ashish_rajput

www.instagram.com/ashish_rajput_14.11

Be a Dark mystery let no one can solve you ♥️

Grid View
List View
Reposts
  • ashish_rajput 4h

    जो मिली है मुझे, मैंने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है,

    और, इतना समझ आया है, की शर्त ही ईमानदारी है,

    उस दिलरुबा की, जो सहर सी इकतारी है,

    दिल फरेब है बोहोत, पर मौजूद समझदारी है,

    मुझसे खेली हर बाज़ी, कभी जीती और कभी हारी है,

    मै कितना भी बड़ा सूरमा, वो बोहोत पक्की खिलाड़ी है...

    © आशीष

  • ashish_rajput 5d

    मै मेरे हिस्से का सूरज भी तुम्हारे नाम करता हूँ,

    सुना है सर्द रातों में ख्वाब ठिठुरने लगे है तुम्हारे...

    © आशीष

  • ashish_rajput 1w

    हमारे हाथ में बच्चों ने तितलियाँ रख दीं,
    तो अपने हाथ की हमनें भी बर्च्छियाँ रख दीं,

    हुआ था ज़िक्र अचानक ही मौत का मुझसे,
    तड़प के उसने मेरे लब पे उँगलियाँ रख दीं,

    रिहा किया है परिंदे को इस तरीक़े से,
    परो को खोल के पैरों में बेड़ियाँ रख दीं,

    तुम उस ग़रीब की झोली में रिज़क भी रखना,
    कि, जिस ग़रीब की गोदी में बेटियाँ रख दीं,

    हदों को तोड़ गया यूँ ग़रीब बंजारा,
    कि, शाहज़ादी के हाथों में चूड़ियाँ रख दीं,

    जब उनके राह के कांटे हटा नहीं पाये,
    तो उनके पाँव के नींचे, हथेलियाँ रख दीं

    मेरी दुआ है सलामत रहे क़यामत तक,
    वो इश्क़ जिसने लबों पर ये सिसकियाँ रख दीं...

    ©आशीष

  • ashish_rajput 2w

    तुम आकर अपनी शॉल में छुपा लोगे,

    बस इसी ख्याल से सर्दियां पसन्द हैं मुझे....

    ©आशीष

  • ashish_rajput 2w

    वो बिक चुकें थे जब तलक, हम ख़रीदने के काबिल हुए,

    ज़माना बीत गया ग़ालिब हमे अमीर होते होते....

    ©आशीष

  • ashish_rajput 3w

    लिख कर बयां करो ज़िंदगी,
    कुछ कहना नहीं पड़ेगा,

    हस कर जियो हर कदम ज़िंदगी,
    कुछ सहना नहीं पड़ेगा...

    ©आशीष

  • ashish_rajput 3w

    एक साल औऱ बीत गया,
    उन कभी ना गुज़रने वाली रातों की तरह,

    मेरी "माँ" एक साल औऱ दूर हो गयी मुझसे,
    अपने कभी साथ ना छोड़ जाने वाले वादे की तरह....

    ©आशीष

  • ashish_rajput 3w

    लाख बुराई है मुझमें,

    पर खुद को रोज संवारने की कोशिश जारी हैं,

    बुरा तुम्हे लगे कुछ, तो मन में मत रखना,

    आजकल लोगो को बिना समझे, बुरा भला कहने की बुरी बीमारी हैं...

    ©आशीष

  • ashish_rajput 4w

    इमारतें सलामत रही हमारी, मगर छतों का पता नहीं,

    लिफाफे संभाले बैठे हैं, तुम्हारे खतों का पता नहीं...

    ©आशीष

  • ashish_rajput 4w

    नीचे आ गिरतीं है हर बार दुआ मेरी,

    ना जानें कितनी ऊंचाई पर ख़ुदा रहता है...

    ©आशीष