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  • alkatripathi79 5d

    बुद्धि का विस्तार कर
    मस्तिक पे प्रहार कर
    अब बन कर तू निष्ठुर
    सपनों को साकार कर

    बैठ थोड़ा विचार कर
    नई ऊर्जा का संचार कर
    अब हो कर तू आतुर
    नई राह का निर्माण कर

    चेतना का आहार कर
    वाणी का निर्वाण कर
    अब बन के जैसे भिक्षुक
    तू ज्ञान का प्रचार कर
    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 1w

    चंद गुफ़्त'गु से दिल नही भरता,
    लम्बी मुलाक़ात हो तो मज़ा आ जाए..
    नज़रों से नज़रें क्या मिलाना,
    ग़र हाथों में हाथ हो तो मज़ा आ जाए..

    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 1w

    ठूँठ सूखा पेड़ हूँ, तब भी सब ताक में
    नहीं बचा अब कुछ भी मुझमें
    फिर भी कुल्हारी सबके हाथ में

    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 1w

    #Rachanaprati96 -97

    आप सबका सहृदय धन्यवाद rachanaprati में भाग लेने के लिए सबकी रचनाएँ उत्तम थी सभी विजेता है...
    इस श्रृंखला को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी ममता जी को देती हूँ।
    धन्यवाद

    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 1w

    ������आप सबको विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ�� ����

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    राम बसे मन में सबके, सत्य का हो अहसास
    रावण मन का जल जाए, असत्य का हो नाश
    घर आँगन उज्जवल हो, मन में जागे विश्वास
    सबके जीवन में फैले, इस दशहरे का प्रकाश

    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 1w

    #rachanaprati96

    सबसे पहले मैं @goldenwrites_jakir भाई जी को धन्यवाद देती हूँ मुझे एक बार फिर से संचालन कि ज़िम्मेदारी देने के लिए ����

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    Rachanaprati96

    दशहरा के उपलक्ष्य में इस बार का विषय है...
    “असत्य पर सत्य की जीत "
    आप सब इससे जुड़े घटना कहानी कविता कुछ भी लिख सकते है।
    समय सीमा कल दोपहर 2 बजे तक।
    धन्यवाद
    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 1w

    कितने दिनों से मैंने कलम उठाया नहीं
    शब्दों से अपने ज़ज़्बातो को सजाया नहीं
    तन्हाई का आलम भी था इस कदर कि
    रौशनी ने भी मेरी परछाई को बनाया नहीं

    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 1w



    तुम दूर हो इतने जितने चाँद सितारें भी नहीं,
    वो भी रात के अँधेरे में दिख जाते है...
    पर
    तुम दिल के करीब इतने जितनी साँसे भी नहीं,
    वो भी एक लेने के लिए एक छोड़े जाते है...
    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 1w

    #rachanaprati95 @goldenwrites_jakir


    क्या करें कोई.....जब से बढ़ी महंगाई है
    सौ पचास तो छोड़ो
    दो हज़ार ने भी दौर लगाई है
    पता नहीं ग़रीबो का कौन मसीहा होगा
    बेघर को अब रोटी होगी कि कपड़ा होगा

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    महंगाई

    भूखा है खेत में जेब में ना है धेला
    महंगाई के बाजार में अमीरों का है मेला
    ...............................
    कीमत बढ़ती अनाजो की
    ग़रीब फिर भी किसान है
    इनके सिर पर हीं नाचते
    नेता जी बनते महान है

    सड़कों पे निकले रैली
    बंगलों के सुःख चैन में
    नेता जी खड़े हाथ जोड़े
    किसानों के रोते नैन में

    हर दिन करते आस ये
    आस ये पड़ती भारी
    महंगाई के बाजार में
    बिलखते है नर नारी
    ©alkatripathi79

  • alkatripathi79 2w

    #rachanaprati94
    @loveneetm

    मुझे वो दिन काफ़ी अच्छे से याद है.. हम चारो भाई बहन को एक साथ वायरल बुखार हुआ था... एक दिन तो पापा हमारी देखभाल किए मम्मी रसोई संभाली मगर दूसरे हीं दिन पापा को भी तेज़ बुखार हो गया... घर मानो अस्पताल बन गया था ... माँ अकेली सब संभाले हुए जैसे दस हाथ निकल आए हो कभी किसी को गर्म पानी देती कभी खाना देती कभी पट्टी देती कभी किसी का सर और पैर दबाती... जब हम सो जाते तो बाजार जाती फल,सब्जी, दवा, सब ले कर आती....
    जब भी वो दिन याद आता है सोंच में पड़ जाती हूँ माँ कर कैसे ली सब कुछ? जब की घर में आज जैसी सुविधा भी नहीं थी.....
    इतनी सेवा और इतना देखभाल की हम चारो भाई बहन 5 दिन में स्कूल जाने लायक हो गए थे

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    नारी तो शक्ति है

    लेकिन उसी दिन मम्मी को बुखार हो गया देखते ऐसा लगा मानो कोई पहाड़ टूट पड़ा हो माँ को हम सबसे ज्यादा चिंता इस बात की थी की ”अभी सब बुखार से उठे है और मुझे बुखार हो गया अब मैं इनकी देखभाल ठीक से नहीं की तो सबको कमजोरी हो जाएगी "
    दीदी जबकि बड़ी थी लेकिन माँ उनको कहती तुम अभी रसोई में मत जाओ कमजोरी होगी... और आज भी यकीं नहीं होता सबके मना करने के बाद भी खाना माँ हीं बनाती थी... लेकिन कैसे?
    वो दिन याद आते हीं एक सहज सा मन में जवाब आता है नारी तो शक्ति का रूप होती है वो अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकती है।
    और यही कारण है की आज जब मेरे बच्चे बीमार पड़ते है तो मुझे शक्ति मिलती है, कुछ भी कर जाने की बिना थके बिना सोए।
    ©alkatripathi79