anita_sudhir

motibhavke.blogspot.com

Aakhya student of poetry master of chemistry

Grid View
List View
Reposts
  • anita_sudhir 17h

    शून्यता

    बोली मन की शून्यता
    क्यों डोली निर्वात

    कठपुतली सी नाचती
    थामे दूजा डोर
    सूत्रधार बदला किये
    पकड़ काठ की छोर
    मर्यादा घूंघट लिए
    सहे कुटिल आघात।।
    बोली मन ...

    चली ध्रुवों के मध्य ही
    भूली अपनी चाह
    पायल की थी बेड़ियां
    चाही सीधी राह
    ढूँढ़ रही अस्तित्व को
    बहता भाव प्रपात।।
    बोली मन ...

    अम्बर के आँचल तले
    कहाँ मिली है छाँव
    कुचली दुबकी हूँ खड़ी
    आज माँगती ठाँव
    आज थमा दो डोर को
    पीत पड़े अब गात।।
    बोली मन ...

    अनिता सुधीर आख्या
    ©anita_sudhir

  • anita_sudhir 5d

    लिव इन रिलेशनशिप

    डगमगाती सभ्यता का
    अब बनेगा कौन प्रहरी

    सात फेरे बोझ लगते
    नीतियों के वस्त्र उतरें
    जो नयी पीढ़ी करे अब
    रीतियाँ सम्बन्ध कुतरें
    इस क्षणिक अनुबंध को अब
    देखती नित ही कचहरी।।

    जब सृजन आधार झूठा
    तब नशे ने दोष ढूँढ़ा
    सत्य बदले केंचुली जो
    चित्त ने तब रोष ढूँढ़ा
    फल घिनौने कृत्य का है
    हो रही संतान बहरी।।

    पत्थरों ने दूब कुचली
    सभ्यता अब रो रही है
    माँगती उत्तर सभी से
    चेतना क्या सो रही है।।
    आँधियों के प्रश्न पर फिर
    ये धरा क्यों मौन ठहरी।।
    ©anita_sudhir

  • anita_sudhir 2w

    बिरसा मुंडा

    जनजातीय गौरव दिवस

    एक आदिवासी नायक ने,आजादी की थाम मशाल। क्रांतिवीर बिरसा मुंडा ने,उलगुलान से किया कमाल।।

    धरती आबा नाम मिला है,देव समझकर पूजें आज।
    कलम धन्य है लिखकर गाथा,लाभान्वित है पूर्ण समाज।।

    शौर्य वीर योद्धा थे मुंडा,जल जंगल के पहरेदार।
    उलगुलान में जीवित अब भी,माँग रहे अपने अधिकार।।

    सबके हित की लड़ी लड़ाई,नहीं दिया था भूमि लगान। एक समाज सुधारक बन के, कार्य किए थे कई महान।।

    विष देकर गोरों ने मारा,छीन सके क्या क्रांति विचार। परिवर्तन की आंधी लेकर,जन्मों फिर से हर घर द्वार।।

    अनिता सुधीर आख्या
    ©anita_sudhir

  • anita_sudhir 2w

    देव एकादशी

    दोहा

    प्रबोधिनी एकादशी,आए कार्तिक मास।
    कार्य मांगलिक हो रहे,छाए मन उल्लास।।


    चौपाई

    शुक्ल पक्ष एकादश जानें।
    कार्तिक शुभ फलदायक मानें।।
    चार मास की निद्रा लेकर।
    चेतन में लौटे दामोदर।।
    श्लोक मंत्र से देव जगाएँ ।
    प्रभु चरणों में शीश झुकाएँ।।
    तुलसी परिणय अति पावन है।
    मंत्र दशाक्षरी मनभावन है।।
    भाव सुमन को उर में भरिये ।
    विधि विधान से पूजन करिये।।
    दीप धूप कर्पूर जलाएं।
    माधव को प्रिय भोग लगाएं।।
    व्रत निर्जल जब सब जन रखते।
    दीन दुखी के प्रभु दुख हरते ।।
    महिमा व्रत की है अति न्यारी।
    पुण्य प्रतापी सब नर नारी।।

    दोहा

    पाप मुक्त जीवन हुआ,हुआ शुद्ध आचार।
    आराधन पूजन करे,खुले मोक्ष के द्वार।।


    अनिता सुधीर
    ©anita_sudhir

  • anita_sudhir 2w

    गीतिका

    छाए जब घनघोर अँधेरा,मन में आस जगाता कौन।
    बीच भंवर में नाव फँसी है,इससे पार लगाता कौन।।

    खड़ा अकेला बचपन सहमा,एकल होते अब परिवार
    दादी नानी के किस्से का,नैतिक पाठ पढ़ाता कौन।।

    सामाजिक ताने-बाने का,भूल गए हैं लोग महत्व
    परंपरा जब बोझ लगेगी,होगा युग निर्माता कौन।।

    कथनी-करनी का भेद बड़ा,व्यथित हृदय के हैं उद्गार ।
    एक मुखौटा ओढ़ खड़े हैं, इसको आज हटाता कौन।।

    शक्ति रूप में देवी पूजन,फिर बेटी पर अत्याचार
    मर्यादा आघात सहे जब, इसका मान बचाता कौन।।

    एक दिवस अठखेली कर, हिंदी घूमी चारों ओर।
    शेष समय चुपचाप पड़ी है,नित्य महत्व बढ़ाता कौन।।

    ऋषि मुनियों की भारत भू पर, वैदिक संस्कृति का इतिहास।
    सत्य सनातन धर्म हमारा, इसको आज सिखाता कौन।।


    अनिता सुधीर आख्या
    ©anita_sudhir

  • anita_sudhir 4w

    शुभकामनाएं

    आ0 संजीव भाई जी के जन्मदिवस पर

    जन्मदिवसस्य अनेकशः शुभकामना:
    सुयश: भवतु, विजय:भवतु

    जन्मदिवस शुभकामना,करें आप स्वीकार।
    आलोकित हो पथ सदा,रहे सफलता सार।।

    सौम्य सहज व्यक्तित्व अरु,मुख पर है मुस्कान।
    रही रिक्त में सिक्तता,यही श्रेस्ठ पहचान।।

    हिंदी के उत्थान में,करते सतत प्रयास।
    भाषा सेवा लक्ष्य रख,करें छंद अभ्यास।।

    मुखिया हैं परिवार के,पूरी करते आस।।
    मार्ग प्रदर्शक आप बन,लिखें नया इतिहास।।

    सुखमय भविष्य हो सदा,सुखी रहे परिवार।
    कान्हा के आशीष से,खुशियाँ मिले अपार।।

    मन भावुक सा हो रहा,मिला आप का स्नेह।
    परम सौभाग्य से मिला,श्रेस्ठ साहित्य गेह।।

    रचनात्मक अभिव्यक्ति और सीखने सिखाने की परंपरा का निर्वहन करते हुए आपने अपने कुशल नेतृत्व से लेखनी को ही गढ़ा है।

    ईश्वर आपको अपार यश ,सुख समृद्धि और स्वास्थ्य
    प्रदान करें।


    अनिता सुधीर आख्या
    ©anita_sudhir

  • anita_sudhir 4w

    काष्ठ

    भाव उकेरे काष्ठ में, कलाकार का ज्ञान।
    हस्तशिल्प की यह विधा,गाती संस्कृति गान।।

    वृक्षों पर आरी चली,बढ़ा काष्ठ उपयोग।
    कैसे शीतल छाँव हो, कैसे रहें निरोग।।

    ठंडा चूल्हा देख के, आंते जातीं सूख।
    अग्नि काष्ठ की व्यग्र है,शांत करें कब भूख।।

    छल कपटी व्यवहार से,क्यों रखते आधार।
    नहीं काष्ठ की हाँडियाँ, चढ़तीं बारंबार।।

    सजे चिता जब काष्ठ की, पावन हों सब कर्म।
    गीता का उपदेश यह, समझें जीवन मर्म।।

    ©anita_sudhir

  • anita_sudhir 6w

    शरद पूर्णिमा

    शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं

    मंगलकारी रात में, हो अमरित बरसात।
    शरदपूर्णिमा चाँद से, बहते हृदय प्रपात।।
    बहते हृदय प्रपात, शुभ्रता जीवन भरती।
    निकट हुए राकेश, धरा आलिंगन करती।।
    रखा पात्र में खीर, बना औषधि उपचारी।
    सभी कला में पूर्ण, कलानिधि मंगलकारी।।

    अनिता सुधीर आख्या
    ©anita_sudhir

  • anita_sudhir 6w

    आप की देहरी तक पहुँचने के लिए
    मेरा एकल संग्रह "देहरी गाने लगी" नवगीत गीत संग्रह अमेजोन पर उपलब्ध हैं।
    कृपया आनंद लें ।
    https://www.amazon.in/dp/8195209203/ref=olp-opf-redir?aod=1

    Read More

    देहरी गाने लगी

    ©anita_sudhir

  • anita_sudhir 7w

    भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानी, प्रखर चिन्तक तथा समाजवादी राजनेता
    राम मनोहर लोहिया जी की पुण्यतिथि पर

    Read More

    लोहिया

    देश के चिंतन में
    लोहिया जीवित हैं आज।
    पक्षधर शुचिता के
    कर्म के मंथन में आज।।

    कुछ लोग मरा कब करते हैं, सोच अमर करती है नाम।
    राम मनोहर समाजवाद को, जन-जन करता नित्य प्रणाम।

    राष्ट्रवाद के प्रखर प्रणेता, नित्य सुधारें देश समाज।
    कर्म अनुसरण कर कितनों ने, अब भी पहना सिर पर ताज।।

    आजादी के आंदोलन में,योगदान भूला है कौन। जनमानस में भेद मिटाने, कर्म करें वह रहकर मौन।।

    मतभेद जवाहर से होता, सप्त क्रांति की उनकी नीति।
    ऐसा जग बन जाए फिर जिसमें पलती पल-पल प्रीति।।

    राजनीति की शुचिता में वो, अपनों का भी करें विरोध। अनगिन स्मारक आज खड़े हो, नित्य कराते सबको बोध।।

    अनिता सुधीर
    ©anita_sudhir