anush18

So many desires in desertedness, Who keeps the track of graves

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  • anush18 12h

    After tasting every flavour of melancholy, you're asking me why I am not the same?
    All that remains in my heart is nothing but those shattered expectations where I thought it's gonna be us but, in the end what resides inside and out pinch .
    ©anush18

  • anush18 1w

    Flowers instead of tears!!

    Hey you were just a random person few days ago but now. You see? How important you have become? Even when I'm lying and dying inside, I still believe that I can rely upon you. You are the best chapter of my life's eulogy. I want you to be there at my funeral, playing my song, right beside my coffin. Promise me you won't be crying. Will you be the same? You will still tease me? You will still shout out my name aloud? You will still take care for every little detail of the things I like and I hate? You will still help me in stepping forward when my inner self will want me to step back? There's something different in how we met and how we are ripping apart. Now, we have no one to show mercy on us. I'm still confused why your eyes have myriads of lies which is for my good? Why do you deny everytime when I ask you to sing me a farewell song? Yes, I know I am an over thinker but why are you obsessed with the silence? I'm in the solace. A world that has you and me for both of us. Oh, this is the most depressing part of my life and how unfortunate I am, can't even tell you what storm is going inside my head. I hope that one day successfully I'll be telling you all my fears and you would listen to me the way I used to listen you. Don't bade me a goodbye whenever you leave, never give surprises to me (maybe I'll die off), don't thank me for any kind of help I ever did to you, don't suggest me anything you like, never ever invite me in your b'day party, never gift me anything, I'll always embrace those memories and one fine day I'll die keeping and caressing these things. Things? Really? They're not merely things, they're tragedies in my life, a tragedy that was going to result in something bad but a miracle happened and It all became a moment! I hope you will not complete my wish to visit our favourite planetarium, to see night aurora's together, to watch "black sirius" on 31st Dec., constellations, planets...I doubt you. I, sometimes, think that you are gonna do that. I request you to please never do these things. When I'll leave, buy 100 bottles of wine or more and enjoy the moments we had together and for a future that is all going to be without me, losing one in billions, not a big big deal? There is no feeling now, I mean, the one who have been assigned as GOD has made me a rock. I'm not rocking but still trying my best to gift myself flowers instead of tears.
    ©anush18

  • anush18 3w

    Hold my hands,
    As I just don't want to go to my grave.
    Faking a smile was much easier,
    Than watching people weeping fake tears for my dead body.
    Hold my hands so that I can see the setting sun's light scattering and reflecting on my broken pieces!
    ©anush18

  • anush18 3w

    पीछे मुड़कर देखा तो पता चला वो वहीं खड़ा था, कुछ ऐसे ही थे हम, एक दूसरे को चोट पहुंचाकर बड़े अच्छे से घाव भरना आता था हमें। एक आखिरी बार मिलकर कुछ ऐसी तसल्ली हुई मन को की आने वाले दिनों में जैसे उस जगह को छोड़ने का कोई दुःख ही नहीं होगा मन में। दिल्ली के मशहूर छोले भटूरे मेरे भटूरे भाई ने ही तो खिलाये थे, पहले दिन कॉलेज उसने यानी आरव ने ही तो छोड़ा था, शायद इस मुलाकात के बाद काफ़ी वक़्त बाद मिले अब हम सारे भाई बहन।

    जा रही थी और उसके लिए कुछ लाई भी न थी, दुःख तो बड़ा हुआ, मगर फ़िर मानो एकाएक वो गायब भी हो गया।
    मैंने ट्रेन की विंडो सीट बुक की थी तो वहीं जाकर शांति से बैठ गयी। और मेरे दुख की तरह आरव भी आँखों से ओझल हो गया और मैं गुम गई अपने इस सफ़र में।

    पुष्कर पहुंची तो परिवार से मिलने के बाद अपनी सबसे अच्छी सहेली "अल्बीना" के घर गयी। उसके घर पहुंचते ही ऐसा लगा मानो जो अंदर अंदर सड़ रहा था, अब उसमे वापिस से जान आ रही हो। वो तूफ़ान के बाद की उदासी अब दिल पर घाव नहीं कर रही थी। अल्बीना को किताबों का बहोत शौक था, इसीलिए उसके लिए उसकी सबसे पसंदीदा किताब "शेखर: एक जीवनी" उसे भेंट कर दी। पर तोहफा लेने के उस व्यवहार से दंग रह गई थी मैं, उसने ऐसा व्यवहार किया जैसे मैं कोई अंजान होऊ। मेरा खिलखिलाता मन फ़िर से उजड़ने लगा और घर पहुंचते ही जी खराब सा हो गया।
    ©anush18

  • anush18 3w

    Playing with my heart,
    You never understood my pain.
    Now every time you try to bring happiness
    All your attempts went in vain.

    Now, I'm merely a statue,
    With no emotions inside.
    You made me cruel,
    And now you're again asking me to melt?
    Just for your happiness?

    Oh, I loved you somedays ago but I didn't know,
    Now all my love has ended, only a dead sadness has enveloped our surroundings!
    It's time to say a good goodbye but let me hold your hands so that I can take your touch with myself in the darkness to shine even in the darkest nights.
    ©anush18

  • anush18 3w

    स्कूल के बाद कॉलेज की पढाई के लिए दिल्ली जाना पड़ा, पहली बार परिवार से और आरुष से इतना दूर जाना था। और आज जब कॉलेज खत्म करके घर जाने की बारी है तो इस घर की रह रह के बड़ी याद आ रही थी। दिल्ली में ना जाने कैसे इतना घुल मिल गयी की अब दिल्ली छोड़ने का मन ना था, मगर दूसरी तरफ़ माँ सा, बापू सा और आरुष से मिलने की खुशी भी थी, वो गुमटी याद है मुझे, कैसे आते वक्त आरुष ने वहाँ बिठा कर सब ध्यान से समझाया था और फ़िर मेरे रो जाने पर उसने हम दोनों के लिए कुल्लहड़ की अदरक वाली चाय पी थी, कम चायपत्ति, ज़्यादा दूध, आलू मेथी, पालक पनीर ये सब तो उसे नींद से जगा कर भी खिला दो तो वो बुरा नहीं मानता था।

    वो गुमटी और उस पर चाय वाले बूढ़े अंकल और उनकी सीख सब याद है। आज सालों बाद पुष्कर लौट रही हूँ तो सारी तस्वीरे आँखों में अपने आप उभर जा रही हैं। इतने में आरुष का कौल आया, मैं इन यादों में इतनी गुम थी की अभी का कुछ अता पता ना था पर थोड़ी देर में मैंने फ़ोन उठाया और पता चला की उसे मेरे आने का बहुत इंतज़ार है। मैंने शर्म से कुछ कहा नहीं पर आरुष समझ गया। और फ़िर जिस तरह सिरफिरी मैं थी, मैंने ट्रेन के आने से पहले स्टेशन के तीन चार चक्कर काट लिए। और अपने भाई को फ़ोन करके बुला लिया की आज दिल्ली में आखिरी दिन है, उसने फ़ोन नहीं उठाया। एक बार को थोड़ा बुरा तो लगा पर फ़िर मैं समझ गयी की कहीं अपने काम में ना फँसा हो।

    ©अनुष् 18

    #pushkar1

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  • anush18 3w

    "कल के बीते पल से बेहतर होते यादों के अक्स अक्सर।"

    यही पढ़ा था पहली दफ़ा जब पुष्कर से प्यार कर बैठी, अरे-अरे! पुष्कर कोई लड़का नहीं, राजस्थान में एक जगह है। बहोत तो नहीं पता प्यार के बारे में, पर इतना ज़रूर पता है की इस जगह से ऐसा प्यार किया है जो तब तक मेरे साथ रहेगा जब तक मैं हूँ यहाँ। कहानियाँ? कहानियाँ सुनानी, सुननी और बनानी बहोत पसंद है पर इस बार लिखने की कोशिश करूँगी। पुष्कर जाने का ये चस्का मुझे शायद पिछले साल लॉकडाउन में लगा जब अपनी गली मे निकालना भी मुश्किल था। पुष्कर लेक, और वो फ़ोर्ट ही था जिसने मुझे अपनी तरफ आकर्षित किया पर उससे भी ज़्यादा उस नज़ारे को आरुष के साथ देखने के ख्वाब जो अभी तक दिल मे संजो कर दफन कर दिया है। याद है आज भी कैसे उसे वहाँ जाने की ख्वाईश झिझकते हुए बताई थी और उसने कितने प्यार से कहा था "अरुशिका!, बस इतनी सी बात, ठीक है, एक बार हम दोनों सारे काम से फ़्री हो जाएँ फ़िर तू जहां बोले वहाँ ले चलू तुझे।"

    आरुष और अरु (अरुशिका)? यही सोच रहे की हम दोनों के नाम इतने मिलते जुलते कैसे हैं? सब्र करो, सब बताती हूँ।
    पुष्कर में ही पैदा हुई और उसी की मिट्टी में पली बढ़ी, पढाई भी वही हुई, आरुष भी उसी मिट्टी का बेटा था। हम दोनों पहली बार उसकी किसी बहन की शादी में मिले थे, पर ये एक जैसे नाम? ये महज़ इत्तेफ़ाक़ है या और कुछ, पर यही सच है। इत्तेफ़ाक़ तो मैं मानती नहीं, पर विज्ञान और अध्यात्म, दोनों के दृष्टिकोण से देखे तो जिस चीज़ के बारे में तनिक भी जानकारी होती है और वो आपस में मिलते जुलते हो तो उनका संयोग निश्चित है। अब समझे? इत्तेफ़ाक़ है या सच। अभी भी नहीं पता पर इतना ज़रूर जानती हूँ की कहीं न कहीं हम दोनों की आत्मा जुड़ी है।
    ©anush18

  • anush18 3w

    ᴅɪᴀʀʏ:
    ʙᴇʟᴏɴɢs ᴛᴏ: ������������ ������������������
    ᴛʀɪɢɢᴇʀᴇᴅ ᴡᴀʀɴɪɴɢ: ������ ���� ���� ������������ ���� ����������������, ���������� ������ �������� �������� ��������.


    ��������: 18.05.2005
    ������: ������������������

    Hey, this is Martha Louisiana and I was born on this unfortunate day. This is the very first diary of my life, usually people keep diaries to remember dates, events, note down their important works, make lists but the reason why I am making and keeping this diary is ���������������������� ���������������� �������� ���� ��������.

    Yes, so it's been a long time, maybe 17 years and I've had enough of it, this cup of poison, oof, can't avoid anymore. When your mother fell sick just because of your toxic family members, what can be more worst than this? You wanna know? OK, even when she got well, they gave her a dose of taunts and traumatized her, never appreciated her for her work, always pointed out mistakes, and then the worst? When she used to fell sick and we were not able to cook breakfast on our own, those toxic members asked us to call our mother and cook breakfast for us and I remember that day very well, she was too good in partiality, my grandmother, yes, too good. They were not too bad cause I've seen people worst than them but they were not good as well, you know upto what extent it hurts a child to see their mother being insulted instead of being appreciated.

    Since then, I hate everyone, either I prefer school, or my own room, I have stopped talking about my stuffs to others as well as to my dear ones, I don't want them to know that I'm going through something very bad. My mother is good and well now, as she tries to be but still I know there are myriads of pain and struggles she has gulped down her throat without letting us know and also we are able to fill our stomachs on our own.

    It's hard to be happy, but we can try at least. It's not about *why only us*, it's about *okay, this will pass top*

    "ᴍᴀʀᴛʜᴀ ʟᴏᴜɪsɪᴀɴᴀ's ғɪʀsᴛ ᴛᴏxɪᴄᴏʟᴏɢʏ"
    ©anush18


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    #ToxicMarch #ceesreposts #toxicology #writersbay
    @writersnetwork @writersnetwork #diaryc
    B. G. IF YOU KNOW THEN YOU KNOW #DARK

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    ©anush18

  • anush18 3w

    Those who say "ɪɴ ʟᴏᴠᴇ, ᴡɪᴛʜ ᴍʏsᴇʟғ", do you think that they don't crave for love? Or being loved by someone? If yes, then you're wrong. They are the broken hearted people who are tired now, tired for they have tried enough to overcome their pain and their urge of being loved.

    Yes, I remember, I have done almost nothing in these two to three months and these days I can't even understand my own moods, somedays I like being alone, somedays I like calling my best friend and talk for hours, somedays I like these four walls where all my pieces are buried alive in between the bricks of my room, somedays no other place is as good as my terrace where I can watch the Orion without anyone to disturb me. All the radiations that my mind transmitted were absorbed by you, lately, but I have realised that it was you, who used to take care of me even when I didn't want to, I've realized that it was you who loved me even when I didn't want to love myself. You are my favourite escape. You're like the pole star, always there but so far. Your glimpses are the ones I crave for. Can't say that love you to the moon & back, that's just a little measurement for us.. We have a whole universe inside us. And now I'm homeless because you were my home, the star under which I used to sleep and then wakeup with your shine on those greeen grasses. Till then, waiting for an another birth to meet you. Oh, I miss you and your fragrance.

    ©anush18

    background credits: there is sadness in your eyes.
    #ToxicMarch #ceesreposts #conceptc @writersnetwork @writersbay @_ashna_

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    You're my favourite escape.

  • anush18 4w

    कुछ किस्से रह जाते हैं सिमट के,
    मन के अंदर की दीवारों के भीतर।
    वे शोर तो करते हैं बाहर आने के लिए,
    मगर कौन ही सुन पाता है उन आवाज़ों को?

    कुछ किस्से थक जाते हैं,
    मन के अंदर दबे हुए।
    और अंत में उसी चार दीवारी
    के भीतर दम तोड़ देते हैं,
    वो अनसुने और अनकहे किस्सै।
    ©anush18