archana_000

Don't know what's the next move

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  • archana_000 22w

    अपनी सिसकियों को दफ़न किया था अंधेरे से कोने में..
    कमबख्त उजाले ने झांक कर दगा कर दिया


    ©archana_000

  • archana_000 22w

    वक्त को ज़रा नजाकत से बरतना मेरे यारा
    क्यूंकि
    वक्त को पलटने के लिए वक्त वक्त नहीं देता


    ©archana_000

  • archana_000 43w

    हम तो चले थे कुछ कहने, कुछ सुनने
    कमबख्त उस रोज़ बारिश चली आई
    दबे रह गए फिर वो जज़्बात अरसों से..
    हमारी उनसे पहली मुलाकात ना हो पाई

    ©archana_000

  • archana_000 51w

    तमाचा पड़ा यूं मुंह पर ऐसा
    जब रूबरू हुए जिंदगी की हकीकत से हम

    बेखौफ था जो दिल मेरा..
    आज बंध जाना चाहता है किसी सहारे से
    दूर जाना है अपने अरमानों से
    खुद को जकड़ना है उन पुरानी बेड़ियों से..

    ये रूह अब सिमटना चाहती है
    ऊंचाइयों के पर काटना चाहती है
    चाहती है कि..
    टूटे दरवाज़े की सांकल बन कर रह जाऊं
    मयखाने का आख़िरी जाम बन कर रह जाऊं

    या यूं कहिए कि किसी..
    महफ़िल की बदनामी का राज़ बन कर रह जाऊं

    ©archana_000

  • archana_000 54w

    हां
    तुझसे इतना प्रेम नहीं है की हर पल तुझे याद करूं
    बस इतना है कि जिस पल भी करूं..तुझे ही करूं

    ये भी नहीं है कि तुझे किसी और का होते हुए ना देख सकूं
    बस इतना कि.. मेरी मोहब्ब्त पे बस तेरा हक हो

    इतना प्यार भी नहीं है कि तेरे लिए जान दे दू या ले लूं
    बस इतना की तेरी सलामती की दुआ रोज़ मैं करूं

    ऐसा भी नहीं है कि तेरी खातिर खुद के परों को काट दूं
    बस ये है कि तेरे अलावा हर मंज़िल आसान सी है..

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    प्रेम इतना नहीं है कि तुझे हकीकत बना लूं
    बस इतना है की तू रोज़ ख्वाबों में आता रहे

    ©archana_000

  • archana_000 56w

    ज़माने ने पूछा - तुझे क्या ही गम है
    वो मेरा ना हुआ, ये क्या कम है ?

    ©archana_000

  • archana_000 56w

    मेरी जिंदगी उफनती नदी की तरह है..
    झाँकने की कोशिश भी मत करना
    नहीं सह पाओगे तुम इतना आवेग
    साथ मेरे बह जाओगे..

    मेरे करीब आने की चाह में
    तमाम मेरी उलझनों की गांठ बन जाओगे..
    नींद उचटते ही हवा की तरह गायब हो जाए
    वह ख़्वाब बन कर रह जाओगे..

    मेरी आंखों के छलावे में ना आना
    इन नजरों के वार से घायल हो जाओगे..
    दिल लगाने की खता तो ना ही करना
    मेरी चाहतों के चौकीदार बन कर रह जाओगे..

    अपने ही अंधेरे से जो जूझ रही है
    उस अमावस रात के साथी हो जाओगे..
    आहे भरते हो जिस लेखनी को पढ़
    उन्हीं रचनाओं का अंत बन कर रह जाओगे..

    मैं झूठी ही सही, गर सच बोला तो
    घिनौनी करतूतों से अपनी बेपर्दा हो जाओगे..
    जो मुक्कमल ना हुआ तेरा प्यार
    सरेआम मुझे बेवफ़ा कह जाओगे..

    ©archana_000

  • archana_000 57w

    #rachanaprati40 #fictional
    @shruti_25904 @aka_ra_143
    ""एक छोटी लड़की की मन की दुविधा जब वो पहली बार अकेले सफ़र करती है..वो ना डरने की भरपूर कोशिश करती है और अजीब अजीब विचारों के साथ वो सही सलामत अपनी मंजिल पर पहुंच जाती है, उसे ये सफ़र एक रण लगता है और अंत में वो खुद को विजेता की तरह देखती है""

    कल सुबह की परीक्षा थी तो आज शाम को ही निकलना था शहर के लिए.. जल्दबाजी के फेर में देर हो गई..घर से, मैं खुद जा सकती हूं, मैं कोई बच्ची नहीं हूं यह कह कर निकल तो गई थी, पर मन डरा रहा था मुझे.. हां तू बच्ची नहीं है, जवान हो गई है, ये कह कर..एक घंटे गांव के बस स्टॉप पर इंतजार करना पड़ा... इक्का दुक्का लोग दिख रहे थे, सभी अपने आप में व्यस्त और ये भारी भरकम पीठू बैग मेरे कंधों को खाए जा रहा था और चोरी के डर से मैं इसे उतार भी नहीं रही थी.. पहली बार अकेली सफ़र कर रही थी ना इसलिए कुछ ज्यादा ही सोच रही थी..
    (बस आ गई थी, बैग संभालते हुए मैं चढ़ी, दरवाजे के पास वाली सीट पर हक जमा लिया, तभी मैंने गौर किया कि बस में कम ही लोग थे और वो भी सब आदमी)
    ""इतने कम लोग क्यू हैं, और ये मुझे ऐसे क्यों देख रहे हैं,अच्छा हुआ मैं जींस की बजाय सूट पहन आई, अगर कुछ ऐसा वैसा हुआ ना तो जोर से चिल्ला दूंगी मैं, पर चलती बस के बाहर क्या आवाज़ जा पाएगी? एक काम करती हूं.. पेन निकाल लेती हूं, अगर किसी ने भी आगे बढ़ने की कोशिश की ना तो पेन मार दूंगी, आंख में मारना सही रहेगा या कहीं और.. भगवान जी प्लीज !! अगले स्टॉप पर कोई औरत चढ़ जाए.. अगर कोई लड़की नहीं आई तो मैं उतर जाऊंगी..पर उतर के जाऊंगी कहां? बाहर अंधेरा होने वाला है..अगली बार पक्का टाइम से चलूंगी..किसी दोस्त के पास कॉल करूं क्या?.. नहीं.. मैं वैसे भी ज़ोर ज़ोर से बोलती हूं, और अगर हँसी तो कहीं ये लोग हिंट समझ लें..अच्छा इयरफोन ही लगा लेती हूं और गाने चलाने के लिए रहने दूंगी, सचेत रहना ज़रूरी है""

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    (हरियाणा रोडवेज की पहचान बरकरार रखते हुए, बस ने अचानक ब्रेक मारे, मेरा फोन गिरते गिरते बचा, कुछ लोग चढ़ते हैं , उनमें औरतें भी थीं और एक जवान लड़का भी जो मेरी बगल में बैठ गया)
    ""शुक्र है कि कोई आंटी तो दिखी, ये पूरी बस खाली है और इस लड़के को मेरे पास ही बैठना था, लगता तो सीधा सा है, पर जो दिखता है ना वो होता नहीं, जरूरी बकरी की खाल में भेड़िया मिलेगा,पक्का बोलने की कोशिश करेगा, अगर ज्यादा बातचीत की ना तो कह दूंगी..मेरा बॉयफ्रेंड है, यार प्यास लगी हुई है , पानी पियू या रहने दू, अगर इसने मांग लिया तो, कह दूंगी की बॉटल झूठी है, और फिर भी मांग लिया तो.. ना ना रहने दी देती हूं, बॉटल वैसे भी ऊपर रखी है, अगर उतारने के लिए खड़ी हुई तो सभी का ध्यान मेरी तरफ़ ही जायेगा,थोड़ी देर में बस आने ही वाला है शहर""
    (शहर आ जाता है, ऑटो से मैं मेरी दोस्त के घर की तरफ़ जाती हूं, अंधेरा छा चुका है और बत्तियां जल चुकी हैं)
    (मैं दोस्त से -)
    ""पता है, आज मैं अकेली आई हूं, और मैं डरी भी नहीं, और पता है मैं बस में सोई भी नहीं और किसी को अपने बारे में भी नहीं बताया..और ऑटो वाले भैया तो बड़े वाले रास्ते से आ रहे थे पर मैंने कह दिया था..कि मेरे पापा पुलिस में है और उन्होंने कहा है कि छोटे वाले रास्ते से ही जाना है..वो बेचारा डर गया और मुझे घर के गेट तक छोड़ के गया है, पापा को फोन कर के बता दूं कि अब मैं बड़ी हो गई हूं""

    उस नादान को नहीं पता कि इस दुनिया में अच्छे लोग भी हैं..तभी वो आज सही सलामत घर पहुंची है..और ये छोटी सी खुशी शायद उसे हिम्मत दे, जिंदगी के लंबे रास्तों को अकेले तय करने में..

    ©archana_000

  • archana_000 57w

    काफ़ी अच्छा खेल गए तुम जज्बातों के साथ
    अब बारी मेरी है खेलने की.. शब्दों के साथ

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    ये जो तुम "किसी" बात पर रूठ जाते हो ना,
    सच कहती हूं ..
    "किसी" बात की बदौलत, किसी दिन
    महज़ इक बात बन के रह जाऊंगी..

    ©archana_000

  • archana_000 57w

    दंड

    अच्छा बताओ क्या दंड दिया जाए...

    उन मासूमों को
    जो पेट की खातिर
    सरेआम सड़कों पर अपना
    मोल भाव किया करते हैं

    या उन आवारों को
    रफ्तार तेज़ ना होने के कारण
    जिन्हें कुचल दिया जाता है

    और उन रक्षकों को
    सरहद पर जो मार रहे हैं.. "किसी" को
    यूं कहिए कि.. जो मर रहें हैं
    'किसी' की हिफाजत की खातिर

    या उस नासमझ को
    जो कच्ची उम्र में वो गलती कर बैठी
    जो उम्र पकने पर..
    एक पवित्र रस्म कही जाती है

    अच्छा यही बता दो कि
    मुझे क्या सज़ा दी जाए
    मैं भी तो कातिल हूं ना..
    तेरी दकियानूसी सीमाओं की...!

    ©archana_000