरार है
    फकत पैसे से लोगों को प्यार है

    सच की हाथों में फूलों के गुच्छे
    झूठ के हाथों में तलवार है

    गांव के लोगों की उम्र लंबी
    शहर में हर शख़्स बीमार है

    क्यों करें खुशामद बूतों की
    ख़ुदा मेरा बड़ा खता गफ्फार है

    रिक्शे वाले से पूछा हाले दिल
    कहा उसने मेरा चेहरा अखबार है

    तबीयत देश की क्यों नाशाद है
    यूं तो बदलती रही सरकार है

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 23w

    जीवन एक संघर्ष है ����

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    जीवन के तप में फल ,
    कब निष्फल होता है ,
    कष्ट देखकर मानव ,
    किंचित क्यों रोता है ...........।।

    चीर संघर्ष से माटी ,
    है बन जाती सोना ,
    स्वेद सिंचित खेतों में ,
    लहललाये फसल सलोना,
    कर्म के पंख दिए दाता ने ,
    क्यों उम्मीदें खोता है ,
    कष्ट देखकर मानव ,
    किंचित क्यों रोता है..............।।

    जीवन है स्वप्न सरोवर ,
    इसमें क्या रोना - धोना ,
    शेष है जीवन ,अवरुद्ध परंतु
    गांठ लगा मन में क्या सोना ,
    बंजर उम्मीदों की छाती पर ,
    क्यों आशा के सूरज न ब़ोता है ,
    कष्ट देखकर मानव
    किंचित क्यों रोता है...............।।
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 23w

    इतनी भीड़ मैं ए ज़िंदगी,तुझको पहचाने कैसे
    तुझे देख कर भी रहें ख़ामोश, अनजाने कैसे

    "दिल" नहीं सुनता है आज, मेरे दिल की बात
    अश्क से अनजान आंखें, आ गए जमाने कैसे

    साकी , शराब , और मैखाने का वजूद कैसा
    प्यासे लबों तक न पहुंचे , अब पैमाने कैसे

    लगता है बिगाड़ दी आदत हवाओं ने चराग की
    वगरना चला है आज यह घर जलाने कैसे

    सवाब की खातिर इमदाद है ज़रूरी जनाब
    कजा आएगी तो , ले जाओगे ख़ज़ाने कैसे
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 31w

    इरादों में अगर तेरे दम है
    यकीनन तेरे चांद पर कदम है

    जख्म देती‌ रहती ‌ है ज़िंदगी
    मुस्कान ही तुम्हारी ‌ मरहम है


    गर मिले मिट्टी को आबो-हवा
    अंकुर का होता जनम है

    नामुकम्मल सी है ज़िंदगी जानां
    साथ तेरे खुशियों का परचम है

    ज़ुल्म के ख़िलाफ़ ना हो आवाज़
    तो अच्छाई भी तेरी सितम है

    गुलशन हवा ख़ुशबू तुम्हारे लिए
    कागज़ ग़ज़ल तेरे लिए क़लम है

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 32w

    आज फिर से उठे हाथ, फिर से दुआ मांगी
    जलती रहे शम्मा , थोड़ी सी हवा मांगी

    यादों के फूल रखकर, सोए सिरहाने हम
    सुब्ह हुई तो ,कांटों से ज़ख्मों की दवा मांगी

    कुछ जागे कुछ सोए से, ख्वाब आंखों में
    नींद ने आंखों से , थोड़ी सी वफा मांगी

    हटा दो चिलमन, दीदार ए रुखसार करने दो
    गुस्ताख नजरों ने,दिल से कुछ ‌हया मांगी


    जन्नत नसीब ना हुई ,ईमान पर चलकर
    आज फिर हमने , रिंदों से सलाह मांगी
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 33w

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    बड़ी दुनिया में छोटी सी कहानी रखना
    परिंदों के लिए कटोरी में पानी रखना

    मुफलिसी में भले ही बीत जाए कोई दिन
    मन को बड़ा रखना दिल दानी रखना

    अंधेरे ने कब रोका है उजाले का रास्ता आंखों में ख्वाब हमेशा सुहानी रखना

    लम्हे चुरा लिया वक्त ने छूप कर कितने
    दिले तिजोरी में खतों की निशानी रखना

    ज़िंदगी नीम सी कड़वी है माना हमने
    पेड़ के साए तले सांसों की रवानी रखना

    तुम्हे भी पढ़े समझे दिल के एहसास कोई
    संभाल कर पन्ने क़िताब की ‌जवानी रखना

    ‌‌ ©bal_ram_pandey
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