aks_the_reflaction

My Intro: Life is a limbo and death is the key. The more you become darker from inside, the more you value the light. - A free soul caged in a Body

Grid View
List View
  • aks_the_reflaction 10w

    इंतेज़ार-ए-इश्क़

    सुना है कई मजमें लगे हैं मातम के
    मेरे इश्क़ का जनाज़ा किस तरफ है?

    आँखें खुली हों तसव्वुर-ए-यार के ख़ातिर
    ऐ 'अक्स'! तेरे इश्क़ का जनाज़ा उस तरफ है।
    ©aks(अक्स)

  • aks_the_reflaction 10w

    Word Prompt:

    Write a 6 word micro-tale on Obsession

    Read More

    आदत है या जुनून
    फ़र्क नहीं पड़ता
    क्या कहें! तेरा ईश्क़ है
    कोई खुदा को पाना थोड़ी है?
    खुद की खोज है।

  • aks_the_reflaction 10w

    तू

    मुझे हर दर्पण में तू दिखता है
    हर शख़्स में हर घड़ी हर सू दिखता है
    तू है नहीं; हो नहीं सकता मेरा
    दिल पूछता है के तू क्यूँ दिखता है?
    ©aks_the_reflaction

  • aks_the_reflaction 10w

    ख़ैर मनाओ

    दिल तन्हा सही; दिल तो रहा
    यहाँ कितने बेरूह-बेजान भटक रहे हैं

    माना रक़ीब नहीं मगर इश्क़ तो है
    कई तो बस हुस्नोजिस्म लिए भरे-बाज़ार बैठे हैं।
    ©aks

  • aks_the_reflaction 10w

    यतीमखाना

    दिल यतीमखाना हो गया है मेरा
    तेरे इश्क़ की जागीर का
    तू आती नहीं के इसे वजह मिल जाये
    मौत आती नहीं के तेर बग़ैर ये फ़ना हो जाये

    कमबख़्त..... बड़ी कशमकश में है ये इश्क़ भी
    जिया जाए के न जिया जाए
    ©aks

  • aks_the_reflaction 26w

    ख़याल

    कई ख़याल हैं मेरे
    जो पुख़्ता नहीं हैं।
    साँस इस से पहले कभी
    इतना सस्ता नहीं है।
    जो ज़िंदा बचें
    मर रहे वो मुसल्सल
    निजात का क्या कोई
    अब रस्ता नहीं है?

    कितने छूटें अपने
    जनिबेमहफिल छोड़ कर
    हममें ज़िम्मा बड़ा है
    ये ज़िन्दगी है
    कोई बस्ता नहीं है।
    कोशिश करूंगा
    उम्मीदों को बाँटू
    अदना इन्सां हूँ
    अब कोई फरिश्ता नहीं है।
    कई ख़याल हैं, जो पुख़्ता नहीं हैं।
    साँसें हैं साथ भी हैं, ज़िन्दगी बेरस्ता नहीं है।
    ©अक्स

  • aks_the_reflaction 26w

    तुम और मैं

    दिगंत के अनंत छोर पर
    तुम हो; मैं हूँ
    और विरह है
    ©अक्स

  • aks_the_reflaction 65w

    तलाश

    सुन ओ मुसाफ़िर!
    तुझसे कुछ कहना है
    मुझे मंज़िल नहीं, कारवाँ की तलाश है
    रास्ते हैं चलने को, और कई पहर भी हैं वक़्त की थैली में भी
    मगर मुझे रास्ते नहीं, हसीं मंज़र की तलाश है।
    अरे हर पल मरते हैं कई राही यहाँ जीने की भूख में
    मुझे पल-पल मरना नहीं, मरते-पिघलते पलों में ज़िन्दगी की तलाश है।
    इंसानियत! इंसानियत इक मज़ाक सी बन रह गई है यहाँ "इंसानों" में रहते-रहते,
    मुझे वहशियत में नफ़ासत की तलाश है।
    हाँ! है गुरूर मुझमें भी, मैं इनकार नहीं करता इस से,
    इस गुरूर में भी कई खामोश बेनूर को नूर की तलाश है।
    भूखे हैं हर साये यहाँ; कोई हुस्न,कोई अस्मत तो कोई दौलत की थाली लिए बैठा है
    मैं हूँ, और मुझे बस "होने" की तलाश है।
    हैं ऐब मुझमें कई सारे, मैं बे-ऐब नहीं कहता खुद को
    मगर उन ऐब में मेरे वजूद के होने की तलाश है।
    ©aks(अक्स)

  • aks_the_reflaction 66w

    Word Prompt:

    Write a 3 word short write-up on Opaque

    Read More

    पर्दे हैं या चेहरों पे चेहरे
    कहीं सादगी के नीचे वहशियत छुपी है,
    तो कहीं हँसी ने कई दर्द को छुपाये रखा है।

  • aks_the_reflaction 66w

    Word Prompt:

    Write a 3 word micro-tale on Galaxy

    Read More

    वक़्त से तेज़
    या प्रकाश से मद्धिम
    ये अनन्त है,
    या स्वयं अंतरिम