an_merciful_friend

27, Aquarius, Engineer, Epigram Writer, Movie & Music Lover, Motto- Keep Smiling ☺️

Grid View
List View
Reposts
  • an_merciful_friend 18w

    _*मेरी नई कविता..*_

    नमस्ते, कैसे हो आप? आशा है कि सब खैरियत होगा।

    साल भर में ऐसे कई दिन आते है जब हम किसी व्यक्ति, किसी अच्छी या बुरी घटना और उनसे जुड़े लोगों को याद करते है, उनकी सराहना करते है।

    वैसे तो साल में तकरीबन हररोज अपने कुछ खास लोगों से बात व याद करना चलता रहता है पर प्रशंसा करने की बात उस एक दिन पर ही आती है।

    शायद ऐसा हो सकता है की बाकी के वक्त हम मन की बातों को कह नही पाते या फिर भागदौड़ भरी ज़िंदगी में भूल जाते है।

    आज भी वैसा ही एक खास दिन है उनका जिन्हे हम *पापा, डेडी, पप्पा* या फिर और कई समानार्थी नामों से बुलाते है, तो दुनिया के हर पापाओं के लिए लेकर आया हुं एक प्यारा सा नज़राना, कैसा लगा ये हो सके तो ज़रूर बताना।

    अर्ज़ किया है..

    जो उनके मन की बातें ज्यादातर या कभी नहीं कहते और जिसे हम कभी या ज्यादातर कई बातें कह नही पाते, वो है *पापा*।

    पूछना चाहता हुं में जिन्हें की वक्त जो गुज़र रहा है वो तो ठीक है पर कुछ ऐसा है जो करना है *आगे की राह पे* जिसे चलते हुए रास्तों पर कर नही पाते, वो है *पापा*।

    मुझे भी है जिनकी तरह गाने गुनगुनाने का शौख, घुमने व खाना खाने का चस्का और है कुछ बातें जिनमें मैं उनके जैसा हुं पर मेरी *सोच व अनुभव* है जो मुझको जिनसे अलग है बनाते, वो है *पापा*।

    जिनके अच्छे स्वास्थ्य की मैं दुआ करता हुं, चाहता हुं कि जल्दी वह मौका आए की उनसे मुलाकात हो, अपने हाथों का खाना खिलाऊ और कहना चाहता हुं की अगर वह तुम्हारे साथ है तो उन्हें यह कहना मत भुलना की "हैप्पी फादर्स डे" क्योंकि साल के बाकी दिनों पर ये जिसे हम कह नहीं पाते, वो है *पापा*।

    आज की मेरी कविता उन सब पापाओं के नाम जिनमें कुछ अपने किरदार के साथ मां की भी कमी पूरी कर रहे, कुछ मां ऐसी है जो एक पिता का किरदार भी निभा रही और कुछ वो जो उनके बच्चों को ऊपरवाले के दर से देख रहे है।।

    _*Wishing all the Dads in the world, "A very Happy and Healthy Father's Day"*_ ❤️

    लिखित द्वारा: _*बेटा*_ उर्फ अंकित महेता ‍♂️

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 25w

    "चांद और मैं"

    चांद हमसे है दूर वहां आसमान में नीले, जब शाम ढले तब गगन के गहरे रंग में वो है खिले।
    हुं मैं भी सबसे दूर यहां अपनी जिंदगी की राह पर चले, जब मेरे देशवासीयों का दिन ढले तब गहरी नींद से मेरी ये आंखें है खुले।।

    रात के अंधेरे में जैसे दूर सूरज की रोशनी से हमें आकाश में चांद है दिखे, वैसे ही यहां धरती पर उसी अंधेरी रात की चांदनी के तले "मुझे आप, आपको मैं और हम सबकी नजरों को ये दुनिया" है दिखे।

    जैसे जैसे हमारे रास्तों की दिशाएं बदलती रहती है वैसे चांद कभी हमारे साथ चलता है तो कभी वह हमारे पीछे रह जाता है।
    अब मेरी और आपकी बात करु तो यहां भी कुछ वैसा ही हाल है कि काम और जिंदगी के पड़ाव व पहलुओं के चलते कभी हम बार बार मिलते है, बातें भी बहोत होती है, और एक दूसरे के बारे में ध्यान भी रहता है तो
    कभी सोचने के बाद भी मिलना नहीं होता, बातें करने का वक्त नहीं मिलता, और एक दूसरे के लिए बस सिर्फ दुआएं होती रहती है।

    लेकिन फिर किसी मोड़ पे हमें चांद का और एक दूसरे का साथ मिल ही जाता है।।

    तकरीबन चार महीने हो गये मुझे कुछ लिखे व मेरे शब्दों को आवाज़ दिए, लगता है जैसे *अमावस* के बाद "बीज से लेकर चौदस" तक के दिन है बीते।
    और आज आपको यह बयान करते हुए में यह कह सकता हुं कि "आज का दिन कोई *पूर्णिमा* से कम नही है, छोटे!" ☺️

    आप ये तो समज ही गए होंगे कि आज की बात में *मैं* हम सब है..और बस अंत में इतना कहुंगा कि,

    "दूर से जो चमकता है, खड्डे उस चांद पर भी है।
    अब हम इस धरती की ज़िंदगी के खड्डों की बात करे या फिर आनेवाले कल के लिए उस चांद के..
    कुछ छोटे खड्डों को हम उछल के, चलके या फिर बारिश की मस्ती में छपाक करके पार कर लेंगे और
    कुछ बड़े, लंबे व गहरे खड्डों को हम छोटे छोटे कदमों से, लंबी छलांगो से या बाजु से चुपचाप चलके पार कर लेंगे।
    बाकी तो बस सब *ग्रेविटी* की बात है!! "

    द्वारा लिखित: *दोस्त* उर्फ अंकित महेता ✌‍♂️

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 42w

    घर और २०२०

    अर्ज़ किया है..

    जिस साल की हम आज बात कर रहे है और जो अब एक बीता हुआ कल बन चुका है जैसे कि चांद की रोशनी में भी अंधेरों का साया, वह साल है २०२०।

    जिस पुराने घर को काफी मरम्मत लगी हो, पर फिर भी जिससे हम सबकी बहुत सी यादें जुड़ी हो और आज के आखरी दिन जिससे अलविदा कहने का वक़्त है आया, वह अपना घर पुराना है २०२०।

    बीती हुई जिस याद में जहां घर की छत के नीचे हमें अपनों का समय और साथ मिल पाया तो वहां कोई अपने अपनों को ठीक से आखरी लफ्ज़ भी नहीं कह पाया, जहां किसीने अपनी जगहों को बेघरों का आसरा बनाया वहां जिस बीती यादों के सफर में किसीने किसीके दिल को अपना घर है बनाया, वह मन की अलमारी में बंध हो चुकी बीती हुई याद है २०२०।

    जो साल गुज़र चुका उसकी बातें तो होगई, अब चलिए देखते है कि जो साल आनेवाला है उसमें क्या होगा...

    अरे अरे परेशान मत होइए, आपके और मेरे दोनों के लिए ये सरप्राइज है और वो सरप्राइज ही रहेगा।

    यह जो पल है जिसमें आनेवाला कल हमारा आज होजाएगा, वो वह रास्ता है जो हम सब पुराने घर से नए घर जाने के लिए काटते है, बांटते है और खासकर के जीते है क्योंकि यह रास्ता पलक झपकते ही गुज़र जाता है।

    इसलिए और देर ना करके मेरा जिस नए घर में आपका स्वागत करने का मौका है आया, वह नया घर है २०२१।।

    WISHING YOU AND YOUR FAMILY A WONDERFUL, HAPPY, HEALTHY, POSITIVE AND PROSPEROUS NEW YEAR OF 2021 ✨

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 44w

    शोर और सन्नाटा

    _*कभी कहीं.. कहीं कभी*_

    जहां शोर है *मन में खयालों* का, वहां *ज़ुबान की आवाज़* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *रास्तों पर गाड़ियों* का, वहां घर की चार दिवारी में *जल रही रोशनी* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है दोस्तों के साथ खेलते हुए *दिल से निकली हसी* का, वहां *दिल के दर्द से सजे आंसु* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *दिल की धड़कनों* का, वहां *तेज़ सांसों* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *उमंगे और रोशनी* का, वहां *दुःख और अंधेरों* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *आत्मविश्वास और भरोसे* का, वहां *पछतावे और बुरी सोच* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *शांति और सुकून* का, वहां *क्रोध और टकराव* का है सन्नाटा।

    जहां शोर है *कुछ पूरी होती बातों* का, वहां *कुछ अधूरी रह जाती कहानियों* का है सन्नाटा।

    इस आखरी पंक्ति के जैसे ही मेरी ये "शोर और सन्नाटा" की कहानी *पूरी होकर भी अधूरी* है।

    हम सब की कहानी भी कुछ ऐसी ही है कि *पिछले कल* में ये पूरी है, *आज* इस कहानी का रहना जरूरी है क्योंकि *आनेवाले कल* के लिए ये अधूरी है।

    इसलिए मेरी बात को यहां पूरी करके में आपसे पूछना चाहता हूं कि *आप अपनी "शोर और सन्नाटा" की कहानी में वह कोनसी एक पंक्ति लिखते* ?

    अगर हो सके तो *ज़रूर बताना* और मेरी यह नई कविता *कैसी लगी* यह भी कहते जाना।

    _*आपको मेरी तरफ से शुभ दिन, शुभ रात्रि और बस अपना खयाल रखना।।*_

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 49w

    नमस्ते आप को

    आशा है कि आपके वहां सब खैरियत है।

    फुलझड़ी और आतिशबाज़ी के साथ मेरी मन की बातों का नज़राना फिर एक बार लेकर आया हुं।

    अर्ज़ किया है..

    जहां इस साल *होली* पर ना रंगों का मेल, ना *जन्माष्टमी* पर मटकीफोड का खेल और ना *नवरात्रि* पर रास - गरबा का तालमेल हो पाया, वहां जिस त्योहार के आने की खुशी ने घर के आंगन के साथ लोगों के अंतर्मन से लेकर उनकी आंखों की भी चमक ✨ को है बढ़ाया, वह है _*दिवाली*_।

    मिटी नहीं है वजह अभी भी कई महीनों के लोकडाउन की, लेकिन फिर भी जिस *पावनपर्व* ने दिया है होंसले से भरा एक मौका अपने चाहनेवालों से मिलने का, कहीं दूर बेठे अपनों से फिर जुड़ने का, और साथ मिलकर अपने सुनेपन के उस भाव को कम करने का जिस *रोशनी भरे अवसर* ने उत्साह है दिलाया, वह है _*दिवाली*_।

    जिस उत्सव की बातें अधूरी है नमकीन और मिठाइयों के बिना, जिसमें बन रहे है कहीं *लड्डु और चिवडा* तो कहीं *चकरी और शकरपारा*.......बस बस, अगर सारे नाम यहीं सुन लोगे तो हो सकता है कि आपके वहां कोई दूसरा ना खा जाए सारा खाना और फिर जिस शुभ दिन पर आप कहते ही रह जाओ कि, "क्या यार, थोड़ा मेरे लिए तुने क्यूं नहीं है बचाया?", वह है _*दिवाली*_।

    आपको मेरी ये बातें अच्छी लगती है तो इसका मतलब में अच्छा हुं ही पर आप बहुत अच्छे हो, इसलिए अगर आप इस कविता के बारे में या फिर यूंही कुछ अपने मन की बात ज़ाहिर करना चाहो तो ज़रूर कहना, आज जिस पवित्र घड़ी पर आप से बस यही था कहने आया, वह है _*दिवाली*_।।

    _*Wishing you and your family, A Very Happy and Prosperous Diwali*_

    द्वारा लिखित: दोस्त उर्फ _*अंकित महेता*_ ❤️

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 56w

    नमस्ते

    कैसे हो आप सब? आशा है कि सब खैरियत होगा। लेकर आया हूं इन तस्वीरों के साथ अपने मन का एक छोटा सा नज़राना, कैसा लगा यह सुनकर ज़रूर बताना..

    अर्ज़ किया है कि..

    कुदरत की ये करामातें हमेशा दिल को छू जाती है।

    आंखों में बंध यादों के डिब्बे में अपनी जगह बना जाती है।

    इन यादों को आप सब से बांटना अच्छा लगता है मुझे क्योंकि इस प्रक्रिया में थोड़े आपके तो थोड़ी मेरे चेहरे की खुशी मुस्कान में बदल जाती है।

    ये कुदरत और मेरा संदेशा है आप सबसे की ज़रा सर उठाके देखिए जी यहां, क्योंकि याद तो हमें भी आप सब की बहोत आती है।।

    द्वारा लिखित: *दोस्त* उर्फ _*अंकित महेता*_ ❤️‍♂️✌
    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 63w

    Happy Rakshabandhan 2020

    *सबको मेरा नमस्ते। आशा करता हूं कि सब खैरियत है।*

    आया हूं मिलने फिर आपसे लेकर फिर एकबार कुछ *मन की बातें* और ये *नज़राना*, *कैसा लगा* ये अगर हो सके तो ज़रूर बताना।

    _*मेरी नई कविता..*_

    कल मनाके दिन दोस्ती का आओ *सब* मिलकर मनाते है *भाई बहनों वाला* जो *त्योहार* आज, वह है *रक्षाबंधन*।

    इस साल जिस पर्व के दिन *बहनों की राखी* शायद ना पहोंच पाए *भाईयो तक* या फिर इस *सर्वव्यापी महामारी* के चलते हो सकता है कि *रूबरू मिलना ना* हो पाए, ऐसे वक़्त में करके *शुक्रिया* इंटरनेट, सोशियल मीडिया व पत्र व्यवहार का *जिनकी वजह से* हर भाई - बहन तक पहोंचा है *प्रेम, आशीर्वाद व रक्षा* का वो *अहसास* आज, वह है *रक्षाबंधन*।

    जो कई महीनों से इस कोरोना के चलते अपनी *दिन रात भुलाकर* कर रहे है *हमारी ज़िन्दगी और तंदुरस्ती की रक्षा*, उन हर *भाईयो - बहनों* को सर झुकाकर *नमन* और सर उठाके *सलाम* करता हूं में *पूर्णिमा* के जिस *शुभ अवसर* पर आज, वह है *रक्षाबंधन*।

    *"खयाल अपना भी तुम रखना"* ये कहके दुनिया की व मेरी हर बहनों को "*अच्छा स्वास्थ्य* और *खुशहाली* हमेशा बनी रहे ज़िंदगी में तुम्हारे" इस *आशीर्वाद* के साथ भेज रहा है यह भाई *शब्दों में समेटा* हुआ *जज्बातों व प्यारभरा* ये *तोहफ़ा* पूरा करने जिस *पावन घड़ी* को आज, वह है *रक्षाबंधन*।।

    _*Happy Rakshabandhan to All the sisters and brothers*_ ❤️

    द्वारा लिखित: भाई उर्फ *अंकित महेता* ✌

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 64w

    *मेरे प्यारे दोस्त*, कुछ कहने से पहले ये पुछना चाहता हूं कि *तुम कैसे हो?*

    जानता हुं कि काफी *वक़्त के बाद* कुछ लिखकर कहने और सुनाने आया हूं, इस देरी के पीछे वैसे तो बहोत कुछ है कहने को पर अभी के लिए बस इतना कहूंगा कि *मेरा मन* भी इस लॉकडाउन के माहौल में *क्वारांटाइन* हो गया था।

    वो *तुमसे मिलने* आया है लेकर अपने साथ ये *प्यारभरा नज़राना*, कैसा लगा ये अगर हो सके तो *ज़रूर बताना..*

    _*मेरी नई कविता..*_

    जिस रिश्ते को *आज मनाने का* और जिसके बारे में मन की कुछ बातों को *इज़हारे बयान* करने का है मौका, वह है *दोस्ती*।

    पिछले कुछ सालों में मैंने जिस रिश्ते के बारे में शायद *सबसे ज़्यादा* है लिखा, वह है *दोस्ती*।

    बढ़ती उम्र और जज्बातों के साथ आगे बढ़ती *जिसकी कहानी* में कभी *परिस्थितियां* तो कभी *छोटे बड़े पहलुओं* की वजह से होता रहता है नोका झोंका, वह है *दोस्ती*।

    *जाने अनजाने* में कोई करता है फरियाद कि उसने याद नहीं किया और फिर फरियाद करनेवाले ने ही उसे याद नहीं किया, जिस रिश्ते में कभी ना कभी ऐसा *अनुभव* तुम्हारा, मेरा या किसिका भी हुआ होगा, होता है और शायद होता रहेगा पर फिर भी उसको *निभाने की चाहत* ही बांधे रखती है जिसकी *अदृश्य डोर* का टांका, वह है *दोस्ती*।

    ऐसे कई अनुभव और कई *पाठ* है जो सिखाते है हमें तैरना *उतार - चढ़ावरूपी लहरों* के साथ और कहते है की *विश्वास से ही जुड़ा* है यह संबंध जिसका, वह है *दोस्ती*।

    जैसे मैंने पहले भी कहा था कि पता है मुझे की तुम ये सब जानते हो पर कभी भूल जाते हो तो कभी याद नहीं रहता, *एक बात कहूं..मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही है* इसीलिए तुमको और मुझको *याद कराने व लिखने* ये बातें जिस पे मन ने मेरे *अपने अंदर* है झांका, वह है *दोस्ती*।।

    _*हैप्पी फ्रेंडशिप डे, माय डियर फ्रेंड*_ ❤️

    शुक्रिया तुम्हारी दोस्ती का और मुझे आज सुनने का!!

    एक और दरखास्त है मेरे ए दोस्त की *क्या सोचते हो तुम दोस्ती के बारे में* ये अगर एक या कुछ शब्दों में हो सके तो ज़रूर बताना।।

    *द्वारा लिखित*: दोस्त उर्फ _*अंकित महेता*_ ‍♂️✌

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 76w

    शीर्षक: मां

    नव महीने तक जो अपने पेट में पालकर एक नन्ही सी जान को बढ़ती दुनिया में कदम रखने अपने साथ उठाए, वह है *मां*।

    एक कुंवारी शहजादी से लेकर एक शादीशुदा रानी बनने के सफर पे आगे चलते हुए औरत अपने बेटी और बीवी होने के साथ साथ जो एक और किरदार भी निभाए, वह है *मां*।

    जिनके लिए अपना परिवार और खुद की दुनिया ही सब कुछ थी अब तक और जब उस दुनिया में नई जन्मी मुस्कान के आने के बाद वही जिनकी दुनिया बन जाए, वह है *मां*।

    जिनके लिए है ये पूरी ज़िंदगी उनके लिए वैसे तो शब्द, प्यार और जज़्बात कम पड़ेंगे कहने को पर आज के दिन जिनकी ज़िंदगी को खुशी से मनाने के लिए कुछ कहने से ये दिल भी रह नहीं पाए, वह है *मां*।।

    Happy Mother's Day to all the mothers in the world ❤️

    ©an_merciful_friend

  • an_merciful_friend 77w

    नमस्ते, कैसे हो आप? ख्वाहिश है कि सब खैरियत है ��

    कुछ लिखा है दो सितारों के लिए जो ज़मीन पर आए थे कई साल पहले, अपनी चमक दिखाकर और छाप छोड़कर कल फिर आसमान की ओर चल दिए।

    "इरफान खान�� और ऋषि कपूर�� जी को मेरी छोटी सी श्रद्धांजलि"

    May Their Souls Rest in Peace ���� ��

    #restinpeace #irrfankhan #rishikapoor #surati #world #life #talks #smile #instapost #instaquote #instagram #tales #wordgasm #authorsofinstagram #writer #writerscommunity #musings #igpoet #wordporn #indianwriters #writersofinstagram #poetsofig #poetrycommunity #poetsofinstagram #igwriters #instapoet #quoteoftheday #shortstories #instawrite #writersofindia #microfiction #writersnetwork #shayar #shayari #qawali #dilkibaat #kuchunkahealfaaz @writersnetwork @mirakeeworld @adhure_lafj @hindiwriters @readwriteunite

    Read More

    यादें

    कई यादें जैसे हमारे साथ हमेशा के लिए रह जाती है वैसे ही कई लोगों के चले जाने के बाद उनके हसते चेहरों के साथ उनकी ज़िंदगी भी लोगों के दिलों में यादें बनकर रह जाती है।

    ऐसे ही सिनेमाजगत के दो मुस्कुराते चेहरों ने, उनकी पाक रूहों ने जन्नत -ए -जहान को आज अपना घर बनाया है और ऐसे दिग्गज अदाकारों की अदाकारी, उनकी कहीं बातें जैसे हमेशा से सबके दिलों में जगह बना चुकी थी वहीं यादें आज पुराने किस्से और सीख बनकर हमारे साथ रह जाती है।

    कई बरसों बाद यादों का सफर थोड़ा कम होता होगा पर वो शायद कभी ख़त्म नहीं होता, रूह की राह बदलने से ज़िंदगी बस वहीं थम जाती है लेकिन उस ज़िंदगी की यादें बढ़ते वक़्त के साथ यादगार बनकर रह जाती है।

    बॉबी हो या लंचबॉक्स, मकबूल हो या लैला मजनू, हिंदी मीडियम हो या कपूर एंड सन्स, और ऐसी कई कहानियां है इन हस्तियों की जो हमारी ज़िंदगी के खज़ाने में सुनहरी यादें बनकर रह जाती है।।

    ©an_merciful_friend