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Reposts
  • anshuman_mishra 5w

    Hope you got it :)

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    फकत हम खूब रोए थे, दीवारों से चिपक कर के..
    किराए के मकां लेकिन, किसे ताउम्र रखते हैं?

    _अंशुमान___

  • anshuman_mishra 5w

    कौन आएगा?
    1222 1222 1222 1222

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    कौन आएगा?

    अंधेरा है वतन में अब, सहर बन कौन आएगा?
    परिंदों के घरों खातिर, शजर बन कौन आएगा?

    कि सूखा पड़ गया है, खून से सींची ज़मीनों पर..
    दोबारा सींचने को फिर लहर बन कौन आएगा?

    किसी मां की बंधी हैं उंगलियां मन्नत की डोरी से..
    "अभी आजाद ज़िंदा है" खबर बन कौन आएगा?

    चलो खलिहान में हैं काटनी बंदूक की फसलें,
    भगत का साथ देने को, कहर बन कौन आएगा?

    कि बाहों में लिपट जाने का भी अपना मज़ा है पर..
    लिपटकर के तिरंगे में अमर बन कौन आएगा?

    _अंशुमान___

  • anshuman_mishra 6w

    2122 2122 2122 212

    शमशीर - तलवार शज़र - पेड़ कल्ब - दिल

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    ग़ज़ल

    अश्क की कल बारिशें थीं, आज फिर बादल दिखे,
    आज फिर से खत पुराने, धूल से घायल दिखे,

    थी पड़ीं कुछ स्याह बूंदें डायरी के पेज पर,
    आज फिर से गाल तक फैले हुए काजल दिखे!

    फेंक शमशीरें उठाते फूल अपने हाथ में,
    इश्क से थी जंग जिनकी, इश्क में पागल दिखे!

    आज कटते इस शज़र की चीख सुन पाते नहीं,
    खुदकुशी करते परिंदे इसलिए थे कल दिखे!

    आस गायब, कल्ब गायब, ज़हन गायब है मगर
    बाद में ढूंढेंगे सब, पहले ज़रा बोतल दिखे..

    _अंशुमान_मिश्र__

  • anshuman_mishra 6w

    Drawing at my fancy ����‍♂️
    2122 2122 2122 212

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    काजल दिखे!

    अश्क की कल बारिशें थीं, आज फिर बादल दिखे!
    आज फिर से खत पुराने, धूल से घायल दिखे!
    थी पड़ीं कुछ स्याह बूंदें डायरी के पेज पर,
    आज फिर से गाल तक फैले हुए काजल दिखे!

    _अंशुमान__

  • anshuman_mishra 7w

    हो चुका विश्वास है अब, मैं चुका हूं हार तुझको..

    पौध है, पर जल नहीं है! तन कहीं पर, मन कहीं है..
    रात्रि नीरसता भरी है! श्वास है, जीवन नहीं है..
    प्रेम अब दिखता कहां है? हर दिशा में बस धुआं है..
    आस की जलती चिताएं, दे रहीं धिक्कार मुझको!
    हो चुका विश्वास है अब, मैं चुका हूं हार तुझको..

    _अंशुमान__

  • anshuman_mishra 7w

    बेड़ियां-कर - हाथों में बेड़ियां व्योम - आकाश
    चपला - बिजली झंझावात - तूफान

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    आज मत कहना कि अंधियारा घना है..

    बेड़ियां -कर , रक्त - भीगे केश लेकर,
    अधर सूखे, अर्धमृत - सा वेश लेकर,
    यदि तनिक भी आत्मगौरव शेष हो तो,
    उठ चलो अभिमान के अवशेष लेकर!
    जो उठा है, वो मिटा है, या बना है,
    आज मत कहना कि अंधियारा घना है..

    तीव्र चपला वार से है व्योम मरता,
    शीत झंझावात से कण-कण ठिठुरता,
    अश्रुओं की धार को तब अस्त्र कर लो,
    काट दो हर बंध जो है कैद करता,
    अब कदम पीछे हटा लेना मना है,
    आज मत कहना कि अंधियारा घना है..

    _अंशुमान___

  • anshuman_mishra 7w

    नदी-संसार = नदी रूपी संसार
    @raakhaa_ thanks for requesting for this����

    जब कुछ भी समझ नहीं आता, तब राम समझ आते हैं..♥️

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    नमन हे राम!

    नमन हे राम!
    सर्वप्रिय नाम,
    सकल सुख धाम,
    बनाओ काम,

    नमन हे तात!
    भानुकुलनाथ,
    रहो तुम साथ,
    पकड़ कर हाथ,

    प्रभो मैं दीन,
    दशा अति हीन,
    कि जल बिन मीन,
    दुखों में लीन!

    प्रभो मैं दास,
    न तोड़ो आस,
    जगा विश्वास,
    बुझाओ प्यास!

    नदी-संसार,
    तेज है धार,
    करो उपकार,
    लगाओ पार!

    _अंशुमान मिश्र__

  • anshuman_mishra 7w

    Read that again!

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    ज़िन्दगी तो भाग निकलेगी फकत छिपते हुए,
    'मौत' का इल्जाम सारा, मौत के सर आएगा..

    _अंशुमान__

  • anshuman_mishra 8w

    2122 2122 212

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    जा चुकी है जान, अब जाती नहीं,
    कब्र में सांसें ज़रा आती नहीं,

    _अंशुमान___

  • anshuman_mishra 9w

    वही इक डोर..
    1222 1222 1222 1222

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    किसी के साथ पूरी ज़िन्दगी बेहाल लगती है,
    किसी के साथ बस इक शाम भी सौ साल लगती है,
    वही इक डोर, बंधकर जोड़ती है खुशनुमा रिश्ता,
    वही इक डोर, ज़िम्मों का कभी जंजाल लगती है..

    _अंशुमान___