ananyakanaujia

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  • ananyakanaujia 155w

    मेरी आंखों का नम हो जाना काफ़ी है क्या, मेरी मुस्कुराहट का बिखर जाना तेरी माफ़ी है क्या।बंद पलकों से लुढ़कती एक बूंद गालों को छू गुज़र जाए,या जुल्फों का खुल जाना ही बस बाकी है क्या।।जब रात आधी में तकिया भीग जाता है,कुछ मेरे ख़्वाबों का टूटा मेरे सीने में चुभ जाता है।मेरी कलाईयों में तेरी दी चूड़ी की खनक,और उसका ही कोई टुकड़ा यूं ही दिल में गड़ जाता है।। जो पैरों से बांधी पायल है मैंने उसकी झंकार मेरी गुस्ताखी है क्या,मेरा यूं बार बार टूटना किसी के खातिर वाजिब है क्या।तड़पते इस मन को कई बार टटोला है,बस तेरा होना ही दवा है तू राज़ी है क्या।।
    ©ananyakanaujia

  • ananyakanaujia 155w

    अनंतकाल से चीत्कार रही इस ताप्ती आभा की,या कहूं में वो कहानी कौरवराज में तार हुई मर्यादा की। बात करूं मैं उस आंगन कि जहां बरसों से एक किलकारी ना गूंजी है,या उस बातचीत उस समाज की जहां अाज भी एक लड़की ही दोषी है।। कष्टों से घिरा जीवन उसपे लाज की चूनर है,टूटी फूटी सी किस्मत उसपे संस्कारों की मोहर है।जिस चेहरे पे तुमने पर्दे हज़ार किए, बाज़रों में बिकती उसकी ही जिस्म की एक सूरत है।। कविता काहनी बहुत हुए ना सिमटे कमरे में ये वो किस्सा है,आजादी के इतने साल हुए पर औरत के वजूद पे एक शंषा है।।परिवर्तन की ज्वाला का और उसकी तरफ उठे हर चेहरे पे माला का, संदर्या ना मेनका ना रम्भा बनने की बारी है। काट फेक हर हाथ जो चीरहरण को उठते हैं,बन दुर्गा शीश कटे उस रूप की तैयारी है।।औरत को सोने के ढककर तुम उसके तन को नोच सको,वो वक़्त हुए पुराना जब प्रूषुत्व तुम दिखला सकते थे।ये अंत है उस युग का जहां सीताहरण हो जाता है,नए समय में बढ़ती अौरत का दर्जा तुम्हें एक आईना दिखता है।।
    ©ananyakanaujia

  • ananyakanaujia 155w

    Mera na Hona

    सोचो अगर मेरी ये रात आखिरी हो,तुमसे की जो मैंने वो बात आखिरी हो।सोचो अगर कल ये मेरा हाथ साथ ना हो ,तुमसे होने वाली बेवक्त की मुलाकात ना हो।। । सोचा है कभी ..... चलो तुम्हें तुमसे जुड़ी कुछ बात बताती हूं,मेरे ना होने पे मेरी कमी का एहसास जताती हूं। जब करवटों में आधी रात तुम जाग जाते हो,नींद में भी मेरा आ जाने वाला ख्याल तुम्हे सुनती हूं।।किसी से भी किए झगड़े के बाद गुस्से में मेरे पास आते हो,तुम्हारे उन डर का जिसे भुले हो उसका जिक्र तुम्हे याद दिलाती हूं।जो महफिलों में बड़े फक्र से उस नाम का हर बात में दीदार करते हो,उस हर बात के वजूद को तुमसे आज मिलाती हूं।।पता है तुम्हे तुम बहुत जुड़े हो मुझसे की बिना कहे ही बात समझ जाती हूं,तुम कहते हो कि क्यूं पास नहीं हो तो बस मुस्कुरा के एक दिन कह जाती हूं।। अरे बताना भूल गई मैं तुम्हरे उस चुप होजने की आदत को,जिसपे में बचकानी हरकतें कर तुम्हें मानती हूं।।
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  • ananyakanaujia 155w

    मेरी मासूम सी शक्ल जिसपे तुम हर दफा दिल हार जाते हो,अगर वो ऐसी ना रहे तो क्या करोगे मोहब्बत....क्यूंकि मैंने सुना है इस इश्क़ से भरी दुनिया में इश्क़ मनाही पे चेहरे जला दिए जाते हैं।। वो पड़ोस की बच्ची की किलकारी जिसे देख तुम हर गम भूल जाया करते हो,अगर सन्नाटे में बदल जाए तो क्या हर रोज़ उसे देख मुस्कुराओगे तुम.....क्यूंकि मैंने सुना है कुछ जिस्मानी भूख मिटाने को उसके बचपन के सपने भी घोट दिए जाते हैं।। वो पति पत्नी याद हैं जिनकी मोहब्बत देख तुम ,हमारी ज़िन्दगी कुछ ऐसी होगी सोच लिया करते थे,सोचो अगर कल तुम्हे पता चले कि उस औरत के मारने की वजह उसका ही कोई अपना है तो क्या भरोसा करोगे तुम .....क्यूंकि मैंने सुना है जिस्मों को तार तार करने में अक्सर किसी अपने के ही हाथ दिख जाते हैं।। अरे भूल गई मैं वो पड़ोस की अम्मा जो अक्सर तुम्हे अनजाने में ही हमेशा खुश रहने का आशीर्वाद दिया करती थी,सोचो अगर तुम्हे पता चले कि वो यूं ही कहीं गायब नहीं हूं उन्हें मार दिया गया तो क्या आंसू रोक पाओगे आपने.….क्यूंकि मेरी खोजबीन के बाद पता चला था कि अकेलेपन की कमजोरी का फ़ायदा लोग अपनी हवस को पूरा करने के लिए कर जाते हैं।।
    ©ananyakanaujia

  • ananyakanaujia 156w

    अज़ीब सी बात है कि मोहब्बत लिखने की बात नहीं, पर फिर भी मोहब्बत ही मैं हर बार लिखती हूं।तुझे ख़ुद में ढूंढ़ के खुश हो जाती हूं,और तेरे ज़िक्र के दीदार को में कलम से हर बार गढ़ती हूं।।टूटी हूं मोहब्बत में या पूरी है मोहब्बत मेरी,जो भी बस में अपनी हर कविता मैं तेरा सार लिखती हूं।आसन नहीं हैं मन को काग़ज़ पे लिखना,पर फिर मैं तुझसे ज्यादा तुझे हर बार कहती हूं।।मैंने हर पहचाना रंग तुझसे जोड़ा हैं,और तुझे रंग सफेद सा मैं समझती हूं। उलझी सुलझी ये बेनाम सी मोहब्बत मेरी,तू वो है जिसे मैं ख़ुदा सा खुद में रखती हूं। नज़रे झुका के तुझे खुद में समेट रक्खा है, मैं आइने सा तुझमें खुद को निहार लिया करती हूं।।
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  • ananyakanaujia 158w

    एक तरफा इश्क़.....

    कुछ तकल्लुफ भी हुआ और कुछ गुफ्तगू भी बेज़ार की, उनकी इक नज़र को तरस जुल्फें सवारने की हरक़त बार-बार की। अब आलम यह देखिए कि कुबूल हुआ नहीं है,मगर बस एक दफा उन्हें देखने की नाकामयाब कोशिश भी कई बार की।। थोड़ा मसरूफ़ रहते है जनाब अक़्सर किसी ख्याल में , और हमने उनके ख्यालों में कई रातें गुलजार की। तवज्जो नहीं देते हैं वह किसी के नैन नक्श में डूब जाने को, और यहां हम ने चुपके से उनके हाथों को पकड़ने की हिमाकत हर बार की।। वो कहते हैं कि इश्क़ बुखार जैसा कुछ नशा है उतर जाएगा ,और हमने इस नशे में डूबने की खुदा से दुआ हर बार की। मान आईना उन्हें हमने नजरों में उतारा है, सजदा बस उनसे होता है यह गुस्ताखी मैंने हर बार की।। एक तरफा इश्क़ की खूबसूरती समझिए ज़रा, उनके इश्क़ में मैंने यह जिंदगी नीलाम की। और मोहब्बत में साथ रहने के सौदे किए नहीं जाते, तो उन्हें अपनी मोहब्बत से आजादी इस बार की।।
    ©ananyakanaujia

  • ananyakanaujia 158w

    We...The generation

    We..The generation of heartless and cold soul,The generation of getting clothes unfold.The generation of Smiling faces and stress that last,the generation of moving without aim very fast. The generation where phone are important then sitting besides,The generation who don't care and Don't stands on people's sides.The generation that have thousands of blindfold thought,The generation that have sleepless nights with Distraught. The generation where a letter to wait turned into skype and video call,The generation of using fake smiles using emojis and all.The generation of leaving people behind,The generation that forgot to be kind.The generation of treating people like objects,The generation where making money is only subject.The Generation of having no gratitude towards parents,The Generation who do not live but capture moments. The generation that thinks that we're always right, Wrong or right no Matter but want bright light. The generation who hurts own people with loud hurled ,The generation that indulge into internet without having second thought for their own world.....
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  • ananyakanaujia 159w

    Coffee prem

    मैंने चाय को इश्क सुना है मगर, पहला इश्क हमेशा कॉफी जैसा होता है।जो अनजाने में यूं ही कभी भी टकरा जाता और जिसे आदत जैसे मैं जी लिया करती हूं। ।उसे चाय का शौक है और मैंने कॉफी से बेतहाशा इश्क जताया है।मगर पहले इश्क से आजाद अब , मैं एक कप कॉफी में आंसू समेट लिया करती हूं।। इश्क की वजह से मैंने खुद को ज्यादा बदला नहीं है मगर हां अब मैं उसके जिक्र से ही एक चुस्की लगा लिया करती हूं । जब दिल के किसी कोने में कोई टीस उठती है तो कॉफी का कप बेतहाशा ही मेरे हाथ में आ जाया करता है। चाय मेरी आदत जैसी है ,और कॉफी को लंबे समय के बाद मिलने वाला सुकून बना लिया करती हूं ।। कॉफी का जिक्र हमेशा पहली मोहब्बत से किया है जिसके वजूद को मैं हर बार इस तरह जी जाया करती हूं। की वजूद की तलाश है रास्ता सुनसान है, मगर अपने डर को मैं कॉफी के साथ गटक आगे बढ़ जाया करती हूं।। ऐसा नहीं कि मै कॉफी की दीवानी हूं, मुझे चाय का भी नशा वैसा ही है। बस मेरे लिए कॉफी किसी बंद डायरी मैं लिखी शायरी की तरह है, जिसमें इश्क लिखने के लिए बंद राज भी खोल जाया करती हूं।।
    ©ananyakanaujia

  • ananyakanaujia 159w

    मैं भागना चाहती थी उससे उसके ख्यालों से, उसके दिए उन हसीन ख्वाबों से। मगर न जाने क्यों कुछ रोक रहा था , बेवजह ही कहीं टोंक रहा था ।। मेरा अपना हिस्सा मुझसे जुदा हो रहा था और मैं, बेपरवाह उसके इश्क में गिरती जा रही थी।सोच लिया था मैंने खुद से अपनी रूह से जुदा कर दूंगी, उसे अनकहे किस्से को मुकम्मल नहीं होने देना चाहती थी रिश्ते को तोड़ दूंगी।। तोड़ देना था सभी ख्वाबों को, मगर कहते हैं ना जब इश्क दस्तक देता है तो बिना पूछे ही दिल के कोने में जगह बना लेता ।उसे बीच रास्ते में छोड़ जाने की आदत है और मुझे मुकम्मल होने का शौक ।पता नहीं इसका अंजाम कैसा होगा यह जो अनजान रास्ते हमें बुला रहे हैं इस सड़कें जो हमें कहीं लिए जा रहे हैं उनका मकसद कैसा होगा।। हर बार जब मैं टूट के बिखर जाती हूं ना तो वह बिना किसी सवाल के चला आता है मुझे संभालने, लग रहा होगा आप लोगों को अजीब सा इश्क है उसका खुली आंखों से हाथ पकड़ नहीं रहा और बंद आंखें बस उसी के ख्वाब सजाती हैं। खैर में लिखने का शौक रखती हूं तो बस अनजाने ही है कुछ लिख दिया, अभी उसका बेसुरा सा गाना कभी मेरी आंखों से बेवजह बूंदों का बरस जाना। इत्तेफाक है या हकीकत जिंदगी की मालूम नहीं, मेरी लोगों को पढ़ने की हुनर से मैंने हर किसी के दिल का यही हाल जाना।।
    ©ananyakanaujia

  • ananyakanaujia 160w

    These cold winds wrapping me around,the melodious singing of rain sound. Feeling the shape of My invisible soul,and making me dance without touching ground.The sweet smell of sand wet and brown,a cheer song loud in my heart town. Destiny and desires are like my crown,smile on my face that never makes me down. This rain came to found self again, And gives me courage to never get knock- down. May be on somedays I will be Unsound,But one day for sure will get rid of all the wound...
    ©ananyakanaujia