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  • archanatiwari_tanuja 8w

    05/10/2021

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    ज़िन्दगी की कली

    खिलने को बेताब ज़िन्दगी की कली,
    नन्हीं सी सुकोमल सी परी आ मिली।

    अधखुली पलको से जहां को देखती,
    रुबरु होने को रेशमी किरणो से चली।

    निर्छल भावों से भरी है मनभावनी सी,
    फूलों के बागीचे मे मुस्कान ले खिली।

    अलग-अलग विचारों से होगा सामना,
    भूल से कदम जो बहके चिंगारी जली।

    झुलसना,मुरझाना नियति या किस्मत,
    सुलझे कैसे ये पहेली जो अश्कों ढली।

    रखना संजो कर इन्हें प्यारे वनमाली,
    बेटियां होती बाबुल अंगना की कली।

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 8w

    04/10/2021

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    आंखों में लेकर

    आंखों में लेकर ख्वाब मिलें,
    हमसे होके कभी बेताब मिलें।

    राह में कितने काफ़िले दिखे,
    पर न कभी वो माहताब मिलें।

    अरमां उमडते रहे दिल में ही,
    के कभी बनके वो आब मिलें।

    राह-ए-सफ़र है लम्बा कितना,
    उल्फ़तों भरी कोई शबाब मिलें।

    इक बार मिले जिगर को राहत,
    बन के ऐसी वो हँसी ताब मिले।।

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 8w

    04/10/2021

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    ज़िन्दगी का हुनर

    ताउम्र हमें ज़िन्दगी जीने का हुनर न आया,
    ऐ खुदा तलाशते रहे तुझे तू नज़र न आया।

    मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे चर्च शीश नवाया है,
    जाने कहां-कहां ढूंढ़ा पर तेरा दर न आया।

    पाँव मे छाले पड़े देख ले इक बार तूभी तो,
    जो हाल पे मेरी रब तेरा दिल भर न आया।

    गर खतावार हूँ तो खता का इल्म करा दे,
    मर जायगें चौखट पेही रहम गर न आया।

    रौशन कर अंधेरों को दुआ कुबूल हो जाये,
    तनुजा अब हमें तो रखना सबर न आया।।

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 12w

    06/09/2021

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    लम्हा-लम्हा

    लम्हा-लम्हा जिंदगी शाम सी ढ़ल रही है,
    आजमाईश की तपिश से पिघल रही है।

    आशा और निराशा आते है बारी-बारी,
    जीवन की लौ भी धीरे-धीरे जल रही है।

    भला-बुरा कुछ भी नहीं अपने हाथ यारों,
    बस ईश्वर के भरोसे पर साँसे चल रहीं है।

    सफर जिस्त का तन्हा नहीं होता आसां,
    फिर भी ये तन्हाइयां न हमें खल रही है।

    उमर गुजारी सारी खिदमतगारी मे हमनें,
    ये तनुजा खुद को अंगारों मे बदल रही है।

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 12w

    06/09/2021

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    कमाल हैं

    अकेले रहने का नशा बेमिसाल है,
    जो लोग भी हमें मिले वो कमाल हैं।

    जिन्हें अपना समझते रहे अबतक,
    वही बने आज जी का जंजाल है।

    अपनेपन का दिखावा करते रहते,
    ओढ़ के बैठे ये भेड़िये की खाल हैं।

    बेगुनाह हो कर भी हमें सज़ा मिली,
    क्या था कुसूर ज़हेन मे ये सवाल है?

    हर दोष को नजरअंदाज है किया,
    पर वो बुनते रहे फरेब का जाल है।

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 12w

    05/09/2021 शिक्षक दिवस की बहुत बहुत बधाई����������������

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    शिक्षक

    शिक्षक ही होते है ज्ञान, बुद्धि, विद्या के दाता,
    जनमानस को राह दिखाते बन भाग्य विधाता।

    ठाम कर उगली हमे कलम पकड़ना सिखाया,
    स्वर वयंजन की माला गुथ सुंदर हार बनवाया।
    जब कभी मै हुई निराश और कमजोर लक्ष्य से,
    मात-पिता सम नेह और प्यार का जोड़ा नाता।

    सृष्टि के कण-कण से साक्षात्कार करते हो सदा,
    देश-दुनिया का हाल शिक्षा के माध्यम से बताते।
    उज्वल भविष्य हो सके आज पर ही नीव धरते,
    जो कुछ भी हमें मिला है उसके तुम ही हो दाता।

    जब कभी हो जाती भूल हमसे अज्ञानता वश,
    बन मार्गदर्शक बन ज्ञान की सच्ची राह दिखाते।
    जो तुम न आते जीवन मे हमारे ऐ गुरुदेव जी,
    सही गलत का बोध हमें तुम बिन कौन कराता।

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 13w

    #लघुकथा 03/09/2021

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    अधूरे रिश्ते

    निशा बिल्कुल खामोश और निराशा के भाव छिपाती हुई बैठी थी आँसू बार-बार पलकों को भिगा रहे थे और वह किसी प्रकार की वेदना का अनुभव करते हुए जैसे कराह रही थी मानो घुट-घुट कर जी रही थी।समझौते का विवाह संबंध ढ़ोती जा रही थी अब तक सिर्फ इस इंतजार मे कि उसके बच्चे बड़े हो कर उसके बलिदान को जरुर समझेंगे परंतु ऐसा नहीं था।

    बाल्यकाल मे विवाह हुआ तथा किशोरावस्था समाप्त होने से पहले गृहस्थ आश्रम की जिम्मेदारियां डाल दी गई।प्रथम दिवस से ही ससुराल वालों का व्यवहार संतोष जनक नहीं था पति का भी यही हाल था उसके लिए निशा संभोग की वस्तु से ज्यादा कुछ नहीं थी प्रेम की आस लिए पत्नी धर्म का पालन करती रहती थी।बहुत से अत्याचार सास,ससुर,
    जेठ,जेठानी,ननद के द्वारा सहती हुई समय बदलने की प्रतीक्षा करती रही।
    पति की नौकरी निशा के पिता ने लगवा दी इस उम्मीद पर कि दामाद तब तो बेटी को सुख पूर्वक रखेगा पर ऐसा न था शंकालू स्वभाव का शेखर किसी न किसी बहाने उसे मारता पीटता और चरित्र हीन होने का आरोप लगाता रहता था जब की वह स्वयं चरित्रहीन था पराई स्त्रियों पर उसकी कुद्रिष्ट रहती थी।ऐसे ही बाइस वर्ष बीत गये इस इंतजार मे कि कभी तो सुख का छड़ उसके भी जीवन मे आयेगा।आज निशा के बच्चे बाहर चले गये है पढ़ने के लिए और निशा के विरोध करने पर शेखर के अनैतिक संबंधों को लेकर विवाद हुआ शेखर ने पराई स्त्री के लिए निशा को मारा पीटा और घर से निकल जाने को कहा जिससे वह घर छोड़ चली जाय या फिर आत्महत्या कर ले और शेखर अपनी मन चाही जीवनशैली जी सके फांसी लगा कर मरने की धमकी देकर शेखर ने बच्चों को भी अपने पक्ष मे कर लिया कि वह उनकी जरुरते पूरी नहीं करेगा यदि बच्चे माँ की तरफ रहे।
    आज निशा अपना सर्वस्व त्याग कर मायके मे अपने माता पिता के साथ है जिस रिश्ते मे अपना कहने को कुछ बचा ही नही उस रिश्ते का बोझ भला बेचारी कब तक सहती त्याग, तपस्या और समर्पण का जो सिला उसे मिला है उन अधूरे रिश्तों की टीस सहती हुई अपने बच्चों के प्यार को तड़पती रहती है।।

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 13w

    02/09/2021

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    मिले हो ऐसे

    तुम हमसे मिले हो ऐसे,
    कोई अजनबी हो जैसे।

    पर पहले सी बात न थी,
    इज़हार करें भी तो कैसे?

    बहारें द्वार से लौट गई है,
    हर मौसम पतझड़ जैसे।

    पुरजोर कोशिश की थी,
    साथ रहें दिया बाती जैसे।

    न था मंजूर किस्मत को,
    हम नदीं के किनारों जैसे।

    इक तरफा रिश्ता निभाना,
    दो धारी तलवार हो जैसे।।

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 13w

    02/09/2021

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    थोड़ी सी मोहलत

    थोड़ी सी मोहलत मिले ज़िंदगी,
    कर लूं मै रब की थोड़ी बंदगी।
    बे-फ़िज़ूल रहा जिस्त का सफर
    बुझी न ख़्वाहिशों की तिश्नगी।

    जुल्म पे जुबां खोलना गुनाह है!
    अपनो की चाहत हुई आवारगी,
    बदनियती का आलम छाया है,
    पाक रिश्ते मे आज घुली गंदगी।

    खुशियां दिखा छलती रही सदा,
    झेलते रहे हम तो यूंही बेचारगी।
    साथ होके भी तन्हा सफ़र किया,
    लानत है तुझपे बे-रहम ज़िन्दगी।।

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 13w

    कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व की बहुत बहुत बधाई
    परमात्मा आप सभी को प्रसन्न रखें����������
    जय श्री कृष्णा����
    29/08/2021

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    श्रीकृष्ण लीला

    रात का सन्नाटा भादव की कारी अँधियारी,
    संकट हरने को आये जगत के पालन हारी।
    द्रवित हृदय की सुन कर करुणा भरी पुकार,
    धन्य हुआ जग कारागार मे जन्मे संकट हारी।

    कान्हा की सावली सलोनी मोहक छवि प्यारी,
    देख दो नैना चपल नटखट लगे कितनी न्यारी।
    पूतना राक्षसी ने कराया विषपान किया उद्धार,
    मोर मुकुट,गल वैजंतीमाल रुप पैजाऊं बलिहारी।।

    त्रिणावत आया छल से करने श्याम तेरा विनाश,
    मन मोहन की इक ठोकर से हुआ उसका नाश।
    अगासुर बलवान प्रतिशोध भ्राता का लेने आया,
    कर के प्रहार मुष्टि का मिटाई गोकुल की त्रास।।

    गोवर्धन गिरधारी की महिमा का मै करु बखान,
    इन्द्र को हुआ स्वयं की शक्ति का जब अभिमान।
    एक उंगली पर गोवर्धन को धार सबकी रक्षा की,
    कालिया मर्दन की सुंदर लीला जाने सारा जहान।।

    दुष्ट कंस के अत्याचारों से त्राहि मची चारो ओर,
    हा-हाकर ,मृत्यु,के तांडव का फैला हर तरफ शोर।
    संहार किया पापी का बोझ था जो धरती पे भारी,
    हम पर भी कर दो मनमोहन अपनी दया की कोर।।

    ©archanatiwari_tanuja