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  • arjuns 1w

    निखरा हुआ है रुख तेरा कुछ बात जरूर होगी।
    मुझसे न सही गैरों से तो मुलाकात जरूर होगी।
    मुझे पूरा अंदाज़ा है मेरे बाद इश्क़ में "अर्जुन"।
    किसी और कि मुहब्बत तुझसे बर्बाद जरूर होगी।

  • arjuns 2w

    धूमिल पथ पर अग्रसर
    संवेदना युक्त्त अंतरिम
    चंद्रमा की चाह में
    प्रतिउत्तर वाचक की भाँति
    शनै: शनै: अस्त होता
    अनूदित मनःस्थितिय

  • arjuns 2w

    तुम आओ या न आओ इंतज़ार बेशक़ करूँगा।
    तुम चाहो य न चाहो मगर प्यार बेशक़ करूँगा।
    कोई कितना कहे मुझसे कि तुम बेवफ़ा हो ।
    मगर मैं ऐतबार बेशक़ करूँगा।

  • arjuns 3w

    बे खौफ़ हूँ मैं मुझे समंदर में डूब जाने दे।
    न रोक मुझे आहिस्ता आहिस्ता करीब आने दे।

    ऊजड़ चुके थे जो आशियाने दिल के कभी।
    दे के दिल मे जगह अपने फिर से उसे बसाने दे।

    कुछ तो बात है तेरी ज़ुल्फ़ों के साये में।
    मेरी हर शाम अपनी ज़ुल्फ़ तले बिखर जाने दे।

    टूटा हूँ ज़ार-ज़ार मैं अपनों के दिए तानों से।
    आज अपनी बाहों में मुझे फिर से पिघल जाने दे।

    महकती है खुशबू तेरी साँसों के दरमियाँ।
    समेट ले मुझे खुद में ज़र्रे-ज़र्रे में समां जाने दे.......।

  • arjuns 3w

    ज़रा सा छू कर तुम जिस्म में आग लगाते हो।
    खुद रहते हो बज़्म में हमें तन्हाईयाँ दे जाते हो।
    कैसे कहूँ कि कैसे कटती हैं आज-कल रातें मेरी।
    कम्बख्त नींद में भी तुम ही तुम नज़र आते हो।

  • arjuns 4w

    मेरे प्रेम का साक्षी ये मंदिर वो बूढ़ा दरख़्त भी है।
    बगीचे का जामुन का पेड़ और वो पनघट भी है।

    काकी का दलान और रास्ते का सन्नाटा भी है।
    वो खेत खलिहान और बबूल का काँटा भी है।

    कूँए की बाट और पीपल की ठंडी छांव भी है।
    गांव की हाट और वो नदी की बैरन नाव भी है।

    तुम क्या भूलोगे मैं क्या क्या याद दिलाउंगा।
    तुम जब भी आओगे मैं यहीं मिल जाऊँगा।


    अर्जुन इलाहाबादी

  • arjuns 4w

    मेरी तमाम बेताब रातें जो सितारों के आगोश में
    कट गयीं
    मेरी हसरतों की वो हज़ार ख्वाहिशें जो तन्हाइयों में
    सिमट गयीं
    एक तूफां आया जो बहा कर ले गया अश्क के समंदर के रेत को।
    कितनी शिद्दत से लिखा था कहानियाँ उंगुलियों के सहारे
    वो मिट गयीं।
    वो मकाँ तेरी यादों का एक खँडहर में तब्दील हो के रह गया है आज
    कदम रखा था जो दहलीज़ पार कर हमनें उसकी रूह मुझसे लिपट गयी।
    क्या कहता उस से खामोश रहा सिसकता रहा मैं।
    आसुंओ से लिखी इबारत प्यार के अश्को से कट गई।

  • arjuns 4w

    इतिहास कभी कभी खुद को दोहराता है।
    अपने ही बनाये किले को खुद ढहाता है।
    जरूरी नहीं कि हर वक़्त गम का बादल हो।
    एक दिन जिन्दगी में सुख लौट कर आता है।

  • arjuns 5w

    दिल इतना पागल सा है कि थोड़ा ही सही तुम्हें देख लूँ।
    अब मुझमें इतनी हिम्मत नहीं कि हसरतों को रोक लूँ।
    उफनाती नदी सा चंचल मन हिलोरे खाती लहरों जैसा।
    तुम आ जाओ बारिश की बूंदों की तरह तुम्हें समेट लूँ।

  • arjuns 5w

    पता नहीं था कि तुम मुझ पर इल्ज़ाम लगाओगे।
    दे कर जिस्म पर खून के धब्बे दूर से चिढ़ाओगे।

    हम तो चले थे तुम्हारा हाथ पकड़ कर "अर्जुन"।
    मुझे क्या पता तुम अपना असली रंग दिखाओगे।

    यूँ तो दाग तुम पर भी था तुम दूध के धुले न थे।
    पर नहीं पता था इश्क़ में तुम मेरा ही घर जलाओगे।

    प्यार विस्वास इज़्ज़त ये सब अवगुण मुझमें नहीं।
    हम तो बत्तमीज़ हैं अब हमें तुम क्या सिखाओगे।