badnaam_shayar

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Engineer Babu|Upsc Aspirant|Chhattisgarhiya|it's just a my passion|joined 14 april 2018|

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Reposts
  • badnaam_shayar 24w

    बेरूखी

    दिल के दर्द में , खुशी जोड़ रखी है।
    इसकदर लबों की चूप्पी तोड़ रखी है।
    दीदार ए अक्श मुस्करा के करते हैं,
    हमने हर एक बेरूखी अब छोड़ रखी है।

    ©badnaam_shayar

  • badnaam_shayar 66w

    कश्मकश

    मेरे प्रश्न में तुम कैसे,उलझ जाते।
    हर मशला इश्क का सुलझ जाते।
    मुझे लेकर कोई कश्मकश न होती
    प्यार करते तो सबकुछ समझ जाते।

    ©badnaam_shayar

  • badnaam_shayar 73w

    मौत

    मेरी ख्वाहिश है आखिरी के,
    पाकर आहटें तु अपनी घर से निकले।

    हंसते हंसते कर देना विदा मुझे,
    जब ज़नाजा मेरा तेरी डगर से निकले।

    ©badnaam_shayar

  • badnaam_shayar 92w

    अश्क

    दिल आसुंओं को अब सोख नहीं पाता,
    दर्द ए गम की तुफां, ये टोक नहीं पाता,
    किस हाल पे रहते रहते हैं क्या बतलाएँ,
    खुद रोने से मैं ,खुद को रोक नहीं पाता,

    ©badnaam_shayar

  • badnaam_shayar 92w

    गम

    मेरे आंसुओं को अबतलक पोछा ना था,
    जबतलक मेरे ज़ख्मों को खरोचा ना था,
    मरहम के जगह उसने दर्द ए गम दे दिये,
    कभी ऐसा हो जायेगा, मैंने सोचा ना था,

    ©badnaam_shayar

  • badnaam_shayar 92w

    No one understand ��

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    तन्हाई

    मेरे दर्द ए ज़ख्मों पे किसी का नज़र नहीं,
    टपकती आसुओं का कोई भी कदर नहीं,
    ये वक़्त कटती है मेरी ,तन्हाईयों में अक्सर,
    किस हाल में हूँ शायद किसी को खबर नहीं,

    ©badnaam_shayar

  • badnaam_shayar 93w

    तन्हा

    खोया खोया सा मैं और कहीं हूँ,
    पाकर तुझको ,मैं तुझमें नहीं हूँ,
    ज़रूरत नहीं हमदर्दी जताने की,
    छोड़ दो मुझे मैं अकेला सही हूँ,

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  • badnaam_shayar 97w

    अश्क आँखों से बहने दो,
    दर्द इस दिल की सहने दो,
    रहमत की कोई ज़रूरत नहीं,
    मेरे हाल पे मुझे रहने दो,

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  • badnaam_shayar 103w

    फ़िरते बदनाम

    जाने क्या क्या उनके बारे में जान बैठे हैं,
    उनके हरेक चेहरे को हम पहचान बैठे हैं,
    पर मुहब्बत जो उनसे हम करते हैं इतना,
    कि जानके भी उन्हें आज अनजान बैठे हैं,

    सोच सोच कर बस ये वक़्त निकल रहा,
    निकम्मो के जैसे यूँ हम सुबह शाम बैठे हैं,

    अब क्या करे, कुछ भी समझ नही आता,
    कुछ बूरा ना समझ कर बस नादान बैठे हैं,

    पता नहीं उनको शायद हमारा कोई पता,
    उस अजब से पते पर हम गुमनाम बैठे हैं,

    खुद से कहता हूँ अब सब खत्म कर दूंगा,
    पर घर के किसी ,कोने में बेजुबान बैठे हैं,

    अब कुछ नहीं सुहाता,खाली सा लगता है,
    दिल में कई गम लेकर बस सुनसान बैठे हैं,

    क्या बताये और इस आशिक की हालत को,
    अब जहाँ देखों वहाँ पर हम बदनाम बैठे हैं,

    जाने क्या क्या उनके बारे में जान बैठे हैं,
    उनके हरेक चेहरे को हम पहचान बैठे हैं...

    ©badnaam_shayar

  • badnaam_shayar 104w

    आंखों को अश्क से भिगोते नहीं,
    मत समझना कि हम, रोते नहीं,
    मुस्कुराता तो मैं हर वक़्त हूँ मगर,
    जो दिखते हैं वो ऐसे, होते नहीं,

    ©badnaam_shayar