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  • amateur_skm 3d

    मेरी खामोशियां भी आजकल गुम सी हो जाती हैं
    अगर मैं कुछ खूबसूरत कहूं वो तुम सी हो जाती हैं

    ~सौरभ

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    तुम्हें सोच कर
    ऐसा लगता है,
    जैसे भीगों लेता हूं खुद
    को किसी बहती नदी में

    तुम्हें लिख कर
    ऐसा लगता है,
    जैसे लिख लेता हूं
    मैं कायनात के सारे
    खूबसूरत किस्से

    तुम्हें पढ़ कर
    ऐसा लगता है,
    जैसे पढ़ लेता हूं मैं
    वेद की ऋचाएं और
    नमाज की आयत

    तुम्हें महसूस कर
    ऐसा लगता है,
    जैसे मई की तपती धूप
    में सावन की बयार का
    देह को छू जाना

    तुम्हें याद कर
    ऐसा लगता है,
    जैसे कोई बचपन की
    कविता को हर पल
    दोहराते रहना

    ~सौरभ

  • amateur_skm 4d

    मेरे ना रहने के बाद
    बचेगा सिर्फ
    एक अधूरा चांद,
    एक तितली,
    तुम्हारे होंठों से
    रिसती हुई स्याही
    और
    तुम्हारे लिए लिखी हुई
    ए क अ धू री न ज़् म,

    ~सौरभ

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    I want to become
    a voiceless memory,
    like an unborn poetry
    screams in poet's pen.

    ~Saurabh

  • amateur_skm 5d

    जितने समय में लोग
    ना जाने क्या क्या
    तरक्की के लिए कर लेते है

    लेकिन उतने समय में सिर्फ़
    मां,ईश्वर से प्रार्थना करती है
    हमारे कल्याण की

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    ठंडी की बात है,
    मां साड़ी खरीद रहीं थी कपड़े के दुकान पर अचानक से मां को कुछ याद आया तो उन्होंने दुकानदार से बोला कि एक स्वेटर दिखा दीजिए, बच्चे के लिए। दुकानदार वाले भईया ने छोटे बच्चों के लिए स्वेटर दिखाया तो मां ने हंस कर कहा अरे भईया इतना भी छोटा नही है।
    दुकानदार ने फिर पूछा कितने साल का है बच्चा तो मां ने बोला बीस साल का।
    फिर दुकानदार वाले भईया ने हंस कर बोला अरे मैडम बोलना चाहिए ना बड़े के लिए स्वेटर चाहिए और आप तो छोटे बच्चे के लिए बोल रही है।
    फिर दोनों लोग हंसने लगे एक दूसरे की नासमझी पर लेकिन दोनों की हंसी का मतलब अलग अलग था। मां के लिए बच्चे हमेशा छोटे ही होते है।
    हम कभी इतने बड़े हो ही नही सकते कि हम मां के आंचल से कभी बाहर निकल पाए

    ~सौरभ

  • amateur_skm 1w

    ☘️ घड़ी की सुई रुक गई, रुक कर इंतजार करने लगी।ये इंतजार था सदियों से किसी एक शख्स का

    ☘️तुम आई धीरे धीरे चलते हुए और चुपके से तुमने चुरा लिया
    तितलियों के पंखों से रंग और तुमने उन रंगों से रंग लिया अपने तमाम ख़्वाबों को

    ☘️ नदिया बह रही थी एकदम मदमस्त हो कर और बिजली इतरा रही थी अपने वजूद पर और जब जब चमक रही थी बिजली तो जैसे लग रहा वो तुम्हारे पायल छन छन कर रहे हो

    ☘️धरती तरस रही थी पानी से तो ललचाती आंखों को देख कर बादल इक्कट्ठे होने लगे,मोर नाचने लगे और इनका नृत्य देख कर तुम्हारे पांव थिरकने लगे।इधर तुम्हारा और मोर का नृत्य देख कर बादल बरस गए और धरती से फूट आया तरह तरह के पुष्प

    ☘️उन तमाम पुष्पों पर तरह तरह के रंग की तितलियां बैठ कर तुम्हारे गाए हुए गीत को सुन रही है और धीरे धीरे वो उड़ कर वो आसमान की तरफ़ जा रही है।आसमान से वो लेते आई तुम्हारे लिए ढेर सारे खत इंद्रधनुषी रंग में लिपटे हुए

    ☘️जैसे तुमने चिट्ठी खोला कई कोरे कागज़ मिले और तुम्हारी हथेली से स्याही बिखर कर उन कोरे कागज पर निखर गई। बन गई एक नज़्म

    P.S. झेलो ��

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    दुआओं में मांगा
    टूटता तारा गाए एक तराना,
    आओ ढूंढें आसमां में
    चांद सा एक आशियाना,
    दिल के दरम्यान
    में एक तुम्हारा नाम ही लिखा,
    फिर भी ये ज़मीं आसमां में
    क्यूं इतने फासले हैं,
    क्यूं इतने फासले हैं


    ~सौरभ

  • amateur_skm 1w

    "अरे ये कितना खूबसूरत लग रहा है चांद"
    "अच्छा जी!मुझसे भी ज्यादा"
    "सच बोलना है या झूठ"
    "तुम जो भी बोल दो, हम तो वही सच मान लेंगे "
    "हिहिहिहिही,वो ना चांद खूबसूर..
    "क्या बोला तुमने चांद मुझसे ज्यादा खूबसूरत है ,हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी ,मेरे सामने उसकी बड़ाई करने के लिए...
    "अरे मेरी !पूरी बात सुनो तो पहले..
    "मुझे तो कुछ नही सुनना है, अब चाहे जो बोलो"
    "अरे मैं कह रहा था चांद खूबसूरत है फिर भी वो हर दिन उसकी खूबसूरती घटती जाती है लेकिन तुम्हारी बात ही...
    "हिहिहिहि ओह तुम ऐसा कह रहे थे, अच्छा कोई बात नहीं लेकिन ऐसे माफ़ी नहीं मिलने वाली"
    "क्या करना पड़ेगा ..."
    "हमारे लिए चाय बनाइए बस और हम कुछ नही जानते"
    "अरे मुझे तो चाय बनाने ही नहीं आती ;( "
    "अरे परेशान क्यूं होते हो, मैं तो हूं ही बताने के लिए"
    फिर बातें चलती रही
    //फिर ऐसी गुफ्तगू चलती रही ना वो उठी ना हम,चाय में कितने चम्मच पत्ती, कितना दूध , दाल चीनी ,अदरक यही बताने लगी और बगल में रेडियों पर विविध भारती चल रहा था और ऊपर से मैडम जी के मुहावरे।मेरा तो चाय पीने का तो मन है लेकिन इस माहौल से कौन उठना चाह रहा है,अब तो हम दोनों लोगों को लग रहा था कि ये हमारी गुफ्तगू ही चाय की चुस्कियां है//

    ~सौरभ

    PC:- gulbeengulraiz (insta)

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    तुम्हारी खूबसूरती
    पर लिखी जा सकती है
    सौ से ज्यादा ग़ज़ल,
    जितनी चाय में चायपत्ती होती है
    तुम्हारी उतनी ही
    गंध मिला दी जाए
    मेरी अधूरी नज्मों में।

    लेकिन मुझे लगता है
    मेरी अधूरी नज़्मों को
    मिलना चाहिए
    तुम्हारे हृदय का
    मीठा
    ठंडा
    गहरा
    मुलायम
    आलिंगन

    ~सौरभ

  • amateur_skm 1w

    आज मेरे दोस्त के शादी की सालगिरह है। मैं भी पूरी तरह से तैयार था जाने के लिए बस वो चश्मा ढूंढना था । तभी दूसरे कमरे से एक प्यार भरी आवाज़ आती है "सुनते हो जी!बहुत दिन हो गए है साड़ी पहने तो आ जाओ और इसमें प्लेट लगाने में मेरी मदद कर दो"। मैं जैसे ही उस कमरे में पहुंचा, आह! पूरा कमरा इत्र से महक रहा था। मैं उनकी साड़ी का प्लेट लगा ही रहा था। उफ्फ उनकी सारी जुल्फें मेरे चेहरे पे आ गई । जैसे ही मैं उनकी जुल्फों को हटा के उनके और करीब बढ़ने जा रहा था तभी जैसे किसी के जूते के खट-खट की आवाज आ रही थी और ये एकदम तेज़ होते जा रही थी।तभी किसी ने मुझे तेज़ से झक झोरा और एक भारी भरकम आवाज़ आई "बेटा! उठ जा ,आज क्लास (ऑनलाइन) नहीं करेगा क्या?"और मेरा प्यारा सपना टूट गया(मैं मन में सोचते हुए ,अरे पापा दस मिनट रुक जाते यार,दुनिया पलट थोड़े ही जाती)
    P.S. साड़ी में प्लेट तो नही लगा पाए लेकिन चाय के कप प्लेट जरूर धोने पड़े थे .·´¯`(>▂<)´¯`·

    ~सौरभ

  • amateur_skm 1w

    समझौते की जरा सी भी गुंजाइश नहीं
    क्यूंकि मेरे हाथों की पकड़ कमज़ोर है
    ~सौरभ

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    उदासी खर्च होंगी
    फिर ज़ख्म कुरेदे जायेंगे

    आंसू खर्च होंगे
    फिर नज़्म लिखी जाएगी

    ~सौरभ

  • amateur_skm 2w

    गर एक दिन गुज़र जाए
    बिना बात हुए तुमसे,
    लगे जैसे लिख दिया नज़्म
    बिना कलम की स्याही के

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    यूं तो तुम बहुत खूबसूरत हो
    उस आसमां के इकलौते चांद से भी ज्यादा
    लेकिन ये बात मैं तुम्हें कभी न बताऊं,
    हां!तुम्हारे जुल्फों में अटके जुगनुओं को समेट कर
    मैं उस चांद को दिखाकर बताऊंगा कि
    तुम
    कितनी
    खूबसूरत
    हो


    ~सौरभ

  • amateur_skm 2w

    खर्चा-पानी

    एक बार घर पर पापा के दोस्त आए हुए थे।
    आप लोग को मालूम ही होगा जैसे ही आपके घर पर गेस्ट आते है तो आपके घर पर तरह तरह के पकवान बनते है और मम्मी तरह तरह के टेस्टी आइटम्स न जाने कहां कहां छिपा कर रखी हुई निकालती है।
    अब जैसे ही मेहमान आते है तो घर पर वेटर के नाम पर मैं ही रहता हूं और धीरे धीरे सबको जा कर देता हूं और अपने अंदर के भूख को कंट्रोल करे हुए रखना पड़ता है।
    अब ये सब करने के बाद , मैं जा कर अपने रूम में बैठ गया और गिनती गिन रहा था कि कब ये जायेंगे और मैं उन सबको खाऊंगाअपने प्यारे समोसे,कचोरी, मिठाई को
    धीरे धीरे दो घंटा बीतने को था और मैं खुले आंखों से सपना देख रहा था कि मेरे हाथ में दो समोसा है और एक हाथ में पेप्सी की बोतल है और मैं पी रहा हूं।तभी शांति ज्यादा हो गई तो मैने सोचा लगता है सब चले गए है
    उसके बाद मैने पर्दे के पीछे दो मिनट तक खड़ा था,सोचा कि चेक कर लेता हूं सही में तो चले गए है ना।
    ओहो लगता है वो चले गए है और मम्मी पापा उन्हें गेट तक छोड़ने गए होंगे।
    और मेरी नज़र सब पकवान पर गई जो मुझे बुला रहे थे
    Snacks:- खाओ सौरभ,हम तुम्हारे है तुम हमारे हो, सिर्फ तुम्हारे है, सिर्फ तुम्हारे,खाओ सौरभ
    Me:- ऐसे ना मुझे तुम देखो, नहीं तो सबको पेट में रख लूंगा
    *उसके बाद मैंने दो समोसा दाएं हाथ में, दो ब्रेड पकौड़ा बाएं हाथ में, दो गुलाब जामुन मुंह में और सोचा नमकीन खा कर कोल्ड ड्रिंक को पी लूंगा*
    जैसे ही सब खा रहा था तभी पीछे से flush की आवाज आई और uncle जी वॉशरूम से निकले।उसके बाद हमारी नज़रें मिली
    Me:- ....
    Uncle:- ......
    Me:-.....
    Uncle.....
    *मम्मी,पापा और आंटी जो बालकनी में थी वो सब आ गए*
    Papa , आंटी , मम्मी
    Mummy:- नालायक निकम्मे नकारा दुष्ट कहीं का, क्या हम लोग तुझे कुछ खिलाते नही है??जो तू जंगली की तरह खा रहा है
    Me:-.....
    Mummy:- बोल कुछ बोल
    Me:- *उसके बाद एक डकार निकला*(burp)

    *मुझे लगा था कि अंकल आंटी के सामने पिटाई नही होगी*

    ~सौरभ

  • amateur_skm 2w

    Aap log inke post ko repost kariye taaki logon ka sahi samay pe help mil jaye.
    @covid_help

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