Grid View
List View
Reposts
  • armaan_deep 4w

    ( Ek Lafaz )

    सुबह से शाम तक लिख लिया तुझे,
    अभी भी और एक अर्ज़ बाकी है,

    सारी किताब भर गई बस तेरी बातों से,
    जिससे मेरी शुरुवात हो वो लफ्ज़ बाकी है ।
    ©armaan_deep

  • armaan_deep 4w

    ( Tabaah )

    दिल से टकरा कर दिल को तबाह कर दिया,
    एक सच्ची महोब्बत को ज़ालिम ने बेवफा कर दिया ।

    ©armaan_deep

  • armaan_deep 7w

    ( Kuch Battein Esi Bhi )

    चलो तुमसे एक बात पूछता हूँ,
    तुम जवाब देना मैं सवालात पूछता हूँ,
    तुम्हरा तो खैर पता नहीं लेकिन

    मैं जब किसी से दिल लगाता हूँ,
    ना उसकी औक़ात पूछता हूँ ना ज़ात पूछता हूँ ।

    ©armaan_deep

  • armaan_deep 12w

    ( Wo Bewafa )

    कभी पत्ते जैसे टूट गए,
    कभी आंधी आयी तो झड़ गए,

    उस बेवफा से दिल लगा के,
    हम तो जीते जी ही मर गए ।
    ©armaan_deep

  • armaan_deep 12w

    (Ye Kasoor mera hai )

    हम बेख़बर ही सही मग़र मजबूर तो नहीं हैं,
    उनको चाहते हैं तो क्या कोई कसूर तो नहीं है ।

    ©armaan_deep

  • armaan_deep 12w

    ( Shikayat )

    शिकायतें हैं मुझे खुद से तुझसे तो नहीं है,
    की ये दिल है कि तेरे बिना कहीं लगता ही नही है ।
    ©armaan_deep

  • armaan_deep 12w

    ( Do Ankhein )

    मैंने उसको इतना देखा जितना देखा जा सकता था,
    आखिर इन दो आंखों से कितना देखा जा सकता था ।
    ©armaan_deep

  • armaan_deep 16w

    ( Zaroorat )

    कभी कभी तुमसे मिलकर क्यों लगता है ऐसे,
    के मुझे सांसो से ज़्यादा तुम्हारी ज़रूरत हो जैसे ।

    ©armaan_deep

  • armaan_deep 18w

    ( Baatein )

    बातें ही तय करती हैं हमारी तक़दीर का सफर,
    बात बनाने के लिए या बिगाड़ने के लिए
    दो लफ्ज़ ही काफी हैं ।

    Inside Eye

  • armaan_deep 37w

    ( Kuch Dard )

    ना आंखों से छलकते हैं,
    ना कागज़ पे उतरते हैं,

    कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं,
    जो बस भीतर ही पलते हैं ।
    ©armaan_deep