bad_writer

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IAS Expect the Unexpected �� The ideal attitude is to be physically loose and mentally tight.����

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  • bad_writer 2d

    बला की खूबसूरत है वो, बलाएं खूबसरत होती हैं।


    @angel_sneha
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    लड़का

    अगर वो आईने हैं, तो फ़िर पत्थरों से गिला करेंगें,
    तब जाकर हम कोई फ़ैसला करेंगें।
    बाजुएं पकड़ कर मैं जो आया क़रीब उसके,
    उसने कहा ठीक है, पर आख़री मरतबा करेंगें।

    ये तो अपने इख्तियार की मुहब्बत हैं,
    यानी के बस बेकार की मुहब्बत हैं,
    और तुम मर रहे हों जिस लड़की के लिए यारा,
    वो तो बस एक उधार की मुहब्बत हैं।

    दस्तूर यें इश्क़ का निभा रहा हूं मैं,
    समा-ए-वफ़ा अकेला जला रहा हूं मैं,
    उसने दगा किया, उसे अल्लाह रखें यार,
    मुहब्बत नई पीढ़ी को शीखा रहा हूं मैं।

    जब मुहब्बत से तंग आ गया लड़का,
    फ़िर दुआ में दर्द मांगने लगा लड़का,
    तुम्हारे बिना कोई नहीं था उसका,
    और तुमने भी नापसंद किया लड़का।

    हज़ारों रातें उसने जाग़ कर काटी,
    बस एक रात तेरे साथ सोया लड़का,
    दुनियां ने तो बस उसे आवारा कहा,
    तुमने जाना किस दर्द में था लड़का।

    जिम्मेदारी उठाई जब उसने अपने कंधों पर,
    लड़के से फ़िर मर्द बना लड़का,
    कैसी बातें करते हों तुम भी यारा,
    भला कोई मुजस्समा है क्या लड़का।
    ©bad_writer

  • bad_writer 5d

    माथे का सिंदुर

    ज़िंदा लाशो के लिए भी कब्रिस्तान होना चाहिए,
    तदफ़िन होने के लिए एक मकान होना चाहिए,
    सरकारी बाजारों के दाम घट गए हैं,
    ख़ुद को बेचने के लिए अपना दुकान होना चाहिए।

    जो हैं ला - इल्म यहां हमें ज़ाहिल बताते हैं,
    कतल ख़ुद करके हमें कातिल बताते हैं,
    ज़मीन के बादशाहों से ज़रा यें कोई कह दे,
    की बस हम एक ख़ुदा को ही आदिल बताते हैं।

    गुस्ल के बाद निखारा जाऊंगा,
    कफ़न में मैं भी संभाला जाऊंगा,
    जो बात तक ना करता था कभी,
    उसी के कंधों के सहारे जाऊंगा।

    के हो गया ज़िन्दगी का सफ़र पूरा,
    लहज़े में अब तो उतारा जाऊंगा,
    फ़रिश्ते का दस्तक हुआ देखो,
    कब्र में पीर कह पुकारा जाऊंगा।

    सांसों के रुकने से बेचैनी बढ़ गई,
    अब तो घूंट घूंट के मारा जाऊंगा,
    आंसुओ से समंदर बनाना है मूझे,
    इस मझधार से अब किनारा जाऊंगा।

    हालात बेहतर हो तो कुछ बात बने,
    अपने गांव से अब ना दुबारा जाऊंगा,
    अकेला हो रहा रुख़सत मैं,
    थोड़ा नहीं सारा का सारा जाऊंगा।

    हाय, मैं तेरे माथे का सिंदुर हो ना सका,
    मगर अबतक तेरे खयालों से दूर हो ना सका,
    तुझे पा ना सका और दिल टूट गया,
    हाय, मैं तेरे लाल जोड़े का गुरूर हो ना सका।
    ©bad_writer

  • bad_writer 1w

    जान

    जान तो पहले भी दिल में ही रहती थीं,
    पर अब तुम में बसने लगीं हैं,
    ख़्वाब तो अब तक नींद में ही क़ैद थें,
    पर अब तुम में जगने लगें हैं।

    सांस तो पहले भी धड़कनों में ही रहती थीं,
    पर अब तुमसे जुड़ गई हैं,
    आस तो पहले भी किसी से ना थीं हमें,
    पर अब जान तुमसे जुड़ गई हैं।

    नींद नहीं मुंझे अब तुम्हारे बिना आती हैं,
    हर रात कानों में बस आवाज़ यही गुनगुनाती हैं,
    मैं पेहली मुहब्बत हूं तुम्हारी यें ज़िद्द मैं किया करता हूं,
    पर वो ही पहली मुहब्बत हैं तुम्हारी इस एहसास से कहीं ना कहीं डरता हूं।

    तुम पास आज हो मेरे पर गुम हो कहीं ना कहीं अपनों में,
    छीन नहीं सकता तुम्हें क्यूंकि तुम अभी भी हो सिर्फ़ मेरे सपनों में,
    हर गीत तुम्हारे लिए ही तो गाता हूं,
    खों ना दूं तुम्हे इस डर से अब तो रातों में भी तुम्हारा हाथ पकड़कर सों जाता हूं।
    ©bad_writer

  • bad_writer 2w

    करनी पड़ी

    अपनी हकीकत में ये एक कहानी करनी पड़ी
    उसके जैसी मुझे अपनी जुबानी करनी पड़ी
    कर तो सकता था बातें इधर उधर की बहुत
    मगर कुछ लोगों में बातें मुझे खानदानी करनी पड़ी


    अपनी आँखों से देखा था मंजर बेवफाई का
    गैर से सुना तो फिजूल हैरानी करनी पड़ी
    मेरे ज़हन से निकला ही नहीं वो शख्स 
    नये महबूब से भी बातें पुरानी करनी पड़ी


    उससे पहले मोहब्बत रूह तलक की मैंने
    फिर हरकतें मुझे अपनी जिस्मानी करनी पड़ी
    ताश की गड्डी हाथ में ले हमको जोकर समझती रही
    फिर पत्ते बदल मुझे बेईमानी करनी पड़ी


    जैसे चलाता हूं वैसे नहीं चलता
    कैसे बताऊं यार ऐसे नहीं चलता
    खुदको मेरा साया बताता है 
    फिर क्यूं तू मेरे जैसे नहीं चलता

    तेरे इश्क में हूं बेबस इतना मैं 
    जवान बेटे पर बाप का हाथ जैसे नहीं चलता 


    दर्द, दिमाग, वार, ये शायद जंग है 
    मेरी जान मोहब्बत में तो ऐसे नहीं चलता
    बस यही बातें हैं इस पूरी गजल में नितीन
    कभी ऐसे नहीं चलता कभी वैसे नहीं चलता।
    ©bad_writer

  • bad_writer 2w

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  • bad_writer 2w

    लायक़ और हम

    सोचा ना था हमने यें दिन भी आएंगे,
    ख़ामोश आएंगे और तूफ़ान भी लाएंगे,
    आईने में ख़ुदको देख के हसने वालों,
    जब ये तुटेंगे तो तुम्हीं को चुभ जाएंगे,
    जितनी मर्ज़ी तस्वीर से बातें करलो,
    तस्वीर वालें तस्वीर से बाहर थोड़ी आएंगे।

    हमनें जो सुखन कही तुमसे, तुम उसके लायक़ ना थीं,
    हमनें जो इश्क़ किया तुमसे, तुम उसके लायक़ ना थीं,
    हर कोइ तुमसे प्यार करता था, तुम सचमे बहुत अच्छी थी,
    पर हमनें जो तुमसे की दिल्लगी, तुम उसके लायक़ ना थीं,
    बेशक मैं शायर हुआ तेरे लिए, तेरी मुहब्बत के लिए,
    पर हमनें जो शायरी कही तुमसे, तुम उसके लायक़ ना थीं।

    तुमको चाहा, तुमसे जुड़ी हर चीज़ को चाहा हमनें बेइंतहा,
    कर गए हम जो आशिक़ी तुमसे, तुम उसके लायक़ ना थीं,
    हुए मल्ताझीर हम तेरे लिए, एक उम्र तक किसीको ना देखा,
    की जो वफ़ा की उम्मीद ही तुमसे, तुम उसके लायक़ ना थीं,
    नितीन वो दरियां हैं जिसने तुमको समंदर समझने की भूल की,
    थी जो उसकी तीशनगी तुमसे, तुम उसके लायक़ ना थीं।

    बेरंग जिसकी जवानी हो, वो शख़्स नहीं है हम,
    बेनूर जिसकी कहानी हो, वो शख़्स नहीं है हम,
    महफिलों में चेहरें देख कर जो कलाब बदल लें,
    ऐसी चट्टखोर ज़ुबानी हो, वो शख़्स नहीं है हम।

    जो केहना है कहेंगे तुमसे, डरते थोड़ी ही है हम,
    खून में जिसके पानी हो, वो शख़्स नहीं है हम,
    किरदार ऐसा जीयेंगे की अज़ल तक जिन्दा रहेंगे हम,
    पल दो पल मेहमानी हो, वो शख़्स नहीं है हम।।

  • bad_writer 2w

    बेकार...

    काश के हम तेरे नखरें उठाते,
    दीदार भी होता तेरा आते-जाते,
    और खत लिखा था कि याद मत आना,
    पर बहुत याद आए तुम भुलाते-भुलाते।


    सेहरामें लगीं आग तो रातोंमें रेह गया,
    वो जब हक़ीक़तसे जागा तो ख़्वाबोंमें रेह गया,
    फ़ुरसत ही ना मिली पढ़ने की जिसे,
    एक शख़्स जो बरसों से किताबोंमें रेह गया,
    दुश्मनों से जब निपटे तो याद आया हमें,
    एक दुश्मन छुपा था जो यारों में रेह गया।

    ऐसी क्या खता की हमने बता भी देते,
    हम जो मुजरिम ठहरते तो ख़ुद को सज़ा भी देते,
    सिर्फ़ हाथ रखनें से आपको ऐतराज़ था,
    हमसे कहते तो हम हाथ हटा भी लेते।

    लोगों से सुना हैं की हम बेवफ़ा है,
    अगर हमको मिलती वफ़ा तो वफ़ा भी देते,
    सिर्फ़ तानें ही मिले हैं आपसे,
    आप अपनें होतें तो दुआं भी देते,
    हर ज़ख्म आसानी से सेह लेते यारा,
    अगर आप ज़ख्म के साथ दवाई भी देते।

    एक इश्क़ लगातार भी कर सकते थे,
    सिर्फ़ वादें पर इन्हेसार भी कर सकते थे,
    ज़रूरी नहीं कि नफ़रत के बदले नफ़रत ही दी जाए,
    आप रुक कर प्यार भी कर सकते थे।


    हमनें माना की देर हो गई आने में,
    पर आप इंतज़ार भी कर सकते थे,
    और आपने मांगा ही नहीं हमसे हमारा वक़्त,
    वरना हम ख़ुद को बेकार भी कर सकते थे।
    ©bad_writer

  • bad_writer 2w

    #rachanaprati86-87

    सबकी रचनाएं खूबसरत थी,
    सबने काफ़ी सारी बातें रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत की।
    #rachanaprati87 के लिए मैं @anusugandh जी को विनती करता हूं कि वो आगे का संचालन करे।

    आप सबका सहयोग और सहकार के लिए बहुत बहुत धन्यवाद्।

    जय मातादी
    ©bad_writer

  • bad_writer 3w

    Suno...

    ये भी अच्छा है कि हम किसी को अच्छे नही लगते ,


    चलो कोई रोयेगा तो नही हमारे मर जाने के बाद...
    ©bad_writer

  • bad_writer 3w

    #rachanaprati86

    सबसे पहले मैं अल्का त्रिपाठीजी ( @alkatripathi79 ) का तहेदिल से धन्यवाद व्यक्त करता हूं एक बार फिर से rachanaprati की बागडोर सौंपने के लिए।।।

    जैसा की हम सब जानते हैं कि कुछ समय बाद नवरात्री का प्रारंभ होने वाला हैं तो उसे देखते हुए
    #rachanaprati86 के लिए विषय है "धर्म में शक्ति (Goddess) का स्थान".

    समय मर्यादा : कल शाम के ७ बजे तक


    आप सब से गुज़ारिश है कि आप सब इस विषय पर अपनी अप्रतिम रचनाएं प्रस्तुत करें और हम सब इन सारी रचनाओं से कुछ ज्ञानकी प्राप्ती करें।

    धन्यवाद्
    ©bad_writer