anonymous_143

Er. by profession. Shayar by instinct.

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Reposts
  • anonymous_143 4d

    Yes, thats the most intense one!

    @fromwitchpen

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    IN THE DARKEST NIGHT OF THIS ERA
    I WAS ASKED BY THAT DRAMATIC MOON
    FOR THE MOST INTENSE CRAVING,
    AND I SHOUTED SILENTLY,
    "ABSENCE OF MOURNERS OF ALL HOPES
    OF MY LIFE AT MY FUNERAL,
    NOTHING ELSE!"

    ©anonymous_143

  • anonymous_143 2w

    ઘડી બે ઘડી રાહ જો તૈયાર થઇ રહી છે.
    ખીચડી અરીસો જોઇ કંસાર થઇ રહી છે.
    જીંદગી અંધારામાંથી પસાર થઇ રહી છે.
    અર્થ એનો એ જ કે સવાર થઇ રહી છે.

    ©anonymous_143

  • anonymous_143 3w



    मैं अपने आप को खुशनसीब मानता हूँ की मुझे इस रचनाप्रति
    के संचालन में जुड़ने का मौका मिला,
    सभी प्रतियोगीयों @alkatripathi79 @anusugandh @piu_writes @happy81 @goldenwrites_jakir का दिल से शुक्रिया की रचनाप्रति में भाग लिया...मेरे लिए आप सभी विजेता है...
    मैं @alkatripathi79 जी को निवेदन करुंगा कि #Rachanaprati85 की बागड़ोर अपने हाथों में ले...और संचालन को आगे बढ़ाये...धन्यवाद

    ©anonymous_143

  • anonymous_143 3w

    "दंगा"

    कितने ही बच्चें, आदमी
    औरतें और युवतियाँ
    बलि चढ़ा दी जाती हैं
    दंगे रूपी हैवान को ।


    जो निगल जाता है
    मानवता को
    शहर को
    सेंककर
    नफ़रत से उत्पन्न आग में
    और इस आग से लगी
    आग की लपटों में।


    हैवान... जो रहता है अदृश्य रूप में
    हर इंसान के भीतर
    एक छोटा सा शैतान बनकर ।


    और जब
    ऐसे ही छोटे-छोटे
    ढेर सारे शैतान
    मिलते हैं
    दूसरे शैतान से
    तो खिलखिला के हँस पड़ते हैं


    और
    टूट पड़ते हैं
    राह में आयी
    हर वस्तु,
    औरत,
    आदमी पर
    बनकर एक हैवान ।


    सौ शैतानों वाला हैवान ।
    दंगा रूपी हैवान ।


    इन्हीं में से कोई एक शैतान
    झटके से रखता है बंदूक
    कनपटी पर
    और फिर वस्त्र
    छोड़ देती है औरत का बदन
    और लुढ़क जाती है पैरों पर उसके
    और बैठ जाती है
    सिमटकर
    दुबककर...


    रह जाता है खुला
    बिल्कुल खुला
    उसका नंगा बदन।


    और फिर कुछ भेड़िये
    ( जो छोटे शैतान हैं )
    उसे नोंच लेते हैं
    और उसके जाँघों के बीच अपना
    कील ठोंक देते हैं


    फिर ?
    और फिर निकल जाता है
    जाँघों से उसके
    खून की कुछ धार
    मारकर फव्वार


    और कर देती है
    उस दानव का लिंग... लाल।
    सड़क... लाल
    हाथ... लाल
    हथियार... लाल
    बस, ट्रेन, दीवार... लाल
    और वह दानव निकलता
    करके अपनी आँखें... लाल।


    फ़िर कुछ समय बाद
    सब ख़ाक हो जाता है
    मिलकर आग से
    उस दंगे रूपी हैवान से।


    और अगले दिन
    निकलता है
    मासिक धर्म में सने लत्ते सा सूरज
    लाल...
    गहरा लाल...

    ©anonymous_143

  • anonymous_143 3w

    @happy81 जी का बहुत बहुत धन्यवाद��

    #Rachanaprati84 विषय:- " दंगा "

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    @happy81 के द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी हेतु इस संचालन को आगे बढ़ाते हुए मैं सभी लेखको से अनुरोध करुंगा की वो
    #Rachanaprati84 में " दंगा " विषय पर अपनी रचनाएँ प्रस्तुत करें|

    आशा करता हूँ आप सभी को विषय पसंद आयेगा एवं अधिक से अधिक लेखक अपना सहयोग प्रदान करेंगे|

    समय सीमा:- कल सुबह 9:00 बजे तक...धन्यवाद

    ©anonymous_143

  • anonymous_143 3w

    Sorry friends��
    Words limit ki wajah se baki ka part comment section me h...

    #Rachanaprati83 @happy81

    बात करीब दो-तीन महिने पहले की है। मैंने मटका आइसक्रीम
    के छोटे मटके को धोकर साफ़ किया, फिर उसे अपने रूम के बेड पर रख दिया । थोड़ी देर बाद मैंने मटके को उठाया और अहमदाबाद जैसे व्यस्त...शहर के एक छोटी सी गली की तरफ चल दिया । थोड़ी देर चलने के बाद मैं गली में पहुँचा ।

    दरअसल मैं उस मटके में नया पौधा उगाने की सोच रहा था । इसके लिए मिट्टी खोज रहा था । गली में घुसते ही मैं सड़क के किनारों पर मिट्टी खोज रहा था ।पौधे के लिए मिट्टी खोजना शहर में मुश्किल काम था ,वर्ना आसपास के गाँव की सड़कों पर मिट्टी की कोई कमी नहीं है ,बात अलग है की वो धुल बनकर उड़ती रहती है। खैर जो भी हो , मैं आगे बढ़ता गया । चार -पाँच घरों के कंस्ट्रक्शन चल रहे थे । यहाँ उम्मीद थी । सब जगह निराशा ही हाथ लगी सिवाय एक के ।

    मैंने देख लिया की लगभग दस कदम पर मिट्टी का ढेर है । मैं आइसक्रीम मटका छुपाते हुए मिट्टी के पास जाकर खड़ा हो गया । सोच रहा था की मिट्टी भरूं की नहीं । इसका कारण था कि एक बूढ़ा व्यक्ति मुझे ही देखे जा रहा था । मेरे हिसाब से वो व्यक्ति उस घर का गॉर्ड होगा । मेरी हिम्मत नहीं हुई की मिट्टी की तरफ़ झुकूं । फिर कुछ सेकण्ड्स रुका और फिर आगे बढ़ गया , ओवरब्रिज के निचे भी अच्छी मिट्टी देख रहा था ,पर मिली नहीं ।

    दिमाग में वही बूढ़ा था की कब हटेगा और मैं मिट्टी उठा लूंगा । पाँच मिनट इधर - उधर टहलने के बाद मैं फिर उसी जगह की ओर चल पड़ा । गेट से घुसते ही बूढ़ा व्यक्ति फिर दिख गया । मन ही मन सोचा कि अब मिट्टी न मिल पायेगी ।

    मैं जैसे ही मिट्टी के पास पहुंचा तो बूढ़ा फिर देखने लगा । मैंने कुछ नहीं सोचा और मटके को मिट्टी की तरफ बढ़ा दिया और बैठ गया । गर्दन बिलकुल मटके से सटा दिया था । ठीक उसी तरह जैसे शुतुरमुर्ग । शुतुरमुर्ग की कहावत तो आपने सुनी होगी । दरअसल होता कुछ नहीं है , बस अपने को तसल्ली रहती है की मैं उसे देख नहीं रहा । तो थोड़ी देर के लिए ही सही पर थोड़ी हिम्मत ज़रूर आ जाती है , उस समय के हालात झेलने के लिए । और अपना काम हो जाता है ।
    मैंने भी वही हिम्मत महसूस किया और धीरे - धीरे मिट्टी भरने लगा।

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    || नन्हा जीवन ||

    (Read in the caption
    &
    then read in the comment section)

    ©anonymous_143

  • anonymous_143 3w

    आज की दुनिया विसंगतियों से भरी जा रही है...
    ऐसी ही एक विसंगति है...दिखावे की| यह दुनिया आज इतनी ज्यादा दिखावे की हो गयी है की क्या कहूँ? ख़ुश है इंसान अंदर से, पता नहीं...पर ख़ुश दिखने की कोशिश करता है...या करनी पड़ती है|

    मैं विरोध नहीं करता कि इंसान को दु:ख छुपाना चाहिए, अगर उसे लगता है कि लोग उसका मज़ाक बना सकते हैं...तो जायज़ है दु:ख छिपाना|

    पर अपने साथ धोखा भी तो न्यायसंगत नहीं लगता|

    आख़िर कब तक हम अपने आप से ही छल करते रहेंगे?

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    अज़ीब हो गयी है ये दुनिया आजकल
    ख़ुश दिखना ज़रुरी है, ख़ुश होने से ज्यादा

    ©anonymous_143

  • anonymous_143 5w

    Sometimes I choose to sing a pain!

    @fromwitchpen

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    Not always in the intense screaming
    but sometimes in the sheer silence of mine,
    You need to hear the graved voice
    That I always see you
    As simple as I see the moon in darkness
    Or I feel the falling rain drops in a desert!

    ©anonymous_143

  • anonymous_143 6w

    इंसान जो है!

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    दूसरो के दिल के आंगन में अपनी प्रतिमा खडे करने के लिए
    अपने आप को हरता-फरता पुतला बना दिया!

    ©anonymous_143

  • anonymous_143 6w

    Happy B'day to you @_do_lafj_����

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    तुम्हारी दोस्तीने जगाई है जीने की आरजू
    तुम्हारे संगतमें मिला है अपने पन का एहसास
    तुम्हारे साथ में है जीवन का संगीत
    तुमसे है मेरा वजूद, मैंने पाया है अपने को तुम मे
    तुम न तो, मैं क्या?

    I'm sending my best wishes your way today, my bestie.
    May your birthday this year be just as wild and wonderful, and as hysterically funny as you are!

    ©anonymous_143