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  • anshulaftaab 3d

    रास नहीं आ रहा था, ये शहर अभी तक...

    चलो अब दिल लगाने का, कोई ज़रिया तो मिला..

    "अंशुल"

    ©anshul

  • anshulaftaab 1w

    सुख की कब तक बाट जोहे
    जब कोई फिक्र भी नही तोहे
    रो रो नैन-नीर भी सूखे..

    सूरज भी अब डूब गया
    अंधकार में अब डगर
    बहुत लम्बा है सफ़र...

    सहर की आस में
    काली सर्द रात में
    लिए जाली सोहबत साथ में...

    कब तक अलाव गर्म किये
    दधीचि हम बने रहे
    सब कुछ यूँ ही सहते रहे...

    "अंशुल"

  • anshulaftaab 1w

    सीखूँगी, समझूँगी, लड़खड़ाऊँगी,

    हो सकता है गिर भी जाऊ...

    फ़िर भी संभल जाऊँगी...

    झाड़ पोंछ के फिर से उठ खड़ी होंगीं...

    पहले से ज्यादा हिम्मत के साथ...

    पहले से ज्यादा जोश के साथ...

    "अंशुल"

    @anshul

  • anshulaftaab 1w

    दिल शीशे सा साफ़ और ज़िगर में आग रख़ते है

    यूँ ही नही हम एक हाथ में "महताब" और

    दूजे में "आफ़ताब" रखते है

    "अंशुल"

    ©anshul

  • anshulaftaab 1w

    कुछ लोग फिर से दोस्ताना हो रहे है,
    लगता है मेरी बर्बादी में, अभी भी कुछ कसर बाक़ी है..

    "अंशुल"

    ©anshul

  • anshulaftaab 1w

    हर शख्स यहाँ,
    ख़ुदा बनने की ज़ल्दी में है,

    मेरी इबादत में मेरा ख़ुदा,
    मेरे ज़मीर के सिवा कोई नही!

    "अंशुल"

    ©anshul

  • anshulaftaab 2w

    हिज़्र के बाद, मुलाक़ात की रात..

    जैसे पतझड़ के बाद, बसंत बहार...

    "अंशुल"

    ©anshul

  • anshulaftaab 2w

    "हिज़्र की रातें"

    तेरा इंतेज़ार, जैसे सदियाँ हज़ार..

    जैसे होती है घनघोर बारिश, ऐसे ही हम ज़ार ज़ार रोये..
    सारी रात करवटे बदलते है, राम क़सम कभी चैन से नहीं सोये..

    "अंशुल"

    ©anshul

  • anshulaftaab 2w

    Dady

    कभी सुकूँ से साथ बैठेंगे, चंद मनपसंद बाते होंगी..

    ज़िन्दगी भर आपका इंतज़ार किया, सारी उम्र गुज़र गईं दुनिया से सर खपाने में..

    "अंशुल"

    ©anshul

  • anshulaftaab 6w

    क्यूँ करके कहूँ, मैं तुझसे अपना हाल-ए-दिल,

    तू भी तो कोई मसीहा नही।

    "अंशुल"

    ©anshulaftaab