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  • anu81088 18w

    बसी हुई दुनिया

    अचानक से दिल के आसमान में
    तेरी यादों की ये बदली उमड़ती है,

    कसम से बहुत याद आती है तेरी
    जब ये दुनिया मुझ से झगड़ती है,

    नहीं ज़माने से मेरा कोई दस्तूर
    तू ज़माने के संग क्यों बिगड़ती है,

    किसने भरे कान,मेरी खिलाफ़त में
    जो आज कल तू बड़ा अकड़ती है,

    ना मैं कोई दरख़्त,ना तू सूखी पत्ती
    फिर क्यों इस पतझड़ में बिछड़ती है,

    माना नहीं बसा सकती तू दुनिया मेरी
    तो बसी हुई दुनिया से क्यों उजड़ती है,,,
    ©anu81088

  • anu81088 19w

    मैं जिम्मेदारी निभा रहा हूं,नाम ना दो गुलामी का
    मैं आदर में झुक रहा हूं,नाम ना दो सलामी का,

    भिखमंगों की दुनिया में,हाथ फैल गए तो क्या
    मैं कमा कर खा रहा हूं,नाम ना दो हरामी का,

    अपने शौक छुपा लिए मैंने,मेरे अपनों के लिए
    मैं जमा नहीं कर रहा हूं,नाम ना दो आसामी का,

    जो कुछ पा लिया है,मेरे अपनों के ही कर्म है
    मैं कुछ गिन नही रहा हूं,नाम ना दो इनामी का,

    रिश्तों के समंदर में,अच्छे भले तैराक डूब गए
    मैं भी उसमें डूब रहा हूं,नाम ना दो सुनामी का,
    ©anu81088

  • anu81088 19w

    नया साल...

    क्या बताऊं ये साल कैसा गुजरा
    आंख का आंसू मेरे पैरों से उतरा,

    एक साल नही दिनों का हुजूम था
    साल बीतने तक रहा ना एक कतरा,

    फख्त कुछ टुकड़े समेटे दिल के
    फिर लगता है इधर-उधर बिखरा,

    नए साल के नए सूरज से उम्मीद थी
    वो भी ढलते हुए हर उम्मीद से मुकरा,

    साल का आखिरी दिन है मेरा नही
    कल से नए साल का भी नया नखरा,

    पहले जश्न मनाएं या उदास हो जाएं
    इस साल में भी उमर बढ़ने का खतरा,
    ©anu81088

  • anu81088 19w

    ताजपोशी...

    जहां में जितने दिल उतनी ही इश्क की बातें
    कुछ बचकर निकले कुछ को अश्क की रातें,

    मिल गया इश्क तो क्या जन्नत क्या जहन्नुम
    दुनिया की इश्कवारों से रश्क की मुलाकातें,

    आशिक सच्चा है या झूठा कोई कैसे तोलेगा
    महबूब जो पूछता,दिल चिर के हम भी दिखाते,

    हमने भी लिखे थे फसाने प्यार की दीवारों पर
    दीवार-ए-ग़ज़ल पढ़ कर प्यार हमें है सिखाते,

    खैर मुद्दा इश्क की हुकूमत पर आकर जो ठहरा
    इश्क की ताजपोशी से कब तक खुद को बचाते,,,
    ©anu81088

  • anu81088 22w

    बावरा दिल...

    बावरा दिल फिर से ख़्वाब सजाने लगा है
    हर किसी पर अपना हक जताने लगा है,

    हां,कभी सर्द हवाओं ने होंठ कपकपाएं थे
    पगला आज भरी दोपहरी गीत गाने लगा है,

    जो बात छुपानी थी सबसे भरी महफिल में
    उसे जुबां के बदले आंखों से बताने लगा है,

    आशिक़ी तक तो सारा हाल ठीक ठाक था
    मयकशी में डूबकर ख़ुद को जलाने लगा है,

    कहता है दर्द का तलबगार बनाकर छोड़ोगे
    इसलिए हंसी खुशी में भी मुझे सताने लगा है,,,
    ©anu81088

  • anu81088 22w

    रकम...

    ये जोड़ियां खुदा ख़ुद
    अपनी मर्जी से बनाता है
    धरती पर लिख रह रहे
    इंसानों की कलम से नही,

    अगर ज़ख्म मिला है
    अपनों के हाथों से तो
    इलाज़ भी अपनों से होगा
    गैरों के मलहम से नहीं,

    कोई किसी को पूछकर
    नहीं चाहता है जनाब
    चाहत अपने आप होती है
    किसी के रहम-ओ-करम से नहीं,

    नजरें सबसे मिलकर
    हाल-ए-दिल बताती है
    कमबख्त नही मिलती है
    तो बस अपने सनम से नहीं,

    ये इश्क का कर्ज़ है
    इश्क से ही उतरेगा
    टकसाल में ढलने वाले
    सिक्कों की रकम से नही,,,
    ©anu81088

  • anu81088 23w

    नाम...

    मेरी इबादत की दुआओं में तू कबूल हुआ
    मैं जिंदगी के बाग का महकता फूल हुआ,

    मेरे किस्से,मेरे फ़सानें मैं ही तो जानता था
    सबको बताने लगा तो रास्ते की धूल हुआ,

    नहीं है वास्ता मेरा,इस दुनिया की जंग से
    अब से मोहब्बत में जीना,मेरा उसूल हुआ,

    दहलीज तेरी छूने को,कितनी हदें पार हुई
    बस किस्मत से रिश्ता हमारा मकबूल हुआ,

    कितनी तन्हाई में बिताएं प्यार भरे मौसम
    अब छोड़ तन्हाई,तेरे प्यार में मशगूल हुआ,

    निभा सके वफादारी नाम की,ज़रा मुश्किल है
    मैं जुड़ा तेरे नाम से तो,नाम का दाम वसूल हुआ,,,
    ©anu81088

  • anu81088 24w

    रूदाली...

    भोर में देख रहा हूं,रोज सूरज की लाली
    सांझ में दिल बनता,फिर उसका सवाली,

    ये राहे तो हरी-हरी पत्तियों से भरी हुई है
    बढ़ते हुए कदम फिर क्यों रहते है खाली,

    बाग लूटा अरमानों का,मौसम की बाहर में
    भंवरा संग ले उड़ा कली,क्या करता माली,

    फूलों की उड़ती खुशबू का क्या ठिकाना
    बस बहती हवा ने इसकी मर्ज़ी है संभाली,

    कभी उल्लू और कौएं के सुर भी सुरीले थे
    आज चुभ गई उसके नाम की भी कव्वाली,

    शबनम गिरी थी,या रोया था ये आसमान
    घास आंसुओं में डूब गई,रात बनी रूदाली,,,
    ©anu81088

  • anu81088 25w

    सौ दफ़ा...

    जाने किस बात पर तुम इतनी खफ़ा हो
    ऐसा क्या कहूं कि,मेरा हर कहा वफ़ा हो,

    धन दौलत वालों के अमीर खेल ना समझूं
    खेल सीखा ऐसा जिसकी हार भी नफ़ा हो,

    मीठी बोली को तरसे है सारे बासिंदे जमीं के
    मैं मीठा भी कड़वा करूं जो तेरे लिए जफ़ा हो,

    जो अक्ल आई तो इश्क का जाना तय समझो
    पर इश्क में कोई आशिक़ मेरी तरह ना सफ़ा हो,

    सुना करते है मोहब्बत मुर्दों में भी जान फूंकती है
    अगर ऐसा है तो ये मोहब्बत सभी को सौ दफ़ा हो,
    ©anu81088

  • anu81088 25w

    चांद देखकर अपना चांद याद कर रहा हूं
    जमीं से आसमान की फरियाद कर रहा हूं,

    चांदनी हो या धूप दर्खतों की छांव तो काली है
    बस तोड़ दिल की पत्तियों को खाद कर रहा हूं,

    जाने कितने हसीन पल गुजारे तेरे ख्यालों में
    उन्हीं ख्यालों की उधेड़बुन तेरे बाद कर रहा हूं,

    मेरा हमदर्द तो बस एक तेरी यादों का सवेरा है
    सवेरे के उजाले से रात में दिलशाद कर रहा हूं,

    टूट गए जो तारे किसी की मुराद पूरा करने को
    उनकी जगह को जगनुओं से आबाद कर रहा हूं,,,
    ©anu81088