ayushsinghania

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Reposts
  • ayushsinghania 18w

    कितना हसीं हो जाता है ना,
    बारिश के आँखों को मलने के बाद,
    हर नज़ारा,
    जैसे जमी धूल की परत पर,
    नमी को बरसाया गया हो,
    बरसात के होंठो से आंखों को चूमा गया हो,
    नज़रो को नई सोच मिली हो,
    जैसे रेगिस्तान में कोई उम्मीद मिली हो,
    दरिया में डूबे को दरख़्त का सहारा जैसे,
    हरे पत्तों के जिस्म पे ठहरा सफेद नज़ारा जैसे,
    मल्हार , मिट्टी की सुगंध और बदन को सिहराती वो हवा,
    एक मन में कितनी कहानियां दोहराती हो जैसे,
    प्रेम , बचपन , यारी सबकुछ,
    बारिश के अलग अलग से लम्हें हो जैसे....!
    ©ayushsinghania

  • ayushsinghania 18w

    किसी रोज़,
    जब वक़्त माफ़िक हुआ,
    तो शायद पिघली कैफ़ियत से बाहर आ,
    थोड़ी समझ और सीख लेकर,
    इन आँखों का टकराना हो शायद ;
    नही, लफ्ज़ उस रोज भी नही होंगे,
    कोई दुआ सलाम नही,
    न लबो पर कोई लकीर,
    मुसकुराहट या अफ़सोस की,
    बस कुछ देर की गुफ्तगू शायद,
    आंखों के बीच,
    भीड़ से भरे जिस्मों के दरमियाँ;
    कुछ सवाल तुमसे होंगे, कुछ मुझसे,
    जवाब की इक झलक को,
    बिना लफ़्ज़ों के,
    आंखों के आंखों तक,
    फ़िर क़दम बढ़ चलेंगे,
    चौराहें के दूसरे छोरों को,
    इस इत्मीनान के साथ,
    कि शायद उम्र कम रही हो उस कहानी की,
    पर निभाई ईमानदारी से गयी ;
    किसी रोज़, (शायद)
    ©ayushsinghania

  • ayushsinghania 19w

    है जानता कहाँ कोई, कहाँ गिरा रुधिर कभी,
    न ज़ख्म और निशां कहीं, कैसे कहे हुई क्षति;
    न धार का इक वार है, न चोट जो दिखे कही,
    बस स्वप्न सी प्रतीत हो, वैसी कथा लगे कोई;
    पर चोट तो फ़िर चोट है, फ़िर चर्म हो या मन कोई,
    पर जो जिया वो जानता, इक थी व्यथा बड़ी पीर सी;
    कहो कहानियाँ गर तो क्या फ़र्क है,
    जो जानता संघर्ष को, अनुमान सिर्फ़ उसे क्षति की;
    न पूछो कहाँ रुधिर गिरा, न पता किसी धार की,
    कुरुक्षेत्र में है जो खड़ा, वो जानता क्या संघर्ष है....!
    ©ayushsinghania

  • ayushsinghania 30w

    मालूम पड़ता है, मोहब्बत शायद उसको कहते हो,
    जैसे बारिश धरती को बोसा करता हो;
    ©ayushsinghania

  • ayushsinghania 32w

    रिश्ते में ईमानदारी जरूरी है;
    अगर ऐसा है तो यक़ीनन हर रिश्ता ख़ूबसूरत हो सकता
    #random

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    एक किस्सा,
    दो किरदार,
    चांदी में घुला अंधेरा,
    मूसलाधार बरसात;
    उलझी उंगलियां,
    उलझे हाथ,
    मुस्काता चेहरा,
    बेशकिमती प्यार;
    बूँदों से सजे होंठ,
    गले पर पड़ती नर्म साँस;
    वक़्त का रुकना यूँ तो मुमकिन नही लगता,
    पर शायद प्यार में वो ताकत है;
    ©ayushsinghania

  • ayushsinghania 35w

    बारिशों ने जिस्म पर बूंदे बिखेर सी दी है,
    अपने वजूद और सब्र का बोसा करदे मालिक इन रूहों पर....!
    ©ayushsinghania

  • ayushsinghania 35w

    #a diary read
    #musings

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    कभी महसूस किया मैंने भी,
    शाखों से लिपटे उन बूंदों का इश्क़,
    पत्तों पर बने रहने की हर मुमकिन कोशिश,
    अपने जिस्म (पत्तों) पर उन्हें (बूँदों) रोक पाने की कोशिश,
    पर फ़िर लम्हों के इस मिलन को हासिल,
    तक़दीर में लिखा हिज्र;
    इंसानी आंखों के लिए ऐसा इश्क़ नया था,
    बहोत पाक था,
    तो आसमान की बारिश के बावजूद आंखों से कुछ बूंदे गालो की चमड़ी को नम कर गयी;
    क्या सच में ऐसा इश्क़ "हिज्र" के काबिल था ?
    पर फ़िर उन्ही बूँदों ने ,
    उन्ही पत्तों ने,
    उन्ही शाखों ने सिखाया,
    उस लम्हें की ताकत का एहसास,
    जिस लम्हें के पल भर का साथ,
    हजार हिज्र पर क़ुर्बान;
    आधी रात के बाद की ये बातचीत,(बारिश , शाख और खुदसे)
    आपके अंदर इक इज्ज़त बो जाती है;
    सब्र की इज्जत , मोहब्बत और उसको निभा पाने की इज्जत;
    और यकीं है,
    किसी रोज़ उस बोई हुई सीख से कोई बहोत बेशकिमती फूल निकलेगा,
    जो रूह और इसके आसपास की क्यारी को खुशबुओं से भर देगा;
    इसी उम्मीद में,
    कमरे की तरफ चल पड़ा हूँ....!
    (बारिश और उसका इज़हार जारी है....!)
    ©ayushsinghania

  • ayushsinghania 36w

    ����

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    मेहनत को लिबास मिले,
    और सपनों को सड़क;
    उम्मीदें दौड़ती दिखाई दे,
    और हो आंखों में वही चमक;
    हिम्मत का हौंसला रहे बना,
    कोशिश की जगी रहे ललक;
    अंधेरा करें कोशिशें लाख,
    तू याद रख दुआओं का सबक;
    गहरा गोता हो रहा अगर,
    तू बस अपना ख़्याल रख;
    समंदर जितना अंधेर हो चलेगा,
    अशर्फियाँ उतनी ही निकलेंगी अनगिनत;
    सीढ़िया बना और चढ़ता जा,
    मेहनत और मौला पर भरोसा रख....!
    ©ayushsinghania

  • ayushsinghania 36w

    Stay safe and at peace.
    Let the divinity help us all to get out of this too.
    This too shall pass and peace will reign :)
    ����

    Do your part and rest is upto him. ��

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    Outcomes are not your imaginary thoughts.
    Outcomes are his plan and they are meant to be there exactly when and how it needs to be.
    Understanding"HIM" to be both creator and narrator will relieve you from your distorted perceptions.

  • ayushsinghania 38w

    बहोत सोचा गया है तुमको,
    लिहाज़ से,
    ऐतिहात से,
    किसी रात बेसब्री से,
    किसी बरस बहोत सब्र से;
    परत दर परत,
    लम्हा दर लम्हा,
    फ़िर सीढ़ियां बनाकर तहख़ाने तक जाने की कोशिश भी की गई;
    इस उम्मीद में कि शायद कोई सुराख़ हो,
    उस गहराई में,
    जिससे इस कहानी को समझा जा सके;
    उन एहसासों को ,
    कोई अर्थ पिरोया जा सके,
    कोई माला किसी परिभाषा की,
    जो किरदारों को जान दे सके;
    उस हँसी के बीज ढूंढे जा सके,
    या उन इम्तहानों के फल ढूढें जा सके;
    किसी रात न सो पाने की बेबसी समझी जा सके,
    या किसी रोज़ के नींद की बेफ़िक्री समझी जा सके,
    पर बीते हर लम्हे ने बस यही समझाया की,
    तुम(कहानी),
    एक अपवाद हो.....!
    या शायद और कुछ जिसे समझने में वक़्त लगेगा
    ©ayushsinghania