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  • amar61090 22w

    I don't have commenting rights

    Hey everyone I'm not able to comment now please help me how can I get again this right
    ©amar61090

  • amar61090 23w

    रात

    आँशु आँख में चिंता याद में,
    अकेले कमरे में गुमशुम,
    कहा होता हैं कोई औऱ साथ में,
    जीवन के संघर्ष में,
    युवा की हर रात ही बीतती हैं काली रात में

    सब सुना जाते हैं शिक़ायत अपनी,
    कोई कहां समझता हैं उसकी बात,
    एक तरफ़ माँ के आँशु दिखते हैं उसे,
    तो एक तरफ़ आती हैं प्यार की याद,

    पिता का सहारा बन न पाया अभी,
    भाई-बहन का मान न बढ़ाया अभी,
    परिवार के खर्चे में हिस्सेदारी दे न पाया अभी,
    लोग समझतें हैं जिम्म्मेदार वो बन न पाया अभी,

    क़भी रात अकेले कमरे में उसे रोते देखे हो क्या,
    क़भी उसके उदास मन से उसकी ख़्वाहिशें पूछे हो क्या,
    उसे भी चिंता हैं अपने परिवार की,
    उसे भी चाहत हैं अपने प्यार की,
    पर जमाने की नियम में जाने क्यु वो बंधा रहता हैं,
    उसकी मुस्कान नक़ली होतीं हैं यारों,
    वो हमेशा किसी न किसी उलझन में ही फंसा होता हैं।

    वो महफिलों में भी तन्हा पड़ा रहता हैं,
    कितने भी ज़ख्म पड़े हो पीठ पीछे,
    युवा चेहरे से मुस्कुराते खड़ा रहता हैं,
    ©amar61090

  • amar61090 23w

    बहुत हैं मेरे चाहने वाले बहुत बड़ा ये सँसार हैं,
    पर मेरे लिए तो असली ज़िंदगी का मतलब,
    बस माता पिता का प्यार हैं,

    हाँ माँ ठीक सुना आपने वहीँ शख्स,
    जो मुझें बचपन से लेकर आज तक,
    हर बुराइयों से बचाने की कोशिश करतीं आ रहीं हैं,
    औऱ पिता जो आज भी बस मेरी खुशियों के लिए,
    अपनी सारी इच्छाओं को दफनाने का काम कर रहें हैं,

    माँ मुझें ने मुझें पाला हैं पिता ने मुझें सहेजा हैं,
    कोई ग़म न मुझें छूने पाये,
    शायद इसीलिए ख़ुदा ने मुझें इनके साये में भेजा हैं,

    हा होते हैं दुःख कई मुझें ज़माने से,
    पर क़भी इनको न बताने की सोचता हूँ,
    आँख में आँशु लिए इनके सामने जाने से ख़ुद को रोकता हूँ
    पर माँ औऱ पिता से ही तो वज़ूद हैं मेरा,
    तो ये मेरी हरबात को समझ जाते हैं,
    उलझन मेरी आँखों में देख ये मुझें हमेशा दिलासा दिलाते हैं
    ©amar61090

  • amar61090 23w

    एक

    एक बारिश की याद हैं,
    एक तन्हाई का साथ हैं,
    एक पीले शूट में धुंधली सी तस्वीर हैं,
    औऱ एक हमारी बेकार सी तकदीर हैं,
    एक तोहफ़े की अंगूठी हैं,
    औऱ एक जिंदगी जो हमशे जाने क्यु रूठी हैं,
    एक मोहब्ब्त हैं उसी से मेरी इबादत हैं,
    उसी को लेकर हज़ार मेरी शिक़ायत हैं,
    उसे पता नहीं एक भी,
    शायद यहीं मेरी शराफ़त हैं।
    ©amar61090

  • amar61090 23w

    आतंकवाद

    किसी को मारकर,
    जन्नत मिलतीं नहीं,
    ये बात तुम भी जानते हो,
    कितने बड़े ज़ाहिल हो सब,
    जो क़साब को अपना मानते हो,

    बैर रखना कोई मज़हब शिखाता नहीं,
    किसी को दुःख भी पहूँचाना,
    शीख नहीं किसी गीता या कुरान का,
    बस एक मानव जाती हैं,
    एक इंसानियत ही धर्म हर इंसान का,

    अगर प्यार हैं आतंकवाद से,
    तो जहाँ इनकी पनप हैं,
    वहीं जाकर बस जाओ न,
    यहीं का खाकर इसी को झूठा बतलाओ न,

    तुमको अलक़ायदा जैसो से लगाव हैं,
    पसंद करतें हो मासूमों को मारने वाले हैवान को,
    अपनों गैरों का फ़र्क़ नहीं,
    जाने कैसे नादाँ तुम इंसान हो,

    किसी भी धर्म को मानो,
    इस बात से कोई मनाही नहीं हैं,
    पर धर्म के नाम पर आतंकवाद,
    ये पाप है कोई बेगुनाही नहीं हैं,

    मुझें बुरे लगते हैं आतंकवाद लोग,
    औऱ उन जैसे विचार रखने वाले,
    क्योंकि मुझें,
    इंसानियत औऱ हैवानियत का फ़र्क़ पता हैं,
    तुम्हें अच्छे लगतें होंगे,
    क्योंकि,
    सच समझ न पाना तुम्हारी इकलौती ख़ता हैं।
    ©amar61090

  • amar61090 23w

    मैं गुज़र रहा हूँ उस दौर से,
    जहाँ,
    ख़ुद से रास्ता पूछता हूँ हर मोड़ पे,
    जाना किधर हैं ख़ुद को पता नहीं,
    बस उसको अपनाते चला,
    जो दिल को जचा सही,

    जाने कब जाकर रुकूँगा,
    हा पहुँच चुका मुक़ाम पर,
    ये ख़ुद से कहूँगा,

    मंज़िल मेरी एक हैं,
    बस मैं रास्तों में उलझा हूँ,
    ऊपर से दिखता ठीक हूँ,
    अंदर से थोड़ा भी न सुलझा हूँ,
    ©amar61090

  • amar61090 23w

    अगर प्यार हैं आतंकवाद से,
    तो जहाँ इनकी पनप हैं,
    वहीं जाकर बस जाओ न,
    यहीं का खाकर इसी को झूठा बतलाओ न,
    ©amar61090

  • amar61090 23w

    माँ पिता

    कुछ लोग आज कर युग में अपने को ज्ञानी ख़ूब बताते हैं,
    पर उम्र ढलते ही माँ-पिता को बाहर का रास्ता दिखाते हैं,
    ©amar61090

  • amar61090 23w

    कमी

    कमी इंसान में नहीं,
    कमी हमारी अपेछाओ में होती,
    जो हम किसी से भी,
    इतनी उम्मीद लगा लेते हैं,
    जितना वो हमारे बारे में क़भी सोंचते भी नहीं,
    ©amar61090

  • amar61090 24w

    मुझें आना हैं तेरी शादी में,

    देखना हैं तेरे आंगन को,

    निहारना हैं तेरे साजन को,


    कैसा होगा रंग रूप उसका,

    देख कर इतना ही तो जान सकता हूँ,

    मैं तो इतना अभागा हूँ

    उससे तेरी खुशियां भी कहाँ मांग सकता हूँ,