aksar_

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भाषा की सुंदरता है कविता

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  • aksar_ 10w

    Safar

    isi raah par tu bhi chalna yun chalna
    ke jab tak safar paas dil ke na aata
    ©aksar_

  • aksar_ 14w

    शेर माँ पर

    बस तभी होंगी हसीं यादें तिरी उसके मर जाने के बाद
    ग़र लगाया हो गले तुमने रोज़ माँ को घर जाने के बाद
    ©aksar_

  • aksar_ 19w

    उम्मीद

    छूट जाता है शाम को जब साथ तिरे साए का
    क्यों चाहता है फ़िर तू वफ़ा किसी पराए का
    ©aksar_

  • aksar_ 24w

    Naukri

    Dhoond lo raasta koi toh paise kamaane ka
    Na ho sunna gar gaali-o-taana zamaane ka
    ©aksar_

  • aksar_ 24w

    मुलाक़ात

    लोग मिल के बात करतें है
    हम मिलने की बात करतें है
    ©aksar_

  • aksar_ 27w

    Yaad

    तन्हाई भी उसी गली में साथ देती है मिरा
    जिस रास्ते तिरे यादों का मकान आता है
    ©aksar_

  • aksar_ 27w

    Hausla

    पाँव पटक ज़मीं पर के ऐसी उड़ान हो तेरी
    एक दिन तू ऊपर हो नीचे आसमान हो तेरी
    ©aksar_

  • aksar_ 28w

    फ़लसफ़ा - १ (philosophy)

    परेशानियों का तूफ़ान ज़िंदगी के समुंदर में आते ही अक़्सर दोस्ती के किनारे खाली हो जातें है।
    ©aksar_

  • aksar_ 29w

    सफ़र-ए-कारवाँ

    ग़र टिक सकी मंज़िल-ओ-राह पर नज़र तो चल
    समतल सफ़र-ए-कारवाँ तो हो नहीं सकती
    ©aksar_

  • aksar_ 30w

    ग़ज़ल

    तो किस काम डीग्री ये इंजीनियर की
    उठा न सका ख़र्च शानों पे घर की
    (शानों - कँधों)
    गवाई तभी नौकरी जब कि हम को
    अभी ये लगा बोझ उतरेगी सर की

    थी नौसीखियों की ज़रूरत तजुर्बा
    है क़िस्मत मिले नौकरी ग़र हुनर की

    सभी माँगते है तजुर्बों का सूरज
    है बेकार की रौशनी फ़िर हुनर की

    रहा जब भरोसा न खुदपर हमें तब
    तो 'अक़्सर' सलाह माँ से मिलती सबर की
    ©aksar_