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  • ashish_d 2d

    यूं समझकर मैंने पतंग हाथ से छोड़ी...
    कि हवा आज उसके घर की ओर है...

    मकर संक्रांति की आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं

    ©ashish_d

  • ashish_d 5d

    मैं कागज पर लकीरे खिंचता रहा शौक से अक्सर...
    वे अजीब लोग है जो उसमें मेरी तस्वीर खोजते है...
    ©ashish_d

  • ashish_d 1w

    तेरे मेरे ओंठो के दरमियां सासों का कोहरा घना है...
    धारा १४४ लागु है, तेरा यूं दिल से गुजरना मना है...
    ©ashish_d

  • ashish_d 1w

    बरगद खुदका साया तक नहीं रखता...
    ता की छाव हरएक के हिस्से की हो...
    ©ashish_d

  • ashish_d 1w

    अक्षर अक्षर खत है, इसे कालीदास के मेघ समझो...
    प्रेमपृष्ठ पर खिंची गयी, नीरव भावो की रेघ समझो...
    ©ashish_d

  • ashish_d 1w

    कलम को छुने से भी परहेज है आजकल...
    कुछ अधुरी रचनाए मुझसे न्याय मांगती है...
    ©ashish_d

  • ashish_d 1w

    नारी

    ना तुम कोने में पडी हुई, ना छुवाछुत से बंधी नारी हो...
    तुम तो घराने को वंश देने वाली, पवित्र माहवारी हो...

    यह लाल पेशीया, तुम्हारे जीगर को क्या तोल पायेगी...
    तुम झांसी वाली मां चंडी हो, दुनिया ये ना भूल पायेगी... 

    बेटो जैसा तुमने, जिम्मेदारियों को कांधे पर उठायां है...
    खुद पढ़-लिखकर तुमने ही, पुरे परीवार को पढाया है...

    माता पिता ने बेटी दे दी, इससे बढकर दहेज क्या है...
    घर छोडा आंगन खातिर, पुछ रहे हो परहेज क्या है...

    तुम हो केसरी अंबर की, रातो को निगलना जानती हो... 
    घर रोशन करने खातिर, मौम सा पिघलना जानती हो... 

    जिस कोख को कोसा गया, उसी में अंकूर फुलता रहा...
    कोख से ही संघर्ष शुर हुआ, वो गली गली चलता रहा...

    तुम ना घुंगट में ढकी हुई, ना ही बेडीयो से लिपटी हो...
    पद्मिनी के जौहर से उपजी, तुम अग्नीसुता द्रौपदी हो...

    जो भी खिलजी किचड भरे, अपनी अपनी आंखों में...
    उखाड़ फेकों उस हर दुर्योधन की, जंघा दो फांको में...

    शक्तिरुप तुम धैर्य तुमको, जहन से गीता लिखता हूँ...
    स्याही कलम से ही नही, नजर से सीता लिखता हूँ...
    ©ashish_d

  • ashish_d 2w

    सृजन के बिज लिए अब नया सवेरा आ रहा...
    नये लम्हो को सौंपकर लम्हा लम्हा जा रहा...

    दास्ताने गुजरने का यह सिलसिला जारी रहे...
    रूठना मनाना है तो शिकवा गिला जारी रहे...

    आपको और आपके परिवार को नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

    ©ashish_d

  • ashish_d 2w

    नारी

    हमें लाल पेशीयो के बलबुतो पर मत आंकना...
    हमारा जीगर बड़ा और हौसला मजबूत है...
    ©ashish_d

  • ashish_d 4w

    तेरे शहर की हवाओं से लिपटा हूं मैं आज...
    तेरे नाम की खुशबू ही इन फिजाओ में है...
    ©ashish_d