archanatiwari

@archanatiwari_tanuja

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  • archanatiwari 19w

    5-7-7-5-7-7 वर्णिक छंद
    12/02/2022#33posts

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    सदोका-:मधुमास

    प्रकृति द्वार
    मधुमास आया है
    पूरी करने आस
    आनंद भरा
    हरियाली छाई है
    मंझरियां महकें।।

    डालियों पर
    चहकती बुलबुल
    कोयलिया गाती है
    पंचम राग
    छेड़ तान सुनाती
    हृदय को लुभाती।।

    फूली सरसों
    फूटी गेहूं बालियां
    खिली कुसुम लता
    मन आंगन
    खुशी देती दस्तक
    अन्न-धान भरेंगे।।

    उल्लास उठे
    मेहनत चमकी
    कृषक आस फले
    बसंत आया
    संग खुशियां लाया
    धरती हुई मगन।।

    ©archanatiwari

  • archanatiwari 19w

    11/02/2022 #32posts

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    लिबास

    हम जो इस रुह पर जिस्म का लिबास डाले हुए हैं,
    इसकी आड़ में जाने कितने किरदार संभालें हुए हैं।
    फ़क़त कहने को तो पैकर ज़िंदा है मगर क्या कहें?
    जिस दिल को आबाद किया वहीं से निकालें हुए हैं।

    अर्चना तिवारी तनुजा ✍️
    ©archanatiwari

  • archanatiwari 19w

    बेटा या बहूं

    बुढ़ापे की लाठी:-

    सवाल बड़ा विचित्र है कैसे इसे सुलझाऊ?
    बुढ़ापे की लाठी से क्यों न तुम्हें मिलवाऊ।
    इक बेटी बहूं बन पूरा घर संसार चलाती है,
    फिर भी पराई कहलाती उसका हाल बताऊं।।

    बेटा नित कर्मों से निवृत्त हो काम को जाता,
    देर रात वो लौटकर फिर घर में वापस आता।
    मात-पिता की जिम्मेदारी को पत्नी पर डाल,
    थक हार भोजन कर गहरी नींद सो जाता।।

    पैसे कमाने को ही बेटा समझे है जिम्मेदारी,
    दिन-रात सबकी सेवा करती वो बहूं प्यारी।
    पूरे कुटुंब की जरुरतों का हरदम रखें ख्याल,
    फिर भी सदा पराई ही कहलाती वो बेचारी।।

    प्रथम किरण के संग काम में लग जाती है,
    बच्चों संग सभी सदस्यों को भोजन कराती है।
    घर की साफ सफाई और बुजुर्गो को दवाई दे,
    फिर भी बहूं ! क्यों पराई ही कहीं जाती है??

    बेटे का है गुणगान बेटा ही लगे सबको प्यारा,
    जब लाचार वृद्ध मात-पिता तलाशें सहारा।
    झट दौड़ बहूं ने कांधों को थाम हाथ बढ़ाया,
    फिर भी समाज ने बहूं को हर बार दुत्कारा।।

    ©archanatiwari

  • archanatiwari 19w

    10/02/2022 #30posts

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    रसाल/मधुर

    कितना रसाल मोहक लगे है बसंत का आगमन,
    शीश झुका करते सभी जन मां सरस्वती पूजन।
    लहराती हैं फसलें देखों झूम-झूम कर खेतों में,
    पुष्पों आम की मंझरियों से महका सारा उपवन।।

    ©archanatiwari

  • archanatiwari 19w

    10/02/2022 #29osts

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    मुद्दत

    मुद्दतों के बाद ज़हेन में ये सवाल आया,
    क्यों हो गया तू पराया ये मलाल आया।
    कुछ तो खामियां रही होगी मुझमें जरुर,
    तभी तो जुदा होने का तुझे ख़्याल आया।।

    ©archanatiwari

  • archanatiwari 19w

    #28Posts 09/02/2022

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    इफ़्तिख़ार

    ऐ मेरे वतन तुझपे तो दिल-ओ-जां निसार है,
    रक्षा में तेरी मौत का आना इक इफ़्तिख़ार है।
    तू ही मेरी जन्नत तू ही मेरी आखिरी मन्नत है,
    तिरंगा जो कफ़न मिले यही अज़ीम उपहार है।।

    अर्चना तिवारी तनुजा ✍️✍️
    ©archanatiwari

  • archanatiwari 19w

    #27posts 09/02/2022

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    बेदर्दी

    बेदर्दी से आशनाई का जो सिला मिला,
    ख़ुलूस ने हमारे लबों को कुछ यूं सिला।
    अज़ाब भर गया है वो मुझमें रुह तलक,
    गुज़िस्ता सदी हुई न फिर मेरा दिल खिला।

    अर्चना तिवारी तनुजा ✍️✍️
    ©archanatiwari

  • archanatiwari 20w

    07/02/2022 #26posts

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    गुलाब

    बात पहुंच ही गयी जब गुलाबों तक,
    दायरा न रहा अब खाली किताबों तक।
    दिल उलझ ही गया रंगीन तितलियों में,
    इक रोज़ पहुंच जायेंगे उनके ख़्वाबों तक।।

    अर्चना तिवारी तनुजा ✍️✍️
    ©archanatiwari

  • archanatiwari 20w

    07/02/2022 #25posts

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    शकेबा/धीरज

    सुन चित्कार कहां से लायें,शकेबा ज़रा हमें भी बताओं,
    अस्मत लूटी है हैवानों ने,तुम बस मोमबत्तियां जलाओं।
    बेटी हो चाहे किसी की भी न दायित्व से मुख मोड़ों तुम,
    रुह तक कांप उठे शैतानों की,ऐसा सख़्त क़ानून बनाओं।

    ©archanatiwari

  • archanatiwari 20w

    05/02/2022 24Posta

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    आखिरी खत

    मां पापा प्रणाम
    बहुत प्यार दुलार दिया आपने मुझे हर छोटी बड़ी खुशियों
    का ख्याल रखा पर जब जीवन साथी चुनने की बारी आयी तो फैसला करने का हक़ छीन लिया मैं भी आपके संस्कारों में पली सिर झुका सब स्वीकार कर लिया और आप लोगों ने भी विवाह कर आंखें फेर ली भाग्य भरोसे छोड़ दिया महज़ तेरह वर्ष की आयु में मेरे जीवन का फैसला कर दिया क्या मैं बोझ थी आप पर? बेटी हूं ये मेरा गुनाह है क्या?
    सामने तो कभी पूछ नहीं सकी खत में जानने की आखिरी कोशिश करती हूं।
    आपकी बेटी......

    ©archanatiwari