amiablethombre

Girl�� Happiest soul�� Blessed to "feel" emotions��

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  • amiablethombre 79w

    क्या कहूंगी?

    आज नहीं जा सकते पापा को अच्छा नहीं लगेगा- तुमने कह दिया, मैंने मान लिया
    पर उस बहू से क्या कहूंगी जिसने ख़ुद को बेटी मान लिया था?
    उस बेटी से क्या कहूंगी जो सास में मां को देखती हैं?
    उस मां से क्या कहूंगी जिसके हर "तू ठीक तो है ना?" का जवाब हां से देती हूं?
    उस भाई से क्या कहूंगी जो राखी पर ना आ पाने की वजह से अबतक नाराज़ बैठा है?
    उस लड़की से क्या कहूंगी जो हर बार तुम्हारी बातों में आकर तुम्हारे पीछे चली आती है,
    जानते हुए भी की इस बार भी उसे पराया ही समझा जाएगा,
    इस बार भी ग़लत वों ही होगी फिर चाहें नज़र किसी और की ख़राब क्यों ना हो


    सोचती हूं अब खुदसे क्या कहूंगी जब पूछूंगी ये "सब ठीक तो हैं ना?"

    ©amiablethombre

  • amiablethombre 102w

    सर पर अंबर का टुकड़ा नहीं है आज
    बाबा तुम्हारी याद आती है....

    ©amiablethombre

  • amiablethombre 134w

    By far my #best work #fav

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    पहचान

    कोई वासता नहीं था हमारा
    बस एक रात वो आया
    और अगली सुबह गया ही नहीं।
    उँगलियों से मुझपर पड़ी धूल की परत उतारता
    और हर रोज़ किसी नयी जगह रख आता
    शायद इस सोच में की मैं भी उसकी तरह घुमंतू बन जाऊं।
    कल उसने मुझमे झांकने की कोशिश की
    पहली बार किसीने ये किया,
    अनपढ़ थे सारे जो इस कालिख़ से दूर भागते थे
    और नाकामी की कोफ्त से बचने मुझपर निशाँ छोड़ जाते
    और वो..?
    हर उस ज़ख्म को सहलाता,रंगों वाला मरहम लगता
    और फिर इसी उम्मीद में मुझे नयी जगह रख जाता के कभी तो ये कालिख़ सुनहरे रंगों में तब्दील होगी
    और फ़िर वो मुझे थामकर पूरी दुनिया की सैर कराएगा
    .
    .
    .
    मैं माशूका नहीं
    क़िताब हूँ एक,
    पढ़ता वो है और निखरती में हूँ...

    ©amiablethombre

  • amiablethombre 134w

    आदत

    अजीब आदत है उसकी भी
    नींद में होती हैं तो मेरा हाथ पकड़कर कभी ना जाने की ज़िद करती है
    और होश में होती है तब एक जग़ह नहीं बैठ सकती।

    घूमनी उसे पूरी दुनिया है अकेले,
    पहले वो चलना सीख ले बस।

    तारों, जुगनुओं में खो जाती है वो अक्सर,
    और मैं उसकी आँखों में...।

    यूँ तो लाख बातें छुपाती है वो,
    पर बारिश में रोकर आँसुओ को कैसे छिपाते है ये उससे सीखा मैंने।

    वह पगली हँसती भी है
    पर थोड़ा कम...
    बच्चों सी खिलखिलाती है वो
    और कमरा रोशन कर देती है अपनी हँसी से।

    ऐसी हस्ती है जिससे किसीको भी मोहब्बत हो जाए,
    पर आजकल मोहतरमा का दिल तो एक पिल्ले पर आया है।

    आदतों पर उसकी एक किताब लिख दूँ
    पर आदत नहीं वो ज़िन्दगी है मेरी...

    ©amiablethombre

  • amiablethombre 134w

    चलों ना!!

    चलों न आज फ़िर वो पल ढूंढते हैं,
    जब घर लौटकर तुम मुझे ढूंढते और मेरी गोद में सर रखकर गहरी नींद सो जाया करते थे।
    जब मुझे घर की याद आती थी तुम मुझे अपनी बाहों में भर लेते थे
    और तबतक सीने से लगा रखते जबतक मैं चुप नही होती।
    मेरे चोट खाने की आदत से तुम इतने परेशान हो जाते की
    मुझे एक जगह बिठाकर सारा काम खुद करते।
    कोई मुझे कुछ कह भी दे तो तुम उसपर पूरी दुनिया का घुसा निकाल देते।
    फ़िर आज क्यों वो ग़ुस्सा अबतक तुम्हारी नाक पर बैठा है,
    क्यों नहीं आज तुम बड़े बनकर मुझे माफ़ कर देते...

    चलों न आज फ़िर वो पल ढूंढते हैं,
    एक बार फिर प्यार में गिरते है और उठ खड़े होते है,
    पहले से ज़्यादा पागलपन के साथ....

    ©amiablethombre

  • amiablethombre 134w

    खोज

    खोज आज भी ज़ारी है




    मेरी उस हँसी की

    जो तुम अपने साथ ले गए.......

    ©amiablethombre

  • amiablethombre 153w

    जासवंत

    सब कुछ तो कर दिया फिर भी एक तूफ़ान बाकी रहा

    मैं जासवंत बन चरणों में अर्पित होती रही

    वह मोगरे नर्तकी पर लुटाता रहा।
    ©amiablethombre

  • amiablethombre 153w

    आज फिर कलम की दौड़ चलेगी

    लगता है फिर धोखेबाज़ का खिताब मिला हैं।
    ©amiablethombre

  • amiablethombre 153w

    शुक्रगुज़ार हूँ इस पागलपन का मैं

    कागज़ों पर ही सही

    होश में तो हूँ
    ©amiablethombre

  • amiablethombre 153w

    आज फ़िर तेरी याद आ रही हैं

    ऐ बचपन तू लौट आ न!!

    ©amiablethombre